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परिचय

एसिड रिफ्लक्स एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट में मौजूद अम्ल वापस इसोफेगस में जाने लग जाते हैं। गले और पेट को आपस में जोड़ने वाली ट्यूब को इसोफेगस या भोजन नली कहा जाता है। यदि आपको एसिड रिफ्लक्स की समस्या कभी-कभार ही होती है, तो इसमें आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह स्थिति आमतौर पर अत्यधिक मात्रा में खाने या पीने के कारण हो सकती है।

पेट में दबाव बढ़ जाने के कारण भोजन नली की वाल्व खुल जाती है, जिसके कारण एसिड रिफ्लक्स होने लग जाता है। कुछ स्थितियां हैं, जो पेट में दबाव बढ़ा देती हैं जैसे  अधिक भोजन भोजन खा लेना, मोटापा और अधिक मसालेदार खाना आदि।

जिन लोगों के शरीर का वजन सामान्य है और वे बिलकुल भी मसालेदार भोजन नहीं खाते हैं, तो मसालेदार खाना, मोटापा और अत्यधिक मात्रा में भोजन खाने से उनको निश्चित रूप से एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो सकती है। एसिड रिफ्लक्स में सीने में जलन, खाया हुआ भोजन वापस गले में आना (रिगर्जिटेशन), मुंह का स्वाद खराब होना, छाती में दर्द, गला बैठना और गले में अन्य तकलीफ महसूस होना आदि समस्या होने लग जाती है। 

डॉक्टर इस स्थिति का परीक्षण मरीज के लक्षणों व उसकी पिछली मेडिकल स्थिति के आधार पर करते हैं इसके अलावा परीक्षण करने के लिए कुछ टेस्ट भी किए जा सकते हैं। परीक्षण के दौरान पेट व भोजन नली के एक्स रेएंडोस्कोपी जैसे टेस्ट किए जा सकते हैं और इसके अलावा 24 घंटे की प्रोब स्टडी भी की जा सकती है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर कुछ दवाएं लिख सकते हैं जैसे एंटासिड्स, प्रोटोन पंप इनहीबिटर और इसके अलावा कुछ मामलों में सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है। 

एसिड रिफ्लक्स के लिए कुछ घरेलू उपचार भी हैं, जिनमें जीवनशैली, आहार व अन्य आदतों में बदलाव शामिल हैं। एसिड रिफ्लक्स से अन्य कई समस्याएं पैदा हो जाती है जैसे अस्थमा, खांसी, फेफड़ों में सूजन व जलन और स्वरयंत्र में सूजन व लालिमा हो जाना। 

(और पढ़ें - सूजन कम करने के उपाय)

  1. एसिड रिफ्लक्स क्या है - What is Acid Reflux in Hindi
  2. एसिड रिफ्लक्स के लक्षण - Acid Reflux Symptoms in Hindi
  3. एसिड रिफ्लक्स के कारण व जोखिम कारक - Acid Reflux Causes & Risk Factors in Hindi
  4. एसिड रिफ्लक्स से बचाव - Prevention of Acid Reflux in Hindi
  5. एसिड रिफ्लक्स का परीक्षण - Diagnosis of Acid Reflux in Hindi
  6. एसिड रिफ्लक्स का इलाज - Acid Reflux Treatment in Hindi
  7. एसिड रिफ्लक्स की जटिलताएं - Acid Reflux Risks & Complications in Hindi
  8. एसिड रिफ्लक्स के डॉक्टर

एसिड रिफ्लक्स क्या है - What is Acid Reflux in Hindi

एसिड रिफ्लक्स क्या है?

जब पेट में मौजूद अम्ल पेट के ऊपर स्थित इसोफेगस में चले जाते हैं, तो इस स्थिति को एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है। इसोफेगस को भोजन नली भी कहा जाता है, यह नली गले और पेट को एक दूसरे से जोड़ती है। एसिड रिफ्लक्स के दौरान पेट से आया हुआ भोजन या फिर खट्टे तरल का स्वाद महसूस होता है और साथ ही सीने में जलन महसूस होती है।

(और पढ़ें - पेट दर्द का कारण)

एसिड रिफ्लक्स के लक्षण - Acid Reflux Symptoms in Hindi

एसिड रिफ्लक्स के लक्षण क्या हैं?

