बालों का झड़ना एक सामान्य स्थिति है. एक दिन में 50 से 100 बालों का झड़ना सामान्य होता है, लेकिन प्रेगनेंसी, मेडिकल कंडीशन या बालों की देखभाल न कर पाने की वजह से बाल असामान्य रूप से झड़ सकते हैं. इसके अलावा, फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस की स्थिति भी बालों के झड़ने का एक कारण बन सकती है. यह स्थिति बहुत कम ही लोगों में देखने को मिलती है. अगर फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस की वजह से लंबे समय तक बाल झड़ते हैं, तो यह गंजेपन तक पहुंच सकता है. इस स्थिति में सिर पर गंजेपन के धब्बे बन सकते हैं.

आज इस लेख में आप फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षण, कारण व इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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  1. फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस क्या है?
  2. फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षण
  3. फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के कारण
  4. फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस का इलाज
  5. सारांश
फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षण, कारण व इलाज के डॉक्टर

फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस वह स्थिति होती है, जिसमें हेयर फॉलिकल के अंदर सूजन हो जाती है. इस स्थिति में फॉलिकल्स से बाल झड़ने लगते हैं. साथ ही नए बाल उगने भी बंद हो जाते हैं. फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस को दुर्लभ स्थिति माना गया है.

फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस होने पर बालों का विकास रुक जाता है. बाल झड़ने लगते हैं और गंजापन हो जाता है. यह स्थिति स्थाई गंजेपन का कारण बन सकती है. यह आमतौर पर युवावस्था में शुरू होता है. शुरुआत में सिर से बाल झड़ते हैं, फिर उसके आसपास फुंसी जैसे घाव नजर आने लगते हैं, लेकिन फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस संक्रामक नहीं है.

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कई लोगों को फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षण जल्दी से महसूस नहीं होते, लेकिन ज्यादातर लोग एफडी के लक्षणों का सामना जरूर करते हैं. आपको बता दें कि फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस सिर की त्वचा को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है. इसके अलावा, यह बगल, जांघ, दाढ़ी और अंडरआर्म्स में भी फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षण नजर आ सकते हैं. इस स्थिति में प्रभावित क्षेत्र पर गोल धब्बे नजर आ सकते हैं यानी बाल झड़ जाते हैं. ऐसे में व्यक्ति को असुविधा महसूस हो सकती है. फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षण ये भी हो सकते हैं -

  • बालों का झड़ना.
  • सिर पर गंजे धब्बे दिखाई देना.
  • गंजे धब्बों के आसपास फुंसियां होना.
  • स्कैल्प पर रेडनेस होना.
  • स्कैल्प पर सूजन होना.
  • स्कैल्प पर पपड़ीदार धब्बे होना.
  • सिर पर खुजली महसूस होना.
  • स्कैल्प पर मवाद वाली फुंसी होना.
  • सिर पर घाव नजर आना.
  • नए बालों का न उगना.

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फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के कारणों पर अभी अधिक शोध नहीं हुए हैं, लेकिन कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह समस्या उन लोगों को होती है, जिन्हें स्टैफिलोकोकस ऑरियस के प्रति असामान्य प्रतिक्रिया होती है. आपको बता दें कि स्टैफिलोकोकस ऑरियस एक प्रकार का बैक्टीरिया है, जो त्वचा पर पाया जाता है. अधिकतर लोगों में यह बैक्टीरिया हानिरहित होता है, लेकिन कुछ लोगों में यह बैक्टीरिया सूजन का कारण बन सकता है. फिर जैसे-जैसे समय बढ़ता है, सूजन की वजह से हेयर फॉलिकल नष्ट हो जाते हैं. इस स्थिति में नए बाल उगने से रुक जाते हैं. पुराने बाल झड़ने शुरू होते हैं और अपने निशान छोड़कर जाते हैं.

