विटामिन बी12 टेस्ट एक खून टेस्ट होता है, जो खून में विटामिन बी12 के स्तर को मापता है। शरीर की रक्त कोशिकाएं और तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने के लिए विटामिन बी12 की आवश्यकता होती है।

विटामिन बी12 पशु उत्पादों में पाए जाते हैं जैसे कि मांस, सीपदार मछली, दूध, पनीर और अंडे आदि। ज्यादातर लोग जो इन उत्पादों का सेवन करते हैं और जब तक उनका शरीर खाद्य पदार्थों से विटामिन बी12 लेता रहता है, तब तक उनमें बहुत ही कम मामलों में विटामिन बी12 की कमी हो पाती है। जो लोग कठोर शाकाहारी होते हैं और किसी भी पशु उत्पाद का सेवन नहीं करते, इनके साथ ही साथ उन कठोर शाकाहारी माताओं से जन्म लेने वाले बच्चे भी जो कठोर शाकाहारी हैं, उनमें विटामिन बी 12 की कमी से एनीमिया होने के जोखिम बढ़ जाते हैं। इसलिए उन्हें विटामिन बी12 के सप्लिमेंट्स लेने चाहिएं। विटामिन बी12 को लिवर में सालों तक संग्रह करके रखा जा सकता है, जो एनीमिया के खतरे को कम करता है।

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आमतौर पर विटामिन बी12 को उस समय मापा जाता है, जब फोलिक एसिड (Folic Acid) को मापा जाता है। क्योंकि इन दोनों में से किसी की भी कमी एक प्रकार के एनीमिया  को विकसित कर देती है, जिसे मेगालोब्लास्टिक एनीमिया (Megaloblastic Anemia) कहा जाता है। विटामिन बी12 की कमी तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करती है।

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  1. विटामिन बी12 टेस्ट कैसे किया जाता है? - How the Vitamin B12 done in hindi?
  2. विटामिन बी12 टेस्ट कब करवाना चाहिए? - When to get Vitamin B12 test?
  3. विटामिन बी12 टेस्ट क्या होता है? - What is Vitamin B12 Test in Hindi?
  4. विटामिन बी12 टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Vitamin B12 Test in Hindi
  5. विटामिन बी12 टेस्ट से पहले - Before Vitamin B12 Test in Hindi
  6. विटामिन बी12 टेस्ट के बाद - After Vitamin B12 Test in Hindi
  7. विटामिन बी12 टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Vitamin B12 Test in Hindi
  8. विटामिन बी12 टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Vitamin B12 Test mean in Hindi

विटामिन बी12 टेस्ट कैसे किया जाता है?

इसमें डॉक्टर खून का सैंपल निकालते हैं, जिसके लिए निम्नलिखित पद्धति अपनाई जाती है:

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  • सबसे पहले बांह के उपरी हिस्से पर बैंड या पट्टी बांध देते हैं, जिससे खून का बहाव रुक जाता है। खून का बहाव रुक जाने के बाद नसें खून से भर कर फूलने लग जाती हैं। जिससे नसें स्पष्ट दिखने लग जाती है और उनमें सुई लगाना आसान हो जाता है।
  • जहां पर सुई लगाई जाती है, उसे अल्कोहॉल के साथ साफ किया जाता है।
  • उसके बाद नस में एक सुई लगाई जाती है और खून का सैंपल निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। सुई से एक ट्यूब या शीशी जुड़ी होती है, जिसमें रक्त को इकट्ठा किया जाता है।
  • इस टेस्ट के लिए पर्याप्त मात्रा में खून निकाल लिए जाने के बाद बांह से उस पट्टी या बैंड को खोल दिया जाता है।
  • उसके बाद सुई को निकाल दिया जाता है और सुई वाली जगह पर खून आने से रोकने के लिए रुई का टुकड़ा रख दिया जाता है। 

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विटामिन बी12 टेस्ट कब करवाना चाहिए?

अगर आपको निम्न समस्या है, तो डॉक्टर विटामिन बी12 टेस्ट का सुझाव दे सकते हैं:

  • हाथों और पैरों में झुनझुनी,
  • संतुलन बनाए रखने में कठिनाई,
  • दिल की धड़कन का तेज होना,
  • दिल की धड़कन का अनियमित होना,
  • उलझन (Confusion),
  • डिमेंशिया (मनोभ्रंश),
  • थकान,
  • मांसपेशियों में कमजोरी,
  • त्वचा पीली पड़ना, (और पढ़ें - त्वचा जीवाणु संक्रमण)
  • साँस फूलना,
  • पैर, हाथ, बांहों और टांगों में झुनझुनी, सुन्नता और जलन का अनुभव,
  • भूख कम लगना, इत्यादि।

अगर डॉक्टरों को लगता है कि आपको पर्निशियस एनीमिया है, तो भी यह टेस्ट किया जा सकता है। जब लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होने लगती है, तो उस स्थिति को पर्निशियस एनीमिया कहा जाता है। यह तब होता है, जब आंतें विटामिन बी12 को अवशोषित नहीं कर पाती, जो कि लाल रक्त कोशिकाएं बनने के लिए आवश्यक होता है। इसके लक्षण अक्सर 30 साल से कम उम्र के लोगों में नहीं देखे जाते। इसके लक्षणों में निम्नलिखित शामिल है:

विटामिन बी12 टेस्ट क्या होता है?