एसिड रिफ्लक्स से होने वाले लक्षणों में निम्नलिखित लक्षण शामिल हो सकते हैं:

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डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

कुछ स्थितियां हैं जो अत्यधिक गंभीर समस्या का संकेत देती हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए, जैसे: 

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एसिड रिफ्लक्स के कारण व जोखिम कारक - Acid Reflux Causes & Risk Factors in Hindi

एसिड रिफ्लक्स क्यों होता है?

पेट में शक्तिशाली अम्ल होते हैं, जो भोजन को छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं और बैक्टीरिया जैसे रोगाणुओं से बचाते हैं। पेट की अंदरुनी परत सुरक्षित होती है और विशेष रूप से पेट के अम्ल के अनुकूल होती है, लेकिन भोजन नली की परत इनके अनुकूल नहीं होती है। 

भोजन नली का निचला हिस्सा जो पेट से जुड़ा होता है, उसमें मांसपेशियों से बनी एक वाल्व लगी होती है। इस वाल्व का काम खाद्य पदार्थों को भोजन नली से पेट तक पहुंचाना होता है और पेट में मौजूद अम्ल व भोजन को वापस भोजन नली में जाने से रोकना होता है। जब ये वाल्व काम करना बंद कर देता है, तो पेट में मौजूद अम्ल व भोजन वापस भोजन नली में जाने लग जाते हैं। 

एसिड रिफ्लक्स का एक मुख्य कारण पेट संबंधी एक असामान्यता भी है, जिसे हाइटल हर्निया कहा जाता है। इस स्थिति में पेट का एक हिस्सा छाती के क्षेत्र में चला जाता है। (और पढ़ें - हर्निया में क्या खाना चाहिए)

आम तौर पर, डायाफ्राम भी एसिड को पेट के अंदर रखने में मदद करता है। लेकिन हाइटल हर्निया के मामलों में पेट के अम्ल इसोफेगस में आने लग जाते हैं और एसिड रिफ्लक्स के लक्षण पैदा हो जाते हैं। 

(और पढ़ें - हर्निया का घरेलू उपाय)

एसिड रिफ्लक्स होने का खतरा कब बढ़ता है?

कुछ आम कारक हैं जो एसिड रिफ्लक्स होने का खतरा बढ़ा देते हैं:

(और पढ़ें - गर्भावस्था में होने वाली परेशानियां)

कुछ दवाएं भी हैं, जो एसिड रिफ्लक्स की स्थिति को और अधिक बढ़ा देती हैं, जैसे:

(और पढ़ें - एलर्जी में क्या खाना चाहिए)

एसिड रिफ्लक्स से बचाव - Prevention of Acid Reflux in Hindi

एसिड रिफ्लक्स की रोकथाम कैसे करें?

एसिड रिफ्लक्स से बचने के लिए कुछ तरीके अपनाए जा सकते हैं:

  • पेट के दबाव को कम करना जैसे पैंट की बेल्ट को अधिक टाइट न बांधना और न ही ऐसी एक्सरसाइज करना जिससे पेट में दबाव बढ़ता है
  • शरीर की पॉजिशन में सुधार करना उदाहरण के लिए सीधी अवस्था में खड़े होना
  • ढीले-ढाले कपड़े पहनना
  • यदि आप मोटे हैं या आपके शरीर का वजन ज्यादा है, तो शरीर का वजन कम करना
  • धूम्रपान ना करना (और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने के घरेलू उपाय)
  • दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाना
  • आपके सिर वाली तरफ से आपके बिस्तर को कम से कम 4 से 6 इंच तक ऊपर उठाना
  • सोने से 2 या 3 घंटे पहले कुछ ना खाना
  • अधिक तंग कपड़े ना पहनना और ना ही बेल्ट को अधिक टाइट करना
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करना और स्वस्थ आहार खाना
  • इसके अलावा डॉक्टर से बात करके पता लगाने की कोशिश करें कि कहीं किसी दवा के कारण तो आपको एसिड रिफ्लक्स की समस्या या उससे लक्षण पैदा नहीं हो रहे हैं।

(और पढ़ें - एक्सरसाइज करने का सही टाइम)

एसिड रिफ्लक्स में क्या नही खाना चाहिए?

