नाभि खिसकना / उतरना / ऊपर चढ़ना (धरण) क्या है?

नाभि खिसकने की समस्या के बारे में आपने सुना ही होगा। कई लोग इसको नाभि का डिगना, धरण और धरण गिरना के नाम से भी जानते हैं। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति में स्वास्थ्य के लिए नाभि को महत्त्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन पश्चिमी चिकित्सा (एलॉपथी) में इसकी कोई चर्चा या महत्त्व नहीं है।

आयुर्वेद के अनुसार, जैसे रीढ़ की हड्डी में टेढ़ापन आ सकता है, उस ही तरह नाभि और पेट की मांसपेशियों में भी मरोड़ या अन्य दिक्कत आ सकती है। ऐसा होने पर नाभि अपनी जगह से हट जाती है। इसके अधिकतर मामलों में नाभि ऊपर या नीचे की तरफ चली जाती है। नाभि अक्सर किसी भारी वजन को उठाने, अचानक झुकने और यौन गतिविधियों को करने से खिसक (धरण) जाती है।

नाभि खिसकने से कई परेशानियाँ हो सकती हैं जैसे पेट में तेज दर्द, कब्ज, उल्टी और जी मिचलाना। इसके अलावा नाभि खिसकने से महिलाओं में माहवारी के समय अधिक रक्तस्त्राव और दर्द होता है।

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पश्चिमी चिकित्सा नाभि खिसकने का कोई इलाज मौजूद नहीं हैं, लेकिन आयुर्वेद, योग और कुछ घरेलू इलाज से इससे राहत पायी जा सकती है।

इस लेख में आगे जानेंगे कि नाभि का खिसकना क्या है, नाभि खिसकने के क्या लक्षण होते हैं, नाभि डिगने (धरण गिरना) के कारण, नाभि खिसकने के उपचार और घरेलू उपाय क्या हैं।

 

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  1. नाभि खिसकने के लक्षण - Nabhi khisakne ke lakshan
  2. नाभि खिसकने (धरण) के कारण - Nabhi khisakne ke karan
  3. नाभि खिसकने का परीक्षण कैसे करें - Nabhi khisakne ka parikshan kaise kare
  4. नाभि खिसकने का उपचार और उपाय - Nabhi khisakne ka upchar aur upay
  5. नाभि खिसकने में उपयोगी योगासन - Nabhi khishane me upyogi yogasan
नाभि खिसकने के लक्षण - Nabhi khisakne ke lakshan

नाभि अपनी जगह से हटने पर किसी भी दिशा की ओर जा सकती है। नाभि खिसकने के लक्षण उसके खिसकने की दिशा के हिसाब से इस प्रकार होते हैं -

  • नाभि के ऊपर की ओर खिसकने पर घबराहट, उल्टी, कब्ज, जी मिचलाना शुरू हो जाता है
  • नाभि के नीचे की ओर खिसकने से दस्त, स्वप्न दोष और पाचनतंत्र में गड़बड़ी होती है।
  • नाभि आगे-पीछे खिसकने से पेट में दर्द होना शुरू हो जाता है।
  • महिलाओं में नाभि खिसकने से कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं, जिसमें गर्भाशय से सम्बंधित परेशानी और मासिक धर्म का अनियमित होना शामिल है। इसमें पेट के निचले हिस्से से पीठ के निचले हिस्से और जांघों में दर्द होता है।
  • नाभि का बाएं कुल्हे की तरफ खिसकने से शरीर के दाएं भाग में समस्याएं उत्पन्न होती है।
  • बाई तरफ नाभि खिसकने से किडनी में कठोरता और आंतों में दर्द होने लगता है।

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नाभि खिसकने (धरण) के कारण  - Nabhi khisakne ke karan

नाभि क्यों खिसकती है?