विटामिन बी12 टेस्ट की मदद से खून में विटामिन बी12 की मात्रा को मापा जाता है। जब स्वास्थ्य जांच या एनीमिया के मूल्यांकन करने के लिए कम्पलीट ब्लड काउंट (CBC) और/या ब्लड स्मीयर (Blood Smear) किया जाता है तो उस दौरान विटामिन बी12 टेस्ट भी किया जा सकता है। ये बड़ी लाल रक्त कोशिकाओं की उपस्थिति में लाल रक्त कोशिकाओं के निम्न स्तर का संकेत देते हैं। विशेष रूप से मीन कोरपुसकुलर वॉल्यूम (MCV) का उच्च स्तर यह संकेत देता है कि लाल रक्त कोशिकाओं का आकार बढ़ गया है।

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विटामिन बी12, सामान्य लाल रक्त कोशिकाओं, ऊतक, कोशिका संबंधी मरम्मत और डीएनए संश्लेषण बनने के लिए आवश्यक होती है। इसके साथ ही साथ विटामिन बी 12 तंत्रिका स्वास्थ्य और कोशिका विभाजन (Cell Division) के लिए भी महत्वपूर्ण है, जैसे गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का तेजी से बढ़ना। विटामिन बी 12 की कमी के कारण मैक्रोसाइटिक एनीमिया विकसित हो सकता है, जिसमें आकार में बड़ी और संख्या में कम लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन होने लगता है।

विटामिन बी12 की कमी के कारण न्यूरोपैथी के कई बदलाव हो सकते हैं और नसों की क्षति, रोगी के हाथों और पैरों में झुनझुनी और सुन्नता पैदा कर सकती है।

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विटामिन बी12 टेस्ट क्यों किया जाता है?

यह परीक्षण सीरम (खून का तरल भाग) में विटामिन बी 12 के संकेंद्रण को मापता है। विटामिन बी12 भी कोबालामिन (Cobalamin) के रूप में भी जाना जाता है। विटामिन बी 12 और फोलेट दोनों विटामिन बी कॉंप्लैक्स ग्रुप के हिस्से हैं और खाद्य पदार्थों द्वारा प्राप्त किए जाते हैं। विटामिन बी12 पशु उत्पादों में पाया जाता है, जैसे लाल मांस, मछली, मुर्गी, दूध और अंडे आदि। इससे संबंधित टेस्ट निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है:

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  • विटामिन बी12 की कमी से होने वाले एनीमिया की जांच करना। कुछ लोगों के लिए एनीमिया विकसित होने के कई जोखिम कारक हो सकते हैं, जैसे उन लोगों के लिए जिनके पेट या आंतों की सर्जरी हुई है, छोटी आंत संबंधी समस्या है या जिन लोगों के परिवार में पहले भी किसी को एनीमिया हो चुका है।
  • कुछ निश्चित प्रकार के एनीमिया का परीक्षण करने के लिए, जैसे मेगालोब्लास्टिक एनीमिया।
  • डिमेंशिया या तंत्रिका तंत्र के लक्षणों के कारण का पता लगाने के लिए, तंत्रिका तंत्र के लक्षण जैसे हाथों और पैरों में झुनझुनी और सुन्नता महसूस होना। (Peripheral Neuropathy)
  • अगर किसी व्यक्ति में एट्रोफिक गैस्ट्राइटिस (Atrophic Gastritis) की जांच की गई है, तो उसके बाद उसमें पर्निसियस एनीमिया (विटामिन बी12 की कमी के कारण होने वाले एनीमिया) की जांच करने के लिए भी विटामिन बी12 टेस्ट किया जा सकता है।
  • जिन लोगों में कुपोषण या कुअवशोषण के लक्षण दिखाई देते हैं उन लोगों में सामान्य स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति जानने के लिए विटामिन बी12 का इस्तेमाल अन्य वर्गीकृत टेस्टों के साथ संयोजन के रूप में किया जा सकता है। यह टेस्ट कई लक्षणों के आधार पर किए जाते हैं, जैसे शराब की लत, लिवर के रोग, गैस्ट्रिक कैंसर या वे लोग जिनको कुपोषण की समस्या है (जैसे, सेलिएक रोग, आंतों में सूजन संबंधी रोग और सिस्टिक फाइब्रोसिस)
  • जिन लोगों में विटामिन बी12 का इलाज हो रहा है, उनमें इलाज के प्रभाव पर नज़र रखने के लिए भी विटामिन बी12 टेस्ट किया जाता है। यह विशेष रूप से उनके लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो लोग विटामिन बी12 को पूरी तरह से अवशोषित नहीं कर पाते और उनका उपचार जिंदगीभर चलता है। 

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विटामिन बी12 टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?

