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आधुनिक दवाईयां हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई हैं। इसके बावजूद कई ऐसी शारीरिक समस्याएं हैं जो दवाओं से ठीक नहीं होतीं। ऐसे में कुछ औषधीय गुणों से भरपूर पौधों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे पौधे न सिर्फ असंख्य बीमारियों से लड़ने में सक्षम होते हैं बल्कि आपके स्वास्थ्य को पूरी तरह ठीक रखते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इंसानी अस्तित्व की मौजूदगी से ही औषधीय पौधे हमारे साथ जुड़े हैं और प्राचीन काल से ही चिकित्सकीय उद्देश्य के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। आइए आज कुछ इसी तरह के पौधों के बारे में जानते हैं।

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एलोवेरा
आयुर्वेद में एलोवेरा को औषधीय पौधों का राजा कहा जाता है। इसके लंबे-लंबे पत्तों में पानी भरा होता है, इस वजह से यह शुष्क वातावरण में भी आसानी से उग जाता है। अतः इस पौधे को आप आसानी से किसी भी गमले में लगा सकते हैं। इसको अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता भी नहीं होती। हां, एलोवरा कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का निवारण करने में उपयोगी हैं जैसे यह कब्ज से राहत देता है, मुंहासों से छुटकारा दिलाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है।

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तुलसी
तुलसी औषधीय पौधों की रानी कहलाती है। हिंदू धर्म में यह पौधा काफी महत्व रखता है। लेकिन तुलसी धार्मिक वजहों के अलावा अपने औषधीय गुणों के लिए भी जानी जाती है। तुलसी में मौजूद सुगंध बैक्टीरिया को दूर रखने में उपयोगी है। इसके साथ ही बीमारियों से आराम दिलाने में भी यह लाभकारी पौधा है। इस पौधे को अगर अपने आंगन या गमले में लगाना चाहते हैं तो थोड़ा सजग रहें। इसे नियमित पानी की जरूरत होती है। यह कई समस्याओं में उपयोगी है मसलन तनाव कम करती है, खांसी कम करती है, पाचन प्रणाली ठीक रखती है, एंटी-कैंसर की तरह उपयोगी है तथा बाल झड़ने, हृदय रोग और डायबिटीज में भी लाभकारी है।

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नीम
नीम में भी असंख्य गुण हैं। यह मूल रूप से त्वचा को साफ करने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए जाना जाता है। अश्वगंधा की ही तरह नीम बीमारियों को ठीक करने के लिए मशहूर है। यह एक बेहतरीन डिटाॅक्सीफाइंड जड़ी-बूटी है। यह न सिर्फ त्वचा को साफ रखता है बल्कि लीवर को भी स्वस्थ रखता है। माना जाता है कि यह रक्त संचार को बेहतर कर रक्त को साफ रखता है। इसके इतर नीम अपने 100 से अधिक जैव सक्रिय अवयवों की मदद से प्रतिरक्षा तंत्र को बेहतर करता है। यह एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर है। इसके उपयोग से ताउम्र मुंह संबंधी समस्याओं से दूर रहा जा सकता है। आयुर्वेद की मानें तो दोषों जैसे कफ और पित्त को संतुलित करने में भी नीम का महत्वपूर्ण योगदान है।

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अश्वगंधा
सालों से अश्वगंधा स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए प्राकृतिक उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह उपयोगी जड़ी-बूटी अविश्वसनीय रूप से हमारे स्वास्थ्य पर कार्य करती है। यह तनाव कम करने, प्रतिरक्षा तंत्र बेहतर करने, यौन इच्छा बढ़ाने, ऊर्जा बढ़ाने में कारगर है। 

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बबूने का फूल (कैमोमाइल)
डेजी फूल से मिलते-जुलते बबूने के फूल भी औषधीय गुणों से भरपूर हैं। इनमें तनाव कम करने वाले तत्व मौजूद हैं। आमतौर पर कैमोमाइल की चाय पी जाती है। आप इसे तरल पदार्थ, कैप्सूल और टैबलेट के रूप में भी ले सकते हैं। केमोमाइल में मौजूद शांत रखने की क्षमता पर अक्सर अध्ययन किया गया है। 2009 में भी एक अध्ययन हुआ था। इसमें यह बात स्पष्ट हुई कि यह एंग्जाइटी डिसआर्डर के उपचार में मदद करता है।

एक अध्ययन से यह सुनिश्चित होता है कि लंबे समय तक बबूने का फूल इस्तेमाल करने से किसी तरह का नुकसान नहीं होता और एक अन्य अध्ययन में बताया गया है कि यह एंटी-कैंसर ट्रीटमेंट में उपयोगी है। इसके अलावा यह कई अन्य बिमारियों जैसे तनाव, नींद न आना, कैंसर जैसी बीमारियों में भी कारगर है। लेकिन कुछ लोगों को इससे एलर्जी हो सकती है। अतः इसके इस्तेमाल से पहले सजग रहें और किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही इसका इस्तेमाल करें।

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