myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

कार्बनडाई ऑक्साइड का रासायनिक सूत्र CO2 होता है। हमारे शरीर में ज्यादातर कार्बनडाई ऑक्साइड कार्बोनेट फॉर्म में होते हैं। बाईकार्बोनेट का रासायनिक सूत्र (HCO3-) होता है। इसलिए जब हम कार्बनडाई ऑक्साइड ब्लड टेस्ट की बात करते हैं तो हमारा सीधा अर्थ शरीर में कार्बोनेट के स्तर को मापना होता है।

(और पढ़ें - खून की कमी का इलाज)

  1. बाइकार्बोनेट ब्लड टेस्ट क्या होता है? - What is Bicarbonate blood Test in Hindi?
  2. बाइकार्बोनेट ब्लड टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of Bicarbonate blood Test in Hindi?
  3. बाइकार्बोनेट ब्लड टेस्ट से पहले? - Before Bicarbonate blood Test in Hindi?
  4. बाइकार्बोनेट ब्लड टेस्ट के दौरान - During Bicarbonate blood Test in Hindi
  5. बाइकार्बोनेट ब्लड टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of Bicarbonate blood Test mean in Hindi?

बाईकार्बोनेट कार्बनडाई ऑक्साइड का एक रूप है, जो हमारे शरीर में खाना पचाने के बाद बचा गैस वेस्ट होता है। बाईकार्बोनेट इलेक्ट्रोलाइट्स का एक ग्रुप होता है जो हमारे शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करने और खून में सही मात्रा में एसीडिटी बनाए रखने में मदद करता है। खून में बहुत अधिक या बहुत ज्यादा कार्बोनेट की मात्रा होना शरीर में डायरिया, लीवर के फेल होने, किडनी संबंधी बीमारियों और एनॉरोक्सिया जैसी समस्याओं का कारण हो सकती हैं। सीधे-सीधे कहा जाए तो कार्बोनेट टेस्ट से हमारे खून में कार्बनडाई ऑक्साइड की मात्रा मापी जाती है। 

CO2 टेस्ट का इस्तेमाल इलेक्ट्रोलाइट या बेसिक मेटाबोलिक पैनल के रूप में किया जाता है। शरीर में CO2 के लेवल में बदलाव का मतलब है कि शरीर में फ्लूड की कमी या अधिकता हो रही है। इससे आपके शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स में असंतुलन पैदा हो सकता है। खून में CO2 के लेवेल में बदलाव, किडनी और फेफड़े की फंक्शनिंग को प्रभावित कर सकती है। किडनी शरीर में सामान्य बाईकार्बोनेट के स्तर को बनाए रखने में मदद करती है।   

(और पढ़ें - किडनी फेल होने का इलाज)

इस टेस्ट के लिए डॉक्टर बिना आस्तीन या फिर छोटी आस्तीन वाला शर्ट पहनने की सलाह देते हैं। इससे डॉक्टरों या लैब टेक्नीशियन को हाथ की भुजा में से खून के सैंपल को निकालने में आसानी होती है। आप ऐसे फुल शर्ट भी पहन सकते हैं, जिन्हें आसानी से ऊपर की ओर मोड़ा जा सके। इस टेस्ट के पहले आपको अपने दैनिक खानपान के तरीकों में कोई बदलाव नहीं करने हैं। आप रोज की तरह खानपान बरकरार रख सकते हैं। 

(और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट क्या है)

इस टेस्ट के लिए डॉक्टर आपके हाथ में से सुई से खून का नमूना लेंगे। अगर आप किसी तरह की दवा या सप्लीमेंट का सेवन करते हैं, तो टेस्ट से पहले अपने डॉक्टर को बता दें, क्योंकि ये टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकते हैं। अंगूर, कीनू जैसे खट्टे फल भी आपके टेस्ट के परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। इस टेस्ट के लिए केवल हमारे खून के फ्लूइड की जरूरत होती है, खून का थक्का बनने में मदद करने वाले प्लेटलेट्स या ब्लड सेल्स की जरूरत नहीं होती। इस टेस्ट के दौरान लैब टेक्निशियन बाईकार्बोनेट में से कार्बनडाई ऑक्साइड को अलग करने के लिए लिक्विड में एसिड मिला देते हैं। बाईकार्बोनेट की मात्रा इस चीज़ से मापी जाती है कि सैंपल की एसीडिटी कितनी तेज बदलती है।

(और पढ़ें - एसिडिटी का इलाज)

इस टेस्ट में यह मापा जाता है कि आपके शरीर के एक लीटर या एक क्वार्ट फ्लूड में कितनी मिली मोल कार्बनडाई ऑक्साइड हैं। सामान्य रिजल्ट 23 और 29 के बीच होता है।

अगर आपके शरीर में कार्बनडाई ऑक्साइड की मात्रा कम है तो इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं: 

  • किडनी की बीमारी
  • डायबिटीज कीटोएसिडोसिस, यह तब होता है, जब हमारे खून में एसिड का स्तर बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे शरीर में उतनी इन्सुलीन नहीं है, जो उस शुगर को पचा सके।
  • मेटाबोलिक एसिडोसिस, इसका मतलब है कि हमारी शरीर बहुत अधिक एसिड बना रही है। 
  • एडिशन्स डिजीज, यह बहुत दुर्लभ मामले में होता है। यह हमारे शरीर के हार्मोन तैयार करने वाले एड्रेनल ग्लैंड्स को प्रभावित करती है। 
  • एथिलीन ग्लाईकोल पॉइजन, यह हमारे शरीर के एंटीफ्रीज, डिटर्जेंट, पेंट और घरेलू उत्पादों में एक तरह का केमिकल होता है। 
  • एस्पिरिन ओवरडोज

शरीर में कार्बनडाई ऑक्साइड की मात्रा के अधिक होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं: 

और पढ़ें ...