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इस टेस्ट से शरीर में फोलिक एसिड की कमी की जांच की जाती है। इस टेस्ट से फोलिक एसिड की मदद से थेरेपी की मॉनिटरिंग की जाती है। इससे मेगालोबैलेस्टिक और माइक्रोसाइटिक एनीमिया की जांच भी की जाती है। शरीर में फोलिक एसिड की कमी से गर्भ के दौरान गर्भ में पल रहे भ्रूण को न्यूट्रल ट्यूब डिफेक्ट हो सकता है। मोटे तौर पर यह टेस्ट शरीर में फोलिक एसिड की मात्रा पता करने के लिए किया जाता है। 

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  1. फोलिक एसिड टेस्ट क्या होता है? - What is Folic Acid Test in Hindi?
  2. फोलिक एसिड टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of Folic Acid Test in Hindi?
  3. फोलिक एसिड टेस्ट से पहले - Before Folic Acid Test in Hindi
  4. फोलिक एसिड टेस्ट के दौरान - During Folic Acid Test in Hindi How the Test is Performed
  5. फोलिक एसिड टेस्ट के बाद - After Folic Acid Test in Hindi
  6. फोलिक एसिड टेस्ट के क्या खतरे होते हैं? - What are the risks associated with of Folic Acid Test mean in Hindi?
  7. फोलिक एसिड टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of Folic Acid Test mean in Hindi?

फोलिक एसिड विटामिन बी9 का ही एक रूप होता है। फोलिक एसिड टेस्ट के माध्यम से यह पता किया जाता है कि ब्लड में फोलिक एसिड की कितनी मात्रा में है। ध्यान रखें की फोलिक एसिड और फोलेट दोनों हैं तो विटामिन बी9 के ही रूप लेकिन दोनों में अंतर होता है। हालांकि, जानकारी के आभाव में कुछ लोग इन्हें एक ही समझते हैं। इनके अंतर के बारे में भी जानकारी होना बहुत आवश्यक है क्योंकि इनका शरीर पर अलग अलग प्रभाव होता है।

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इस टेस्ट से यह पता किया जाता है कि हमारे शरीर में फोलिक एसिड की मात्रा कहीं कम तो नहीं है। दरअसल फोलिक एसिड हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण और डीएनए पैदा करता है, जहां हमारे जेनेटिक कोड होते हैं। इसीलिए गर्भावस्था के समय या उससे पहले सही मात्रा में फोलिक एसिड का सेवन करने से स्पाइना बिफिडा जैसे न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स से बचा जा सकता है। जो महिलाएं गर्भवती हैं या फिर गर्भवती होने की सोच रही हैं, उन्हें हर रोज कम से कम 600 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड का सेवन करना चाहिए। जिन महिलाओं में पहले की गर्भावस्था में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स की समस्या रही है, उन्हें अधिक मात्रा में फोलिक एसिड लेने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए जांच के बाद अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें कि आपको कितना फोलिक एसिड लेने की जरूरत है।

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अगर आप किसी तरह की कोई दवा, जड़ी बूटी या अन्य तरह की औषधि का इस्तेमाल करते हैं तो फोलिक एसिड टेस्ट करवाने से पहले इनके बारे मे अपने डॉक्टर से बता दें क्योंकि ये सब आपके टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं। इस टेस्ट से 6 से 8 घंट पहले हो सकता है कि आपके डॉक्टर आपको खाने-पीने के लिए मना करें। इसीलिए बेहतर होगा कि जिस दिन जांच करानी हो, उससे पहले वाली रात को बिना खाना खाए रहा जाए और अगले दिन सुबह-सुबह जांच के लिए अपॉइंटमेंट लिया जाए।

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इस टेस्ट के लिए खून के सैंपल की जरूरत होती है। ज्यादातर मामलों में खून का सैंपल आपके हाथ की नस या फिर कुहनी या हाथ की पीछे की नस से लिया जाता है। इसके लिए जिस जगह से सैंपल निकालना होता है, उस जगह को स्पिरीट जैसी किसी एंटीसेप्टिक से साफ कर दिया जाता है। इसके बाद डॉक्टर आपके हाथ में ऊपर एक इलास्टिक बैंड बांध देंगे। बैंड बांध देने से उस जगह से खून का बहाव रुक जाता है। खून का बहाव रुक जाने से वहां पर पर नसें उभर आती हैं। इसके बाद उस जगह से खून का सैंपल लेना आसान हो जाता है। फिर इस हाथ की नस में सुई चुभा कर खून का सैंपल लिया जाता है।

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एक बार खून का सैंपल के बाद डॉक्टर उस जगह से सुई निकाल लेते हैं। खून के उस सैंपल को किसी शीशी या विशेष तरह के ट्यूब में इकट्ठा कर लेते हैं। हाथ से इलास्टिक बैंड को खोल दिया जाता है। जिस जगह पर सूई चुभोई जाती है, उस जगह से खून निकलने से रोकने के लिए कोई बैंड या फिर पट्टी बांध देते हैं। 

छोटे बच्चों या शिशुओं में स्किन से खून का सैंपल लेने के लिए लैन्सेट नाम की एक नुकीले चीज को इस्तेमाल किया जाता है। इस खून को किसी छोटी सी शीशी में या फिर किसी पीपेट, स्लाइड या फिर किसी टेस्ट स्ट्रिप में इकट्ठा कर लिया जाता है। सैंपल लेने के बाद अगर खून बह रहा है तो उस जगह पर कोई पट्टी या बैंडेज बांध दी जाती है।

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खून की जांच के लिए सैंपल लेने में बहुत कम खतरे हैं। फिर भी सैंपल लेने में निम्नलिखित खतरे हो सकते हैं:

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शरीर में फोलिक एसिड की सामान्य मात्रा 2.7 से 17.0 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर होती है या फिर 6.12 से 38.52 नैनोमोल्स प्रति लीटर होती है। हालांकि इस जांच को अलग-अलग लैब में कराने पर इसके नॉर्मल वैल्यू रेंज के परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। 

असामान्य रिजल्ट का मतलब: 

सामान्य स्तर से कम फोलिक एसिड का स्तर होने के निम्नलिखित अर्थ हो सकते हैं: 

  • खानपान पर ध्यान न देने की जरुरत। 
  • मालबसोर्पशन सिंड्रोम (छोटी आंत में पोषक तत्वों के अवशोषण में रूकावट की स्थिति)।
  • कुपोषण। 

इस जांच को निम्नलिखित परिस्थितियों में भी किया जा सकता है

जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद आपके डॉक्टर टेस्ट रिपोर्ट को देखकर बताएंगे कि आपको क्या समस्या है और आगे आपको क्या करना है। 

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