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गलसुआ क्या होता है? 

गलसुआ या मम्पस एक प्रकार का वायरल इन्फेक्शन होता है जो मुख्य रूप से लार ग्रंथियों को प्रभावित करता है, इन ग्रंथियों को पैरोटिड ग्रंथियां भी कहा जाता है। ये ग्रंथियां लार बनाती हैं। लार ग्रंथियों के तीन समूह होते हैं जो मुंह के तीनों तरफ होते हैं जो कानों के पीछे और नीचे स्थित होते हैं।

गलसुआ के सबसे मुख्य लक्षण लार ग्रंथियों में सूजन होती है गलसुआ के लक्षण शुरू होने के बाद ये 14 से 18 दिनों तक रहते हैं। रोग की अवधि लगभग सात से दस दिन तक की होती है। गलसुआ में आमतौर पर एक या दोनों तरफ की ग्रंथियों (गाल व जबड़े वाले क्षेत्र) में दर्द, सूजन और टेंडरनेस (छूने पर दर्द होना) आदि शामिल होते हैं।

गलसुआ की रोकथाम में एमएमआर टीकाकरण आदि शामिल हैं। गलसुआ के लिए कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। लार ग्रंथियों में टेंडरनेस और सूजन आदि की समस्या को कम करने के लिए उन्हें गर्म व ठंडी चीजों से सेकना मददगार हो सकता है। दर्द को शांत करने के लिए कुछ पेनकिलर (दर्दनिवारक) दवाएँ भी ली जा सकती हैं। गकसुआ के साथ कुछ गंभीर जटिलताएँ भी जुड़ी होती हैं जैसे मेनिनजाइटिस, इन्सेफेलाइटिस, बहरापन और जननांगों में सूजन, लालिमा व जलन आदि। 

(और पढ़ें - शिशु टीकाकरण चार्ट)

  1. गलसुआ के लक्षण - Mumps Symptoms in Hindi
  2. गलसुआ के कारण और जोखिम - Mumps Causes & Risks in Hindi
  3. गलसुआ से बचाव - Prevention of Mumps in Hindi
  4. गलसुआ का परीक्षण - Diagnosis of Mumps in Hindi
  5. गलसुआ का इलाज - Mumps Treatment in Hindi
  6. गलसुआ की जटिलताएं - Mumps Complications in Hindi
  7. गलसुआ की दवा - Medicines for Mumps in Hindi
  8. गलसुआ के डॉक्टर

गलसुआ में कौन से लक्षण विकसित होने लगते हैं?

गलसुआ के लक्षण मरीज के संक्रमित होने के बाद आमतौर पर 2 से 3 हफ्तों के बीच दिखाई देते हैं। गलसुआ के वायरस से संक्रमित कुछ लोगों में या तो कोई भी लक्षण महसूस नहीं हो पाता या फिर बहुत ही हल्के लक्षण पैदा होते हैं। जब संकेत और लक्षण विकसित होते हैं, तो वे आमतौर पर वायरस के संपर्क के लगभग दो से तीन हफ्तों के बाद प्रकट होते हैं और लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

गलसुआ में सबसे मुख्य लक्षण लार ग्रंथियों में सूजन ही होता है जिसके कारण गाल फूलने लगते हैं।

गलसुआ से जुड़े अन्य लक्षण हैं:

  • निगलने में कठिनाई
  • बुखार (103 डिग्री फॉरेनहाइट से ऊपर)
  • मुंह सूखना
  • जोड़ों में दर्द

वयस्कों को गलसुआ बहुत ही कम मामलों में होता है। इस मामले में लक्षण आमतौर पर समान ही होते हैं। लेकिन कभी-कभी लक्षण थोड़े बदतर हो जाते हैं और उनमें गलसुआ से और अधिक कई जटिलताएं विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर आपके बच्चे में निम्न लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

यदि आपको गलसुआ का संदेह हो रहा है तो जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाएं ताकि स्थिति का परीक्षण किया जा सके। जब गलसुआ की समस्या आमतौर पर अधिक गंभीर नहीं होती, तो इस स्थिति में अधिक गंभीर संक्रमण के समान लक्षण महसूस होते हैं जैसे टॉन्सिलाइटिस

यदि आप डॉक्टर के पास जा रहे हैं तो उनको पहले ही बता दें ताकि वे आपके जाने से पहले संक्रमण फैलने से रोकने संबंधी सावधानियां बरत सकें।

(और पढ़ें - चिकन पॉक्स का इलाज)

गलसुआ क्यों होता है?

