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बहुत से लोगों को लगता है कि मूड स्विंग का मतलब है बाइपोलर डिसऑर्डर। ये सच है कि बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित मरीजों में मूड स्विंग यानी व्यवहार या भावनाओं में अचानक बहुत ज्यादा परिवर्तन देखने को मिलता है लेकिन सिर्फ बाइपोलर डिसऑर्डर की वजह से ही मूड स्विंग होता है ऐसा नहीं है। इसके कई और कारण भी हो सकते हैं। 

आपके मन, व्यवहार या मूड में जब अचानक बहुत ज्यादा परिवर्तन देखने को मिलता है तो उसे ही मूड स्विंग कहते हैं। साधारण शब्दों में समझें तो मान लीजिए अभी आपका मन बेहद खुश और उत्साहित है लेकिन अगले ही पल आप बहुत ज्यादा दुखी, अवसाद या किसी अन्य भावना का अनुभव करने लगती हैं तो इस स्थिति को ही मूड स्विंग कहते हैं।  

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कुछ मामलों में मूड स्विंग आपके आसपास के वातावरण या परिस्थितियों की प्रतिक्रिया के तौर पर हो सकता है। उदाहरण के लिए- आप कानों में हेडफोन लगाकर संगीत सुनते हुए घर की सफाई कर रही हैं, झाड़ू-पोछा कर रही हैं, अभी आपका मूड अच्छा है। तभी पोछे वाली जगह पर कोई जूते पहनकर चलने लगता है और आपको बहुत तेज गुस्सा आ जाता है। यह परिस्थिति की प्रतिक्रिया के तौर पर हुआ मूड स्विंग है। हालांकि मूड स्विंग के ज्यादातर मामलों में व्यक्ति के मूड या भावनाओं में अचानक होने वाला नाटकीय बदलाव बिना किसी स्पष्ट वजह के होता है।

  1. मूड स्विंग के लक्षण - Mood Swing Symptoms in Hindi
  2. मूड स्विंग के कारण - Mood Swing Causes in Hindi
  3. मूड स्विंग का उपचार - Mood Swing Treatment in Hindi
  4. मूड स्विंग के डॉक्टर

मूड स्विंग के लक्षण - Mood Swing Symptoms in Hindi

मूड स्विंग आखिर किस अन्तर्निहित बीमारी या परिस्थिति की वजह से हो रहा है इस पर निर्भर करता है कि इसके लक्षण कैसे होंगे। मूड स्विंग्स के अलावा आपको खुद में कई और मनोवैज्ञानिक लक्षण नजर आ सकते हैं जैसे :

मूड स्विंग के कारण - Mood Swing Causes in Hindi

वैसे तो मूड स्विंग की समस्या किसी को भी हो सकती है लेकिन ज्यादातर मामलों में महिलाएं मूड स्विंग की दिक्कत का ज्यादा अनुभव करती हैं और इसके लिए उनकी लाइफस्टाइल और कई दूसरे कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं:

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस)
प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम या पीएमएस पीरियड्स आने के 1 या 2 हफ्ते पहले देखने को मिलता है। इस दौरान लड़कियों और महिलाओं में मूड स्विंग के अलावा थकान, भूख में बदलाव, डिप्रेशन, पेट फूलना जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं। दुनियाभर की करीब 90 प्रतिशत महिलाओं में पीएमएस के लक्षण नजर आते हैं। ये लक्षण समय के साथ बेहतर भी हो सकते हैं या फिर और ज्यादा खराब भी।

अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो मासिक धर्म या पीरियड्स आने से पहले शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन का लेवल नाटकीय रूप से बढ़ने और घटने लगता है। इस हार्मोनल बदलाव की वजह से ही मूड और व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिलता है।

प्रीमेंस्ट्रुअल डाइस्फोरिक डिसऑर्डर (पीएमडीडी)
यह पीएमएस का एक बेहद गंभीर और दुर्लभ प्रकार है जो दुनिया की करीब 5 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है। पीएमडीडी के लक्षणों में मूड में बहुत ज्यादा बदलाव होना, गंभीर डिप्रेशन, हद से ज्यादा चिड़चिड़ापन जैसी चीजें देखने को मिलती हैं। इस दौरान स्ट्रेस को मैनेज करने के साथ ही डायट में भी कुछ बदलाव करके मूड स्विंग के लक्षणों में आराम मिल सकता है।

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स्ट्रेस या तनाव
स्ट्रेस यानी तनाव, चिंता और बेचैनी आपके शरीर और स्वास्थ्य को कई तरह से प्रभावित करती है और इन्हीं में से एक है आपका मूड भी। चिड़चिड़ापन, किसी बात की चिंता और लगातार तनाव बना रहे तो इसकी वजह से आपके मूड में अचानक परिवर्तन देखने को मिलता है। लिहाजा मूड स्विंग से बचना है तो स्ट्रेस को मैनेज करना सीखें।

मानसिक रोग से जुड़े कारण
मनोविकार और व्यवहार से जुड़ी ऐसी कई बीमारियां हैं जिनकी वजह से मूड स्विंग जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। अटेंशन डेफिसिट हाइपरऐक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी), डिप्रेशन और बाइपोलर डिसऑर्डर की वजह से भी मूड स्विंग की समस्या हो सकती है। इन बीमारियों का इलाज होने पर मूड स्विंग की समस्या भी अपने आप ठीक हो जाती है।

