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चाहे आपको चश्मा लगा हो या आपकी कोई भी आँखों से संबंधित समस्या हो, समय समय पर नेत्र रोग विशेषज्ञ से आँखों की नियमित जांच कराना बेहतर होता है। इसका कारण यह है कि आँखों के संक्रमण या आँखों की समस्या को अनदेखा करने से आंखों को गंभीर क्षति या यहां तक कि आँखों की रोशनी भी जा सकती है। इसलिए 10 से 60 वर्ष की उम्र के बीच प्रत्येक व्यक्ति को हर दो साल में कम से कम एक बार नेत्र रोग को विशेषज्ञ दिखाना चाहिए। जब बात आंखों की देखभाल की आती है तब डॉक्टर हर किसी को इन कुछ चीज़ों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं -

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  1. काउंटर आई ड्रॉप और घरेलू उपचार से बचें
  2. आंखों की समस्या को लेकर ऑप्टिशियन से न करें परामर्श
  3. उम्र के अनुसार कराएँ आंखों की जांच
  4. नियमित रूप से जाएं आँखों के परीक्षण के लिए
  5. आँखों की देखभाल के लिए करें डॉक्टर की सलाह का पालन
  6. आँखों के लक्षणों को ना करें अनदेखा
  7. लेसिक आई सर्जरी कराने से पहले लें डॉक्टर की सलाह

आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण, नेत्र समस्याओं से निपटने के लिए कभी भी घरेलू उपचार का उपयोग न करें। जैसी आंखों की लाली जो एलर्जी की प्रतिक्रिया या समाप्त हो चुके मेकअप उत्पादों के उपयोग के कारण हो सकती है। तो ऐसे में आंखों से धूल साफ़ करने के लिए गाय के दूध या शहद जैसे घरेलू उपायों का उपयोग करने से दूर रहें। इसके अलावा, लाल आँखों से निपटने के लिए काउंटर आई ड्रॉप्स के इस्तेमाल से बचें। ये ड्रॉप्स आपको अच्छे से अधिक नुकसान पहुंचाएगी। (और पढ़ें - आँखों के सूखेपन (ड्राई आईज) के घरेलू उपाय)

आँखों को लेकर एक ऑप्टिशियन से परामर्श करना एक आम गलती है जो कि ज्यादातर लोगों के द्वारा की जाती है। ऑप्टिशियन आमतौर पर दृष्टिगत असामान्यताओं (vision abnormalities) की जांच करने के लिए कंप्यूटरीकृत आँख परीक्षण (computerised eye testing) करते हैं और फिर आँखों की रोशनी में सुधार करने के लिए चश्मे का सुझाव देते हैं। लेकिन ऐसा करके आप अच्छे से ज्यादा नुकसान कर रहे हैं क्योंकि एक ऑप्टिशियन लेंस और आंखों के चश्मे बनाने में माहिर होते हैं न की आँखों कि विस्तृत जांच में। दूसरी ओर, नेत्र रोग विशेषज्ञ ने रेटिना की जांच करने के लिए आँख के दबाव को मापने से दृष्टि की समस्याओं का टेस्ट करते हैं। (और पढ़ें - जानिए आपकी आँखें कमज़ोर हैं या नहीं?)

एक अपवर्तक (रफ्रैक्टिव) त्रुटि वाले बच्चों को वर्ष में एक बार आंख की जांच करानी चाहिए। इसके अलावा जिनको कोई कोई दृष्टि समस्या नहीं है उन्हें हर तीन साल के बाद परीक्षण कराना चाहिए जब तक वे 20 साल के नहीं हो जाते हैं। 20 से 40 साल के बीच, हर व्यक्ति को हर दो साल के बाद आंखों की जांच के लिए जाना चाहिए। यदि आप 40 से ऊपर हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप हर छह महीनों में अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास जाते हैं और अपनी आँख के दबाव की जाँच करें। और अगर आप मधुमेह से ग्रस्त हैं तो साल में एक बार जांच जरूर करवाएं, क्योंकि आपको मोतियाबिंद, ग्लूकोमा या मधुमेह के रेटिनोपैथी का खतरा हो सकता है। (और पढ़ें - आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए क्या खाएं)

