वजन घटाते समय की जाने वाली गलतियां सेहत पर उल्टा असर डाल सकती हैं. इससे वजन कम होने की जगह बढ़ सकता है. यहां तक कि कई तरह की शारीरिक समस्याएं भी हो सकती है. अक्सर लोग वजन घटाते समय बहुत कम या बहुत ज्यादा कैलोरी का सेवन करते हैं. साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी भी नहीं पीते हैं, जो हानिकारक साबित हो सकता है.
आज इस लेख में जानेंगे कि वजन घटाते समय कौन-कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए -
(और पढ़ें - वजन कम करने के उपाय)
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वजन कम करते हुए इनका रखें ध्यान
- लो-कार्ब डाइट में ज़्यादा फैट लेना
- ज़्यादा प्रोसेस्ड फूड खाना
- खाने के लेबल न पढ़ना
- मीठे ड्रिंक्स पीना
- क्या खा रहे हैं इसका ट्रैक न रखना
- अवास्तविक उम्मीदें रखना
- भूख न लगने पर भी बार-बार खाना
- फाइबर की कमी
- प्रोटीन की कमी
- एक्सरसाइज से बर्न हुई कैलोरी का गलत अंदाज़ा लगाना
- लो फैट या “डाइट” फूड चुनना
- वेट लिफ्टिंग न करना
- एक्सरसाइज न करना या ज़रूरत से ज़्यादा करना
- ज़्यादा या बहुत कम कैलोरी खाना
- सिर्फ़ वजन मशीन पर ध्यान देना
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सारांश
वजन कम करते हुए इनका रखें ध्यान
कई लोग वजन घटाने की कोशिश में लगे रहते हैं, लेकिन सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिलते हैं. ऐसा वजन घटाने की प्रक्रिया के दौरान की जाने वाली गलतियां होती हैं, जिसके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है -
लो-कार्ब डाइट में ज़्यादा फैट लेना
लो-कार्ब या कीटो डाइट वजन घटाने में मदद करती है, लेकिन कई लोग इसमें बहुत ज़्यादा फैट खाना शुरू कर देते हैं — जैसे बटर, चीज़ या तले हुए खाने। अगर आप ज़रूरत से ज़्यादा फैट खा रहे हैं, तो कैलोरी बढ़ जाती है और वजन घटने की बजाय बढ़ सकता है। इसलिए लो-कार्ब डाइट में भी संतुलन ज़रूरी है।)
ज़्यादा प्रोसेस्ड फूड खाना
आजकल पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड्स हमारे जीवन का हिस्सा बन गए हैं, जैसे इंस्टेंट नूडल्स, कुकीज़, सॉस या पैकेट वाले स्नैक्स। ये चीज़ें शरीर में सूजन बढ़ाती हैं, गट हेल्थ खराब करती हैं और ओवरईटिंग की आदत डालती हैं। इसलिए कोशिश करें कि ज्यादातर खाना नैचुरल और सिंपल हो, जैसे घर का बना दाल-चावल, फल, सब्जियां या सलाद। ऐसा खाना खुद-ब-खुद लिमिट में खाया जाता है और वजन घटाने में मदद करता है।
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खाने के लेबल न पढ़ना
कई बार हम जो चीज़ खरीदते हैं, उस पर “हेल्दी” या “नेचुरल” लिखा होता है, लेकिन पीछे के लेबल में छुपे फैट, शुगर और केमिकल्स हमें पता ही नहीं चलते। इसलिए किसी भी चीज़ को खरीदने से पहले उसका न्यूट्रिशन लेबल ज़रूर पढ़ें। असली जानकारी हमेशा पैक के पीछे लिखी होती है।
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मीठे ड्रिंक्स पीना
कई लोग सॉफ्ट ड्रिंक्स छोड़ देते हैं, लेकिन जूस या फ्लेवर्ड ड्रिंक पीना शुरू कर देते हैं। जबकि ये भी उतने ही मीठे होते हैं। जैसे सेब के जूस में कई बार कोला से ज़्यादा शुगर होती है। लिक्विड शुगर का असर हमारे दिमाग पर नहीं होता, इसलिए हम बाद में भी ज़्यादा खा लेते हैं। बेहतर है कि जूस की जगह फल खाएं, ताकि फाइबर भी मिले और शुगर कंट्रोल में रहे।
क्या खा रहे हैं इसका ट्रैक न रखना
कई बार हम सोचते हैं कि हम बहुत हेल्दी खा रहे हैं, लेकिन असल में हम ज़रूरत से ज़्यादा खा जाते हैं। इसलिए यह ज़रूरी है कि आप अपने खाने का ट्रैक रखें, चाहे किसी ऐप से या डायरी में। इससे आपको पता चलेगा कि आप कितनी कैलोरी, प्रोटीन या फैट ले रहे हैं। जिन लोगों ने अपने खाने और एक्सरसाइज का रिकॉर्ड रखा, उन्होंने ज़्यादा वजन घटाया।
