चोट क्या होता है?

आपके शरीर को किसी भी प्रकार के नुकसान होने को चोट कहा जाता है। घर, ऑफिस या खेल के दौरान एक्सीडेंट और किसी भी तरह के उत्पात, मार-पीट या लड़ाई-झगडे से आपको चोट लग सकती है। नोकीली या शरीर में घुसने वाली वस्तुएं आपको चोट पहुंचा सकती हैं।

सामान्य प्रकार की चोट होती हैं खरोंच, फ्रैक्चर, जोड़ों का अपनी जगह से हिल जाना, मोच, खिंचाव और जलना अदि।

(और पढ़ें - मोच के घरेलू उपाय)

चोट मामूली और गंभीर हो सकती हैं। कुछ मामलों में, दिखने में मामूली लगने वाली चोट अंदर से गंभीर हो सकती है, जिसे तुरंत चिकित्स्कीय इलाज की आवश्यकता होती है।

मामूली चोट को फर्स्ट ऐड (प्राथमिक चिकित्सा) से ठीक किया जा सकता है लेकिन गंभीर चोट के लिए आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

चोट के प्रकार - Types of Injury in Hindi

चोट के प्रकार क्या होते हैं?

चोट के कुछ सामान्य प्रकार निम्नलिखित हैं -

  • फ्रैक्चर
  1. बंद फ्रैक्चर (Closed fracture) -  जब हड्डी टूट जाती है लेकिन त्वचा के अंदर ही रहती है, तो उसे बंद फ्रैक्चर कहते हैं। (और पढ़ें - पैर में फ्रैक्चर)
  2. खुला फ्रैक्चर (Open fracture) - जब हड्डी टूटने के बाद त्वचा से बाहर आने लगती है, तो उसे खुला फ्रैक्चर कहते हैं। (और पढ़ें - कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर)
  • जोड़ों की चोट
  1. हड्डियों का अपनी जगह से हिलना।
  2. ज़्यादा इस्तेमाल करने पर "टेंडन" (Tendon: हड्डियों को मासपेशियों से जोड़ने वाले ऊतक) में चोट लगना।
  3. “कार्टिलेज” (Cartilage: घुटनों में मौजूद हड्डियों को जोड़ने वाले मजबूत ऊतक) का फटना।
  • सॉफ्ट टिशू की चोट
  1. मोच - "लिगामेंट" (Ligament: दो हड्डियों या कार्टिलेज को आपस में जोड़ने वाले रेशेदार ऊतक) और मासपेशी या "टेंडन" (Tendon: हड्डियों को मासपेशियों से जोड़ने वाले ऊतक) का खिंचना या फटना।
  2. नील पड़ना - दबाव पड़ने पर रक्तवाहिकाओं का त्वचा के अंदर फट जाना।
  • त्वचा की चोट
  1. कट लगना - किसी नोकीली चीज़ से त्वचा का फटना।
  2. खरोंच या छाला - रगड़ लगने के कारण त्वचा का छ्लिना या छाले होना।

चोट के अन्य सामान्य प्रकार निम्नलिखित हैं -

  1. सिर की चोट
  2. घुटने की चोट
  3. जलना
  4. करंट से लगने वाली चोट
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चोट के लक्षण - Injury Symptoms in Hindi

चोट लगने के लक्षण क्या होते हैं?

चोट लगने के बाद कई बार लक्षण उसी समय दिखने लगते हैं लेकिन कभी-कभी लक्षण धीरे-धीरे दिखते हैं और बढ़ते जाते हैं। अगर आप चोट के लक्षणों पर ध्यान नहीं देते व चोट के लिए कोई इलाज नहीं लेते, तो आपको लम्बे समय के लिए समस्याएं हो सकती हैं।

निम्नलिखित लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें -

  • जोड़ों में दर्द
    जोड़ों में दर्द, खासकर घुटनों, टखने, कोहनी और कलाई के दर्द को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि इन जोड़ों में मासपेशियां नहीं होती, इसीलिए यहां होने वाला दर्द मांसपेशियों का दर्द नहीं होता। 48 घंटों से ज़्यादा जोड़ों में दर्द होने पर डॉक्टर के पास जाना चाहिए। (और पढ़ें - जोड़ों में दर्द के घरेलू उपाय)
     
  • छूने पर दर्द
    अगर आपको किसी हड्डी, मासपेशी या जोड़ में छूने पर दर्द हो रहा है, तो हो सकता है आपको कोई चोट लगी हो। अगर शरीर के दूसरी तरफ उसी जगह पर छूने में दर्द नहीं हो रहा है, तो अपने डॉक्टर के पास जाएं। (और पढ़ें - मांसपेशियों में दर्द के घरेलू उपाय)
     
  • सूजन
    ज़्यादातर मांसपेशियों की चोट लगने पर सूजन होती ही है। आमतौर पर, सूजन दिख जाती है, लेकिन कुछ मामलों में आपको सूजन दिखाई नहीं देती और ऐसा महसूस होता है जैसे कुछ सूजा हुआ है। दर्द, लालिमा और गर्माहट महसूस होने जैसे लक्षणों के साथ सूजन भी होती है। (और पढ़ें - सूजन कम करने के घरेलू उपाय)
     