विटामिन बी12 का टेस्ट करवाने से 6 या 8 घंटे पहले तक कुछ  खाएं या पिएं नहीं।

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कुछ प्रकार की दवाएं भी हैं, जो इस टेस्ट के रिजल्ट में हस्तक्षेप कर सकती हैं। अगर आप कुछ दवाएं ले रहे हैं, तो उनके बारे में डॉक्टर से बात करें, अगर वे दवाएं डॉक्टर छोड़ने के लिए कहें तो उन दवाओं को ना लें। बिना डॉक्टर के कहे किसी भी दवाई को लेना बंद ना करें।

कुछ दवाएं जो टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं उनमें निम्नलिखित शामिल है:

  • कोलचिसिन (Colchicine)
  • नियोमाइसिन (Neomycin)
  • पैरा-अमीनोसिलीसिलिक एसिड (Para-aminosalicylic acid)
  • फ़िनाइटोइन (Phenytoin)

विटामिन बी 12 टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?

इसके बाद सुई निकाल ली जाती है और सुई वाली जगह पर रुई का टुकड़ा लगा दिया जाता है, ताकि खून बहने से रोका जा सके। सुई वाली जगह पर एक छोटा सा निशान या नीला पड़ सकता है।

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विटामिन बी 12 टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं?

इसमें खून निकालने से संबंधी कुछ मामूली जोखिम जुड़े होते हैं। नसें व धमनियां हर व्यक्ति की अलग-अलग आकार की हो सकती हैं, यहां तक की एक तरफ से दूसरे तरफ की नसों व धमनियों का आकार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए खून निकालने के प्रक्रिया किसी के लिए आसान तो किसी के लिए कठिन व दर्द भरी हो सकती है।

खून आने के साथ जुड़े अन्य जोखिम मामूली हो सकते हैं, लेकिन उनमें निम्न शामिल होते हैं:

  • अत्याधिक खून बहना
  • बेहोशी या सिर घूमने जैसा महसूस करना (और पढ़ें - चक्कर आने के मुख्य कारण)
  • हेमाटोमा (त्वचा के नीचे खून जमा होना)
  • संक्रमण (त्वचा में सुई से छेद होने के कारण संक्रमण के भी कुछ जोखिम हो सकते हैं)
  • अगर टेस्ट के बाद बांह में दर्द हो रहा है या सूजन आ गई है, तो इस बारे में डॉक्टर को बताएं।
  • अगर आपको खून बहने संबंधी कोई विकार है तो टेस्ट करवाने से पहले ही डॉक्टर को इस बारे में बता दें। अगर आपको खून का थक्का जमने संबंधी समस्या है या पहले थी, तो इस बारे में भी डॉक्टर को जानकारी जरूर दें। जहां पर सुई लगाई जाती है, वहां से थोड़ी मात्रा में खून निकलना संभव है।

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विटामिन बी12 टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

सामान्य स्तर:

विटामिन बी12 का सामान्य स्तर 200 से 900 पिकोग्राम प्रति मिलिलीटर (pg/mL) होता है।

निम्न स्तर:

  • विटामिन बी12 के निम्न स्तर का मतलब आपको विटामिन बी12 की कमी का एनीमिया (Vitamin B12 Deficiency Anemia) हो सकता है। यह विटामिन बी12 को अवशोषित ना कर पाने की समस्या के कारण हो सकता है (Pernicious Anemia)।
  • शरीर में विटामिन बी12 का निम्न स्तर कम होने का कारण कई परिस्थितियां हो सकती हैं, जैसे पेट का कुछ भाग या पूरा आमाशय शरीर से बाहर निकाल देना (Gastrectomy), गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी और अन्य सर्जरी जिनकी मदद से छोटी आंत का वह हिस्सा निकाला जाता है, जहां पर विटामिन बी12 को अवशोषित किया जाता है (Terminal Ileum)।
  • विटामिन बी12 के निम्न स्तर का मतलब एक परजीवी संक्रमण भी हो सकता है, जिसे टेपवार्म (Tapeworm) कहा जाता है।
  • बहुत ही कम मामलों में विटामिन बी12 का स्तर कम होने का मतलब यह भी हो सकता है कि व्यक्ति अपने खाद्य पदार्थ में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी12 प्राप्त नहीं कर पा रहा।
  • इसका निम्न स्तर हाइपरथायराइडिज़्म या फोलिक एसिड की कमी से होने वाले एनीमिया से भी जुड़ा हो सकता है।
  • खून में प्रोटीन का उच्च स्तर जैसे कि मल्टीपल मायलोमा, विटामिन बी12 में कमी दिखा सकता है।

उच्च स्तर:

  • विटामिन बी12 का उच्च स्तर लिवर के रोगों (सिरोसिस या हेपेटाइटिस), और कुछ प्रकार के ल्यूकेमिया के कारण हो सकता है। लेकिन विटामिन बी12 टेस्ट का इस्तेमाल आमतौर पर इन समस्याओं की जांच करने के लिए नहीं किया जाता।
  • बहुत ही कम मामलों में विटामिन बी12 का उच्च स्तर डायबिटीज के मरीजों या मोटापे से ग्रस्त लोगों में भी पाया जाता है।