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जब कोई महिला अपने नवजात शिशु को अपनी बाहों में लेती है, उस समय उसे जो ख़ुशी मिलती है उसे बयान कर पाना बहुत मुश्किल है। माँ बनना कुदरत का एक आशीर्वाद है। जब आपका बच्चा आपके अंदर था, उस समय आपने हर छोटी से छोटी सावधानी बरती। पर जब वह इस दुनिया में आया उसके साथ-साथ आपके शरीर में भी बदलाव आए। गर्भावस्था के दौरान आपने अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए अपना वजन बढ़ाने के साथ-साथ बहुत कुछ किया। जब वह दुनिया में आया तो उसे पोषण देने के लिए आपने स्तनपान करवाना भी शुरू कर दिया।

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इस प्रसव अवधि को आयुर्वेद के अनुसर सूतक काल और प्रसव से पूर्व देखभाल को सूतीका परिचार्य के रूप में जाना जाता है। यह वह समय होता है जब मां को अपने स्वास्थ्य को अच्छा रखने और अपनी ताकत को हासिल करने की आवश्यकता होती है। आयुर्वेद के अनुसार गर्भावस्था के बाद मां की स्थिति तेल से भरे बर्तन की तरह होती है। जैसे की तेल से भरा बर्तन स्थिर नहीं रहे तो तेल चारों तरफ फैल सकता है, उसी प्रकार अगर माँ की उचित देखभाल नहीं की जाए तो उसका स्वास्थ्य ख़राब हो सकता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि वह अपनी आहार, जीवनशैली और दैनिक दिनचर्या का ख्याल रखें, ताकि वह फिर से अपनी सामान्य अवस्था में वापस आ सकें।

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आयुर्वेद द्वारा कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिनको अपना कर प्रसव के बाद महिलाएं स्वस्थ जीवन जी सकती हैं और अपने स्वास्थ्य को फिर से अच्छा कर सकती हैं।

तो चलिए जानते हैं, प्रसव के बाद स्वस्थ जीवन जीने के सुझावों के बारे में -

  1. प्रसव के बाद करें वात दोष को संतुलित - Balance vata dosha after delivery in hindi
  2. जच्चा का खाना - Post pregnancy indian diet in hindi
  3. डिलीवरी बाद देखभाल के लिए करें आराम - Importance of rest after delivery in hindi
  4. डिलीवरी के बाद देखभाल के लिए करें मालिश - Benefits of massage after childbirth in hindi
  5. गर्भावस्था के बाद सावधानी के लिए लें ये दवाइयां - Ayurvedic medicines to be taken after delivery in hindi
  6. प्रेगनेंसी के बाद लें ये आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां - Ayurveda herbs for post pregnancy care in hindi
  7. प्रसव के बाद देखभाल के लिए अपनाएं व्यायाम - Exercises for losing weight after pregnancy in hindi
  8. आयुर्वेद कहता है नई माताएं इन बातों पर देकर विशेष ध्यान करें अपनी देखभाल के डॉक्टर

आयुर्वेद के अनुसार शिशु के जन्म के बाद माताओं का वात दोष बढ़ जाता है। इसका मतलब यह है कि शिशु के जन्म के बाद वात दोष असंतुलित हो जाता है, जिसके कारण बच्चे के जन्म के बाद वात दोष को संतुलित करना एक समस्या बन जाती है। इस मामले में घी का सेवन काफी महत्तपूर्ण है। वात दोष को संतुलित रखने के लिए एक चम्मच घी में अदरक, काली मिर्च, चित्रक, छाव जैसे जड़ी-बूटियों को मिलाकर माता को रोज़ाना देना चाहिए। यह पाचन में मदद करते हैं। इस मिश्रण को पचाने के बाद माता को चावल के मांड के साथ घी और गर्म पानी का सेवन करना चाहिए। यह भी वात दोष को संतुलित रखते हैं। इसके साथ-साथ वात दोषा को संतुलित रखने के लिए नई माताएं ऑयल मालिश करवा सकती हैं जो प्रसव के बाद देखभाल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह दैनिक रूप से करवानी चाहिए।

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यह भी ध्यान रखें कि विभिन्न मौसमों के दोषों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ते हैं। उदाहरण के लिए सर्दियों (या निम्न तापमान) में प्रसव के बाद मां के शरीर में वात और कफ दोष बढ़ सकता है। इसलिए पहले तीन दिनों में घी का मिश्रण उन्हें नहीं दिया जाना चाहिए। इसके अलावा माता को गर्माहट महसूस होनी चाहिए। दूसरी ओर गर्मियों (या उच्च तापमान) में प्रसव के बाद वात और पित दोष उच्च होते हैं इसलिए घी और जड़ी बूटियों का मिश्रण नई माताओं को तुरंत दिया जा सकता है। 

