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फेनीटोइन टेस्ट क्या है?

फेनीटोइन एक ड्रग है जो कि दौरे और मिर्गी के इलाज में प्रयोग किया जाता है। ये दौरे निम्न प्रकार के हो सकते हैं :

  • जनरलाइज्ड टॉनिक-क्लोनिक सीजर - जिसमें होश में न रहना और मांसपेशियों का हिलना या झटके लेना आदि शामिल है।
  • काम्प्लेक्स फोकल सीजर - मस्तिष्क के एक हिस्से में शुरू होता है और व्यक्ति उलझन में आ जाता है या घबरा जाता है।

फेनीटोइन दवा का प्रयोग न्यूरोसर्जरी के दौरान या इसके बाद होने वाले दौरे के इलाज में भी किया जाता है।

हालांकि इस दवा में नैरो थेराप्यूटिक रेंज होती है। जिस मात्रा में प्रभावशीलता का पता चलता है उसे नैरो थेराप्यूटिक रेंज कहते हैं। यदि फेनीटोइन की खुराक बहुत अधिक है तो इससे फेनीटोइन की विषाक्तता हो सकती है और यदि बहुत कम है तो व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ सकते हैं।

फेनीटोइन टेस्ट रक्त में फेनीटोइन की सही मात्रा की जांच करने के लिए किया जाता है ताकि आपके लिए एक सही खुराक निश्चित की जा सके।

  1. फेनीटोइन टेस्ट क्यों किया जाता है - Phenytoin Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. फेनीटोइन टेस्ट से पहले - Phenytoin Test Se Pahle
  3. फेनीटोइन टेस्ट के दौरान - Phenytoin Test Ke Dauran
  4. फेनीटोइन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Phenytoin Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

फेनीटोइन टेस्ट क्यों किया जाता है?

फेनीटोइन टेस्ट करने की सलाह मिर्गी के मरीजों को नियमित रूप से दी जाती है, ताकि इलाज के लिए जरूरी खुराक की मात्रा पर नजर रखी जा सके। यह टेस्ट इंट्रावेनस (ड्रिप द्वारा) ड्रग के एक घंटे बाद या टेबलेट लेने के चौबीस घंटे बाद करवाने के लिए कहा जा सकता है।

इसके अलावा जो लोग फेनीटोइन थेरेपी के प्रति ठीक तरह से प्रतिक्रिया नहीं करते हैं (जिन्हें दवा लेने पर भी दौरे पड़ रहे हों) या वे जिनमें फेनीटोइन की विषाक्तता के लक्षण दिखाई दे रहे हों।

फेनीटोइन की विषाक्तता के निम्न लक्षण हैं :

रक्त में फेनीटोइन के स्तर निम्न स्थितियों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं :

  • कुछ निश्चित प्रकार की दवाएं लेने पर
  • फेनीटोइन के मेटाबोलिज्म के लिए एंजाइम सेचुरेशन होने से रक्त में इसकी मात्रा बढ़ जाती है या विषाक्तता हो जाती है। ऐसा खुराक के थोड़ा सा बढ़ने से भी हो जाता है।
  • एल्ब्यूमिन का स्तर कम होना, जिसके कारण एल्ब्यूमिन से बंधा हुआ फेनीटोइन कम होगा और फ्री एक्टिव फेनीटोइन की मात्रा बढ़ जाएगी
  • किसी दवा का साइड इफेक्ट होने से

दवा का सही प्रभाव प्राप्त करने के लिए रक्त में फेनीटोइन के स्तर की उचित रूप से जांच करते रहना आवश्यक होता है।

फेनीटोइन टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती। यदि आप कोई अन्य दवा लेना शुरू करते हैं या पहले से ली जा रही दवा की खुराक में अचानक बदलाव करते हैं तो फेनीटोइन के स्तर प्रभावित हो सकते हैं। इसमें निम्न दवाएं शामिल हैं :

शराब के सेवन से भी रक्त में फेनीटोइन के स्तर बढ़ जाते हैं। कोई भी नई दवा शुरू करने से पहले डॉक्टर से पूछ लें कि आप किसी अन्य दवा के संपर्क में आए हैं या नहीं।

फेनीटोइन टेस्ट कैसे किया जाता है?

डॉक्टर आपकी बांह की नस में सुई लगाकर रक्त की थोड़ी सी मात्रा ले लेंगे। यह एक छोटी सी प्रक्रिया है जिसमें कुछ मिनट का समय लगता है। 

यह एक प्रकार का ब्लड टेस्ट है, जिससे निम्न जोखिम जुड़े हो सकते हैं:

  • रक्त स्राव होना
  • नील पड़ना
  • चक्कर आना
  • संक्रमण होने की आशंका

फेनीटोइन टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

सामान्य परिणाम

फेनीटोइन के रक्त में सामान्य थेराप्यूटिक स्तर बच्चों और वयस्कों में 10-20 mcg/mL हैं और नवजात शिशुओं में ये स्तर 8-15 mcg/mL होते हैं।

मिर्गी के मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर दवा की खुराक निश्चित करेंगे। 

असामान्य परिणाम

यदि फेनीटोइन का स्तर सामान्य से कम या अधिक है, तो इसे असामान्य माना जाता है, जिसे नेगेटिव रिजल्ट के रूप में लिखा जाता है। सामान्य से कम वैल्यू होने पर व्यक्ति को दौरे पड़ सकते हैं। यदि ड्रग  का स्तर सामान्य से अधिक है तो फेनीटोइन विषाक्तता हो सकती है। 

हालांकि, टेस्ट के परिणाम निम्न कारणों से अलग आ सकते हैं :

  • आपकी उम्र 
  • स्वास्थ्य संबंधी पिछली स्थिति
  • आपका लिंग
  • टेस्ट के लिए प्रयोग किया गया तरीका

डॉक्टर टेस्ट के परिणामों की जांच करके तथा आप किस तरह से दवा पर प्रतिक्रिया कर रहे हैं यह जानकर वे थेरेपी की खुराक निश्चित करेंगे।

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