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उम्र बढ़ने के साथ-साथ त्वचा भी कमजोर पड़ने लग जाती है और इसमें कई समस्याएं भी विकसित हो जाती हैं। जीवन भर सूरज के संपर्क में आने के कारण होने वाली त्वचा संबंधी समस्याएं अक्सर 55 साल की उम्र के बाद दिखने लग जाती हैं। एज स्पॉट भी इनमें से एक है, जो ज्यादातर सूरज के संपर्क में अधिक आने वाले हिस्सों में विकसित होते हैं जैसे चेहरा, गर्दन, कमर, पैर, हाथ और कंधे आदि। एज स्पॉट में त्वचा पर पड़ने वाला निशान चोट के निशान की तरह भी हो सकता है। एज स्पॉट कोई हानिकारक समस्या नहीं है और न ही इसका इलाज करवाने की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि सौंदर्य संबंधी समस्याओं के कारण कुछ लोग इनका इलाज करवा लेते हैं।

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  1. एज स्पॉट्स क्या है - What is Age Spots in Hindi
  2. एज स्पॉट्स के लक्षण - Age Spots Symptoms in Hindi
  3. एज स्पॉट्स के कारण व जोखिम कारक - Age Spots Causes & Risk Factors in Hindi
  4. एज स्पॉट्स से बचाव - Prevention of Age Spots in Hindi
  5. एज स्पॉट्स का परीक्षण - Diagnosis of Age Spots in Hindi
  6. एज स्पॉट्स का इलाज - Age Spots Treatment in Hindi
  7. एज स्पॉट्स (उम्र के धब्बे) के डॉक्टर

एज स्पॉट्स क्या है - What is Age Spots in Hindi

लिवर स्पॉट्स क्या है?

एज स्पॉट को मेडिकल भाषा में “सोलर लेंटीगो” (Solar lentigo) कहा जाता है। कुछ धब्बों की आकृति व रंग लिवर अंग के जैसा होता है, इसलिए इसे लिवर स्पॉट्स भी कहा जाता है। इसके अलावा यह किसी भी प्रकार से लिवर अंग से संबंधित नहीं होता। ये अक्सर 55 साल की उम्र के बाद त्वचा पर विकसित होने वाले हल्के काले या ब्राउन रंग के निशान होते हैं। कुछ मामलों में ये 55 साल की उम्र से पहले और यहां तक कि युवावस्था में भी विकसित हो जाते हैं।

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एज स्पॉट्स के लक्षण - Age Spots Symptoms in Hindi

एज स्पॉट्स के लक्षण क्या हैं?

त्वचा में ब्राउन या काले रंग (हल्के या गहरे) के धब्बे बनना एज स्पॉट का मुख्य लक्षण होता है। इन धब्बों में किसी प्रकार की खुजली, जलन या अन्य किसी प्रकार की तकलीफ विकसित नहीं होती है। इनमें त्वचा की संरचना में कोई बदलाव भी नहीं होता है और ना ही इनमें सूजन व लालिमा विकसित होती है। एज स्पॉट कुछ इस प्रकार से दिखाई देते हैं:

  • इनकी आकृति गोलाकार या अंडाकार हो सकती है। कुछ मामलों में इनकी आकृति लिवर अंग के समान देखी जाती है।
  • इनका रंग आमतौर पर ब्राउन होता है और कुछ मामलों में हल्का काला भी हो सकता है

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

लिवर स्पॉट्स पूरी तरह से हानिरहित होते हैं और इनकी जांच करवाने की आवश्यकता भी नहीं होती है। लेकिन कुछ मामलों में ये मेलानोमा के लक्षणों से मेल खा सकते हैं, जो कि एक गंभीर स्किन कैंसर होता है। इसलिए पुष्टि करने के लिए जांच करवाना बहुत आवश्यक होता है। यदि आपको निम्न लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो जितना जल्द हो सके डॉक्टर से दिखा लेना चाहिए:

  • त्वचा पर काले या ब्राउन रंग के धब्बे बन जाना
  • धब्बे का आकार तेजी से बढ़ना
  • त्वचा पर बने धब्बों की आकृति असामान्य होना
  • किसी धब्बे में असामान्य रंग होना
  • किसी धब्बे के साथ खुजली, लालिमा, जलन, ब्लीडिंग या छूने पर दर्द होना

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एज स्पॉट्स के कारण व जोखिम कारक - Age Spots Causes & Risk Factors in Hindi

एज स्पॉट क्यों होता है?