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अवास्तविक उम्मीदें रखना
वजन घटाने में धैर्य बहुत ज़रूरी है। बहुत से लोग सोचते हैं कि 10-15 किलो जल्दी कम हो जाएगा, लेकिन ये सोच बाद में निराशा देती है। बेहतर है कि आप छोटे-छोटे लक्ष्य रखें, जैसे हर हफ्ते 1 या 2 किलो कम करना। धीरे-धीरे कम किया गया वजन ज़्यादा समय तक टिकता भी है और सेहत पर असर नहीं डालता।
भूख न लगने पर भी बार-बार खाना
कई लोग सोचते हैं कि हर 2-3 घंटे में कुछ न कुछ खाते रहना मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, लेकिन ऐसा नहीं है। बार-बार खाने से शरीर को खाने का पूरा समय नहीं मिलता और कैलोरी ज़्यादा हो जाती है। बेहतर है कि जब सच में भूख लगे तभी खाएं। ज़बरदस्ती सुबह-सुबह नाश्ता करने से भी कई बार वजन बढ़ सकता है, अगर आपकी बॉडी की आदत न हो।
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फाइबर की कमी
अगर आपकी डाइट में फाइबर कम है तो वजन कम करना मुश्किल हो सकता है। फाइबर पाचन को धीमा करता है और पेट लंबे समय तक भरा रखता है। खासकर ‘विस्कस फाइबर’ जो पानी पकड़कर जेल जैसा बनाता है, वो भूख कम करने में मदद करता है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और बीन्स जैसी चीज़ें अपने खाने में शामिल करें। इससे वजन घटेगा और पाचन भी बेहतर होगा।
प्रोटीन की कमी
वजन घटाने के लिए प्रोटीन बहुत ज़रूरी है क्योंकि यह भूख कम करता है, पेट ज़्यादा देर तक भरा रखता है और मसल्स को बचाए रखता है। अगर आपकी डाइट में प्रोटीन कम है, तो फैट कम होने की बजाय मसल्स कम होने लगते हैं। इसलिए हर मील में थोड़ा प्रोटीन शामिल करें — जैसे दाल, पनीर, अंडा, सोया, या बीन्स। ये सस्ते और हेल्दी ऑप्शन हैं।
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एक्सरसाइज से बर्न हुई कैलोरी का गलत अंदाज़ा लगाना
बहुत से लोग सोचते हैं कि एक्सरसाइज से उन्होंने बहुत कैलोरी जला ली है, जबकि असल में उतनी नहीं जलती। फिर वो उस भरोसे में ज़्यादा खा लेते हैं। इससे वजन घटने के बजाय रुक जाता है। इसलिए अपनी मेहनत का सही अंदाज़ा लगाएं, लेकिन इसे ओवरएस्टिमेट न करें। एक्सरसाइज सेहत के लिए ज़रूर करें, लेकिन खाने पर कंट्रोल भी साथ रखें।
लो फैट या “डाइट” फूड चुनना
मार्केट में मिलने वाले “लो फैट” या “डाइट” फूड्स हमेशा हेल्दी नहीं होते। इनका स्वाद बनाए रखने के लिए इनमें अक्सर शुगर या आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैं। जैसे, फ्लेवर्ड लो फैट योगर्ट में कई बार 4-5 चम्मच तक चीनी होती है। ऐसे में आप हेल्दी सोचकर ज़्यादा कैलोरी ले लेते हैं। बेहतर है कि आप नैचुरल चीजें खाएं, जैसे फल, सब्जियां या घर का बना खाना।
वेट लिफ्टिंग न करना
कई लोग सोचते हैं कि वेट उठाने से शरीर भारी लगने लगता है, लेकिन असलियत इसके उलट है। वेट ट्रेनिंग से मसल्स मजबूत होते हैं, मेटाबॉलिज्म तेज होता है और पेट की चर्बी कम करने में भी मदद मिलती है। अगर आप सिर्फ़ वॉक या कार्डियो कर रहे हैं, तो थोड़ी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जोड़ना बेहद फायदेमंद रहेगा। इससे बॉडी टोन होती है और वजन घटाना आसान हो जाता है।
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एक्सरसाइज न करना या ज़रूरत से ज़्यादा करना
