अणु तेल एक आयुर्वेदिक तेल है, जिसे कई जड़ी-बूटियों के कॉम्बिनेशन से बनाया जाता है. यह सिर, गर्दन, कंधे, आंख, नाक, गले व बालों से संबंधित रोगों को ठीक करने में मददगार साबित होता है. यह स्किन की सतह पर भी सूदिंग प्रभाव डालता है और ब्रेन के साथ-साथ नसों को भी अंदर से राहत देता है. सभी सेंसर ऑर्गन पर शानदार तरीके से काम करके अणु तेल राहत और रिलैक्स महसूस कराता है. इसके इस्तेमाल से आंखों की रोशनी तेज होती है और यह सूंघने की क्षमता में भी सुधार लाता है. वहीं, कई बार इसके इस्तेमाल से उल्टी की समस्या भी हो सकती है.

आज इस लेख में हम अणु तेल के उपयोग, फायदे और नुकसान के बारे में जानेंगे -

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  1. अणु तेल का उपयोग
  2. अणु तेल के फायदे
  3. अणु तेल का नुकसान
  4. सारांश
अणु तेल का उपयोग, फायदे व नुकसान के डॉक्टर

अणु तेल का न तो सेवन किया जाता है और न ही इसे टॉपिकल तरीके से लगाने की सलाह दी जाती है. इसे सिर्फ नाक में डाला जाता है, जिसके बारे में सही सलाह डॉक्टर ही दे सकते हैं. आयुर्वेद में इसे नास्य इलाज कहा जाता है. आइए, जानते हैं कि इसे कैसे इस्तेमाल किया जाता है -

  • इसे नाक में डालने से पहले रोगी के सिर व चेहरे पर मालिश की जाती है.
  • इसके बाद सिर को पीछे 30 डिग्री एंगल पर लाने के बाद नाक के दोनों छेदों में बूंद-बूंद करके अणु तेल डालने के लिए कहा जाता है.
  • जब तेल को नाक के छेद में डाला जाता है, तो दूसरे छेद को उंगली की मदद से बंद करने और लंबी सांस लेने की सलाह दी जाती है.
  • इस तरह से तेल नाक के जरिए होते हुए गले के अंदर म्यूकस तक पहुंच जाता है.
  • फिर कुछ देर इसी पोजीशन में रहने के लिए कहा जाता है, ताकि गले में जमा म्यूकस को बाहर थूका जा सके, क्योंकि यह टॉक्सिक होता है.
  • इसके बाद गले और मुंह को गुनगुने पानी से साफ करने के लिए सलाह दी जाती है.

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अणु तेल कान, नाक और गले से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने में फायदेमंद साबित होता है. यह वात, पित्त और कफ दोष को संतुलित करने में मददगार है. इसकी मदद से आंखों की रोशनी में सुधार आता है और यह गले से जुड़ी परेशानियों को भी ठीक करता है. आइए, विस्तार से अणु तेल के फायदे जानते हैं -

आंखों की रोशनी में सुधार

अणु तेल के इस्तेमाल से आंखों की रोशनी में सुधार आता है. इसके साथ ही मोतियाबिंद, मायोपिया और हाइपरमेट्रोपिया जैसी आंखों से संबंधित बीमारियों को दूर करने में भी मदद मिलती है. आंखों की रोशनी तेज बनाए रखने में इसका इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है.

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गले की समस्या से राहत

अणु तेल गले में आई सूजन को कम करने में अहम भूमिका निभाता है. टॉन्सिलाइटिस, एफोनिया, आवाज का भारी हो जाना जैसी गले की समस्याओं में अणु तेल का इस्तेमाल करने के लिए कहा जाता है. यह आवाज की क्वालिटी को सुधारने के लिए भी बढ़िया है.

बेहतर सूंघने की क्षमता

अणु तेल नेजल म्यूकोसा और म्यूकस मेंब्रेन में आई सूजन को दूर करता है. यह साइनसाइटिस व साइनस कंजेशन जैसी नाक से जुड़ी परेशानियों के इलाज के लिए भी फायदेमंद है.

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कंधे की मजबूत मांसपेशियां

इसके इस्तेमाल से चेहरे और कंधे के आसपास की मांसपेशियां, हड्डियां व जोड़ मजबूत होते हैं. यह फ्रोजन शोल्डर और फेशियल पैरालिसिस के लक्षणों को कम करने में भी सहायक है.

स्वस्थ बाल

अणु तेल समय से पहले सफेद हो रहे बालों और झड़ते बालों को ठीक करने में अहम भूमिका निभाता है. यह सिर के ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाते हुए बालों के विकास में मददगार है.

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मस्तिष्क की बीमारियों में फायदेमंद

अणु तेल का इस्तेमाल माइग्रेन, पार्किंसन डिजीज, डिप्रेशन, याददाश्त की कमी व मानसिक तनाव जैसी ब्रेन संबंधित बीमारियों को ठीक करने में भूमिका निभाता है. यह ब्रेन की नसों को स्टिमूलेट करके नर्व डिसऑर्डर को भी कम करता है. यह सिरदर्द के इलाज के तौर पर भी एक प्रभावशाली दवा है.

अणु तेल के सेवन से उल्टी जैसे कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. आइए, अणु तेल के इस्तेमाल से होने वाले कुछ ऐसी ही नुकसान के बारे में जानते हैं -

  • अणु तेल और जल नेति दोनों का साथ में इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह नेजल कैविटी को कोल्ड में बदल सकता है, जिससे कफ, सर्दी-जुकाम और साइनसाइटिस के लक्षण बढ़ सकते हैं.
  • अणु तेल का इस्तेमाल खाली पेट करना सही रहता है, क्योंकि भरे पेट में यह नॉजिया या उल्टी का कारण बन सकता है.

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कई जड़ी-बूटियों के कॉम्बिनेशन से तैयार अणु तेल आंखों की रोशनी बढ़ाने के साथ ही गले से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में सहायक है. हालांकि, इसके इस्तेमाल से कई बार नॉजिया या उल्टी जैसी परेशानी भी हो सकती है. बेहतर तो यह होगा कि अणु तेल के इस्तेमाल से पहले आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह ली जाए.

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