शरीर द्वारा अतिरिक्त मात्रा में मेलेनिन बनाना लिवर स्पॉट्स का मुख्य कारण है। मेलेनिन एक प्रकार का एक स्किन पिगमेंट होता है, जो त्वचा को रंग प्रदान करता है। जब त्वचा सूरज की किरणों के संपर्क में आती है, तो शरीर त्वचा को पराबैंगनी किरणों (UV Rays) से सुरक्षित रखने के लिए अधिक मात्रा में मेलेनिन बनाने लगता है। शरीर जितना अधिक मेलेनिन बनाता है त्वचा का रंग उतना ही गहरा होता रहता है। जब त्वचा के किसी हिस्से में मेलेनिन जमा हो जाता है, तो उस हिस्से में एज स्पॉट विकसित हो जाते हैं।

लिवर स्पॉट होने का खतरा कब बढ़ता है?

एज स्पॉट किसी भी व्यक्ति में किसी भी उम्र में विकसित हो सकते हैं। लेकिन कुछ स्थितियां हैं, जिनमें एज स्पॉट्स होने का खतरा बढ़ जाता है, जैसे:

एज स्पॉट्स से बचाव - Prevention of Age Spots in Hindi

एज स्पॉट्स की रोकथाम कैसे करें?

जितना हो सके धूप के संपर्क को कम करके, लिवर स्पॉट्स होने की संभावना को कम किया जा सकता है। 20 साल की उम्र से पहले आप जितना अधिक धूप के संपर्क में आते हैं, बाद मे आपकी त्वचा उतनी ही अधिक प्रभावित होती है। यदि आपकी त्वचा पर पहले ही कोई दाग या धब्बा बना हुआ है, तो जितना कम हो सके धूप में जाएं। ऐसा करने से धब्बे का रंग अधिक गहरा हो जाता है और उसका आकार बढ़ने से रोका जा सकता है।

त्वचा को धूप से बचाने के लिए पैंट, लंबी बाजू वाली शर्ट और टॉपी पहनें। यदि आपको लगातार धूप में खड़ा होना है, तो सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। अधिक धूप से समय बाहर न निकलें क्योंकि इस समय सूरज की किरणें अधिक हानिकारक होती हैं, इसलिए यदि संभव हो तो दिन में 10 से 3 बजे तक बाहर न निकलें।

(और पढ़ें - एक अच्छी सनस्क्रीन कैसे चुनें)

एज स्पॉट्स का परीक्षण - Diagnosis of Age Spots in Hindi

एज स्पॉट का परीक्षण कैसे किया जाता है?

वैसे तो लिवर स्पॉट पूरी तरह से हानि रहित होते हैं, लेकिन इनके लक्षण शुरुआती स्किन कैंसर से मेल खाते हैं, इसलिए परीक्षण करवाना बहुत जरूरी होता है। यहां तक कि कुछ मामलों में तो एज स्पॉट और मेलेनोमा स्किन कैंसर के बीच अंतर बताना डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा के विशेषज्ञ डॉक्टर) के लिए भी मुश्किल हो जाता है।

एज स्पॉट का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज का विजुअल एक्जामिनेशन करते हैं, जिस दौरान डर्मेटोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है। डर्मेटोस्कोप एक छोटा आवर्धक लेंस होता है, जिसकी मदद से त्वचा की सूक्ष्म असामान्यताओं को भी देखा जा सकता है।

यदि डॉक्टर स्थिति की पुष्टि न कर पाएं, तो हो सकता है कि उन्हें स्किन बायोप्सी करनी पड़े। इसमें प्रभावित त्वचा से ऊतकों का एक छोटा सा टुकड़ा सैंपल के रूप में ले लिया जाता है और उसे लेबोरेटरी में जांचा जाता है। 

एज स्पॉट्स का इलाज - Age Spots Treatment in Hindi

एज स्पॉट का इलाज कैसे किया जाता है?

