myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

आजकल हर कोई ट्रेंड मे रहना चाहता है, बालों के कलर करवाने से लेकर टैटू बनवाना और अन्य फैन्सी चीजों का इस्तेमाल करना आज के दौर में एक आम फैशन बन गया है। आप चाहे किसी भी जगह जाएं, आपको हर जगह कुछ ना कुछ नया फैशन देखने को मिल सकता है।

कान छिदवाना भी एक ऐसा ट्रेंड बन गया है, जिसकी मदद से आप खुद को फैशनेबल दिखा सकते हैं, हालांकि कान छिदवाना हमेशा से कई संस्कृतियों की परंपराओं का हिस्सा रहा है। कान छिदवाने से कई प्रकार के जोखिम भी जुड़े होते हैं, खासतौर पर ऐसे मामलों जब कान को ठीक तरीके से ना छिदवाया गया हो तो मुश्किल ज्यादा बढ़ जाती है। 

कुछ छोटी-छोटी बातें हैं जिन पर ध्यान ना देने से कान के छेद में संक्रमण हो सकता है, जैसे कान में पहने जाने वाले आभूषणों और कान में छेद करने वाले उपकरणों को इस्तेमाल करने से पहले साफ व कीटाणुरहित बनाना और कान छिदवाने के बाद उसकी देखभाल ना करना आदि। यदि कान के छेद में गंभीर रूप से संक्रमण हो जाता है, तो इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। 

काफी लोगों को कान छिदवाने से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में पता होता है, लेकिन फिर भी यह प्रक्रिया इतनी आम है कि इसको अनदेखा किया जा सकता है। आपको यह भी लग रहा होगा कि जो लोग कान में छेद करते हैं, उनको इसके जोखिमों के बारे में पता होगा लेकिन आपको बता दें कि ऐसा जरूरी नहीं होता। इसलिए कान में छेद करने वाली सुई को अच्छे से चेक कर लें और सुनिश्चित कर लें कि वह स्वच्छ व कीटाणुरहित हो। 

इस लेख में कान के छेद में होने वाला इन्फेक्शन क्या है, कैसे होता है और इससे कौन से लक्षण होते हैं आदि के बारे में जानकारी दी गई है। इतना ही नहीं, इस आर्टिकल में कान के छेद में होने वाले संक्रमण की रोकथाम, बचाव व इसका इलाज कैसे करें आदि के बारे में भी जानकारी दी गई है। यदि आप भी कान के छेद में संक्रमण से संबंधित जानकारी चाहते हैं, तो आप सही जगह आए हैं चलिए आपको बताते हैं।

(और पढ़ें - कान में संक्रमण का इलाज)

  1. कान के छेद में संक्रमण के लक्षण क्या हैं - Symptoms of Infected Ear Piercing in Hindi
  2. कान के छेद में संक्रमण के कारण व जोखिम कारक - Causes and Risk Factors of Infected Ear Piercing in Hindi
  3. कान के छेद में संक्रमण से बचाव - Prevention of Infected Ear Piercing in Hindi
  4. कान के छेद में संक्रमण का इलाज - Infected Ear Piercing treatment in Hindi

कान के छेद में संक्रमण होने के क्या लक्षण होते हैं?

सबसे पहले कान के छेद में संक्रमण के लक्षणों के बारे में जानना जरूरी होता है, तभी तो आप यह पता लगा पाएंगे कि आपको संक्रमण हुआ है। लक्षणों का पता लगाकर ही आप इस समस्या से छुटकारा पाने और इसका इलाज करने में सफल हो पाएंगे। नीचे कुछ लक्षणों के बारे में बताया गया है, जो कान में संक्रमण होने का संकेत देते हैं:

  • कान के छेद के आस-पास लालिमा होना
  • छेद के आस-पास सूजन हो जाना
  • कान के छेद में तेज दर्द होना
  • छेद से पस या मवाद निकलना
  • बुखार होना