नाभि खिसकने या उतरने की समस्या मुख्यतः बचपन में होती है और नाभि डिगने के पीछे कई कारण होते है, जैसे

जो व्यक्ति एक पैर पर ज्यादा देर तक दबाव डालकर खड़े होते हैं, या भार उठाते समय एक तरफ वजन ज्यादा देते हैं, उनकी नाभि भी खिसक सकती है। इसके अलावा पैर को झटकने से भी नाभि खिसक जाती है।

कुछ लोगों को कहना है कि उनके अनुभव में ज्यादातर पुरुषों की नाभि बाई तरफ और महिलाओं की नाभि दाई तरफ खिसकती है। लेकिन ऐसा क्यों होता है, यह ज्ञात नहीं है।

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नाभि खिसकने का परीक्षण कैसे करें - Nabhi khisakne ka parikshan kaise kare

नाभि खिसकने पर आप घर पर ही इसकी जांच कर सकते हैं। इसकी जांच के तीन तरीके होते हैं, जिनको नीचे विस्तार से बताया जा रहा है।

1. नाभि से पैर के अंगूठे की दूरी नाँपना

नाभि खिसकने की जांच के लिए आपको नीचे जमीन पर पीठ के बल सीधा लेटना होता है। इसके बाद किसी अन्य व्यक्ति की सहायता से एक रस्सी की मदद से आपकी नाभि से पैरों के अंगूठे तक की दूरी को नापा जाता है। इस प्रक्रिया में रस्सी का एक छोर नाभि पर तो दूसरा छोर पैर के अंगूठे पर ले जाया जाता है। इसी तरह से नाभि और दूसरे पैर के अंगूठे की दूरी को भी नापा जाता है। यदि नाभि से दोनों पैरों के अंगूठों की दूरी में अंतर आता है, तो यह नाभि डिगने की ओर संकेत करता है।

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2. नाभि में नाड़ी ढूंढना

नाभि डिगने के लिए दूसरे परीक्षण में भी आपको जमीन पर पीठ के बल लेटना होता है। इसके बाद आपको अपने हाथ का अंगूठा नाभि के स्थान पर रखना होता है। ऐसे में यदि आपको अपने अंगूठे पर नाभि में धड़कने की तरह अनुभव हो तो आपकी नाभि सही जगह पर होती है। यदि धड़कन का अनुभव न हो तो यह नाभि के डिगने की ओर इशारा करता है।

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3. नाभि से निप्पल की दूरी नाँपना

इसके परीक्षण का तीसरा तरीका भी काफी हद तक पहले वाले तरीके से ही मिलता है। इसमें आपको अपनी नाभि से निप्पल की दूरी को नापना होता है। अगर इन दूरियों में अंतर होता है तो यह आपकी नाभि के खिसकने का ही संकेत होता है। नाभि के खिसकने (धरण) का फिलहाल चिकित्सीय जगत मे कोई परीक्षण उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन घरेलू परीक्षणों के आधार पर ही नाभि के खिसकने का अनुमान लगाया जाता है।

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नाभि खिसकने का उपचार और उपाय - Nabhi khisakne ka upchar aur upay

कई वर्षों से समाज में नाभि खिसकने पर घरेलू उपचार की ही मदद ली जाती है। आप सभी ने बचपन से ही नाभि खिसकने पर घर के बुजुर्गों के द्वारा कई तरह के उपायों को आजमाते हुए देखा होगा। नाभि खिसकने (धरण) के इन्हीं कुछ उपायों को नीचे विस्तार से बताया जा रहा है।

  1. मालिश करवाना –
    नाभि खिसकने पर घर के बुजुर्गों द्वारा इसको ठीक करने के लिए मालिश का सुझाव सबसे पहले दिया जाता है। कुछ लोगों को नाभि पर मालिश करके इसको सही जगह पर लाने का तरीका मालूम होता है। नाभि खिसकने पर मसाज या मालिश करने से यह समस्या ठीक हो जाती है, परंतु यह मसाज किसी विशेषज्ञ द्वारा ही करवानी चाहिए, नहीं तो आपको अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    मसाज के दौरान पैरों पर भी मालिश की जाती है, जिससे पैरों के एक्युप्रेशर बिंदुओं पर दबाव पड़ता है। इसमें मालिश करने वाला व्यक्ति अपने हाथों की छोटी अंगूली और अंगूठों के अलावा अन्य तीन अंगूलियों से मसाज करता है। इस उपाय में पूरी तरह से प्रशिक्षित व्यक्ति से ही मसाज करवानी चाहिए, यदि नाभि गलत जगह पर पहुंच जाए तो इससे सांस भी रूक सकती है। (और पढ़ें - पेट फूलने पर क्या करें)
     
