वजन घटाने के बारे में तो हम सभी सोचते हैं लेकिन बहुत ही कम लोग ऐसे होते हैं जो वाकई में वेट लॉस के लिए कुछ करते हैं। वजन घटाने में कैलोरी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इससे दूर रह कर वजन घटाने का काम आसान हो सकता है लेकिन मीठा या चटपटा खाना देखते ही हम खुद को रोक नहीं पाते हैं और आपको बता दें कि ऐसे खाने में कैलोरी भी ज्यादा होती है एवं इनसे वजन भी जल्दी बढ़ता है। ऐसी स्थिति में वजन घटाना नामुमकिन सा लगता है।
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अगर आप भी वजन कम करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको डाइट चार्ट के अनुसार स्वस्थ आहार लेना चाहिए। आहार में कम कैलोरी वाली चीज़ों को शामिल कर वजन घटाने में मदद मिलती है और ये दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।
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तो आइए जानते हैं कि वजन घटाने के लिए आपको क्या और कब खाना चाहिए। नीचे डाइट चार्ट दिया गया है जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिंस शामिल हैं।
मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट
मोटापा आज की सबसे आम लेकिन सबसे नजरअंदाज की जाने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। आप में से ज़्यादातर लोग इसे सिर्फ ज़्यादा खाने या कम चलने से जोड़कर देखते हैं, जबकि असल में मोटापा हमारे खानपान की क्वालिटी, खाने के समय, खाने के प्रकार और शरीर के हार्मोनल संतुलन से जुड़ा होता है।
मोटापे को कंट्रोल करने के लिए आपके लिए डाइट सबसे अहम भूमिका निभाती है, लेकिन कोई एक डाइट सभी के लिए सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। अलग-अलग डाइट तरीके शरीर पर अलग-अलग तरह से असर डालते हैं।
लो-फैट डाइट
लो-फैट डाइट को लंबे समय से आपकी दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता रहा है। इस डाइट में फैट से मिलने वाली कैलोरी को कम कर दिया जाता है, ताकि आपका कुल कैलोरी इनटेक घटे। आमतौर पर इसमें फैट से मिलने वाली ऊर्जा 20–25 प्रतिशत या उससे भी कम रखी जाती है।
पहले यह माना जाता था कि इससे वजन तेजी से घटेगा, लेकिन हाल की स्टडीज़ बताती हैं कि लंबे समय तक वजन घटाने में लो-फैट डाइट, लो-कार्ब डाइट से ज़्यादा असरदार नहीं है। कई लोगों के लिए बहुत कम फैट वाली डाइट लंबे समय तक फॉलो करना भी मुश्किल हो जाता है, इसलिए यह हर किसी के लिए सही विकल्प नहीं मानी जाती।
लो-कार्ब डाइट
आज की आधुनिक डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज़्यादा हो गई है जैसे सफेद आटा, चीनी, बेकरी आइटम्स और पैकेज्ड फूड। लो-कार्ब डाइट में इन्हें कम या लगभग बंद कर दिया जाता है। इस डाइट का असर आपके इंसुलिन पर पड़ता है।
जब कार्ब कम होते हैं, तो इंसुलिन का लेवल घटता है और आपका शरीर जमा फैट को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने लगता है। बहुत कम कार्ब वाली डाइट में आपका शरीर कीटोन्स बनाने लगता है, जिससे आपका वजन तेजी से घट सकता है। लो-कार्ब डाइट डायबिटीज, प्रीडायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम वाले लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद पाई गई है।
हालांकि लंबे समय तक इस डाइट को फॉलो करना सभी के लिए आसान नहीं होता। इसमें फाइबर की कमी हो सकती है और ज़्यादा फैट लेने से आपको दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लंबे समय के लिए प्लांट-बेस्ड, हाई-फाइबर और लो-ग्लाइसेमिक कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट ज़्यादा सुरक्षित और टिकाऊ होती है।
मेडिटेरेनियन डाइट