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

वैसे कान के छेद में संक्रमण होने पर इसका इलाज घर पर भी किया जा सकता है, लेकिन अगर घरेलू उपायों से इस स्थिति में सुधार ना हो पाए तो डॉक्टर की मदद ले लेना बेहतर होता है। कुछ स्थितियां होती हैं, जिनमें डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है और यदि हम डॉक्टर के पास जाने में देरी कर देते हैं तो ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं।

नीचे कुछ लक्षणों के बारे में बताया गया है, यदि आपको उनमें से एक भी महसूस हो रहा है तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर की मदद ले लेनी चाहिए:

  • घरेलू उपचार करने के बाद दो दिन तक भी इन्फेक्शन कम ना होना
  • तेज बुखार होना (और [पढ़ें - तेज बुखार होने पर क्या करें)
  • छेद से लगातार पस निकलना
  • दिन प्रति दिन सूजन बढ़ती जाना
  • कान के छेद से खून आना

डॉक्टर छेद में बने हुऐ मवाद को निकालने में आपकी मदद कर सकते हैं, क्योंकि बढ़ते हुए संक्रमण को कंट्रोल करने के लिए मवाद को निकालना जरूरी होता है। संक्रमण शरीर के किसी अन्य हिस्से में फैलने से रोकने के लिए डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक दवाओं की टेबलेट व क्रीम आदि दे सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में जिनमें संक्रमण कार्टिलेज तक फैल जाता है, ऐसी स्थिति में संक्रमण को कंट्रोल करने के लिए संक्रमित कार्टिलेज को निकालना पड़ सकता है। 

(और पढ़ें - कान में दर्द के लक्षण)

कान के छेद में संक्रमण कैसे होता है?

कान में छेद करने वाला उपकरण कान के एक हिस्से में छेद करते हुऐ अंदर घुसता है और दूसरी तरफ निकल जाता है, इस प्रक्रिया में उस हिस्से में खुला घाव बन जाता है। यह घाव त्वचा के किसी भी हिस्से में हुऐ एक सामान्य घाव की तरह ही होता है, तो धीरे-धीरे ठीक होने लग जाता है। घाव के अपने आप ठीक होने की प्रक्रिया एक जटिल तंत्र के दौरान होती है।

इस प्रक्रिया को कई प्रकार के केमिकल घटक, प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया और घाव के लिए स्वस्थ वातावरण की आवश्यकता पड़ती है। यदि उपरोक्त जरूरतों में किसी प्रकार की कमी या बदलाव है, तो घाव के प्राकृतिक रूप से ठीक होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। 

  • वातावरण में ऐसे काफी सारे सूक्ष्मजीव होते हैं, जिनके कारण खुले घाव में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। यदि आप घाव की ठीक तरीके से देखभाल नहीं कर पा रहे हैं, तो वातावरण में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव घाव में चले जाते हैं और संक्रमण पैदा कर देते हैं। कान के छेद में संक्रमण ज्यादातर मामलों में बैक्टीरिया के कारण होता है, जैसे स्ट्रेप्टोकॉकस और स्टैफिलोकॉकस आदि। 
  • कान में छेद करने के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण भी कान के छेद में संक्रमण होने का एक मुख्य कारण होता है। यदि कान में छेद करने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले उपकरण को ठीक तरीके से कीटाणुरहित नहीं किया गया है, तो उस पर मौजूद बैक्टीरिया कान में छेद करने के दौरान अंदर रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में छेद का घाव ठीक होने में काफी समय लगता है और इन्फेक्शन भी हो सकता है।
  • कान में छेद करना एक प्रकार की छोटी सी सर्जिकल प्रक्रिया होती है। इसलिए जो लोग कान में छेद करते हैं, उनके लिए पूरी तरह से साफ-सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। छेद करने के दौरान कीटाणुरहित उपकरण को ठीक तरीके से ना पकड़ने, कीटाणुरहित दस्ताने ना पहनने या कान में छेद करने के दौरान उचित रूप से स्वच्छता ना अपनाने से बैक्टीरिया आसानी से घाव के अंदर पहुंच जाते हैं और संक्रमण पैदा कर देते हैं। (और पढ़ें - कान के पर्दे में छेद का इलाज)
  • यदि कान के छेद वाली जगह पहले से ही सोरायसिस या डर्मेटाइटिस जैसे त्वचा संबंधी किसी रोग से ग्रस्त है, तो ऐसे में संक्रमण होने के जोखिम अत्यधिक बढ़ जाते हैं। जिन लोगों को हार्ट वाल्व से संबंधित रोग है उनको कान में छेद नहीं करवाना चाहिए, क्योंकि इन्फेक्शन होने से उनकी स्थिति अत्यधिक गंभीर हो सकती है। इतना ही नहीं हार्ट वाल्व संबंधी रोगों से ग्रस्त लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक से काम नहीं कर पाती, इसलिए इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • कभी-कभी अच्छी तरह से देखभाल करने के बावजूद भी इन्फेक्शन से बचाव करना मुश्किल हो जाता है। वैसे बैक्टीरिया भी इतने कमजोर नहीं होते और जीवित रहने का एक भी मौका नहीं चूकते हैं। ऐसे मामलों में कान छिदवाने के बाद छेद की ठीक तरह से देखभाल करना, घाव को जल्दी ठीक करने के लिए बहुत जरूरी होता है।