मम्पस या गलसुआ का कारण मम्पस वायरस के कारण होने वाला संक्रमण होता है। यह संक्रमित व्यक्ति की लार व अन्य रिसाव आदि से स्वस्थ व्यक्तियों में फैलता है। जब गलसुआ रोग होता है तब वायरस श्वसन तंत्र  से लार ग्रंथियों तक पहुंचता  है और वहां जाकर प्रजनन करने लगता है जिस कारण से ग्रंथियों में सूजन आने लगती है।

जुकाम और फ्लू की तरह गलसुआ रोग भी फैलने वाला रोग है। गलसुआ लार की बूंदों से फैल सकता है जिनको सांस के द्वारा अंदर लिया जा सकता है या सतह से उठाकर मुंह या नाक तक ले जाया जा सकता है। गलसुआ रोग कैसे फैलता है उसके कुछ उदाहरण निम्न हैं:

  • यदि एक व्यक्ति अपनी नाक या मुंह को छूकर किसी दूसरी सतह को छू लेता है तो वह सतह संक्रमित हो जाती है और कोई स्वस्थ व्यक्ति उस सतह के छूने से संक्रमित हो सकता है।
  • छींकना या खांसना (और पढ़ें - खांसी का इलाज)
  • संक्रमित व्यक्ति के साथ भोजन व पेय पदार्थ शेयर करना
  • संक्रमित व्यक्ति के साथ प्लेट या अन्य बर्तन शेयर करना

जो लोग गलसुआ के वायरस से संक्रमित होते हैं वे लगभग 15 दिनों तक संक्रामक (रोग फैला सकते हैं) रहते हैं (लक्षण शुरू होने से 6 दिन पहले और शुरू होने के 9 दिन बाद तक)

गलसुआ का जोखिम किन कारणों से बढ़ सकता है?  

  • ज्यादातर मामलों में गलसुआ युवा वयस्कों यानी आमतौर पर 1980 से 1990 के बीच पैदा हुए लोगों में होता है जिन्होंने गलसुआ के लिए टीकाकरण नहीं करवाया होता या जिनको बचपन में गलसुआ नहीं हुआ। जब एक बार आप गलसुआ के वायरस से संक्रमित हो जाते हैं तो जीवन भर के लिए इसके संक्रमण से निपटने के लिए आपमें प्रतिरक्षा विकसित हो जाती हैं।
  • किसी स्कूल में काम करना या आस-पास बहुत सारे बच्चे होना
  • किसी स्वास्थ्य देखभाल केंद्र में काम करना जैसे अस्पताल या अन्य मेडिकल सुविधाएं
  • ऐसी जगह पर उपस्थित होना जहां पर काफी सारे युवा लोग होते हैं जैसे कॉलेज 

(और पढ़ें - चेचक के उपचार)

गलसुआ होने से कैसे बचें?

अपने बच्चों का समय पर एमएमआर का टीकाकरण (मम्पस, मीसल्स और रूबेला के लिए) करवा कर आप अपने बच्चों का गलसुआ से बचाव कर सकते हैं। गलसुआ का टीकाकरण करवाना गलसुआ की रोकथाम करने का सबसे बेहतर तरीका होता है। 

एमएमआर टीकाकरण बचपन के टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा होता है। जब आपका बच्चा 12 से 13 महीने का हो जाता है तो उनका एक टीकाकरण करवा देना चाहिए। दूसरा टीकाकरण बच्चे के स्कूल शुरू करने से पहले ही करवा देना चाहिए। जब एक दोनों खुराक मिल जाती हैं तो गलसुआ के प्रति बच्चा 95 प्रतिशत सुरक्षित हो जाता है। 

यदि आपको गलसुआ है तो आपको इसके फैलने से रोकथाम करने के लिए निम्न तरीके अपनाने चाहिए:

  • छींकते समय टिश्यु पेपर का इस्तेमाल करना और फिर उसको सुरक्षित रूप से नष्ट कर दें
  • गलसुआ का पहला लक्षण विकसित होते ही स्कूल या ऑफ़िस से कम से कम 5 दिन की छुट्टी ले लें
  • नियमित रूप से अपने हाथों को साबुन के साथ धोते रहना

(और पढ़ें - खसरा क्या है)

गलसुआ का परीक्षण कैसे किया जाता है?