यदि आपको एसिड रिफ्लक्स है तो आपको कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए, जैसे:

  • कॉफी
  • चाय
  • चुइंगम
  • प्याज (बिना पके)
  • संतरे का रस
  • चॉकलेट
  • तला हुआ भोजन
  • लहसुन
  • अल्कोहल (शराब)

(और पढ़ें - खाली पेट लहसुन खाने के फायदे)

एसिड रिफ्लक्स में क्या खाना चाहिए?

यदि आपको एसिड रिफ्लक्स की समस्या है, तो आपको निम्न प्रकार के खाद्य पदार्थ खाने की सलाह दी जाती है:

(और पढ़ें - संतुलित आहार के फायदे)

एसिड रिफ्लक्स का परीक्षण - Diagnosis of Acid Reflux in Hindi

एसिड रिफ्लक्स का परीक्षण कैसे किया जाता है?

एसिड रिफ्लक्स का परीक्षण अक्सर इसके लक्षणों व इलाज के प्रति होने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर किया जाता है।

जिन लोगों को एसिड रिफ्लक्स के लक्षण हो रहे हैं और उससे कोई जटिलताएं पैदा नहीं हुई हैं तो इलाज के रूप में मरीज की जीवनशैली में कुछ बदलाव किए जाते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में बिना टेस्टिंग किए कुछ प्रकार की दवाएं भी दी जा सकती हैं। यदि स्थिति का परीक्षण स्पष्ट रूप से ना हो पाए या फिर लक्षण व संकेत अत्यधिक गंभीर हो जाएं तो इस स्थिति की जांच करने के लिए कुछ विशेष प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं।

एसिड रिफ्लक्स के समान लक्षण पैदा करने वाली कुछ घातक स्थितियां भी हैं, जिनका पता लगाना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि एसिड रिफ्लक्स में आमतौर पर छाती में दर्द होता है और हृदय रोग जैसे गंभीर रोग होने पर भी छाती में दर्द होने लग जाता है।

(और पढ़ें - एचबीए1सी टेस्ट क्या है)

एसिड रिफ्लक्स का पता लगाने के लिए कुछ टेस्ट किए जा सकते हैं:

  • एक्स रे:
    इस स्थिति की जांच करने ले लिए पाचन प्रणाली के ऊपरी हिस्से का एक्स रे टेस्ट किया जाता है। (और पढ़ें - बिलीरुबिन टेस्ट)
     
  • एंडोस्कोपी:
    इस टेस्ट की मदद से भोजन नली के अंदरुनी हिस्से की जांच होती है। इस दौरान एक छोटी व पतली ट्यूब जैसे उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है जिसे एंडोस्कोप कहते हैं। यह उपकरण भोजन नली, पेट या  छोटी आंत में डाला जाता है। इस ट्यूब के सामने एक छोटी लाइट व कैमरा लगा होता है। अंदरुनी हिस्सों में क्षति की जांच करने के लिए ऊतकों से सेंपल लेकर (बायोप्सी) उनपर परीक्षण किए जाते हैं और ऊतक कितनी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुऐ हैं उसका पता लगाया जाता है। (और पढ़ें - एसजीपीटी टेस्ट क्या है)
     
  • एंबुलैटोरी एसिड (पीएच) टेस्ट:
    इस टेस्ट की मदद से इसोफेगस में एसिड की मात्रा जांची जाती है। इस टेस्ट के दौरान नाक के अंदर से इसोफेगस में एक ट्यूब डाली जाती है। इस ट्यूब को 24 घंटों तक अंदर ही रखा जाता है। इस 24 घंटे के दौरान मरीज को उसके लक्षणों को नोट करते हैं। यह ट्यूब एक छोटे उपकरण से जुड़ी होती है, जो यह पता लगाता है कि पेट के एसिड कितनी बार इसोफेगस तक आते हैं। (और पढ़ें - इन्सुलिन टेस्ट)
     
  • इसोफेजियल इपेंडेंस टेस्ट:
    इस टेस्ट की मदद से भोजन नली में मौजूद पदार्थों की मूवमेंट (हिलना-ढुलना) का पता लगाया जाता है। (और पढ़ें - विटामिन डी टेस्ट)
     
  • बायोप्सी:
    इस टेस्ट के दौरान क्षतिग्रस्त ऊतकों से सेंपल लिया जाता है और लेबोरेटरी में उसकी जांच की जाती है। (और पढ़ें - यूरिन टेस्ट क्या है)
     
  • बेरियम एक्स रे:
    इस टेस्ट के दौरान मरीज को एक विशेष प्रकार का तरल पिलाया जाता है जिसके बाद एक्स रे करने पर इसोफेगस, पेट और पाचन प्रणाली के ऊपरी हिस्से की स्पष्ट तस्वीरें आती हैं।

 (और पढ़ें - लिवर फंक्शन टेस्ट)

एसिड रिफ्लक्स का इलाज - Acid Reflux Treatment in Hindi

एसिड रिफ्लक्स का इलाज कैसे किया जाता है?