  2. मोमबत्ती और दीये का प्रयोग –
    नाभि खिसकने के उपचार में इस घरेलू उपाय को आजमाने के लिए आपके पास एक दीया होना चाहिए। इसमें लिए जाने वाले दीये का आधार करीब एक इंच का होना चाहिए, जबकि इसकी गहराई 2 इंच होनी चाहिए। इस उपाय को करने के लिए आपको जमीन पर पीठ के बल लेटना होगा और दीये में तेल डालकर इसको जलाते हुए अपनी नाभि के बीच में रखना होगा। इसके बाद आपको इस दीये के ऊपर एक कांच का गिलास रखना होता है। इतना करने के बाद आपको गिलास के ऊपर से हल्का सा दबाव डालना होगा, ताकि हवा बाहर ना आ सके।

    कुछ देर बाद आप देखेंगे कि दीये के अंदर बनी भाप से गिलास आपकी नाभि से चिपक गया है। ऐसा होने पर आपको गिलास को हल्के हाथ से ऊपर की ओर उठाना होगा, इससे आपकी नाभि के आसपास की त्वचा भी ऊपर की ओर खिचेगी। कुछ देर बाद गिलास के अंदर की हवा बाहर आ जाएगी और आपकी नाभि की त्वचा सामान्य स्थिति में हो जाएगी। इस उपाय से नाभि पर दबाव पड़ता है और वह अपनी सही जगह पर आ जाती है। इस उपाय में दीया न होने पर आप मोमबत्ती का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसमें आपको मोमबत्ती को 1 इंच आधार वाले सिक्के पर नाभि पर रखना होगा।

    सावधानी बरतना जरूरी – इस उपाय को करते समय आपको दीये में तेल आधे से भी कम भरना होगा, क्योंकि गर्म तेल से आपकी त्वचा जल सकती है। (और पढ़ें - पेट के कैंसर का इलाज)
     
  3. नाभि खिसकने का उपाय है कूदना –
    इस उपाय को करने के लिए आपको अपने पैरों के पंजो पर खड़े होकर कूदना होता है। इसके लिए आपको 1.5 से 2 फिट ऊंचाई से दो से तीन बार कूदना होता है। ध्यान दें कि कूदते समय आपको पंजो पर दबाव देना होता है, पूरे तलवों को जमीन पर रखने से बचें। इस उपाय में एक बार कूदने पर कुछ समय के लिए रूकना जरूरी होता है। इस उपाय को करने के लिए आप घर के सोफा या बेड का उपयोग कर सकते हैं। (और पढ़ें - बदहजमी के उपाय)
     
  4. सक्शन पंप से करें नाभि को ठीक –
    सक्शन पंप की मदद से नाभि खिसकने की समस्या को दूर किया जाता है। यह सक्सन पंप वैक्यूम थेरेपी पर काम करता है। इस पंप के कपनुमा भाग को नाभि के बीच में लगाया जाता है। इसके बाद यह कप पंप की मदद से नाभि पर चिपक जाता है। कुछ देर तक इस पंप को नाभि पर ही लगा रहने दें जिसके बाद यह अपने आप ही हट जाता है। इससे नाभि अपनी सही जगह पर आ जाती है। इस प्रक्रिया को आप दो से तीन बार दोहरा सकते हैं।

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पश्चिमी चिकित्सा में नाभि खिसकने को समस्या नहीं माना जाता है, तो इसलिए एलॉपथी में इसका कोई इलाज भी नहीं है। 

नाभि खिसकने में उपयोगी योगासन - Nabhi khishane me upyogi yogasan

नाभि खिसकने की समस्या को दूर करने के लिए कई योगासनों का सहारा लिया जा सकता है। योग पद्धति में ऐसे कई आसन बताए गए हैं जिनके अभ्यास से आप नाभि खिसकने की समस्या को ठीक कर सकते हैं। कहा जाता है कि नाभि खिसकने के कुछ मामलो में शशांक आसन और मार्जरी आसन के अलावा आगे झुकने वाले आसन नहीं करने चाहिए।

नाभ उतरने को ठीक करने के लिए उन योगासन को किया जाता है जिनसे गुदा के पास की मांसपेशियों में सामान दबाव पड़ता है। नाभि खिसकने (धरण) में भुजंगासन, मत्स्यासन, कंधरासन, सूप्ता व्रजासन, चक्रासन, धनुरासन, मकरासन, मत्स्य क्रीड़ासन आदि करने से फायदा होता है। इसके अलावा शंख प्रक्षालन आसन भी इस समस्या में राहत प्रदान करता है।

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