लिवर स्पॉट त्वचा या अन्य शारीरिक स्वास्थ्य को हानि नहीं पहुंचाते हैं, इसलिए इनका इलाज करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हालांकि जैसा कि ऊपर बताया है कि ये त्वचा कैंसर के लक्षणों से मेल खाते हैं, इसलिए इनकी जांच व इलाज करवाने की आवश्यकता जरूर होती है।

इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को एज स्पॉट ही है और वह इनसे छुटकारा पाना चाहता है, तो इसके लिए कई उपचार विकल्प हो सकते हैं, जैसे:

  • दवाएं:
    कुछ प्रकार की ब्लीचिंग क्रीम (हाइड्रोक्विनोन) का इस्तेमाल किया जाता है कभी कभी इसके साथ रेटिनोइड्स (ट्रेटिनॉइन) और माइल्ड स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ये दवाएं धीरे-धीरे कई महीनों में एज स्पॉट्स को गायब कर देती है। यदि आप ये दवाएं ले रहे हो, तो कम से कम 30 एसपीएफ (Sun protection factor) वाले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। 
     
  • लेजर एंड इन्टेंस लाइट थेरेपी:
    इस थेरेपी की मदद से त्वचा की सतह को क्षति पहुंचाए बिना मेलानिन बनाने वाली कोशिकाओं (मेलेनोसाइट्स) को नष्ट कर दिया जाता है। लेजर या इन्टेंस पल्स्ड लाइट थेरेपी को आमतौर पर दो या तीन बार करना पड़ता है।

    इलाज के बाद एज स्पॉट्स के निशान धीरे-धीरे हल्के होकर कुछ हफ्तों या महीनों के भीतर गायब होने लगेंगे। लेजर थेरेपी से आमतौर पर कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होता, हालांकि इससे त्वचा के रंग में बदलाव हो सकते हैं। लेजर व इन्टेंस पल्स्ड थेरेपी के बाद, त्वचा को धूप से बचा कर रखना बहुत जरूरी होता है।
     
  • क्रायोथेरेपी (फ्रीजिंग):
    इस प्रक्रिया में कॉटन लगे एक स्वैब की मदद से तरल नाइट्रोजन को एज स्पॉट्स पर लगाया जाता है, जिसकी मदद से अतिरिक्त पिगमेंट को नष्ट कर दिया जाता है। कई बार क्रायोथेरेपी में नाइट्रोजन की जगह किसी अन्य फ्रीजिंग एजेंट का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। जैसे-जैसे त्वचा ठीक होती है, इसके निशान कम होने लगते हैं। इस प्रक्रिया से कुछ समय के लिए त्वचा प्रभावित भी हो सकती है और थोड़े-बहुत मामलों में इससे त्वचा के किसी हिस्से में स्कार (ठीक हुई खरोंच जैसा निशान) भी पड़ सकता है।
     
  • केमिकल पील:
    इस प्रक्रिया में त्वचा के प्रभावित हिस्से पर एक विशेष प्रकार का एसिड लगाया जाता है, जो एज स्पॉट की त्वचा की ऊपरी सतह को जला देता है। इसके बाद त्वचा पर पपड़ी बन कर उतरने लगती है और उसकी जगह पर एक नई त्वचा बन जाती है। सही रिजल्ट प्राप्त करने के लिए डॉक्टर कुछ अन्य उपचार प्रक्रियाएं भी कर सकते हैं। केमिकल पील के बाद डॉक्टर विशेष रूप से धूप से बचाव रखने की सलाह देते है। इस प्रक्रिया के बाद कुछ समय तक त्वचा में लालिमा रह सकती है और कुछ दुर्लभ मामलों में स्थायी रूप से भी त्वचा के रंग में बदलाव हो जाता है।

(और पढ़ें -  त्वचा रोगों का इलाज)

Dr. Abhishek Mishra

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