  • गतिविधि करने की क्षमता में कमी
    अगर आपको सूजन का पता नहीं चल पा रहा है, तो गतिविधि न कर पाने से आपको चोट का पता चल जाएगा। अगर आपके किसी जोड़ में सूजन है, तो आपको हिलने-डुलने व गतिविधि करने में कठिनाई होगी। ऐसा अनुभव होने पर अपने डॉक्टर के पास जाएं।
     
  • कमजोरी
    अपने दोनों हाथों से वजन उठा कर देखें और दोनों पैरों पर एक-एक कर के अपने शरीर का वजन डालें। अगर आप दोनों हाथों से समान वजन नहीं उठा पा रहे या पैरों से शरीर का वजन नहीं संभाल पा रहे हैं, तो हो सकता है आपको कहीं चोट लगी हो। (और पढ़ें - कमजोरी के लक्षण)

चोट के कारण और जोखिम कारक - Injury Causes & Risk Factors in Hindi

चोट कैसे लगती है?

चोट दो तरह से लग सकती है, बहरी और अंदरूनी कारणों से।

  • बाहरी कारण
  1. एक्सीडेंट, टक्कर या किसी के द्वारा के द्वारा मारे जाने पर आपको बाहरी चोट लग सकती है, जिससे फ्रैक्चर या हड्डियों का अपनी जगह से हिल जाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  2. गर्मी के कारण निर्जलीकरण (Dehydration) होने से मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है और ठण्ड से "हायपोथर्मिया" (Hypothermia) होने से आपके अंगों को नुक्सान हो सकता है।
  • अंदरूनी कारण
    अचानक कोई गतिविधि करने से मांसपेशियों और "टेंडन" में मोच आ सकती है और वह फट भी सकती हैं। यह समस्या मांसपेशियों को ज़्यादा इस्तेमाल करने से भी हो सकती है। यह चोट मामूली या गंभीर भी हो सकती है।
     

चोट लगने के जोखिम कारक क्या होते हैं?

चोट लगने के जोखिम कारक निम्नलिखित हैं -

  1. मांसपेशियों की कमजोरी
  2. उम्र का बहुत अधिक या बहुत कम होना।
  3. खेलों में भाग लेना।
  4. मिर्गी और तंत्रिकाओं से सम्बंधित अन्य विकार।
  5. गलत तरह से व्यायाम करना।
  6. वजन ज़्यादा होना। (और पढ़ें - वजन कम करने के लिए डाइट चार्ट)
  7. खेलते समय सुरक्षा के लिए उपकरण (जैसे हेलमेट और पैड) न इस्तेमाल करना।

चोट से बचाव - Prevention of Injury in Hindi

चोट लगने से कैसे बचा जा सकता है?

चोट से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं -

  • एक्सरसाइज करने की सही तकनीक जानें।
  • हलके दर्द के लिए प्रभावित जगह पर बर्फ का उपयोग करें।
  • सूजन कम करने के लिए एंटी-इन्फ्लैमटरी (Anti-inflammatory) दवाएं लें।
  • डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पर्याप्त पानी पिएं। (और पढ़ें - कितना पानी पीना चाहिए)
  • एक्सरसाइज करने से पहले वार्म अप करें।
  • खेलते या व्यायाम करते समय हल्के कपडे पहनें ताकि पसीना सूख सके।
  • खेलते और एक्सरसाइज करते समय सुरक्षा करने वाले उपकरण पहनें (जैसे हेलमेट और पैड)।
  • पर्याप्त आराम करें।
  • दर्द, तनाव और असहजता होने जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें।
  • ऐसी गतिविधियों से दूर रहें जिनसे आपको चोट लग सकती है (जैसे लड़ाई-झगड़े)।
  • एक्सीडेंट से चोट लगने से बचने के लिए यातायात के नियमों का पालन करें और गाड़ी चलाते समय सीट बेल्ट अवश्य पहनें।
  • दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनें।

चोट का परीक्षण - Diagnosis of Injury in Hindi

चोट का पता कैसे लगाया जाता है?

चोट का पता लगाने के लिए आपके डॉक्टर आपसे लक्षणों के बारे में पूछेंगे और प्रभावित क्षेत्र का शारीरिक परीक्षण करेंगे।

आमतौर पर चोट लगने के कारण से डॉक्टर को चोट के प्रकार का पता चल जाता है।

फ्रैक्चर, "लिगामेंट" की चोट और हड्डियों का अपनी जगह से हिलने का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपके इमेजिंग टेस्ट (Imaging test) कर सकते हैं जैसे कि ​एक्स रे, ​एमआरआई स्कैन, ​सीटी स्कैन

चोट का इलाज - Injury Treatment in Hindi

चोट का उपचार कैसे किया जाता है?