हार्मोन का असंतुलन
हाइपोथायराइडिज्म जिसमें थायराइड ग्लैंड पर्याप्त मात्रा में हार्मोन का उत्पादन नहीं करता यह हार्मोन से जुड़ी सामान्य बीमारी है जिसका आपके मूड पर भी असर देखने को मिलता है। इसके अलावा अगर आप हार्मोन थेरेपी ले रहे हों तब भी आपको बिना किसी वजह के गुस्सा या उदासी महसूस हो सकती है। जब भी शरीर में हार्मोन की मात्रा कम या ज्यादा हो जाती है तो मूड स्विंग देखने को मिलता है। 

प्रेगनेंसी
जब आप गर्भवती होती हैं तो शरीर में हार्मोन्स की अधिकता हो जाती है जिसका सीधा असर आपके मूड पर पड़ता है। इस दौरान आपको बिना बात के रोना आ सकता है, खालीपन महसूस हो सकता है, एक ही पल में आप खुशी और उदासी दोनों का अनुभव कर सकती हैं। गर्भवती महिलाओं को कई तरह के शारीरिक बदलाव और भावनात्मक तनाव भी महसूस होता और इस कारण भी उनकी भावनाएं और मूड स्विंग की समस्या बढ सकती है।

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मेनोपॉज
महिलाओं के जीवन का एक और प्रमुख परिवर्तनकाल है मेनोपॉज और इस दौरान भी मूड में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। एस्ट्रोजेन हार्मोन के लेवल में में कमी की वजह से महिलाओं के मूड में बदलाव होने के साथ ही हॉट फ्लैश, अनिद्रा और कामेच्छा में कमी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। ऐसे में लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव करके आप अपने मूड को बेहतर बना सकती हैं।

डिमेंशिया
डिमेंशिया एक बीमारी है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त और व्यक्तित्व प्रभावित होता है। डिमेंशिया के मरीजों में भी अचानक मूड स्विंग देखने को मिलता है। वे एक ही मिनट में खुश और अगले ही पल गुस्सा या उदास हो सकते हैं। चूंकि वे चीजें भूलने लगते हैं लिहाजा उन्हें निराशा और कुंठा भी महसूस होती है। डिमेंशिया से पीड़ित कई मरीज डिप्रेशन का शिकार भी हो जाते हैं।

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मूड स्विंग का उपचार - Mood Swing Treatment in Hindi

अपने मूड या मनोदशा को स्थिर और मजबूत बनाकर आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकती हैं ताकि भविष्य में मूड और भावनाओं में किसी तरह का बदलाव न हो। इसके लिए आप अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव कर सकती हैं या फिर कुछ वैकल्पिक चीजों को घर पर ही ट्राई कर सकती हैं जिसकी मदद से मूड स्विंग की समस्या को दूर किया जा सके:

नियमित रूप से एक्सरसाइज करें
जब आप एक्सरसाइज करते हैं तो आपका शरीर फील-गुड हार्मोन और इन्डॉर्फिन का निर्माण करता है जिससे आपका मूड बेहतर होता है और तनाव में कमी आती है। लिहाजा हफ्ते में कम से कम 5 दिन 30 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें। इससे आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत दोनों बेहतर बनी रहेगी।

कैफीन, शुगर और अल्कोहल के ज्यादा सेवन से बचें
कैफीन के सेवन से भले ही थकान कम महसूस हो लेकिन इसकी वजह से बेचैनी और घबराहट महसूस होने लगती है जिस कारण मूड स्विंग की समस्या हो सकती है। इसके अलावा अल्कोहल एक तरह का अवसादक है जो खराब मूड और खराब कर सकता है या फिर आपके व्यवहार को विवेकहीन बना सकता है। बहुत ज्यादा शुगर वाली चीजों के सेवन से ब्लड शुगर लेवल बिगड़ सकता है और इस वजह से भी मूड स्विंग की समस्या हो सकती है। लिहाजा अपने मूड को बनाए रखने के लिए जितना हो सके इन तीनों चीजों का सेवन कम से कम करें।

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स्ट्रेस को मैनेज करना सीखें
चिंता, तनाव और बेचैनी जैसे लक्षण पीएमएस और मूड स्विंग की समस्या को और बिगाड़ सकते हैं। लिहाजा जहां तक संभव हो अपने तनाव या स्ट्रेस को मैनेज करना सीखें। इससे मूड में हो रहा बदलाव भी अपने आप ठीक हो जाएगा। आप चाहें तो तनाव को नियंत्रित करने के लिए मेडिटेशन कर सकते हैं, गहरी सांस ले सकती हैं, प्राणायाम कर सकती हैं या फिर योग की मदद ले सकती हैं। मसाज थेरेपी से भी फायदा मिल सकता है।

अच्छी नींद लें
रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद कई तरह की बीमारियों को दूर कर सकती है जिसमें चिड़चिड़ापन और मूड से जुड़ी दिक्कतें भी शामिल हैं। लिहाजा हर रात बिना किसी अवरोध वाली पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। जब आपकी नींद पूरी हो जाएगी तो आपका मूड फ्रेश रहेगा और चिड़चिड़ापन भी महसूस नहीं होगा।

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डॉक्टर से संपर्क करें
अगर आपके मूड में अचानक हो रहे इन बदलावों की वजह से आपका रोजाना का काम और दिनचर्या प्रभावित हो रही हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एक बार मूड स्विंग का कारण क्या है ये पता चल जाए उसके बाद उसका इलाज आसान होता है। कई बार लाइफस्टाइल में बदलाव से ही काम चल जाता है तो कई बार दवाइयों की भी जरूरत पड़ती है।

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