डाइटिंग करते समय अगर आप एक्सरसाइज नहीं करते, तो फैट के साथ-साथ मसल्स भी कम हो जाते हैं और मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। वहीं अगर आप ओवरएक्सरसाइज करते हैं तो शरीर थक जाता है, हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है और तनाव बढ़ने लगता है। सही तरीका ये है कि हफ्ते में कुछ दिन वेट ट्रेनिंग और कुछ दिन हल्का कार्डियो करें। इससे मसल्स बने रहेंगे और शरीर फैट जलाने में और एक्टिव रहेगा।
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ज़्यादा या बहुत कम कैलोरी खाना
वजन घटाने के लिए ज़रूरी है कि आप जितनी कैलोरी खाते हैं उससे ज़्यादा कैलोरी बर्न करें। लेकिन बहुत बार लोग सोचते हैं कि वो कम खा रहे हैं, जबकि हकीकत में वो ज़्यादा कैलोरी ले रहे होते हैं। जैसे ड्राय फ्रूट्स या फिश हेल्दी तो हैं, लेकिन इनमें कैलोरी ज़्यादा होती है। दूसरी तरफ़ अगर आप बहुत कम कैलोरी खा रहे हैं, तो शरीर ‘सेविंग मोड’ में चला जाता है, जिससे मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है और वजन कम होने के बजाय रुक जाता है। इसलिए बैलेंस रखना ज़रूरी है – ना बहुत कम खाएं, ना बहुत ज़्यादा।
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सिर्फ़ वजन मशीन पर ध्यान देना
हम अक्सर सोचते हैं कि वजन कम नहीं हो रहा, जबकि हम डाइट और एक्सरसाइज सब सही कर रहे होते हैं। लेकिन ज़रूरी नहीं कि वजन मशीन जो दिखा रही है वही सच्चाई हो। वजन सिर्फ़ फैट से नहीं, बल्कि शरीर में मौजूद पानी, खाने की मात्रा और हार्मोनल बदलावों से भी प्रभावित होता है। कई बार महिलाएं पीरियड्स के दौरान या हार्मोनल उतार-चढ़ाव के समय शरीर में पानी रोक लेती हैं, जिससे वजन बढ़ा हुआ लगता है। अगर आपकी कमर की फिटिंग ढीली हो रही है या कपड़े आराम से पहन पा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि फैट कम हो रहा है, भले ही वजन वही दिख रहा हो। इसलिए सिर्फ़ स्केल पर भरोसा न करें, बल्कि हर महीने अपने माप और तस्वीरों से ट्रैक करें।
(और पढ़ें - वजन कम करने के लिए क्या खाएं)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अपने सवालों के जवाब यहाँ पाएं।
क्या “लो फैट” या “डाइट” फूड्स हेल्दी होते हैं?
ज़रूरी नहीं। इनमें अक्सर स्वाद बढ़ाने के लिए शुगर या आर्टिफिशियल चीज़ें डाली जाती हैं। ऐसे में कैलोरी बढ़ जाती है। बेहतर है कि आप नेचुरल और घर का बना खाना खाएं।
क्या वेट उठाने से शरीर भारी हो जाता है?
नहीं, यह एक मिथ है। वेट लिफ्टिंग से फैट घटता है, मसल्स मजबूत होते हैं और मेटाबॉलिज्म तेज होता है। इससे बॉडी टोन होती है और पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है।
अगर मैं एक्सरसाइज नहीं करूं तो क्या सिर्फ़ डाइट से वजन घट जाएगा?
थोड़ा घट सकता है, लेकिन लंबी अवधि में नहीं टिकेगा। बिना एक्सरसाइज के मसल्स कम हो जाते हैं और मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। थोड़ी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हल्का कार्डियो वजन घटाने के साथ शरीर को टोन रखने में मदद करते हैं।
सारांश
वजन कम करना ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कुछ दिन नहीं, बल्कि महीने और साल लग सकते हैं. इस प्रक्रिया में बेहद सजग रहने की जरूरत होती है, क्योंकि मामूली समझी जाने वाली गलतियां भी वजन घटाने की प्रक्रिया में आड़े आ सकती हैं. उदाहरण के लिए स्ट्रेस लेना, पर्याप्त नींद न लेना, कैलोरी का बहुत ज्यादा या कम सेवन करना, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना आदि.
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वजन घटाते समय न करें गलतियां के डॉक्टर
Dr. Bepari Hafsa
सामान्य चिकित्सा
1 वर्षों का अनुभव
Dr. Vikrant Sidana
सामान्य चिकित्सा
7 वर्षों का अनुभव
Dr. Sudhanshu Kumar Jalap
सामान्य चिकित्सा
1 वर्षों का अनुभव



