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दांतों की सड़न, दांत की संरचना को होने वाला नुकसान है जो दांत के इनैमल (दांत की बाहरी कोटिंग) और दांतों की परत (डेंटिन या दंतधातु) दोनों को प्रभावित कर सकता है। अब बड़ा सवाल ये कि आखिर दांतों में सड़न की समस्या होती क्यों है और क्या इसे होने से रोका जा सकता है?

दांत में सड़न की समस्या तब होती है जब हम कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ जिसमें चीनी और स्टार्च वाली चीजें जैसे- ब्रेड, अनाज, दूध, सोडा, फल, केक, या कैंडी जैसी चीजें शामिल हैं को खाने के बाद ब्रश नहीं करते और इन खाद्य पदार्थों का कुछ हिस्सा दांतों पर ही चिपका रह जाता है। मुंह में मौजूद ओरल बैक्टीरिया इन खाद्य पदार्थों को पचाने में मदद करते हैं और उन्हें एसिड में बदल देते हैं। 

(और पढ़ें - दांत में दर्द के लक्षण, कारण, इलाज)

मुंह में मौजूद बैक्टीरिया, एसिड, खाद्य पदार्थों का बचा हुआ मलबा और लार का संयोजन मिलकर प्लाक का निर्माण करते हैं जो दांतों से चिपक जाता है। प्लाक में मौजूद एसिड दांतों की इनैमल (तामचीनी) वाली सतह को समाप्त कर देता है, जिससे दांत धीरे-धीरे सड़ने लगते हैं और उनमें छेद भी हो जाता हैं, जिन्हें कैविटीज कहा जाता है।

दांतों में सड़न की समस्या इन 3 जगहों पर आसानी से हो जाती है:

  • दांतों की दरारों में, गड्ढों में और खांचे में
  • दांतों के बीच में
  • किसी भी भराव के आसपास, खासकर जब वे चिपके या टूटे हुए हों
  • मसूड़ों के बेहद नजदीक

इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं कि दांतों में सड़न की समस्या को होने से कैसे रोकें और दांतों में सड़न की समस्या का घरेलू उपाय क्या है।

(और पढ़ें - दांतों का संक्रमण)

  1. दांतों की सड़न रोकने के उपाय - Danto ki sadan rokne ke upay
  2. दांतों की सड़न के घरेलू उपाय - Tooth decay home remedies in hindi
  3. दांतों की सड़न से बचने और दूर करने के घरेलू उपाय के डॉक्टर

दांतों में सड़न हो जाए उसके बाद उसका इलाज करवाने से बेहतर है कि हम दांतों में सड़न की समस्या होने से पहले ही उसे रोक दें। इसके लिए हमें निम्नलिखित उपायों को आजमाना चाहिए:

  • दिन में 2 बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल कर अच्छी तरह से ब्रश करें। बेहतर तो यही होगा कि आप हर बार भोजन करने के बाद ब्रश करें और खासकर सोने से पहले तो जरूर ब्रश करें। (और पढ़ें- टूथपेस्ट के हैरान करने वाले 5 फायदे)
  • डेंटल फ्लॉस या क्लीनर्स की मदद से दांतों के बीच में जमा गंदगी को भी अच्छी तरह से साफ करना जरूरी है।
  • फ्लोराइड युक्त माउथवॉश से रोजाना अच्छी तरह से कुल्ला करें। कुछ माउथवॉश ऐसे भी होते हैं जिनमें ऐंटिसेप्टिक सामग्री होती है जो मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया और प्लाक को भी दूर करते हैं। (और पढ़ें- क्या माउथवॉश कोरोना वायरस के वायरल लोड को कम कर सकता है)
  • पौष्टिक और संतुलित भोजन का सेवन करें और सीमित मात्रा में ही स्नैक्स खाएं। कैंडी, प्रेट्ज़ेल रोटी और चिप्स जैसे कार्बोहाइड्रेट्स वाली चीजों से बचें, जो दांत की सतहों पर चिपके रह जाते हैं। यदि आप किसी तरह का चिपचिपा पदार्थ खाते हैं तो उसे खाने के तुरंत बाद ब्रश की मदद से दांतों को साफ कर लें।
  • अपने डेंटिस्ट से पूछें कि क्या आप दातों को मजबूत बनाए रखने के लिए सप्लिमेंटल फ्लोराइड का इस्तेमाल कर सकते हैं। 
  • अपने डेंटिस्ट से डेंटल सीलेंट (एक प्लास्टिक सुरक्षात्मक कोटिंग) के बारे में पूछें जिसे आपके पीछे वाले दांतों (मोलर्स) की चबाने वाली सतहों पर लगाया जाता है ताकि दांतों को सड़ने से बचाया जा सके।
  • फ्लोराइड युक्त पानी पिएं। बच्चों के दांतों को सड़ने से बचाने के लिए रोजाना उन्हें 450 एमएल फ्लोराइड वाला पानी पिलाने की जरूरत होती है। (और पढ़ें- बच्चों के लिए दांतों में कैविटी से बचने के उपाय)
  • मुंह की सही तरीके से प्रफेशनल सफाई और मौखिक परीक्षा के लिए नियमित रूप से अपने डेंटिस्ट के पास जरूर जाएं।
  • क्लीनिकल ट्रायल्स में दिखाया गया है कि भोजन के बाद शुगर-फ्री च्यूइंग गम चबाने से दांतों के इनैमल को रीमिनरलाइज करने में मदद मिलती है।  
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO की मानें तो चीनी या शक्कर खाना दांतों की सड़न के लिए सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। लिहाजा अपने चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करना चाहिए।

(और पढ़ें - ब्रश करने का सही तरीका और फायदे)