आपको बता दें कि फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस वाले लोगों में स्टैफिलोकोकस ऑरियस बैक्टीरिया के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया करती है, जिससे त्वचा में जलन व सूजन होती है और बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं. फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस दुर्लभ स्थिति है. इसके कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं. लेकिन फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के कुछ जोखिम कारक हो सकते हैं. इनमें शामिल हैं -

  • वयस्कों या युवाओं को फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस होने की आशंका अधिक होती है.
  • इसके अलावा, महिलाओं की तुलना में पुरुषों को फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस होना आम है.
  • फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस जेनेटिक भी हो सकता है. अगर परिवार में पहले किसी को यह रोग रहा है, तो आपको भी इस रोग के होने का जोखिम अधिक होता है.
  • आपको बता दें कि कि आयु और मेडिकल कंडीशन फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के विकास की संभावना को प्रभावित नहीं करते हैं.

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फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ उपचार और दवाइयां फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षणों से छुटकारा दिला सकते हैं. इसमें शामिल हैं -

ओरल एंटीबायोटिक्स

वैसे तो फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस का इलाज करने के लिए कई प्रकार के एंटीबायोटिक दवाइयों का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, ओरल एंटीबायोटिक्स फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षणों को कम करने में असरदार साबित हो सकते हैं. क्लिंडामाइसिन और रिफैम्पिसिन इससे राहत दिला सकते हैं. आपको बता दें कि इन ओरल एंटीबायोटिक्स का उपयोग स्कैल्प के घाव व फोड़े आदि को ठीक करने के लिए किया जाता है.

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टॉपिकल एंटीबायोटिक्स

टॉपिकल एंटीबायोटिक्स भी फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं. डॉक्टर भी एफडी का इलाज करने के लिए टॉपिकल एंटीबायोटिक का उपयोग करते हैं. टॉपिकल एंटीबायोटिक्स भी स्कैल्प से घाव, फुंसियों, मवाद व खुजली को कम कर सकते हैं. अगर आप टॉपिकल और ओरल एंटीबायोटिक्स का उपयोग एक साथ करते हैं, तो जल्दी राहत मिल सकती है.

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फोटोडायनामिक थेरेपी

फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षणों की गंभीरता को कम करने के लिए फोटोडायनामिक थेरेपी का सहारा लिया जा सकता है. इसमें स्किन इंफेक्शन से लड़ने के लिए विशेष रोशनी का उपयोग किया जाता है. फोटोडायनामिक थेरेपी एफडी वाले लोगों के लिए एक प्रभावी उपचार विकल्प हो सकता है. 2021 के एक अध्ययन में साबित हुआ है कि एफडी वाले लोगों के लिए फोटोडायनामिक थेरेपी मददगार साबित हो सकती है. 

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ओरल या टॉपिकल कॉर्टिकोस्टेराइड

फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षणों से राहत पाने के लिए आप ओरल और टॉपिकल कॉर्टिकोस्टेराइड का भी उपयोग कर सकते हैं. कॉर्टिकोस्टेराइड सूजन, दर्द और खुजली को कम करने में असरदार साबित हो सकता है. इसके अलावा, स्टेराइड इंजेक्शन भी सिर की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है. 

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कोल टार वाला शैंपू

फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षणों को कम करने के लिए कोल टार युक्त शैंपू का उपयोग करना प्रभावी साबित हो सकता है. इस शैंपू का यूज करने से सिर की खुजली को कम करने में मदद मिल सकती है. साथ ही पपड़ी और सूजन से भी राहत मिल सकती है. इसके अलावा, ओवर-द-काउंटर एंटी इचिंग क्रीम भी एफडी का इलाज कर सकती है.

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सर्जरी

जब ओरल और टॉपिकल दवाइयों से फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षणों से राहत नहीं मिलती है, तो डॉक्टर सर्जरी करवाने की सलाह दे सकते हैं. इस स्थिति में डॉक्टर पुराने बालों को निकाल सकते हैं और फिर हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी कर सकते हैं. 

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फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस ऐसी स्थिति है, जिसमें हेयर फॉलिकल में सूजन हो जाती है. इसकी वजह से बालों का विकास रुक जाता है. साथ ही बाल झड़ने लगते हैं और सिर पर गंजेपन के धब्बे नजर आने लगते हैं. इसके अलावा, सिर में सूजन, खुजली, रेडनेस, फुंसी होना भी फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस के लक्षण हो सकते हैं. फॉलिक्युलिटिस डेकाल्वेंस में बाल दोबारा नहीं उग पाते हैं. इसलिए, अगर किसी को इसके शुरुआती लक्षण नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. पुरुषों में यह दुर्लभ स्थिति की होने की आशंका अधिक होती है.

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