मेडिटेरेनियन डाइट इटली और ग्रीस जैसे देशों के पारंपरिक खानपान पर आधारित है। इसमें फल, सब्ज़ियां, साबुत अनाज, नट्स, बीज, मछली और ऑलिव ऑयल शामिल होते हैं। यह डाइट फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट्स और अच्छे फैट से भरपूर होती है, जबकि सैचुरेटेड फैट कम होता है।
कई स्टडीज़ में यह पाया गया है कि यह डाइट वजन कम करने के साथ-साथ दिल की सेहत सुधारने और डायबिटीज का खतरा कम करने में भी मदद करती है। जब इसे सही कैलोरी कंट्रोल और फिजिकल एक्टिविटी के साथ अपनाया जाता है, तो इसका असर और बेहतर होता है।
ऑर्निश डाइट
ऑर्निश डाइट मुख्य रूप से प्लांट-बेस्ड होती है और इसमें फैट की मात्रा बहुत कम रखी जाती है। यह साबुत अनाज, फल, सब्ज़ियां और दालों पर आधारित होती है।
इस डाइट को आप अक्सर योग, एक्सरसाइज़ और स्ट्रेस मैनेजमेंट के साथ अपना सकतें है। रिसर्च के अनुसार, इससे आपका वजन धीरे-धीरे लेकिन सुरक्षित तरीके से कम होता है। यह डाइट उन लोगों के लिए बेहतर हो सकती है जो दिल की बीमारी के जोखिम में हैं।
एटकिंस डाइट
एटकिंस डाइट में कार्बोहाइड्रेट बहुत कम और प्रोटीन व फैट ज्यादा होता है। इससे आपका पेट जल्दी भरता है और आपको भूख कम लगती है।
इस डाइट से शॉर्ट टर्म में वजन अच्छा खासा कम हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक ज़्यादा फैट और एनिमल प्रोटीन लेने से दिल और किडनी पर असर पड़ सकता है। इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक अपनाना सही नहीं माना जाता।
पैलियोलिथिक डाइट
पैलियो डाइट हमारे शिकारी-संग्रहकर्ता पूर्वजों के खानपान से प्रेरित है। इसमें प्रोसेस्ड फूड, अनाज और डेयरी शामिल नहीं होती। यह फल, सब्ज़ियां, नट्स, बीज, मांस और मछली पर आधारित होती है।
यह डाइट आपके इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने और वजन कम करने में आपकी मदद कर सकती है, लेकिन इसकी लागत और सीमाएं आपको इसे लंबे समय तक अपनाने में मुश्किल बना देती हैं।
वेजिटेरियन डाइट
शाकाहारी डाइट आपके लिए धीरे-धीरे वजन घटाने के लिए एक अच्छा विकल्प मानी जाती है। खासकर वेगन डाइट में वजन घटाने का असर ज़्यादा देखा गया है।
जब शाकाहारी डाइट को सही कैलोरी कंट्रोल के साथ अपनाया जाए, तो यह आपके शरीर को जरूरी पोषक तत्व देते हुए वजन कम करने में आपकी मदद करती है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग
इंटरमिटेंट फास्टिंग में यह तय किया जाता है कि आपको कब खाना है और कब नहीं। इसमें आपके खाने की क्वालिटी से ज़्यादा आपके खाने के समय पर ध्यान दिया जाता है।
इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है और शरीर में सूजन कम होती है। कई लोगों के लिए यह तरीका लंबे समय तक अपनाना आसान होता है, लेकिन यह सभी के लिए एक जैसा असर नहीं करता।
कैलोरी डेफिसिट पर बेस्ड डाइट
लो-कैलोरी और वेरी लो-कैलोरी डाइट का मकसद कुल कैलोरी कम करना होता है। बहुत कम कैलोरी वाली डाइट बिना मेडिकल निगरानी के नहीं अपनानी चाहिए। कुछ मामलों में कीटोजेनिक लो-कैलोरी डाइट से शॉर्ट टर्म में अच्छे नतीजे मिलते हैं, लेकिन इसे लंबे समय तक फॉलो करना मुश्किल होता है।
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वजन कम करने के लिए डाइट चार्ट
जब भी कोई वजन कम करने का फैसला करता है, तो सबसे पहला सवाल यही आता है कि वजन घटाने के लिए सबसे अच्छी डाइट कौन‑सी है। अक्सर लोग यह सोच लेते हैं कि कुछ समय के लिए बहुत सख्त डाइट कर ली जाए, वजन कम हो जाएगा और फिर सब पहले जैसा चलने लगेगा।
लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसा तरीका लंबे समय तक काम नहीं करता। वजन वही लोग कम कर पाते हैं और उसे बनाए रख पाते हैं, जो अपनी खाने की आदतों में स्थायी बदलाव करते हैं। मतलब यह कि कुछ हफ्तों की डाइट नहीं, बल्कि हमेशा के लिए हेल्दी खाना अपनाना ही असली रास्ता है।