इस स्थिति का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर रोगी की सूजन देखते हैं और उसे छूकर महसूस करते हैं, मुंह में टॉन्सिल की पॉजिशन देखते हैं और साथ ही साथ मरीज के तापमान की भी जांच करते हैं।

परीक्षण की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर थूक या लार का सेंपल लेकर उसकी जांच करते हैं। 

परीक्षण करने के लिए डॉक्टर निम्न जांच भी कर सकते है:

  • परीक्षण की पुष्टि करने के लिए खून, पेशाब और थूक का सेंपल लेना
  • जांच के लिए रीढ़ की हड्डी से सेरिब्रोस्पाइनल द्रव (CSF) का सेंपल लेना, यह आमतौर पर अधिक गंभीर मामलों में ही लिया जाता है।
  • टॉन्सिल की पॉजिशन की जांच करने के लिए मुंह के अंदर के हिस्से की जांच करना - क्योंकि जब कोई व्यक्ति गलसुआ के वायरस से संक्रमित होता है तो उसके टॉन्सिल एक तरफ हटने लग जाते हैं।
  • मरीज के तापमान की जांच करना (और पढ़ें - शरीर का तापमान कितना होना चाहिए)
  • वायरस कल्चर या ब्लड टेस्ट की आवश्यकता भी पड़ सकती है। किसी भी संक्रमण से लड़ने के लिए आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) खुद एंटीबॉडी़ज बनाती है। इसलिए यदि आपको गलसुआ रोग हो गया है तो खून टेस्ट की मदद से खून में एंटीबॉडीज का पता लगाया जा सकता है, जो गलसुआ के वायरस से लड़ रहे हैं।

(और पढ़ें - लैब टेस्ट)

गलसुआ का उपचार कैसे किया जाता है?

गलसुआ के लिए किसी प्रकार का उपचार उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस रोग की अवधि को पूरा करना ही पड़ता है। क्योंकि मम्पस वायरस एंटीबायोटिक या किसी अन्य दवाओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है। गलसुआ के उपचार का मुख्य लक्ष्य इस रोग के कारण पैदा होने वाले लक्षणों को शांत करना होता है और जितना संभव हो सके मरीज को आरामदायक महसूस करवाना होता है। उपचार में निम्न स्टेप शामिल हो सकते हैं:

  • यदि लार ग्रंथियों में सूजन हो गई है और जिससे तकलीफ पैदा हो रही है बर्फ व गर्म चीजों से सेंकने से दर्द को शांत किया जा सकता है। 
  • बिना एस्पिरिन वाली दवाएं जैसे एसिटामिनोफेन और इबुप्रोफेन की मदद से बुखार को कंट्रोल और सूजन से ग्रस्त ग्रंथियों के दर्द को शांत किया जा सकता है। 
  • जब थकान और कमजोरी महसूस हो तो उस समय आराम करें
  • बुखार के कारण निर्जलीकरण होने से बचाव करने के लिए खूब मात्रा में तरल पदार्थ पिएं 
  • सूप, दही व अन्य नरम आहारों का सेवन करें जिनको चबाने में कठिनाई ना हो (क्योंकि जब आपकी ग्रंथियों में सूजन आ जाती है तो चबाने के दौरान दर्द महसूस हो सकता है) 
  • अम्लीय खाद्य व पेय पदार्थों का सेवन ना करें क्योंकि ये लार ग्रंथियों में और अधिक गंभीर दर्द का कारण बन सकते हैं।

यदि आप ठीक महसूस करते हैं तो डॉक्टर द्वारा गलसुआ का परीक्षण कर लेने के एक हफ्ते के बाद आप वापस अपने ऑफिस या स्कूल जा सकते हैं। क्योंकि इतने समय बाद आप संक्रामक नहीं रहते यानि आप किसी और में यह संक्रमण नहीं फैला सकते। गलसुआ आमतौर पर कुछ हफ्तों तक रहता है। बीमारी के दस दिन बाद आमतौर पर आपको अच्छा महसूस होने लगता है। 

ज्यादातर लोग जिन लोगों को गलसुआ हो जाता है उनको जीवन में दूसरी बार यह रोग नहीं होता। एक बार वायरस प्राप्त होने से आपको फिर से संक्रमित होने के खिलाफ सुरक्षा मिलती रहती है।

गलसुआ के प्राकृतिक उपचार:  

यदि आपके बच्चे को गलसुआ है तो उसके लिए आराम करना और रोग का समय पूरा होने तक इंतजार करना ही सबसे बेहतर उपचार होता है। बच्चे को जल्दी से स्वस्थ करने में डॉक्टर भी थोड़ी सी मदद कर सकते हैं। लेकिन दर्द और तकलीफ कम करने के लिए और रोग दूसरों तक फैलने से बचाने के लिए आप निम्न तरीके अपना सकते हैं: 

