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यूरिन ग्लूकोज टेस्ट क्या है?

यूरिन ग्लूकोज टेस्ट मुख्य रूप से पेशाब में ग्लूकोज (शुगर) की मात्रा का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसे यूरिन शुगर टेस्ट, यूरिन ग्लूकोज टेस्ट, ग्लिकोसुरिया टेस्ट भी कहा जाता है। ग्लूकोज एक सामान्य शर्करा है, जो प्राथमिक तौर पर शरीर में ऊर्जा पैदा करता है। यह हमारे पाचन तंत्र द्वारा कार्बोहाइड्रेट को तोड़कर बनाया जाता है और विभिन्न कोशिकाओं तक इन्सुलिन हार्मोन की मदद से ले जाया जाता है। यदि रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है तो इसे यूरिन द्वारा निकाल दिया जाता है। इसीलिए यह टेस्ट रक्त में ग्लूकोज के अधिक स्तर का पता लगाने में भी मदद करता है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि ग्लूकोज का अधिक स्तर डायबिटीज का संकेत दे सकते हैं। 

डायबिटीज या तो इन्सुलिन के पर्याप्त मात्रा में न बन पाने के कारण या इन्सुलिन प्रतिरोध के कारण हो सकता है। डायबिटीज के दो प्रकार होते हैं टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज। टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून डिसॉर्डर है जिसमें अग्नाशय में मौजूद वो कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं जो इन्सुलिन बनाती हैं। टाइप 2 डायबिटीज में शरीर में इन्सुलिन का प्रतिरोध बढ़ जाता है, जिसके कारण पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन बन भी सकता है और नहीं भी। कुछ महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज भी होती है जिसमें गर्भावस्था के दौरान ग्लूकोज के स्तर बढ़ जाते हैं।

  1. यूरिन ग्लूकोज टेस्ट क्यों किया जाता है - Urine Glucose Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. यूरिन ग्लूकोज टेस्ट से पहले - Urine Glucose Test Se Pahle
  3. यूरिन ग्लूकोज टेस्ट के दौरान - Urine Glucose Test Ke Dauran
  4. यूरिन ग्लूकोज टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Urine Glucose Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

यूरिन ग्लूकोज टेस्ट किसलिए किया जाता है?

यदि आपके शरीर में डायबिटीज के निम्न लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह दे सकते हैं:

जिन लोगों को डायबिटीज होने का खतरा होता है उनमें यूरिन ग्लूकोज लेवल नियमित रूप से टेस्ट किए जाते हैं। डायबिटीज होने का खतरा बढ़ाने वाले कारक निम्न हैं:

यदि आपकी उम्र 45 वर्ष या उससे अधिक है, तो टेस्ट के रिजल्ट पॉजिटिव आने के बाद भी आपको नियमित रूप से यह टेस्ट करवाते रहना चाहिए। इसके अलावा गर्भवस्था के दौरान महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज की जांच के लिए नियमित रूप से टेस्ट किया जाता है। 

मूत्र विश्लेषण के एक भाग के रूप में भी यूरिन ग्लूकोज टेस्ट किया जा सकता है। यह एक यूरिन टेस्ट है, जिसमें यूरिन में मौजूद विभिन्न पदार्थों की जांच की जाती है। 

हालांकि ये टेस्ट ब्लड ग्लूकोज टेस्ट की तुलना में कम सटीक होते हैं, फिर भी इस टेस्ट की सलाह तभी दी जाती है जब निम्न कारणों की वजह से यूरिन ग्लूकोज टेस्ट नहीं हो पाता:

  • नसें संकुचित होना 
  • बार-बार पंक्चर या सुई लगने से नसों पर निशान पड़ जाना
  • सुई लगवाने से अधिक डरना

यूरिन ग्लूकोज​ टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती। यदि आप किसी भी प्रकार की दवा, गैर-कानूनी ड्रग्स या कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो इनके बारे में पहले ही डॉक्टर को बता दें क्योंकि इनमें से कुछ टेस्ट के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

यूरिन ग्लूकोज टेस्ट कैसे किया जाता है?

इस टेस्ट के लिए एक कीटाणुरहित यूरिन सैंपल लेने की जरूरत होती है। यह एक विशेष कंटेनर में लिया जाता है। सैंपल लेने के लिए यहां कुछ निर्देश दिए गए हैं:

  • अपने हाथ को धो लें और जननांगों को एक स्वच्छ क्लीनिंग पैड से ठीक से साफ करें 
  • पुरुषों को पेनिस का अगला सिरा साफ करना चाहिए और महिलाओं को योनि को पूरी तरह साफ करना चाहिए। 
  • पेशाब की शुरुआती कुछ बूंदें न लें कुछ बूंदों के बाद पेशाब के प्रवाह के नीचे कंटेनर लगाएं और सैंपल ले लें। 
  • कंटेनर पर बने निशान तक यूरिन को इकट्ठा करें जो कि 30-50 मिलीलीटर होगा। 
  • कंटेनर पर ढक्कन लगाएं और टॉयलेट में पेशाब करें। इस सैंपल को जल्द से जल्द लैब में परीक्षण के लिए भेज दें।

यूरिन ग्लूकोज​ टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

सामान्य परिणाम:
सामान्य परिणामों में आमतौर पर यूरिन में ग्लूकोज मौजूद नहीं होता। ग्लूकोज की यूरिन में सामान्य मात्रा 0-15 मिलीग्राम प्रति डेसीलिटर (0-0.8 मिनीमॉल्स प्रति लीटर) है।

असामान्य परिणाम:
ग्लूकोज के अधिक स्तर डायबिटीज का संकेत देते हैं। ग्लूकोज के सामान्य से अधिक  स्तर किसी और बीमारी या स्थिति के होने के संकेत भी दे सकते हैं:

यूरिन ग्लूकोज टेस्ट एक स्क्रीनिंग टेस्ट है। ग्लूकोज के अधिक स्तर के मामलों में डॉक्टर परीक्षण की पुष्टि करने के लिए ब्लड ग्लूकोज टेस्ट कर सकते हैं।

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References

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