(और पढ़ें - त्वचा रोग का कारण)

कान के छेद में संक्रमण की रोकथाम कैसे करें?

जब कान में किये गए छेद में संक्रमण हो जाता है तो उसे फैलने से रोकने व खत्म करने के लिए जल्द से जल्द कुछ विशेष उपाय करना बहुत जरूरी होता है। कान के छेद में संक्रमण को कम करने या उसका इलाज करने से पहले ऐसे उपायों के बारे में जानना जरूरी है, जो संक्रमण पैदा होने से पहले ही बचाव कर सके। 

लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसे कौन से तरीके हैं, जिनकी मदद से पहली बार में कान के छेद में संक्रमण होने से बचाव किया जा सकता है। आमतौर पर जो व्यक्ति कान में छेद करते हैं, वे छेद करने के बाद आपको कुछ निर्देश देंगे जिनका सावधानीपूर्वक पालन करना चाहिए। हालांकि कुछ तरीके, उपाय बताए गए हैं, जो कान के छेद में संक्रमण होने से रोकथाम कर सकते हैं:

  • कान के छेद को सूखा रखें। नहाने के बाद या कान के छेद को साफ करने के बाद उसे सूखी रुई या टिश्यु पेपर से धीरे-धीरे पोंछ लें। 
  • गंदे या बिना धुले हाथों से कान के छेद को ना छुएँ। यदि आपको किसी वजह से कान के छेद को छूना है और आपको लगता है कि आपके हाथ गंदे हैं, तो अपने हाथों को पहले अच्छे से धो लें।
  • यदि आवश्यकता ना हो तो कान के छेद को छूना नहीं चाहिए क्योंकि कान के छेद पर बने घाव को दबाने या उस पर खुजली करने से संक्रमण होने के जोखिम बढ़ जाते हैं। कान के छेद में संक्रमण हो जाना एक परेशान कर देने वाली स्थिति होती है और इसे ठीक होने में भी अधिक समय लगता है।
  • नहाने के दौरान कान के छेद वाले हिस्से को धोने के लिए एंटीबैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • यदि आपने हाल ही में कान छिदवाया है या कान के छेद में अभी घाव है, तो आपको स्विमिंग आदि नहीं करनी चाहिए।
  • यदि आपका घाव साफ है तो एंटीसेप्टिक, कीटाणुनाशक, एल्कोहल वाले क्लीन्जर या टी ट्री ऑयल क्लीन्जर आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये सभी घाव को सुखा देते हैं, जिस कारण से घाव को ठीक होने में सामान्य से अधिक समय लगता है। इतना ही नहीं अपने कान की बाली को भी किसी के साथ शेयर ना करें।
  • कान छिदवाने के बाद लगातार 6 हफ्तों तक यहां तक कि रात में भी कान में बाली आदि पहन कर रखें, क्योंकि कान की बाली को जल्दी निकाल देने से कान का छेद फिर से बंद हो जाता है। छेद बंद होने के बाद बाली को फिर से पहनने से त्वचा को नुक्सान हो सकता है और नया घाव बन जाता है जिसमें संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। 
  • कान में पहनी हुई इयरिंग को दिन में 2 या 3 बार हल्के से घुमाते रहना चाहिए। ऐसा करने से कान की बाली के आस-पास की त्वचा बंद नहीं होती है। 