  • जब तक बुखार ठीक नहीं हो जाता बिस्तर पर ही आराम करें।
  • ऐसे खाद्य पदार्थों को ना खाएं जिनमें अत्यधिक चबाने की जरूरत पड़े। इसकी बजाए सूप, स्मूदी और नरम खाद्य पदार्थों का सेवन करें जैसे मसले हुऐ आलू और पका हुआ ओटमील आदि।
  • खट्टे खाद्य पदार्थों को ना खाएं जैसे खट्टे फल व उनके रस क्योंकि वे लार बनने की प्रक्रिया को उत्तेजित करते हैं।
  • रोग फैलने से बचाने के लिए रोगी को स्वस्थ व्यक्तियों से अलग रखें क्योंकि गलसुआ का मरीज लक्षण शुरू होने के एक हफ्ते बाद तक संक्रामक रह सकता है।
  • वृषण में दर्द और टेंडरनेस (छूने पर दर्द होना) को शांत करने के लिए उन्हें बर्फ से सेकें और एथलेटिक सपोर्टर पहनें। 

गलसुआ से क्या जटिलताएं विकसित हो जाती हैं?

गलसुआ आमतौर पर एक हल्का रोग होता है। इससे जुड़ी कुछ गंभीर जटिलताएं जिनमें मेनिनजाइटिस, इन्सेफेलाइटिस या स्थिर बहरापन आदि शामिल हैं। हालांकि यह आमतौर पर किशोरावस्था और वयस्क रोगियों में होता है।

बच्चों की तुलना में वयस्कों में जटिलताएं अधिक होती है, जिनमें से सबसे आम जटिलताएं निम्न हो सकती हैं: 

  • वायरल मेनिनजाइटिस (Viral meningitis): यह स्थिति आम जटिलताओं में सबसे दुर्लभ स्थिति है। यह तब होती है जब वायरस खून में फैल जाता है और शरीर की केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) को संक्रमित कर देता है। 
  • अग्न्याशय में सूजन व जलन - इस स्थिति में पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द महसूस होने लगता है, यह गलसुआ के 20 मामलों में से 1 में होता है और आमतौर पर हल्का होता है।
  • ऑर्काइटिस (Orchitis): इस स्थिति में वृषण में सूजन आ जाती है और दर्द होने लगता है। यह गलसुआ के 5 मरीजों में से एक को हो जाता है। सूजन अक्सर एक हफ्ते के भीतर कम हो जाती है और टेंडरनेस को कम होने में अधिक समय लग सकता है। यह स्थिति कुछ बेहद ही दुर्लभ मामलों में बांझपन का कारण बनती है।
  • ओफोराइटिस (Oophoritis): इस स्थिति में अंडाशय में सूजन व दर्द होने लगता है। यह गलसुआ से ग्रस्त 20 वयस्क महिलाओं में से एक को होता है। जैसे ही प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस के साथ लड़ती है तो सूजन कम होने लगती है। बहुत ही दुर्लभ मामलों में यह बांझपन का कारण बन पाती है। 

यदि कोई गर्भवती महिला को गर्भावस्था के 12 से 16 हफ्तों के बीच गलसुआ रोग हो जाता है, तो उसके लिए मिसकैरेज का थोड़ा सा जोखिम हो सकता है। 

गलसुआ में होने वाली कुछ अत्यधिक दुर्लभ जटिलताएँ:

  • सुनाई देने में कमी (और पढ़ें - बहरापन का इलाज)
  • इन्सेफेलाइटिस: इस स्थिति में कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के कारण मस्तिष्क में सूजन आ जाती है, कुछ मामलो में यह घातक स्थिति भी बन सकती है।

इनमें से कुछ जटिलताएँ बहुत ही दुर्लभ हैं। यदि किसी व्यक्ति को यह संदेह हो रहा है कि उनको या उनके बच्चे में ये जटिलताएं विकसित हो सकती हैं तो मेडिकल सलाह व मदद लेना बहुत जरूरी है।

Dr. Jogya Bori

Dr. Jogya Bori

संक्रामक रोग

Dr. Lalit Shishara

Dr. Lalit Shishara

संक्रामक रोग

Dr. Amisha Mirchandani

Dr. Amisha Mirchandani

संक्रामक रोग

गलसुआ के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Mr-Vac VaccineMr Vac Injection90.47
Rubella VaccineRubella 1000 Ccid50 Vaccine71.65
R VacR Vac 1000 Ccid50 Injection78.8

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