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मशहूर सितार वादक 38 वर्षीय अनुष्का शंकर ने 30 अगस्त 2019 को सोशल मीडिया पर अपनी गायनेकोलॉजिकल (स्त्री रोग संबंधी) समस्या से जुड़ी एक अहम जानकारी साझा की। यह जानकारी दो वजहों से काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बात तो भारत व दुनियाभर में, महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में खुलकर कम बात की जाती है और दूसरा अनुष्का को कई ऐसी समस्याएं हैं, जिन पर महिलाएं चुप्पी साधे रहती हैं। इसमें मेनोरेजिया (मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव), गर्भनिरोधक गोलियां जो माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती हैं और यूटेराइन फाइब्रॉयड शामिल है।

यूटेराइन फाइब्रॉयड के इलाज के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इस प्रक्रिया को मायोमेक्‍टोमी कहते हैं। यदि मरीज की स्थिति गंभीर है, तो हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय को निकालने के लिए ऑपरेशन) का सहारा लेना पड़ता है।

मेनोरेजिया के कई कारण हो सकते हैं जिनमें एंडोमेट्रिओसिस, एडिनोमायोसिस और यूटेराइन फाइब्रॉयड शामिल हैं।

एंडोमेट्रिओसिस एक दर्दनाक स्थिति है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी लाइनिंग (परत) फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय और अन्य अंगों पर फैलने लगती है। डॉक्टर अभी तक नहीं जान पाए हैं कि ऐसा क्यों होता है। वर्तमान में, करीब 25 मिलियन यानी 2.5 करोड़ भारतीय महिलाएं एंडोमेट्रिओसिस से प्रभावित हैं।

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एडिनोमायोसिस में, एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की अंदरूनी लाइनिंग) से ऊतक मायोमेट्रियम (गर्भाशय की बाहरी परत) में बढ़ने लगते हैं और इस वजह से अधिक समय तक पीरियड्स रहते हैं जिसमें बहुत तेज दर्द होता है।

गर्भाशय में मस्कुलर टिश्यू से गैर-कैंसरकारी (जो कैंसर पैदा न करते हों) ग्रोथ को यूटेराइन फाइब्रॉयड कहा जाता है। महिलाओं में यूटेराइन फाइब्रॉयड क्यों होता है इसका सटीक कारण पता नहीं चल पाया है, हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि फाइब्रॉएड जेनेटिक या हार्मोनल असंतुलन के कारण हो सकता है।

डॉक्टर अक्सर मेनोरेजिया और यूटेराइन फाइब्रॉयड दोनों को नियंत्रित करने के लिए गर्भ निरोधक गोलियां लेने की सलाह देते हैं। इन गोलियों में मौजूद एस्ट्रोजन हार्मोन की वजह से कुछ महिलाओं को तेज सिरदर्द और माइग्रेन की शिकायत हो सकती है। अनुष्का की बात करें तो उन्हें महीने में तीन से चार बार माइग्रेन अटैक आते थे।

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यूट्राइन फाइब्रॉएड और मायोमेक्‍टोमी

अपने ट्वीट में अनुष्‍का ने बताया कि 26 साल की उम्र में उनकी सफल मायोमेक्‍टोमी हो चुकी है। इस सर्जरी में गर्भाशय को छोड़कर फाइब्रॉएड को हटा दिया जाता है। इस सर्जरी के बाद उन्‍होंने दो बेटों को जन्‍म दिया था।
25 वर्ष का अनुभव रखने वाली myUpchar से जुड़ी गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना नरुला कहती हैं कि "मरीज के लिए फाइब्रॉएड्स बहुत तकलीफदेह हो सकता है। फाइब्रॉएड गर्भाशय में कहीं भी हो सकता है – जैसे कि गर्भाशय के अंदर या बाहर या गर्भाशय की परत से छोटी सी स्‍टेम से जुड़ा हुआ हो सकता है। फाइब्रॉएड धीरे-धीरे बढ़ता है या कई सालों तक इसका आकार छोटा ही रह सकता है या कुछ मामलों में ये अचानक से भी बढ़ सकता है। इसके लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं जैसे कि एनीमिया, पीरियड्स में ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होना, कमर के निचले हिस्‍से में दर्द और सेक्‍स के दौरान दर्द होना।" डॉ. नरुला कहती हैं कि “अभी तक इसके स्‍पष्‍ट कारणों का पता नहीं चल पाया है। जिस हौसले के साथ अनुष्‍का ने सोशल मीडिया पर अपनी इस बीमारी का खुलासा किया है, वह प्रशंसनीय है।" 
अनुष्‍का के मामले में मायोमेक्‍टोमी के बाद फाइब्रॉएड दोबारा से आ गए थे। कुछ महीने पहले डॉक्‍टर ने उनके गर्भाशय में दोबारा बड़े फाइब्रॉएड देखे। इस बार अनुष्‍का ने हिस्‍टेरेक्‍टोमी करवाने का फैसला किया। इस सर्जरी में गर्भाशय को निकाल दिया जाता है। डॉक्‍टरों ने अनुष्‍का के पेट सहित शरीर से 13 ट्यूमर निकाले थे।

हिस्‍टेरेक्‍टोमी और डिप्रेशन

अपने ट्वीट में अनुष्‍का ने लिखा कि “हिस्‍टेरेक्‍टोमी के ख्‍याल ने ही उन्‍हें डिप्रेशन में डाल दिया है। इस खबर से जैसा मेरा भविष्‍य ही  खतरे में आ गया था। सर्जरी के दौरान मरने और अपने बाद बच्‍चों को अकेला छोड़ने, इससे सेक्‍स लाइफ पर पड़ने वाले असर के बारे में सोचकर ही मैं डर गई थी।"
आंकड़ों की मानें तो विश्‍व में हिस्‍टेरेक्‍टोमी के दौरान केवल एक फीसदी महिलाओं की मृत्‍यु होती है। इसमें मलाशय, मूत्राशय को नुकसान, ब्‍लीडिंग, ओवरी फेल होने और संक्रमण होने जैसी समस्‍याओं का खतरा रहता है।
डॉ. नरुला कहती हैं कि “दुर्भाग्‍यवश, प्रजनन से संबंधित बीमारियों के निदान के बारे में जानकर ही अक्‍सर महिलाएं अवसादग्रस्‍त हो जाती हैं।" डॉक्टर आगे बताती हैं कि "हिस्‍टेरेक्‍टोमी को लेकर भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में एक नकारात्‍मक धारणा सी बन गई है। हमें यह समझना चाहिए कि यह एक मेडिकल प्रक्रिया है जिससे किसी महिला की जान बचाई जा सकती है। इस स्थिति और इसके इलाज को लेकर महिलाओं के ऊपर बहुत दबाव बन जाता है।" 

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ऐसे में अनुष्‍का का ट्वीट करना काबिल-ए-तारीफ है क्‍योंकि अक्‍सर महिलाएं इस तरह के मुद्दों पर खुलकर बात नहीं कर पाती हैं। उन्‍होंने अपने एक ही ट्वीट में पीरियड्स, हिस्‍टेरेक्‍टोमी और प्रेगनेंसी के बारे में बात करके काफी हिम्‍मत दिखाई है और इससे बाकी महिलाओं को भी हिम्मत मिलती है।

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