(और पढ़ें - कान छिदवाने के तरीके)

कान के छेद में संक्रमण का इलाज कैसे किया जाता है?

जब आपको कान के छेद में होने वाले संक्रमण के लक्षणों का पता लग जाता है, जो जल्द से जल्द उसका इलाज शुरू कर देना बहुत जरूरी होता है। समय पर इलाज शुरू कर देने से इन्फेक्शन को फैलने से रोका जा सकता है और उसे पूरी तरह से खत्म किया जाता है। यदि आप इन्फेक्शन को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, तो समय के साथ-साथ यह गंभीर होता रहता है और अंत में सेप्टीसीमिया के रूप में विकसित हो जाता है।

हालांकि सेप्टीसीमिया स्थिति गंभीर रूप से बढ़ जाने के कारण ही होता है, जबकि इन्फेक्शन का शुरूआती चरणों में ही इलाज कर दिया जाता है। इसलिए स्थिति आमतौर पर इतनी गंभीर नहीं हो पाती है। बढ़ते संक्रमण को रोकने और इससे छुटकारा पाने के लिए बहुत सारे तरीके उपलब्ध हैं। इसका इलाज घरेलू तरीकों से और ओटीसी दवाओं की मदद से किया जा सका है। 

घरेलू उपचार:

कान के छेद में हुऐ इन्फेक्शन को फैलने से रोकने और उसे कम करने के लिए उसका घर पर उपचार करना काफी अच्छा तरीका है। यदि घरेलू उपायों को ठीक तरीके से किया जाए, तो बहुत ही कम मामलों में मरीज को डॉक्टर के पास जाने या किसी प्रकार की दवाई खाने की आवश्यकता पड़ती है। कान के छेद में संक्रमण के लिए घर पर की जाने वाली देखभाल में निम्न शामिल हैं:

  • स्पर्श ना करें:
    यह कान के छेद में संक्रमण का घर पर इलाज करने के दौरान ध्यान में रखी जाने वाली और सबसे महत्वपूर्ण बात है। जब कान के छेद का घाव बन जाता है, तो उसकी तरफ ध्यान रहना काफी आम बात होती है। घाव पर ध्यान रहने पर बार-बार उसे छूने का मन भी करता है, लेकिन ऐसा करना बिलकुल भी ठीक नहीं होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बार-बार घाव को छूने से हाथों की मदद से उसमें बैक्टीरिया जाने लग जाते हैं, जिससे संक्रमण हो जाता है। इतना ही नहीं यदि आपको पहले ही संक्रमण हो गया है, तो बार-बार छूने से यह स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसलिए घाव को ना छूने की आदत डालें, ताकि वह अपने आप जल्द से जल्द ठीक हो सके।
     
  • संक्रमित जगह का साफ करें:
    यदि कान के छेद की जगह साफ व स्वच्छ है, तो उसके प्राकृतिक रूप से अपने-आप ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए अपने कान के छेद को साफ व स्वच्छ रखने के लिए आपको विशेष रूप से देखभाल रखनी चाहिए। नहाने के दौरान कान के छेद के वाली जगह का साफ करने के लिए तरल साबुना या जेल का इस्तेमाल करना चाहिए। इसकी मदद से उस जगह से कुछ बैक्टीरिया व डेड स्किन सेल्स धुल कर साफ हो जाते हैं और घाव को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है। यदि कान के छेद में मवाद बन गया है तो उसे समय-समय पर निकाल कर साफ करते रहें। पस को साफ करने के लिए आप रुई के टुकड़े या टिश्यु पेपर का इस्तेमाल कर सकते हैं। कान के छेद में बने मवाद को नंगे हाथों से ना पोंछे।
     