2014 की एक स्टडी के परिणाम बताते हैं कि वैसे टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना जिसमें फ्लोराइड की मात्रा अधिक हो वह दांतों के इनैमल को काफी सख्त कर देते हैं जिससे दांतों को सड़न से सुरक्षा मिलती है।

दांतों की सड़न के लिए ऑयल पुल्लिंग करें - Oil pulling technique in hindi

ऑयल पुल्लिंग की शुरुआत प्राचीन काल में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से हुई जिसमें निर्धारित अवधि के लिए मुंह में 1 चम्मच तिल का तेल या नारियल का तेल लेकर उसे कुछ देर के लिए पूरे मुंह में घुमाते हैं और फिर तेल को बाहर थूक देते हैं। 2009 की एक स्टडी में पाया गया कि ऑयल पुल्लिंग तकनीक में तिल के तेल का इस्तेमाल माउथवॉश की ही तरह प्लाक और बैक्टीरिया की मात्रा कम करने में मदद करता है। ऑयल पुल्लिंग की मदद से न सिर्फ प्लाक को कम करने में मदद मिलती है बल्कि दांत का इनैमल भी सुरक्षित रहता है जिसे दांतो में सड़न की समस्या नहीं होती।

(और पढ़ें - दांतों को साफ करने के लिए क्या नारियल तेल का इस्तेमाल ज्यादा फायदेमंद है)

दांतों की सड़न के लिए ऐलोवेरा जेल या जूस का इस्तेमाल - Using aloe vera gel or juice in hindi

ऐलोवेरा टूथ जेल बैक्टीरिया से लड़कर दांतों में कैविटीज और सड़न की समस्या को दूर करने में मदद करता है। साल 2015 की रिव्यू स्टडी की मानें तो ऐलोवेरा जेल का एंटीबैक्टीरियल (जीवाणुरोधी) प्रभाव मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया को मारता है। आप चाहें तो ऐलोवेरा जूस का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐलोवेरा का एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण दांतों और मसूड़ों में सड़न, दर्द और सूजन से बचाता है। इसके लिए आप चाहें तो रोजाना ब्रश करने के बाद ऐलोवेरा जूस को मुंह में रखकर इधर-उधर घुमाएं और उससे गार्गल करें। इसके बाद साफ पानी से कुल्ला कर लें।

(और पढ़ें- अगर ये खाएंगे तो दांत प्राकृतिक रूप से सफेद हो जाएंगे)

दांतों की सड़न दूर करने के लिए मुलेठी का इस्तेमाल करें - Using licorice root in hindi

2011 की एक ट्रायल स्टडी के मुताबिक, मुलेठी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी दांतों में सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया को टार्गेट करके उन्हें मारने में मदद करता है। 2011 में ही हुई एक और स्टडी में यह सुझाव दिया गया कि लिकोरिस या मुलेठी चूसने से कैविटी और दांतों में सड़न की समस्या को रोकने में मदद मिलती है। मुलेठी एक ऐसी जड़ी बूटी है जो मौखिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है।

(और पढ़ें - मुंह स्वस्थ तो दिल स्वस्थ)

दांत की सड़न दूर करने के लिए नमक के पानी से करें कुल्ला - Rinse mouth with salt water

गर्म पानी में 1 चम्मच नमक मिलाएं और इस नमक वाले पानी को मुंह में लेकर कुछ देर तक अच्छी तरह से कुल्ला करें। इससे भी दांतों की सड़न, कैविटी और मुंह की बाकी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। बेहतर परिणाम के लिए नमक वाले पानी का इस्तेमाल रोजाना करें। आप चाहें तो रात में सोने से पहले भी नमक वाले पानी से कुल्ला कर सकते हैं। दरअसल, नमक में एंटीसेप्टिक और जीवाणुरोधी गुण पाए जाते हैं जिससे दांतों में सड़न, कैविटी, दर्द और संक्रमण को दूर करने में मदद मिलती है।

(और पढ़ें - मसूड़ों की बीमारी पायरिया क्या है)

दांतों की सड़न दूर करना है तो लौंग का तेल है गुणकारी - Clove oil is beneficial in hindi

दांतों में दर्द, सड़न और कैविटीज जैसी दांतों की हर तरह की समस्या को दूर करने में लौंग का तेल भी एक बेहतरीन घरेलू नुस्खा माना जाता है। औषधीय गुणों से भरपूर लौंग के तेल में यूजेनॉल होता है जो दांतों में होने वाले किसी भी तरह के सेंसेशन को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा लौंग में एंटीसेप्टिक, एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं जो मुंह के साथ ही दांत और मसूड़ों को भी साफ और स्वस्थ रखने में मदद करता है।

(और पढ़ें- दांतों को मजबूत बनाने के लिए ये चीजें खाएं)

दांतों की सड़न से बचाती है नीम की डंडी - Chewing neem twig in hindi

नीम भी आपके दांतों को साफ करने का एक बहुत ही स्वस्थ और प्रभावी तरीका है। नीम की डंडी या छोटी सी टहनी जिसे नीम का दातुन भी कहते हैं उसे चबाने से दांत और मसूड़े बेहद मजबूत हो जाते हैं। नीम की डंडी या नीम का दातुन चबाते वक्त जो शक्तिशाली प्लांट कम्पाउंड रिलीज होता है वह बैक्टीरिया के खिलाफ काम करता है और दांतों को सड़ने से बचाता है। साथ ही नीम में फाइबर की मात्रा भी अधिक होती है जिस कारण यह प्लाक को भी दांतों से दूर रखता है। नीम की डंडी चबाने के बाद साफ पानी से कुल्ला कर लें। अगर नीम की डंडी न मिले तो आप नीम के तेल को भी दांतों और मसू़ड़ों पर लगा सकते हैं।

(और पढ़ें- दांत दर्द के घरेलू उपाय)

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