एसिड रिफ्लक्स का इलाज ऐसी दवाओं से भी किया जा सकता है, जो डॉक्टर की पर्ची के बिना मेडिकल स्टोर से मिल जाती है, जैसे: 

  • एंटासिड्स
  • एच-2 रिसेप्टर ब्लॉकर दवाएं जैसे सिमेटिडाइन या फेमोटिडाइन
  • प्रोटोन पंप इनहिबिटर जैसे ओमेप्राजोल
  • एल्जिनेट दवाएं

(और पढ़ें - दवाइयों की जानकारी)

जिन लोगों को बार बार एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है उनका इलाज करने के लिए मुख्य रूप से या तो पीपीआई या फिर एच2 ब्लॉकर दवाएं दी जा सकती हैं।

पीपीआई और एच2 ब्लॉकर पेट मे अम्ल बनने की मात्रा को कम कर देती हैं और एसिड रिफ्लक्स पैदा करने वाले अन्य संभावित कारणों को भी कम कर देती हैं। 

ये दवाएं आमतौर पर सुरक्षित व प्रभावी होती हैं। लेकिन डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली सभी दवाओं की तरह ये एसिड रिफ्लक्स से पीड़ित सभी मरीजों के लिए उचित नहीं होती हैं और इनसे कुछ साइड इफ़ेक्ट होने लग जाते हैं।

यदि जीवनशैली में कुछ उचित बदलाव लाने या दवाओं से आपके एसिड रिफ्लक्स के लक्षण कम नहीं हो रहे हैं, तो इस स्थिति में डॉक्टर मरीज का ऑपरेशन भी कर सकते हैं। 

  • फंडोप्लीकेशन सर्जरी:
    यह ऑपरेशन का सबसे आम प्रकार है। ज्यादातर मामलों में इससे लंबे समय तक रिफ्लक्स की प्रक्रिया कंट्रोल में रहती है। सर्जरी करने वाले डॉक्टर (सर्जन) फंडोप्लीकेशन प्रक्रिया को लेप्रोस्कोप की मदद से करते हैं। लेप्रोस्कोप एक पतली ट्यूब होती है जिसके जिसपर एक छोटा वीडियो कैमरा लगा होता है। ऑपरेशन के दौरान सर्जन पेट के ऊपरी हिस्से को भोजन नली के आसपास टांके आदि की मदद से लगा देते हैं। इसकी मदद से इसोफेगस के निचले हिस्से में दबाव बढ़ जाता है और एसिड रिफ्लक्स की समस्या कम हो जाती है। 
     
  • एंडोस्कोपिक:
    इस तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। एंडोस्कोपिक तकनीकों के परिणाम फंडोप्लीकेशन के लिए उतने अच्छे नहीं हो सकते हैं। डॉक्टर अक्सर एंडोस्कोपिक तकनीक का उपयोग नहीं करते हैं। 

(और पढ़ें - सर्जरी से पहले की तैयारी)

घरेलू उपाय:

  • एलोवेरा जूस:
    एक गिलास एलोवेरा का जूस पीने से भोजन नली को शांत किया जा सकता है और इसोफेगस में सूजन, लालिमा व अन्य तकलीफ को भी कम किया जा सकता है।
     
  • केला या सेब:
    इन दोनो प्रकार के फलों में एंटासिड्स के प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं, जिनकी मदद से एसिड रिफ्लक्स होने से रोकथाम की जा सकती है और उसके लक्षणों को शांत किया जा सकता है। (और पढ़ें - सेब के फायदे)
     
  • कैमोमाइल चाय:
    पेट के संतुलन को बनाए रखने के लिए भी कैमोमाइल टी का उपयोग करना भी एक अच्छा तरीका है। इसके अलावा यदि आप सोने से पहले कैमोमाइल चाय पीते हैं, तो इससे आपके लक्षण शांत होते हैं और आप रातभर चैन से सो पाते हैं। 

(और पढ़ें - हर्बल चाय के फायदे)

एसिड रिफ्लक्स की जटिलताएं - Acid Reflux Risks & Complications in Hindi

एसिड रिफ्लक्स से क्या जटिलताएं होती हैं?

