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ब्लड कल्चर टेस्ट एक ऐसा टेस्ट है, जिससे डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि कहीं आपके शरीर में कोई ऐसा संक्रमण तो नहीं है, जो आपके पूरे शरीर को संक्रमित कर सकता है। डॉक्टर इसे सिस्टेमैटिक इन्फेक्शन कहते हैं। इस टेस्ट में आपके खून का एक नमूना लेकर खून में उन बैक्टीरिया या यीस्ट की जांच की जाती है, जिनके कारण इन्फेक्शन हो रहा है। 

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  1. ब्लड कल्चर टेस्ट क्या होता है? - What is Blood Culture Test in Hindi?
  2. ब्लड कल्चर टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of Blood Culture Test in Hindi?
  3. ब्लड कल्चर टेस्ट से पहले - Before Blood Culture Test in Hindi
  4. ब्लड कल्चर टेस्ट के दौरान - During Blood Culture Test in Hindi
  5. ब्लड कल्चर टेस्ट के बाद - After Blood Culture Test in Hindi
  6. ब्लड कल्चर टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं? - What are the risks of Blood Culture Test in Hindi?
  7. ब्लड कल्चर टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of Blood Culture Test mean in Hindi?

ब्लड कल्चर टेस्ट से खून में बैक्टीरिया या फंगी जैसे जर्म्स की जांच की जाती है। जांच में अगर शरीर में रोगाणु पाए जाते है तो इससे डॉक्टर्स को यह जानने में मदद मिलेगी कि मरीज के इन्फेक्शन को ठीक करने के लिए कौन सी दवा बेहतर तरीके से काम करेगी।

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ब्लड कल्चर टेस्ट तब किया जाता है, जब किसी बच्चे में बैक्टीरिया या फंगी के कारण होने वाले संक्रमण के लक्षण दिखते हैं। यह टेस्ट उस समय भी किया जाता है, जब किसी बच्चे के शरीर के किसी हिस्से में संक्रमण हो और वह खून को भी संक्रमित कर दिया हो।

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डॉक्टर आपमें निम्न लक्षण दिखने पर ब्लड कल्चर टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं:

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अगर आपका इन्फेक्शन अधिक गंभीर है तो आपको निम्न समस्याएं हो सकती हैं:

इस टेस्ट से पहले आपको किसी तरह की तैयारी करने की जरूरत नहीं होती है। अगर आप किसी तरह की कोई एंटीबॉयोटिक का सेवन कर रहे हैं तो अपने डॉक्टर से इस बारे में बता दें। अपने डॉक्टर को यह भी बताएं कि आपने दवा की अंतिम खुराक कब ली थी। अपने डॉक्टर को उन सभी तरह की जड़ी बूटियों, विटमिन्स और सप्लीमेन्ट के बारे में बता दें, जिनका आप सेवन करते हैं। 

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टेस्ट के पहले आपके शरीर के जिस हिस्से से खून निकाला जाएगा, उस हिस्से को साफ किया जाता है। इसके बाद आपकी नसों में सूई को चुभोकर खून निकाला जाता है। टेस्ट में एकदम सटीक रिजल्ट पाने के लिए इसी प्रक्रिया को दूसरी नस में दुहराया जाएगा यानी दूसरी नस से भी खून निकाला जाएगा।

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इसके बाद आपके खून के नमूनों को एक विशेष तरह के मैटेरियल के साथ मिक्स कर दिया जाता है। इस मैटेरियल को कल्चर कहते हैं। ऐसा करने से आपके खून में पहले से मौजूद बैक्टीरिया या यीस्ट की मात्रा बढ़ जाती है। 
इस टेस्ट के रिजल्ट को 24 घंटे में लैब से पाया जा सकता है। लेकिन किस तरह के बैक्टीरिया के कारण आपके शरीर में संक्रमण हो रहा है, ये सब जानने के लिए आपको 48 से 72 घंटों तक इंतजार करना पड़ सकता है। आपको कुछ दूसरे टेस्ट भी कराने की जरूरत पड़ सकती है। 

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सूई से ब्लड कल्चर टेस्ट कराने में कुछ जोखिम होते हैं। इससे रक्तस्राव, संक्रमण होने, चोट लगने और सिर में हल्कापन महसूस करने जैसी समस्याएं शामिल हैं। जिस समय सूई आपके हाथ या किसी हिस्से में चुभोई जाती है, आपको हल्का सा दर्द हो सकता है। उसके बाद इस हिस्से में हल्की सी तकलीफ हो सकती है।

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टेस्ट का रिजल्ट आपकी उम्र, लिंग, स्वास्थ्य, टेस्ट के तरीके जेसी तमाम बातों पर निर्भर कर सकते हैं। टेस्ट के रिजल्ट के आधार पर आप यह नहीं कह सकते हैं कि आपको किसी तरह की बीमारी है। इसलिए रिजल्ट आने के बाद अपने डॉक्टर से पता करें कि आपको कौन सी बीमारी है। 

रिजल्ट के पॉजिटिव पाए जाने का मतलब है कि आपके खून में बैक्टीरिया या यीस्ट पाए गये हैं। जबकि टेस्ट के निगेटिव पाए जाने जाने का मतलब है कि आपके शरीर में किसी तरह के बैक्टीरिया या यीस्ट नहीं पाए गये हैं। 

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References

  1. Beavis KG, Charnot-Katsikas A. Henry's Clinical Diagnosis and Management by Laboratory Methods. 23rd ed. Specimen collection and handling for diagnosis of infectious diseases. In: McPherson RA, Pincus MR, eds. St Louis, MO: Elsevier; 2017:chap 64.
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  3. Murray PR. The clinician and the microbiology laboratory. In: Bennett JE, Dolin R, Blaser MJ, eds. Mandell, Douglas, and Bennett's Principles and Practice of Infectious Diseases, 8th ed. Philadelphia, PA: Elsevier Saunders.