रीढ़ की हड्डी का ट्यूमर क्या है?

आम तौर पर शरीर के दो हिस्सों को 'रीढ़ की हड्डी' के नाम से जाना जाता है -

  • मेरुदंड - यह हिस्सा सिर्फ हड्डियों का बना होता है। 
  • मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) - यह स्नायविक उत्तकों और अन्य कोशिकाओं का रस्सीनुमा हिस्सा हो जो मस्तिष्क से लेकर कमर तक गुजरता है।

मेरुनाल (स्पाइनल कनाल) या रीढ़ की हड्डियों में होने वाला ट्यूमर, स्पाइनल ट्यूमर कहलाता है। स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर को इंट्राड्यूरल ट्यूमर भी कहते हैं जो स्पाइनल कॉर्ड या ड्यूरा (स्पाइनल कॉर्ड और मस्तिष्क को ढकने वाली परत) में शुरू होता है । रीढ़ की हड्डियों (Vertebrae) में होने वाले ट्यूमर को वर्टिब्रल ट्यूमर कहते हैं। 

इंट्राड्यूरल ट्यूमर के मुख्य प्रकार :

  • इंट्रामेड्यूलरी ट्यूमर (Intramedullary tumors) - यह ट्यूमर  स्पाइनल कॉर्ड की कोशिकाओं में शुरू होता है। 
  • एक्सट्रामेड्यूलरी ट्यूमर (Extramedullary tumors) - यह ट्यूमर स्पाइनल कॉर्ड को ढंकने वाली परत या तंत्रिका मूल में होता है। हालांकि यह ट्यूमर स्पाइनल कॉर्ड के अंदर विकसित नहीं होता लेकिन यह ट्यूमर आपकी स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव डाल सकता है और अन्य समस्याएं पैदा कर इसकी कार्यक्षमता में बाधा डाल सकता है। 

शरीर के अन्य हिस्सों के ट्यूमर रीढ़ की हड्डी को संबल प्रदान करने वाली कशेरुकाओं (Vertebrae) तक फैल सकते हैं और कुछ दुर्लभ मामलों में स्पाइनल कॉर्ड को भी अपनी चपेट में ले सकते हैं।

स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर के कारण आपको काफी दर्द महसूस हो सकता है, स्नायविक समस्याएं हो सकती हैं या लकवा भी हो सकता है। स्पाइनल ट्यूमर जानलेवा हो सकता है और आपको स्थायी रूप से अपंग बना सकता है। 

(और पढ़ें - कमर दर्द के उपाय)

  1. स्पाइनल ट्यूमर के प्रकार - Types of Spinal Tumor in Hindi
  2. स्पाइनल ट्यूमर के लक्षण - Spinal Tumor Symptoms in Hindi
  3. स्पाइनल ट्यूमर के कारण - Spinal Tumor Causes and risk factors in Hindi
  4. स्पाइनल ट्यूमर का परीक्षण - Diagnosis of Spinal Tumor in Hindi
  5. स्पाइनल ट्यूमर का उपचार - Spinal Tumor Treatment in Hindi
  6. स्पाइनल ट्यूमर के जोखिम और जटिलताएं - Spinal Tumor Complications in Hindi
  7. रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर के डॉक्टर

स्पाइनल ट्यूमर कितने प्रकार के होते हैं?

स्पाइनल ट्यूमर सात प्रकार के होते हैं -

  1. अस्ट्रॉयटोमा (Astrocytoma)
  2. कॉर्डोमा (Chordoma)
  3. एपेंडीमोमा (Apendymoma)
  4. ग्लायोमा (Glioma)
  5. मेनिंजियोमा (Meningioma)
  6. न्यूरोफायब्रोमा (Neurofibroma)
  7. श्वानोमा (Schwannoma)

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी की चोट का इलाज)

रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर के क्या लक्षण होते हैं?

रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर के कई लक्षण हो सकते हैं विशेष तौर पर इसके बढ़ने के दौरान। यह ट्यूमर आपके स्पाइनल कॉर्ड, तंत्रिका मूल, रक्त नलिकाओं या आपकी रीढ़ की हड्डियों को प्रभावित कर सकता है। 

इसके लक्षण इस प्रकार से हो सकते हैं -

स्पाइनल ट्यूमर का शुरुआती लक्षण है पीठ में दर्द होना। यह दर्द आपकी पीठ से लेकर कूल्हों, टांगों, पैरों या हाथों की तरफ भी फैल सकता है और समय के साथ बढ़ता जा सकता है। 

(और पढ़ें - पैर दर्द के उपाय)

स्पाइनल ट्यूमर का प्रसार ट्यूमर के प्रकार पर निर्भर करता है।

डॉक्टर से कब संपर्क करें?