कई आंखों की समस्याएं चुपचाप आती हैं और समय के साथ आपको इनके लक्षण दिखाई देते हैं और तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इसलिए अपनी आंखों को हल्के में न लें और नियमित रूप से आपको की जांच के लिए जाएँ। आपको आँखों की समस्या है या नहीं यह देखने का एक आसान तरीका है। अपने हथेली को राइट आई पर रखें और पढ़ने की कोशिश करें, ऐसे ही दूसरी आँख के साथ दोहराएं। अगर आपको पढ़ने में कोई समस्या उत्पन्न होती है तो एक नेत्र चिकित्सक से परामर्श करें। कई परीक्षणों और आंखों की जांच के साथ, आपका डॉक्टर इस स्थिति का पता लगाएँगे। और यदि आवश्यक है तो आपको आंख की स्थिति के आधार पर रेटिना विशेषज्ञ, स्क्वींट विशेषज्ञ, मोतियाबिंद विशेषज्ञ जैसे विशेषज्ञ की सलाह दी जा सकती है। (और पढ़ें - आँखों का टैस्ट)

आपके नेत्र रोग विशेषज्ञ आपके आंखों के स्वास्थ्य के निदान के आधार पर जीवनशैली में बदलाव या दवा का सुझाव देंगे, इसलिए उनका पालन करें। ऐसे में अगर आप इन सब चीज़ो का पालन नहीं करते हैं तो आपको परेशानी हो सकती है। उदाहरण के लिए, ग्लूकोमा से पीड़ित लोगों को हर दिन और लंबे समय तक आई ड्राप डालनी होती है और यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो इससे गंभीर तंत्रिका क्षति और दृष्टि को नुकसान हो सकता है। (और पढ़ें - आँखों की रौशनी कैसे बढ़ायें)

किसी संक्रमण के कारण आँखों में दर्द या लाली हो तो डॉक्टर से परामर्श करना अच्छा है। यदि आपको पढ़ते या टीवी देखते समय सिरदर्द होता हैं, तो अपनी आँखों का परीक्षण करवाएं। इसके अलावा आँखों में सूजन, खुजली और आँखों में चुभन जैसे लक्षणों की उपेक्षा न करें क्योंकि ये लक्षण अंतर्निहित आंख की समस्या का संकेत कर सकते हैं। इसके अलावा, रात में ड्राइविंग करते समय विशेष रूप से दोहरी दृष्टि का सामना करना पड़ रहा है तो यह मोतियाबिंद का एक महत्वपूर्ण चिन्ह है।  इसलिए किसी भी लक्षण की नजरअंदाज न करें और अपने चिकित्सक से तत्काल लक्षण के सटीक कारण जानने के लिए परामर्श करें। (और पढ़ें - चश्मा छुड़ाना या मोतियाबिंद से मुक्ति पाना, सभी आँखों की समस्याओं का इलाज है रामदेव जी के पास)

लेसिक आई सर्जरी सबसे पहली बात है जो दिमाग में आती है यदि आप चश्मा पहनते हैं। सर्जरी के लिए जाने से पहले मूलभूत ज्ञान प्राप्त करें। लेसिक आई सर्जरी के लिए एक व्यक्ति 18 वर्ष से अधिक आयु का होना चाहिए। इसके अलावा, आपका विज़न नंबर कम से कम एक साल के लिए स्थिर होने की आवश्यकता है ताकि लेसिक आई सर्जरी कर सकें। कॉर्नियल मोटाई, कॉर्नियल कर्वचर और कॉर्नियल टपाग्रफी जैसी आंखों की पूरी जांच और परीक्षण के साथ, आपके डॉक्टर तय करेंगे कि आप लेसिक आई सर्जरी के लिए फिट हैं या नहीं। इसलिए जरूरी नहीं है कि जिन लोगों को चश्मा लगा है वो दृष्टि सुधार के लिए लेसिक आई सर्जरी करवाएं। (और पढ़ें - जानें आप कलर ब्लाइंड हैं या नहीं)

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