1. फ्रैक्चर 

फ्रैक्चर और गंभीर चोट के लिए डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता होती है। ऐसी चोट का इलाज डॉक्टर ही कर सकते हैं। 

हड्डियों के फ्रैक्चर और जोड़ों का अपनी जगह से हिल जाना गंभीर समस्याएं होती हैं, जिनके लिए आपातकालीन स्थिति में डॉक्टर से इलाज लेना चाहिए।

फ्रैक्चर के लिए "प्लास्टर" (Plaster), मजबूत धातु की एक पट्टी (Splint) और सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

(और पढ़ें - चोट की सूजन कम करने का घरेलू उपाय)

2. मोच या मांसपेशियों में खिंचाव

 मोच या खिंचाव जैसी चोट के लिए प्राथमिक उपचार अपने आप "RICE" तकनीक से किया जा सकता है। "RICE" तकनीक इस प्रकार है -

  • आराम करें (R: Rest)
    चोट लगने के बाद एक्सरसाइज या व्यायाम न करें। कुछ गंभीर चोट लगने के कारण आपको पूरी तरह से आराम करने की आवश्यकता हो सकती है लेकिन अधिकतर मामलों में आपको गतिविधि कम करने और एक्सरसाइज के तरीके को बदलने की आवश्यकता होती है। (और पढ़ें - व्यायाम करने का सही समय)
     
  • बर्फ लगाएं (I: Ice)
    चोट लगने के तुरंत बाद कम से कम 20 मिनट के लिए प्रभावित क्षेत्र पर बर्फ लगाएं, और उसके बाद अगले 48 घंटों के लिए हर चार घंटे में लगाएं। तौलिये में बर्फ लपेटकर लगाना या जमे हुए मटर का पैकेट प्रभावित क्षेत्र पर रखना सबसे उचित होता है। बर्फ से खून बहना और नील पड़ना कम होता है, और इससे दर्द में भी आराम मिलता है। ज़्यादा देर तक बर्फ को सीधे त्वचा पर न रखें, इससे त्वचा जल सकती है। (और पढ़ें - त्वचा पर बर्फ लगाने के फायदे)
     
  • पट्टी लगाएं (C: Compression)
    10 से 20 बार बर्फ लगाने के बाद हो सके तो प्रभावित क्षेत्र पर क्रेप पट्टी लगाएं। इससे खून बहना रुकेगा और सूजन भी कम होगी। यह तरीका हाथ व पैरों में लगने वाली चोट के लिए अधिक प्रभावी होता है।
     
  • हाथ/पैर को ऊपर उठाएँ (E: Elevate)
    प्रभावित हाथ या पैर को ऊपर की तरफ रखने से ऊतक में मौजूद तरल पदार्थ निकल जाता है और सूजन कम होती है, जिससे दर्द में आराम आता है।

प्राथमिक उपचार करने के बाद डॉक्टर को चोट जरूर दिखाएँ। अगर आपको जरा सी भी आशंका है की चोट गंभीर है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ।

चोट की जटिलताएं - Injury Risks & Complications in Hindi

चोट लगने की जटिलताएं क्या होती हैं?

चोट लगने की जटिलताएं निम्नलिखित हैं -

  1. सिर पर और हाथ व पैर पर चोट लगने से मस्तिष्क को गंभीर नुक्सान हो सकता है और अधिक खून बह जाने के कारण मौत हो सकती है।
  2. उम्र के साथ या मांसपेशियों व अन्य अंगों के ज़्यादा उपयोग के कारण लगने वाली अंदरूनी चोट से दीर्घकालिक दर्द और चलने में समस्याएं हो सकती हैं।
  3. बहुत गंभीर चोट लगने के कारण मरीज जीवन भर के लिए बिस्तर पर ही सीमित हो सकता है।

ध्यान रहे कि ऐसी जटिलताएं बहुत की कम होती हैं।  लेकिन फिर भी सुरक्षित रहे और कोशिश करें कि आपको किसी प्रकार की चोट न लगे।

Siddhartha Vatsa

सामान्य चिकित्सा
3 वर्षों का अनुभव

Dr. Harshvardhan Deshpande

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Dr. Supriya Shirish

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Dr. Priyanka Rana

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2 वर्षों का अनुभव

चोट की दवा - OTC medicines for Injury in Hindi

चोट के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Rizer Syrup 450mlएक बोतल में 450 ml सिरप230.0
Anju Lal Balmएक डब्बे में 10 gm बाम35.0
Meru Bio Herb Joint Pain Relief Cream 50gmएक ट्यूब में 50 gm क्रीम230.0
Sri Sri Ayurveda Quick Heal Creamएक ट्यूब में 25 gm क्रीम60.0
Rizer Syrup 200mlएक बोतल में 200 ml सिरप150.0
Cipzer Roghan Surkh 50 mlएक बोतल में 50 ml रोगन449.0
Deep Ayurveda Organic Multani Mitti (Bentonite Clay) 100gmएक पैकेट में 100gm पॉवडर174.0
Deep Ayurveda Organic Turmeric Powder (Curcuma Longa) 100gmएक पैकेट में 100gm पॉवडर174.0
Deep Ayurveda Organic Manjistha Powder (Rubia cordifolia) 100gmएक पैकेट में 100gm पॉवडर327.0
Deep Ayurveda Organic Aloevera Powder (Aloe barbadensis miller) 100gmएक पैकेट में 100gm पॉवडर218.0
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