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9 महीनों तक आपने अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बहुत कुछ किया और फिर अंत में इस छोटी सी जान को इस दुनिया में लाने के लिए आप काफी दर्द से गुजरीं। इस दौरान आपके शरीर और मन में बड़े बदलाव हुए। इसलिए डिलीवरी के बाद आपको पोषक आहार की आवश्यकता होती है जिससे आपका शरीर मजबूत हो ताकि आप थकान और कमजोरी महसूस न करें। अपनी ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए आपको स्वस्थ और पौष्टिक भोजन चाहिए। इसके लिए पका हुआ खाना खाएं जो आसानी से पच सके और आपके पेट के लिए भी हल्का हो। अपने आहार में दूध और घी को शामिल करें। इसके साथ-साथ अपने भोजन में हल्दीजीरा और काली मिर्च जैसे मसालों का उपयोग करें। आपको भारी खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए जो अपच जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं। आसानी से पचने के लिए माताओं को अपने आहार में तरल-आधारित खाद्य पदार्थों को शामिल करने का प्रयास करना चाहिए। डिलीवरी के बाद माताएं जो भी खाना खाती हैं, उसका असर उनके ब्रेस्‍ट मिल्‍क की गुणवत्ता पर परता है। इसलिए जितना संभव हो उन्हें स्वस्थ आहार का सेवन करना चाहिए और गर्म पानी पीना चाहिए। अगर आपको परेशानी महसूस होती है तो आप गुड़ खा सकती हैं जो आपके लिए उपयोगी है।

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गर्भावस्था वास्तव में मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से थकाने वाली होती है। इसलिए प्रसव के कुछ सप्ताह बाद तक आपको आराम करने की आवश्यकता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए उचित नींद महत्वपूर्ण है। साथ ही मैडिटेशन करना भी आपके लिए अच्छा है. मैडिटेशन आपके शरीर में रक्त परिसंचरण में सुधार करने में भी मदद करती है और आपके दिमाग को शांत और ताज़ा रखती है। आप कुछ कुछ घंटों में मूत्र विसर्जन करें, इसे रोक कर ना रखें। मातृत्व के तनाव से निपटने में मदद के लिए योग आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके साथ-साथ अपने प्रियजनों के साथ समय बिताएं और उनसे मदद भी लें। मातृत्व की स्थिति में तनावग्रस्त न हों। धीरे-धीरे आप सब कुछ सीख जाएँगी।

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प्रसव के बाद तनाव और शारीरिक दर्द से निपटने में मालिश बहुत मदद करती है। यह आप हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। यह आपको शारीरिक दर्द से राहत देने के साथ साथ आपको ताज़ा और विश्राम का अनुभव कराती है। इसके लिए आप किसी पेशेवर मालिश कराने वाले से मालिश करवा सकती हैं या अपने पति से भी मालिश करवा सकती है। यदि आपकी सिजेरियन डिलिवरी हुई है तो मालिश को घाव ठीक होने तक टाल देना चाहिए क्योंकि यह कभी-कभी घाव को बदतर कर सकती है। यदि आपकी डिलिवरी सामान्य हुई है तो आप हर रोज मालिश करवा सकती हैं। आयुर्वेद के अनुसार डिलिवरी के बाद रोज़ाना मालिश करवाने से रक्त परिसंचरण और आपकी ताकत में वृद्धि होती है और अच्छे परिणाम के लिए मालिश के बाद गर्म पानी से स्नान करें।

कई ऐसे प्राकृतिक तेल उपलब्ध हैं जो आपके शरीर के लिए अद्धभुत काम कर सकते हैं -

  • आप सरसों के तेल का उपयोग कर सकते हैं जो अपने आंतरिक गर्म गुणों के कारण विशेष रूप से अच्छा है। यह अच्छे रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है, साथ साथ तनाव और मांसपेशियों की परेशानी को दूर करने में मदद करता है। मालिश करने के लिए थोड़े गर्म सरसों के तेल का प्रयोग करना चाहिए।
  • तिल का तेल भी शरीर की मालिश करने के लिए बहुत अच्छा होता है। यह शरीर के उपचार और बेहतर परिसंचरण में मदद करता है। आयुर्वेद में तिल के तेल का कई बीमारियों में उपयोग किया गया है और कई चिकित्सकों द्वारा प्रसव के बाद मालिश के लिए इसका उपयोग बताया जाता है।
  • जैतून का तेल और बादाम तेल भी मांसपेशियों को स्वस्थ बनाने में व्यापक रूप से मदद करता हैं। इनका उपयोग भी शरीर की मालिश करने के लिए किया जाता है। आप आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श करके प्रसव के बाद मालिश करने के लिए तेल का चयन कर सकते हैं।

