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एट्रियल फाइब्रिलेशन - Atrial Fibrillation in Hindi

Dr. Nabi Darya Vali (AIIMS)MBBS

October 31, 2020

October 31, 2020

कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!
एट्रियल फाइब्रिलेशन
सुनिए कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!

एट्रियल फाइब्रिलेशन, हृदय अतालता या अनियमित दिल की धड़कन का एक प्रकार है। यह एक ऐसी स्थिति जो हृदय की असामान्य धड़कन द्वारा चिह्नित होती है जिसमें धड़कन अचानक ही असामान्य रूप से तेज हो जाती है जिसे टैकीकार्डिया भी कहते हैं। एट्रियल फाइब्रिलेशन को AF या AFib के तौर पर भी जाना जाता है। 

सामान्य तौर पर आराम की स्थिति में वयस्कों की हृदय गति 60 से 100 बीट प्रति मिनट होती है। लेकिन एट्रियल फाइब्रिलेशन की स्थिति में जब मरीज आराम की स्थिति में होता है तब भी उसकी हृदय गति इससे कहीं अधिक हो सकती है। हृदय गति में होने वाले इस परिवर्तन को मरीज की कलाई या गर्दन में पल्स की जांच करके देखा जा सकता है। किसी व्यक्ति में एट्रियल फाइब्रिलेशन की स्थिति हृदय रोग से जुड़े कई तरह के जोखिम जैसे- खून के थक्के जमना, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर को भी बढ़ा सकती है। 

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एट्रियल फाइब्रिलेशन स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ाता है : जब हार्ट बीट सामान्य होती है तो हृदय संकुचित होकर अपने सामान्य साइज में वापस आ जाता है लेकिन एट्रियल फाइब्रिलेशन की स्थिति में हृदय का ऊपरी कक्ष- जिसे एट्रिया के रूप में जाना जाता है- अनियमित रूप से धड़कने लगता है जिससे खून का सामान्य प्रवाह बाधित होता है। यह स्थिति खून में थक्का जमने की स्थिति का कारण बन सकती है, और इस तरह का खून का कोई एक थक्का बड़ी आसानी से रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकता है और धमनी में फंस सकता है, जिससे स्ट्रोक हो सकता है।

अमेरिकन हार्ट इंस्टिट्यूट के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि करीब 15 से 20 प्रतिशत लोग जो स्ट्रोक से पीड़ित होते हैं, उनमें एट्रियल फाइब्रिलेशन की भी समस्या होती है। इस बारे में अब तक कई अध्ययन हुए हैं जिससे यह पता चलता है कि दुनियाभर में एट्रियल फाइब्रिलेशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में, हालांकि अधिकांश अध्ययनों ने हृदय वाल्व रोग और क्रॉनिक हार्ट कंडिशन की व्यापकता पर ही ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन महामारी विज्ञान से जुड़े विभिन्न अध्ययनों के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में एट्रियल फाइब्रिलेशन के मामलों की संख्या वैश्विक औसत से काफी अधिक है।

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विकासशील देशों में लगभग 1-1.5% आबादी को एट्रियल फाइब्रिलेशन से पीड़ित बताया गया है- यह कार्डियक हृदय अतालता का सबसे आम रूप है। हृदय अतालता के अन्य प्रकार हैं:

  • एट्रियल स्पंदर (फ्लटर)
  • प्रीमैच्योर वेन्ट्रिक्यूलर कॉन्ट्रैक्शन्स
  • वेन्ट्रिक्यूलर टैकीकार्डिया
  • सुप्रावेन्ट्रिक्यूलर टैकीकार्डिया
  • वेन्ट्रिक्यूलर फाइब्रिलेशन
  • लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम

भारतीय आबादी के बीच एट्रियल फाइब्रिलेशन के बोझ के सटीक आंकड़ों की कमी के बावजूद, अधिकांश अध्ययनों से पता चला है कि भारत में इस बीमारी से पीड़ित रोगियों की औसत आयु पश्चिमी देशों में अध्ययन की गई जनसंख्या की तुलना में लगभग 10 साल कम है।

एट्रियल फाइब्रिलेशन के लक्षण - Atrial Fibrillation Symptoms in Hindi

कुछ मरीजों में बीमारी से जुड़े कोई भी लक्षण उपस्थित नहीं होते हैं इसलिए उन्हें महसूस नहीं होता कि वे एट्रियल फाइब्रिलेशन की समस्या से कब से पीड़ित हैं। अन्य रोगियों में इनमें से कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं:

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एट्रियल फाइब्रिलेशन के कारण - Atrial Fibrillation Causes in Hindi

पहले से मौजूद हृदय रोग या हृदय के कार्यों में होने वाला किसी तरह का नुकसान एट्रियल फाइब्रिलेशन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हो सकता है। इसमें निम्नलिखित कारण शामिल हैं:

उम्र बढ़ने की प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण बुजुर्गों में इस बीमारी का अधिक प्रचलन देखने को मिलता है। इसके अतिरिक्त, आबादी का कुछ हिस्सा ऐसा भी है जिसे एट्रियल फाइब्रिलेशन के उच्च जोखिम में माना जाता है। इसमें मुख्य रूप से यूरोपीय वंश या उत्पत्ति के लोगों के साथ ही स्लीप ऐप्निया जैसी नींद संबंधी बीमारी से पीड़ित लोग शामिल हैं।  कुछ मामलों में, एट्रियल फाइब्रिलेशन को आनुवांशिकी यानी जेनेटिक्स के साथ भी जुड़ा हुआ माना जाना जाता है।