हेल्दी डाइट का असली मतलब
हेल्दी डाइट का मतलब सिर्फ कम खाना नहीं, बल्कि सही खाना है। ऐसी डाइट जिसमें ज़्यादा से ज़्यादा प्राकृतिक और कम प्रोसेस्ड फूड हों। पैकेट वाले स्नैक्स, रेडी‑टू‑ईट मील और ज़्यादा तले‑भुने खाने से दूरी बनानी चाहिए। एक अच्छी डाइट वह होती है जो शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व, मिनरल और एनर्जी दे। इसमें फल, सब्ज़ियाँ, दालें, साबुत अनाज, अच्छी मात्रा में प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल होते हैं। साथ ही चीनी और नमक की मात्रा कम रखी जाती है।
वजन घटाने के लिए रोज़मर्रा का खाना कैसा हो
अगर हम अपने रोज़ के खाने की बात करें, तो वजन घटाने के लिए बहुत महंगे या विदेशी खाने की ज़रूरत नहीं है। नाश्ते में दलिया, ओट्स या ब्रान फ्लेक्स के साथ फल और थोड़े नट्स लिए जा सकते हैं।
दोपहर के खाने में गेहूं की रोटी या ब्राउन राइस के साथ सब्ज़ी, दाल या ग्रिल्ड पनीर/चिकन अच्छा विकल्प है। रात का खाना हल्का रखना बेहतर होता है, जैसे सब्ज़ियों के साथ सूप या सलाद और थोड़ा प्रोटीन। इस तरह का संतुलित खाना पेट भी भरता है और शरीर को ज़रूरी पोषण भी देता है।
स्नैक्स छोड़ना ज़रूरी नहीं
अक्सर लोग सोचते हैं कि वजन कम करना है तो स्नैक्स पूरी तरह बंद करने पड़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। सही स्नैक्स चुन लिए जाएँ तो वे वजन घटाने में मदद ही करते हैं।
भूख लगने पर मुट्ठी भर बादाम या पिस्ता, एक फल के साथ थोड़ा पीनट बटर, दही या उबला अंडा लिया जा सकता है। ये स्नैक्स लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं और बेवजह ज़्यादा खाने से बचाते हैं।
सबसे हेल्दी डाइट कौन‑सी है?
कोई एक ऐसी डाइट नहीं है जिसे पूरी दुनिया के लिए सबसे हेल्दी कहा जा सके। लेकिन दुनिया के अलग‑अलग हिस्सों में कुछ खाने के तरीके ऐसे हैं, जो सेहत और वजन दोनों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।
इन सभी में एक बात समान होती है, ये ज़्यादातर प्लांट‑बेस्ड होती हैं, इनमें प्राकृतिक खाना शामिल होता है और चीनी, नमक व प्रोसेस्ड फूड कम होते हैं।
मेडिटेरेनियन स्टाइल डाइट
मेडिटेरेनियन डाइट में फल, सब्ज़ियाँ, दालें, नट्स, साबुत अनाज और ऑलिव ऑयल का ज़्यादा इस्तेमाल होता है। इसमें मछली और चिकन सीमित मात्रा में लिए जाते हैं और रेड मीट बहुत कम। यह डाइट वजन घटाने के साथ‑साथ दिल की सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है।
डैश डाइट और माइंड डाइट
डैश डाइट खासतौर पर दिल और ब्लड प्रेशर को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसमें सब्ज़ियाँ, फल, साबुत अनाज और लो‑फैट प्रोटीन पर ज़ोर दिया जाता है। माइंड डाइट इसी का थोड़ा बदला हुआ रूप है, जिसमें हरी पत्तेदार सब्ज़ियों और बेरीज़ को ज़्यादा महत्व दिया जाता है। ये दोनों डाइट शरीर और दिमाग, दोनों के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं।
इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है?
आजकल इंटरमिटेंट फास्टिंग का नाम बहुत सुनने में आता है। इसमें दिन के कुछ घंटों में खाना खाया जाता है और बाकी समय उपवास रखा जाता है।
जब शरीर लंबे समय तक बिना खाना पाए रहता है, तो वह फैट को एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करने लगता है। इससे वजन कम हो सकता है। हालांकि यह तरीका हर किसी के लिए आसान नहीं होता और कुछ लोगों को इसे लंबे समय तक अपनाने में दिक्कत आती है।
क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग सभी के लिए सही है?