एसिड रिफ्लक्स से ग्रस्त ज्यादातर मरीजों में किसी प्रकार की जटिलता पैदा नहीं होती है, खासकर ऐसे मामलों में जब एसिड रिफ्लक्स का उचित तरीके से इलाज कर दिया गया हो। हालांकि यदि किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो गई हैं, तो उसको कई प्रकार की जटिलताएं विकसित हो सकती हैं, जैसे:

  • अल्सर:
    पेट के एसिड से भोजन नली की अंदरुनी परत में अत्यधिक जलन पैदा हो जाती है जिसके परिणामस्वरूप उसमें छाले भी विकसित हो सकते हैं। कुछ मामलों में छाले होने पर प्रभावित त्वचा में खून भी बहने लग सकता है। आपको खून बहने का पता नहीं लग लग पाता है, लेकिन मल के सेंपल की जांच करने के दौरान इस स्थिति का पता लग जाता है। इसके अलावा कुछ अन्य टेस्ट भी हैं जिनकी मदद से खून आदि बहने की जांच की जाती है। (और पढ़ें - स्टूल टेस्ट क्या है)
     
  • स्ट्रिक्चर:
    पेट के एसिड से इसोफेगस क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप भोजन नली संकुचित हो जाती है और उसमें स्कार ऊतक बन जाते है। ऐसी स्थिति में भोजन व दवाएं आदि भोजन नली में अटकने लग जाते हैं। इसोफेगस के ऊतक क्षतिग्रस्त होकर ठीक हो जाते हैं, तो उन पर स्कार विकसित हो जाते हैं। भोजन नली में स्कार ऊतक बनने के कारण ही वह संकुचित होने लग जाती है। (और पढ़ें - एसिडिटी में क्या खाएं)
     
  • फेफड़े व गले संबंधी समस्या:
    कुछ लोगों को एसिड रिफ्लक्स के कारण गले में मौजूद वोकल कोर्ड में लालिमा व सूजन आ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप गला बैठना या गले में दर्द जैसी समस्याएं विकसित हो जाती हैं। यदि एसिड रिफ्लक्स की समस्या लंबे समय से हो रही है और इससे फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं, तो इस स्थिति में फेफड़े स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। फेफड़े क्षतिग्रस्त होने की स्थिति को पल्मोनरी फाइब्रोसिस या ब्रोन्किइक्टेसिस कहा जाता है। (और पढ़ें - फेफड़े खराब होने के लक्षण)
     
  • अस्थमा या निमोनिया:
    ये अम्ल सांस के द्वारा फेफड़ों तक जा सकते हैं और एक प्रकार का निमोनिया (एस्पिरेशन निमोनिया) या अस्थमा के लक्षण पैदा कर देते हैं। (और पढ़ें - दमा के लिए योग)
     
  • बैरेट इसोफेगस:
    जब भोजन नली के निचले हिस्से की परत में मौजूद कोशिकाओं की जगह बदल कर अलग प्रकार की कोशिकाएं आ जाती हैं, तो इस स्थिति को बैरेट इसोफेगस कहा जाता है। यह आमतौर पर इसोफेगस की परत में बार-बार क्षति के कारण और भोजन नली में लंबे समय तक एसिड रहने के कारण होती है।
     
  • भोजन नली का कैंसर:
    आंतों की कोशिकाओं का कैंसर की कोशिकाओं में बदल जाने के भी थोड़े जोखिम हैं। इसके परिणामस्वरूप बैरेट इसोफेगस से ग्रस्त लोगों को समय-समय पर एंडोस्कोपी टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। ताकि कैंसर के शुरुआती संकेतों का पता लगाया जा सके। 

(और पढ़ें - पेट के कैंसर की सर्जरी)

Dr. Mahesh Kumar Gupta

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गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

Dr. Raajeev Hingorani

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Dr. Vineet Mishra

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