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एट्रियल फाइब्रिलेशन से बचाव के उपाय - Prevention of Atrial Fibrillation in Hindi

एट्रियल फाइब्रिलेशन की रोकथाम में मोटे तौर पर खुद की बेहतर देखभाल शामिल है। इसका मतलब है एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करना, भोजन से जुड़ी अपनी आदतों का ध्यान रखना और धूम्रपान और शराब पीने जैसी आदतों से दूर रहना। डॉक्टर द्वारा नियमित रूप से अपनी जांच करवाते रहने से भी आपको भविष्य में होने वाली जटिलताओं को रोकने और अपने हृदय की सेहत की अधिक बारीकी से निगरानी करने में मदद मिल सकती है।

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एट्रियल फाइब्रिलेशन का निदान - Diagnosis of Atrial Fibrillation in Hindi

जो लोग अपने हृदय स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हैं उन्हें डॉक्टर के पास जाने में देर नहीं करनी चाहिए। अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी महसूस हो जैसे- दिल की धड़कन का तेज होना या हाल के दिनों में या पहले कभी सिर घूमने या चक्कर आने की परेशानी रही हो तो डॉक्टर से अपनी जांच करवाने में ही समझदारी है। डॉक्टर आमतौर पर आपकी शारीरिक जांच करने के साथ ही मेडिकल इतिहास के बारे में और उन लक्षणों के बारे में पूछते हैं जिसका अनुभव आप कर रहे हों। शारीरिक परीक्षण के दौरान पल्स की जांच करना, ब्लड प्रेशर और श्वास की जांच करना शामिल है। इसके अलावा इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) जैसे टेस्ट भी किए जाते हैं ताकि एक निश्चित अवधि में हृदय के व्यवहार को समझने में मदद मिल सके।

अगर इन परीक्षणों में से किसी में भी एट्रियल फाइब्रिलेशन की उपस्थिति नहीं दिखती है, तो डॉक्टर आगे कुछ टेस्ट करने की सिफारिश कर सकते हैं, जैसे कि- एक या दो दिन के लिए पोर्टेबल हार्ट मॉनिटर को पहनकर रखना जो हृदय की कार्यप्रणाली को लंबे समय तक मॉनिटर करने में सक्षम होता है। अन्य परीक्षणों में एक इकोकार्डियोग्राम (इको) करना शामिल है- यह एक प्रकार का अल्ट्रासाउंड है जो आपके हृदय के स्वास्थ्य पर अधिक प्रकाश डालने में सक्षम होता है।

साथ ही ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह भी दी जा सकती है ताकि थायराइड फंक्शन्स और ब्लड शुगर की जांच की जा सके और साथ ही कोई और अंतर्निहित स्थिति भी जो अब तक डायग्नोज न हो पायी हो लेकिन एट्रियल फाइब्रिलेशन के लिए जिम्मेदार हो। 

एट्रियल फाइब्रिलेशन का उपचार - Atrial Fibrillation Treatment in Hindi

बीमारी की डिग्री यानी गंभीरता के आधार पर अलग-अलग तरीके हैं जिससे मरीज में एट्रियल फाइब्रिलेशन का इलाज किया जा सकता है। इसमें निम्नलिखित चीजें शामिल हैं :

  • हृदय की गति और लय को नियमित करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं (और पढ़ें- हार्ट सर्जरी जितनी ही कारगर हैं दिल से जुड़ी बीमारियों की दवाएं)
  • खून के थक्के जमने से रोकने और स्ट्रोक की आशंका को कम करने के लिए खून को पतला करने वाली दवाइयां (ब्लड थिनर्स)
  • सर्जरी : गंभीर मामलों में, सर्जरी की सलाह दी जाती है जो हृदय की मदद करता है ताकि वह खून को अधिक कुशलता के साथ पंप कर पाए
  • दवाओं की नियमित खुराक के साथ ही जीवनशैली में बदलाव करने से मरीजों को स्वस्थ होने के मार्ग पर लाने में मदद मिलती है

(और पढ़ें - बाइपास सर्जरी के बाद स्वस्थ जीवन जीने के 6 टिप्स)



एट्रियल फाइब्रिलेशन के डॉक्टर

Dr. Peeyush Jain Dr. Peeyush Jain कार्डियोलॉजी
34 वर्षों का अनुभव
Dr. Dinesh Kumar Mittal Dr. Dinesh Kumar Mittal कार्डियोलॉजी
15 वर्षों का अनुभव
Dr. Vinod Somani Dr. Vinod Somani कार्डियोलॉजी
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Dr. Vinayak Aggarwal Dr. Vinayak Aggarwal कार्डियोलॉजी
27 वर्षों का अनुभव
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एट्रियल फाइब्रिलेशन की दवा - Medicines for Atrial Fibrillation in Hindi

एट्रियल फाइब्रिलेशन के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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