इंटरमिटेंट फास्टिंग से कुछ लोगों को फायदा होता है, लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि यह हर किसी के लिए सबसे अच्छा विकल्प हो। जिन लोगों को डायबिटीज़, हार्ट की समस्या या दूसरी गंभीर बीमारियाँ हैं, उन्हें इसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा, अगर कोई डाइट लंबे समय तक निभाई ही न जा सके, तो उसका कोई फायदा नहीं होता।
हाई‑फैट या कीटो डाइट
कीटो डाइट में कार्बोहाइड्रेट बहुत कम और फैट बहुत ज़्यादा लिया जाता है। शुरुआत में इससे वजन तेजी से कम हो सकता है, लेकिन इसे लंबे समय तक फॉलो करना आसान नहीं होता। इसलिए इसे स्थायी समाधान मानने से पहले अच्छी तरह समझना ज़रूरी है।
हेल्दी प्लेट का आसान तरीका
एक आसान तरीका यह है कि थाली को ध्यान में रखकर खाना खाया जाए। आधी थाली सब्ज़ियों और फलों से भरी हो, एक चौथाई में साबुत अनाज और बाकी हिस्से में दाल, पनीर, मछली या चिकन जैसे हेल्दी प्रोटीन हों। साथ में पानी पिएँ और खाना बनाने में घी‑मक्खन की जगह सीमित मात्रा में तेल का इस्तेमाल करें।
आखिर में ज़रूरी बात
वजन घटाने के लिए सबसे अच्छी डाइट वही है जिसे आप लंबे समय तक खुशी‑खुशी अपना सकें। ज़रूरी नहीं कि आप किसी ट्रेंडिंग डाइट के पीछे भागें। अपने स्वाद, दिनचर्या और सेहत को ध्यान में रखते हुए हेल्दी खाना चुनें। धीरे‑धीरे की गई सही आदतें ही आपको फिट और हेल्दी बनाए रखती हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अपने सवालों के जवाब यहाँ पाएं।
क्या वजन कम करने के लिए सिर्फ डाइट ही काफी है?
डाइट वजन घटाने की सबसे अहम कड़ी है, लेकिन इसके साथ हल्की फिजिकल एक्टिविटी ज़रूरी होती है। केवल खाना कम कर देने से लंबे समय तक असर नहीं रहता। सही डाइट और एक्टिव लाइफस्टाइल मिलकर ही बेहतर नतीजे देते हैं।
क्या बहुत कम कैलोरी वाली डाइट से वजन जल्दी कम होता है?
बहुत कम कैलोरी वाली डाइट से वजन तेजी से कम हो सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होती। इससे कमजोरी, चक्कर और पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। ऐसी डाइट डॉक्टर की निगरानी में ही अपनानी चाहिए।
लो-कार्ब डाइट क्या सभी के लिए सही है?
लो-कार्ब डाइट कुछ लोगों, खासकर डायबिटीज़ वालों के लिए फायदेमंद हो सकती है। लेकिन लंबे समय तक इसे फॉलो करना सभी के लिए आसान नहीं होता। इसलिए इसे संतुलित तरीके से अपनाना ज़रूरी है।
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सारांश
मोटापा कम करने के लिए कोई एक जादुई डाइट नहीं होती, बल्कि सही और संतुलित खानपान सबसे ज़रूरी होता है। वजन घटाने में कैलोरी की भूमिका अहम है, लेकिन सिर्फ कम खाना ही काफी नहीं है, बल्कि सही खाना ज़रूरी है। प्राकृतिक, कम प्रोसेस्ड और पोषक तत्वों से भरपूर आहार वजन घटाने के साथ-साथ सेहत भी सुधारता है।
अलग-अलग डाइट जैसे लो-फैट, लो-कार्ब, मेडिटेरेनियन या इंटरमिटेंट फास्टिंग के अपने फायदे और सीमाएँ हैं। इसलिए किसी ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय ऐसी डाइट चुननी चाहिए जो लंबे समय तक निभाई जा सके। संतुलित भोजन, सही समय पर खाना और धीरे-धीरे अपनाई गई हेल्दी आदतें ही स्थायी वजन घटाने की कुंजी हैं।
मोटापा कम करने का ख़ास डाइट प्लान सम्बंधित चित्र
संदर्भ
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