टाइफस - Typhus in Hindi

Dr. Nadheer K M (AIIMS)MBBS

October 24, 2020

April 13, 2021

टाइफस
टाइफस

टाइफस, रिकेट्सिया बैक्टीरिया के कारण होने वाला संक्रमण है। सामान्य रूप से पिस्सू, माइट्स (चीगर्स), जूं या टिक्सेस आदि के काटने से यह संक्रमण फैलता है। संक्रमण के कारण लोगों को ठंड लगने, बुखार, सिरदर्द और मांसपे​शियों में दर्द की समस्या हो सकती है।

आधुनिक समय में स्वच्छता के प्रति लोगों की जागरुकता के कारण टाइफस के मामले कम ही देखने को मिलते हैं। लेकिन यह अब भी उन जगहों पर हो सकता है जहां बुनियादी स्वच्छता की स्थिति खराब है।

टाइफस मुख्यरूप से तीन मुख्य प्रकार का होता है। वैसे तो एंटीबायोटिक दवाओं से इन सभी तीन प्रकार के टाइफस का इलाज किया जा सकता है। हालांकि, कुछ लोगों में संक्रमण के बाद यह गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं, इसलिए इन मामलों में तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है।

इस लेख में हम टाइफस बीमारी के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

 

टाइफस के प्रकार - Types of Typhus in Hindi

टाइफस मुख्यरूप से तीन मुख्य प्रकार का होता है और ये सभी अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरिया के कारण होते हैं।

टाइफस के लक्षण - Typhus Symptoms in Hindi

टाइफस का संक्रमण होने के बाद 10 दिनों से लेकर 2 सप्ताह तक इसके लक्षण मौजूद रह सकते हैं। इस दौरान रोगी में निम्न प्रकार के लक्षणों को देखा जा सकता है।

  • ठंड लगना
  • बुखार
  • सिरदर्द
  • फ्लू की तरह ही मांसपेशियों में दर्द का अनुभव होना
  • संक्रमण के कुछ दिनों तक शरीर पर दाने या चकत्ते देखे जा सकते हैं।

म्यूरिन टाइफस के लक्षण

एपेडमिक टाइफस के लक्षण

स्क्रब टाइफस लक्षण

टाइफस का कारण - Typhus Causes in Hindi

सामान्य रूप से कीड़ों के काटने से टाइफस का संक्रमण होता है। इंसानों को काटने के बाद ये कीड़े त्वचा में बैक्टीरिया युक्त मल छोड़ जाते हैं, जिसके कारण टाइफस संक्रमण होता है। सर्दी या फ्लू की तरह यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। आइए तीनों अलग-अलग प्रकार के टाइफस के कारणों के बारे में जानते हैं।

एपेडमिक टाइफस / जूं-जनित टाइफस का कारण

यह रिकेट्सिया प्रोवाज़ेकी नामक बैक्टीरिया के कारण फैलता है, जोकि सामान्य रूप से जूं में पाया जाता है। दुनियाभर में इस प्रकार के टाइफस के मामले देखने को मिलते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा यह उन हिस्सों में देखने को मिलते हैं, ज​हां आबादी ज्यादा हो और स्वच्छता की कमी होती है।

एंडीमिक (म्यूरिन) टाइफस का कारण

म्यूरिन टाइफस मुख्यरूप से रिकेट्सिया टाइफी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया चूहे या बिल्ली में पाए जाते हैं। एंडीमिक टाइफस के मामले भी दुनियाभर में देखने को मिलते हैं। जो लोग चूहों के संपर्क में ज्यादा रहते हैं उन्हें इस संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

स्क्रब टाइफस

स्क्रब टाइफस मुख्यरूप से ओरिएंटिया सूटसूगामूशी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया घुन के लार्वा में पाए जाते हैं। इस प्रकार का टाइफस एशिया, ऑस्ट्रेलिया, पापुआ न्यू गिनी और प्रशांत द्वीपों में अधिक पाया जाता है।

कीड़ों के काटने के कुछ ही दिनों में आपमें इसके लक्षण देखने को मिल सकते हैं। जानवरों के काटने के अलावा उनके मल के संपर्क में आने के कारण भी बैक्टीरिया का संक्रमण फैल सकता है। इन कीड़ों या जानवरों के काटने के बाद जब आप उस हिस्से को खुरचते हैं तो खुरचने के कारण होने वाले सूक्ष्म घाव के माध्यम से मल में मौजूद बैक्टीरिया रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं।

टाइफस का निदान - Diagnosis of Typhus in Hindi

यदि आपको टाइफस का संदेह है तो इसके निदान के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपके लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। निम्नलिखित स्थितियों में आपमें टाइफस का संदेह हो सकता है।

  • यदि आप भीड़ भाड़ वाले इलाकों में रहते हैं
  • हाल ही में विदेश यात्रा की है
  • आपके समुदाय में टाइफस का प्रकोप हो

टाइफस के लक्षण अन्य संक्रामक रोगों की ही तरह होते हैं, इस वजह से टाइफस का निदान कर पाना थोड़ा मुश्किल होता है। टाइफस के लक्षण निम्न रोगों की ही तरह होते हैं।

  • डेंगू : इसे ब्रेकबोन बुखार भी कहा जाता है
  • मलेरिया : मच्छरों द्वारा फैलने वाला एक संक्रामक रोग है
  • ब्रुसेलोसिस : ब्रुसेला प्रजातियों के जीवाणु के कारण होने वाला एक संक्रामक रोग

टाइफस की पुष्टि के लिए डॉक्टर आपको निम्न प्रकार के परीक्षणों की सलाह दे सकते हैं।

  • स्किन बायोप्सी : स्किन बायोप्सी के दौरान त्वचा पर दिखने वाले चकत्तों का सैंपल लेकर परीक्षण के लिए भेजा जाता है।
  • वेस्टर्न ब्लॉट : टाइफस की उपस्थिति का पता लगाने के लिए यह परीक्षण उपयोगी माना जाता है।
  • इम्यूनोफ्लोरेसेंस टेस्ट : रक्तप्रवाह से लिए गए सीरम के सैंपल में टाइफस एंटीजन का पता लगाने के लिए फ्लोरोसेंट डाइस का प्रयोग किया जाता है।
  • खून की जांच : खून की जांच के माध्यम से संक्रमण का पता लगाया जा सकता है।

टाइफस का इलाज - Treatment of Typhus in Hindi

टाइफस के तीनों प्रकार के इलाज में एंटीबायोटिक दवा को प्रभावी माना जाता है।

  • टाइफस के इलाज के दौरान डॉक्सीसाइक्लिन एंटीबायोटिक की खुराक दी जाती है। रोग के सभी लक्षणों में यह काफी प्रभावी माना जाता है।
  • रोग की पहचान होने के साथ ही एंटीबायोटिक दवाएं शुरू कर देनी चाहिए। इससे संक्रमण को फैलने से रोकने के साथ तमाम प्रकार के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • यदि आपको डॉक्सीसाइक्लिन से एलर्जी है या आपमें यह प्रभावी साबित नहीं होता है, तो डॉक्टर अन्य एंटीबायोटिक को प्रयोग में ला सकते हैं।


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