  • औषधीय तेल:
    संक्रमण ठीक होने की प्रक्रिया को उत्तेजित करने के लिए उस जगह से बैक्टीरिया को कम करना बहुत जरूरी होता है। कुछ प्रकार के तेल हैं, जिन्हें संक्रमित घाव पर लगाकर बढ़ते बैक्टीरिया को रोका जा सकता है।
    इन औषधीय तेलों में कुछ प्रकार के वाष्पशील पदार्थ होते हैं, जिनमें एंटीमाइक्रोबियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। ये तेल ना सिर्फ संक्रामक सूक्ष्म जीवों को खत्म करने में मदद करते हैं बल्कि घाव में संक्रमण होने से रोकने और त्वचा को फिर से बनने में मदद करता है।
    टी ट्री ऑयल, लैवेंडर का तेल और अजवाइन का तेल जैसे कुछ प्रकार के औषधीय तेल हैं जो कान के छेद में हुऐ संक्रमण को ठीक करने में मदद करते हैं। इन तेलों को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया गया है कि तेल ये स्ट्रेप्टोकॉकस और स्यूडोमोनस जैसे बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं। ये बैक्टीरिया मुख्य रूप से कान के छेद में संक्रमण का कारण बनते हैं। इन तेलों के हर संभव औषधीय प्रभावों को प्राप्त करने के लिए, आपको इन तेलों को संक्रमण वाली जगह पर लगाना जरूरी होता है। एक स्वच्छ व किटाणु रहित रुई के टुकड़े में कुछ बूंदें औषधीय तेलों की डालें और इस कान के छेद के घाव पर लगा लें। आपको दिन में कई बार यह तेल कान के छेद पर लगाने की जरूरत है और घाव धीरे-धीरे ठीक होने लग जाता है।
     
  • विटामिन C से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं:
    संक्रमण का इलाज करने के लिए उस पर दवा लगाना जितना जरूरी है उतना ही अंदर से शरीर को पोषण देना भी जरूरी है। विभिन्न प्रकार के मैक्रो और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स में विटामिन सी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन C प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में भी मदद करता है, ताकि आपका शरीर गतिशीलता से संक्रमण के साथ लड़ सके। इसके अलावा, कोलेजन एक प्रकार का त्वचा का प्रोटीन होता है, जो घाव को ठीक करने के लिए एक तंत्र तैयार करता है और कोलेजन को बनाने के लिए भी आपके शरीर को विटामिन सी की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए घाव को जल्दी से जल्दी ठीक करने के लिए विटामिन सी प्राप्त करना बहुत महत्वपूर्ण है।
    विटामिन सी प्राप्त करने के लिए अपने आहार में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करें, जिनमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जैसे खट्टे फल आदि। शरीर में विटामिन सी की कमी को पूरा करने विटामिन सी सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं। हालांकि किसी भी प्रकार के सप्लीमेंट्स लेने से पहले एक बार डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए क्योंकि ज्यादातर प्रकार के पोषक तत्व भोजन से ही प्राप्त हो जाते हैं।
    हरी पत्तेदार सब्जियां और ताजे फल खाएं जिनसे शरीर को वे सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं, जो घाव को ठीक करने में मदद करते हैं जैसे विटामिन ए, जिंक और कॉपर आदि।
     