यह एक तरल दवा है जो प्रसव के बाद देखभाल के लिए उपयोगी होती है। यह पाचन प्रक्रिया को सही करने, प्रतिरक्षा को बढ़ाने और माता को शक्ति प्रदान करने में मदद करती है। डॉक्टर के परामर्श के बाद आप इस दवा के 2 बड़े चम्मच एक दिन में दो बार ले सकते हैं।

सौभाग्य शुंठी दवा प्रसव के बाद देखभाल के लिए बहुत ही उपयोगी है। यह न केवल प्रसव के बाद गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत करती है बल्कि यह प्रसव के बाद किसी भी प्रकार की समस्या से छुटकारा दिलाने में मदद करती है। यह पाचन शक्ति को अच्छा करने के साथ-साथ दस्त की समस्या में भी मदद करती है। यह स्तन के दूध के प्रवाह को भी बढ़ाने में मदद करती है।

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जीरकारिष्टं प्रसव के बाद मां को शक्ति देने में मदद करता है। यह संक्रमण को रोकने और मां को स्वस्थ और फिट रखने में मदद करता है। आम तौर पर यह ठंड के मौसम में उपयोग किया जाता है। आप प्रतिदिन इस दवा का दो बार दो बड़े चम्मच सेवन कर सकते हैं।

शतावरी गुलाम दवा में शतावरी शामिल है जो महिला प्रजनन स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है। यह दवा कमजोर हार्मोन को संतुलित करती है और उचित लैक्टेशन को बढाती है। आप इसके 5 ग्राम की मात्रा का सेवन प्रतिदिन दो बार कर सकते हैं।

पुलि लेहम का सेवन प्रसव के एक महीने के बाद करना चाहिए। इस दवा का उपयोग प्रसव के बाद होने वाली समस्याओं के इलाज करने और अपने स्वास्थ्य और वैलनेस को बढ़ाने में मदद करता है। आप इसके उपयोग और खुराक के बारे में चिकित्सक से परामर्श करके पता कर सकते हैं।

शतावरी एक बहुत अच्छी जड़ी बूटी है और इसका उपयोग कई मादा प्रजनन समस्याओं के उपचार में भी किया जाता है। प्रसव के बाद इसका सेवन विशेष रूप से बहुत अच्छा होता है क्योंकि यह लैक्टेशन को बढ़ाने और असंतुलित हार्मोनल को ठीक करने में मदद करता है। यह प्रसव के बाद मानसिक समस्याओं को दूर करने में भी मदद करता है। इसके लिए आप लगातार 4 महीने तक एक गिलास गर्म दूध में एक छोटा चम्मच शतावरी पाउडर मिलाकर प्रतिदिन पिएं।

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मस्ता एक बहुत ही अच्छी जड़ी बूटी है जो स्तन के दूध उत्पादन को बढ़ाने में मदद करती है। यह माताओं के सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। इस जड़ी बूटी का पेस्ट बना कर स्तनों पर लगाने से स्तन के दूध उत्पादन बढ़ जाता है।

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नोट: किसी भी दवा या जड़ी-बूटी को लेने से पहले एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श करें क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है और उनकी शारीरिक आवश्यकताएं भी विभिन्न होती हैं।

कुछ महिलाओं का वजन गर्भावस्था के बाद बढ़ने लगता हैं। मोटापा लंबे समय में आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है और आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। चिंता मत करें, बस आप कसरत करने के लिए अपने जीवन से कुछ समय निकाले। वर्कआउट आपकी सहनशक्ति को बढ़ाने का शानदार तरीका है। यदि आपने गर्भावस्था के दौरान व्यायाम किया है तो इस समय वह आपके लिए बहुत लाभदायक होगा। व्यायाम आपको ऊर्जा देने और आपके शरीर को मजबूत करने में मदद करता है। शरीर में रक्त परिसंचरण को बढ़ाने में कसरत बहुत फायदेमंद है। इतना ही नहीं, व्यायाम आपके मूड को अच्छा कर आपको खुश रखता है। इसके लिए आप धीरे-धीरे चलने और हल्के व्यायाम से शुरूआत कर सकते हैं। प्रसव के तुरंत बाद आपको आराम की आवश्यकता है लेकिन जल्दी ही वापस अपनी पुरानी दिनचर्या में आने के लिए आपके लिए व्यायाम आवश्यक है।

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