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इलेक्ट्रोलाइट पैनल एक तरह का ब्लड टेस्ट है। इससे खून में इलेक्ट्रोलाइट्स और कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा मापी जाती है। इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पाए जाने वाले सोडियन, पोटैशियम जैसे मिनिरल होते हैं। खून में ये बाईकार्बोनेट के फॉर्म में हो जाते हैं। इसलिए इस टेस्ट को कभी कभी बाईकार्बोनेट टेस्ट भी कहा जाता है। 

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  1. इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट क्या होता है? - What is Electrolytes Test in Hindi?
  2. इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of Electrolytes Test?
  3. इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट से पहले - Before Electrolytes Test in Hindi
  4. इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट के दौरान - During Electrolytes Test in Hindi
  5. इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट के क्या जोखिम हैं? - what are the risks associated with Electrolytes Test?
  6. इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of Electrolytes Test mean in Hindi?

इस टेस्ट से हमारे शरीर में सोडियम, क्लोरीन, पोटैशियम और कार्बन डाईऑक्साइड जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स को मापा जाता है। हमारे शरीर की कोशिकाएं शरीर में फ्लुइड्स (तरल) और इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा को बैलेंस करती हैं। ये तरल और इलेक्ट्रोलाइट्स इलेक्ट्रिकली चार्ज मिनरल होते हैं। इलेक्ट्रोलाइट्स तरल को हमारे शरीर के भीतर बाहर भेजते हैं। वो तरल न्यूट्रीएंट्स को कोशिकाओं तक पहुंचाने और वेस्ट व गैरजरूरी पदार्थों को शरीर से बाहर करने का काम करता है।

इलेक्ट्रोलाइट्स हमारे शरीर में पानी के स्तर को नॉर्मल और पीएच लेवेल को स्थिर बनाए रखते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इलेक्ट्रोलाइट्स हमारे शरीर में एसिड और बेस की मात्रा संतुलित किए रहते हैं। हमारे खून और टीशूज में इलेक्ट्रोलाइट्स साल्ट के फॉर्म में होते हैं। आप इलेक्ट्रोलाइट्स को भोजन और पेय पदार्थों से प्राप्त करते हैं।

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इस टेस्ट को तब किया जाता है अगर आप भ्रमित रहते हैं, मचली आती है या फिर कमजोरी महसूस होती है। कुछ ऐसे लश्रण हैं, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन के बिगड़ने का संकेत होते हैं। अगर आप अस्पताल जाते हैं तो डॉक्टर आपके इलेक्ट्रोलाइट की समस्याओं को दूर करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट पैनल का इस्तेमाल कर सकते हैं। कई बार दूसरी समस्याओं के इलाज से पहले भी आपके डॉक्टर आपको यह टेस्ट जरूर कराने की सलाह दे सकते हैं। जैसे, इलेक्ट्रोलाइट के असंतुलित होने के कारण हार्ट भी फेल हो सकता है। इसीलिए हार्ट फेल होने पर भी इस जांच को कराने की सलाह दी जा सकती है।

आपको यह जांच कराने की सलाह तब भी दी जा सकती है, अगर आपको डायरिया है, उल्टी हो रही है, शुगर है, हार्ट की बीमारी है, नसें डैमेज हैं, मांसपेशियों में किसी तरह की कोई समस्या है, क्रोनिक किडनी की बीमारी है। इसके अलावा आपका इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट किया जाता है अगर डियोरेटिक्स या अन्य तरह की ऐसी दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं, जिनसे आपको बहुत अधिक पेशाब आता है। अगर आपको गर्मी से संबधित कोई बीमारी हो गई है या फिर खेलते समय टकरा जाने से चोट लग गई है तो डॉक्टर आपको यह टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं। 

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अपने डॉक्टर से इस बारे में पता कर लें कि जांच से पहले आपको किसी प्रकार के खाने पीने की चीजों या दवाइयों से परहेज तो नहीं करना है। अगर आप किसी विशेष तरह की खाने-पीने की चीजों या फिर दवाइयों जैसे हर्ब्स, विटमिन्स या सप्लीमेंट का सेवन करते हैं तो इस बारे में अपने डॉक्टर को जरूर बता दें। अगर आप किसी तरह की घरेलू दवाइयों का सेवन करते हैं तो उन्हें भी अपने डॉक्टर से बता दें। क्योंकि ये दवाइयां टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं।

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इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच शरीर में खून या यूरीन, दोनों से की जा सकती है। खून की जांच खून के सैंपल से की जाती है। इसके लिए हाथ की भुजा की नस में एक पतली सूई से खून को सैंपल निकाला जाता है। जबकि यूरीन टेस्ट के लिए डॉक्टर आपसे किसी कंटेनर में यूरीन का सैंपल मांगते हैं।

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इस टेस्ट के लिए खून का सैंपल लेते समय थोड़ा सा खतरा हो सकता है। इसमें खून बहना, संक्रमण होना, घाव होना या सिर में हल्कापन महसूस होने जैसी समस्या हो सकती है। नस में से खून निकालते समय आपको थोड़ी सी तकलीफ हो सकती है। उसके बाद उस जगह पर आपको थोड़ा सा घाव हो सकता है। जबकि यूरीन टेस्ट में किसी तरह का कोई खतरा नहीं होता है। 

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आपके टेस्ट का रिजल्ट आपकी उम्र, लिंग और स्वास्थ्य जैसे कई कारकों पर निर्भर कर सकता है।  यह टेस्ट इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप इस टेस्ट को किस तरह से कर रहे हैं। इस टेस्ट के रिजल्ट के आधार पर निश्चिंत होकर यह नहीं कहा जा सकता है कि आपको किसी तरह की कोई समस्या है। इसलिए रिजल्ट को पढ़कर खुद से ही कोई निष्कर्ष न निकालें। रिजल्ट आने के बाद अपने डॉक्टर को उसे दिखाएं। इलेक्ट्रोलिटिक पैनल के सभी हिस्से अलग-अलग साल्ट या इलेक्ट्रोलाइट की जांच करते हैं। जांच का रिजल्ट आपकी उम्र, स्वास्थ्य जैसे कई कारणों पर निर्भर करता है। 

टेस्ट के रिजल्ट मिलीइक्वीवैलेंट्स पर लीटर (mEq/L) में व्यक्त किया जाता है। खून में सभी तरह के इलेक्ट्रोलाइट के लिए एक सामान्य रेंज निर्धारित होता है, जो निम्नलिखित हैं:

  पोटैशियम       क्लोराइड सोडियम कार्बन डाईऑक्साइड
बड़ों में 3.5 से लेकर 5 mEq/L    98 से लेकर 106 mEq/L 136 से लेकर 145 mEq/L 23 से लेकर 30 mEq/L
बच्चों में 3.4 से लेकर 4.7 mEq/L         90 से लेकर 110 mEq/L 138 से लेकर 146 mEq/L 20 से लेकर 28 mEq/L
शिशुओं में 4.1 से लेकर 5.3 mEq/L  96 से लेकर 106 mEq/L 128 से लेकर 148 mEq/L  20 से लेकर 28 mEq/L
नवजात में 3.9 से लेकर 5.9 mEq/L 95 से लेकर 110 mEq/L 133 से लेकर 146 mEq/L 13 से लेकर 22 mEq/L  

 

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