  • सिकाई करें:
    कान के छेद में संक्रमण को ठीक करने के लिए उसकी सिकाई करना अजीब लग सकता है। हालांकि अध्ययनों में साबित हुआ है कि गर्म सिकाई करने से घाव को गर्मी प्राप्त होती है जिससे उस क्षेत्र में खून का बहाव बढ़ जाता है। घाव के क्षेत्र में खून का बहाव बढ़ने से खून मे मौजूद प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएं भी अधिक आने लगती हैं। घाव की घर पर ही सिकाई करने लिए आप किसी स्वच्छ सूती कपड़े का उपयोग कर सकते हैं। सूती कपड़े को गर्म पानी में डुबोएं और उसके साथ घाव को धीरे-धीरे साफ करें। गर्म पानी में समुद्री नमक मिलाना और अधिक लाभदायक रहता है। नमक में प्राकृतिक रूप से किटाणुनाशक गुण पाए जाते हैं, यह संक्रामक किटाणुओं को बढ़ने से रोक देता है और घाव को जल्दी ठीक होने में मदद करता है। घाव को साफ करने के बाद गीले व गर्म कपड़े के साथ घाव को हल्के से दबा लें, ऐसा करने से घाव के ठीक होने प्रक्रिया उत्तेजित हो जाती है। यह ध्यान रखें कि पानी इतना गर्म हो कि उससे सिकाई की जा सके और अत्यधिक गर्म भी ना हो क्योंकि उससे त्वचा जल सकती है। 

ओटीसी दवाएं:

कुछ दवाएं डॉक्टर की पर्ची के बिना ही मेडिकल स्टोर से मिल जाती हैं, उन्हें “ओवर द काउंटर” (ओटीसी) दवाएं कहा जाता है। घाव की घर पर देखभाल करने और कुछ प्रकार के घरेलू उपायों का इस्तेमाल करने के अलावा कभी-कभी संक्रमण के लिए कुछ अन्य इलाज करवाने पड़ सकते हैं, जैसे कुछ प्रकार की क्रीम आदि लगाना। यदि आपको लग रहा है कि संक्रमण की गंभीरता कम नहीं हो रही है, तो संक्रमण को कंट्रोल करने लिए आपको कुछ ओटीसी दवाएं भी लेनी पड़ सकती हैं। 

मेडिकल स्टोर पर काफी प्रकार की एंटीमाइक्रोबियल क्रीम व मलम मिल जाती हैं, जिनमें नियोमाइसिन होता है। घाव पर किसी भी प्रकार की क्रीम या मलम लगाने से पहले घाव को अच्छे से साफ कर लें और सुखा लें। कान के छेद वाली जगह पर क्रीम को धीरे-धीरे मलें ताकि थोड़ी बहुत क्रीम छेद के अंदर जा सके। लगातार कुछ दिनों तक रोजाना दिन में 2 से 3 बार क्रीम लगाते रहें ताकि सारे बैक्टीरिया खत्म हो जाएं। दवाई लगाने के बाद हमेशा याद से अपने हाथ धो लें। 

(और पढ़ें - जिंक की कमी के लक्षण)

और पढ़ें ...

References

  1. The Royal Children's Hospital Melbourne [internet]: Victoria State Government. Piercings
  2. Laura M Koenig, MD and Molly Carnes, MD. Body Piercing. J Gen Intern Med. PMID: 10354260
  3. American Academy of Family Physicians [Internet]. Leawood (KS); Body Piercing
  4. Irina Negut, Valentina Grumezescu, and Alexandru Mihai Grumezescu. Treatment Strategies for Infected Wounds. Molecules. 2018 Sep. PMID: 30231567
  5. The Royal Children's Hospital Melbourne [internet]: Victoria State Government. Wounds - how to care for them
  6. Cologne, Germany: Institute for Quality and Efficiency in Health Care (IQWiG); What are the treatment options for chronic wounds?
  7. Leise BS. Topical Wound Medications.. Vet Clin North Am Equine Pract. 2018 Dec. PMID: 30447767
  8. Medline plus [internet]: US National Library of Medicine; Neomycin Topical
  9. Queensland Health. Government of Queensland, Australia; Body Piercing - So you are thinking of getting a piercing
  10. American Academy of Dermatology. Rosemont (IL), US; Caring for pierced ears
  11. National Health Service [internet]. UK; Body piercing