पीठ में दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं और ज्यादातर पीठ दर्द ट्यूमर के कारण नहीं होता। लेकिन स्पाइनल ट्यूमर के सफल इलाज के लिए इसका जल्द से जल्द पता लगना महत्वपूर्ण होता है इसलिए यदि निम्न किस्म का पीठ का दर्द होता है तो डॉक्टर से संपर्क करें -

  • पीठ का दर्द स्थायी हो और बढ़ता जाये 
  • दर्द का किसी दैनिक गतिविधि से कोई लेना-देना न हो 
  • रात में दर्द बढ़ जाता हो 
  • यदि आपको पहले कभी कैंसर हुआ हो और नए किस्म का पीठ का दर्द उभरा हो
  • यदि कैंसर के अन्य लक्षण भी दिखें जैसे मतली, उल्टी या चक्कर आना 

(और पढ़ें - मतली के उपाय)

 यदि ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें -

  • मांसपेशियों की कमजोरी बढ़ती जाये या अगर आपके हाथ और पैर सुन्न पड़ें
  • अगर आपकी मलत्याग प्रक्रिया या मूत्राशय की कार्यक्षमता में बदलाव दिखे

(और पढ़ें - मांसपेशियों में ऐंठन का इलाज)

स्पाइनल ट्यूमर क्यों होता है?

स्पाइनल ट्यूमर के कारण अब तक स्पष्ट नहीं है। शोधकर्ताओं का कहना है कि दोषयुक्त जीन, ट्यूमर का एक मुख्य कारण हो सकता है। लेकिन इसकी जानकारी नहीं है कि जीन में यह दोष अनुवांशिक होता है या फिर समय के साथ खुद विकसित हो जाता है। यह दोष वातावरण या किसी रसायन के संपर्क में आने की वजह से भी पैदा हो सकता है। हालांकि कुछ मामलों में स्पाइनल ट्यूमर अनुवांशिक विकारों से जुड़े होते हैं। 

स्पाइनल ट्यूमर होने के जोखिम कारक क्या हैं?

स्पाइनल ट्यूमर उन लोगों में काफी आम हैं जिन्हें ये विकार हों -

  • न्यूरोफायब्रोमैटोसिस 2 - यह एक अनुवांशिक विकार है जिसके कारण श्रवण शक्ति में मदद करने वाली तंत्रिकाओं की आस-पास ट्यूमर बनता है। इससे दोनों कानों की सुनने की क्षमता खत्म हो सकती है। न्यूरोफायब्रोमैटोसिस 2 से पीड़ित कुछ रोगीयों को स्पाइनल कनाल ट्यूमर हो सकता है।
     
  • वॉन हिपेल-लिंडॉ डिजीज - यह दुर्लभ किस्म का विकार है जो मस्तिष्क की रक्त नलिकाओं के ट्यूमर, आँख के रेटिना, स्पाइनल कॉर्ड और कई अन्य प्रकार के ट्यूमर से भी जुड़ा है। 

(और पढ़ें - आँख की बीमारी का इलाज)

स्पाइनल ट्यूमर का निदान कैसे होता है?

स्पाइनल ट्यूमर के लक्षण अक्सर नजर अंदाज हो जाते हैं क्योंकि यह आम बीमारी नहीं है। साथ ही इसके लक्षण कुछ अन्य साधारण बीमारियों से मिलते-जुलते दिखते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि डॉक्टर को आपको अब तक हुई बीमारियों के बारे में पूरी जानकारी हो और वे सामान्य शारीरिक और स्नायविक दोनों तरह की जांच करें। 

(और पढ़ें - लैब टेस्ट क्या है)

यदि आपके डॉक्टर को स्पाइनल ट्यूमर का अंदेशा होता है तो निम्न जांच से निदान की पुष्टि और ट्यूमर की जगह का पता लगाने में मदद मिल सकती है -

  • एम्.आर.आई. - एम्आरआई ऐसी तकनीक है जिसमें चुम्बकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की मदद से रीढ़ की हड्डी, स्पाइनल कॉर्ड और स्नायविक तंत्र की सटीक छवियां तैयार होती हैं। स्पाइनल कॉर्ड और उसके आस-पास की कोशिकाओं के ट्यूमर का पता लगाने के लिए एम.आर.आई. जांच को तरजीह दी जाती है। एम.आर.आई. जांच के दौरान आपके हाथ की नसों में एक घोल सुई के जरिये डाला जाता है ताकि कुछ ऊतकों और संरचनाओं की बेहतर तस्वीर मिल सके। (और पढ़ें - एचएसजी टेस्ट क्या है)
     
  • सीटी स्कैन - इस जांच में विकिरण की पतली धार के जरिये रीढ़ की हड्डी की विस्तृत छवियां तैयार की जाती हैं। इस जांच के दौरान नसों में सुई के द्वारा मिश्रण डाला जाता है ताकि स्पाइनल कॉर्ड और स्पाइनल कनाल में हुए अस्वाभाविक बदलाव बेहतर दिख सकें। हालांकि, स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर का पता लगाने के लिए इस जांच का इस्तेमाल शायद ही किया जाता है। (और पढ़ें - लेप्रोस्कोपी क्या है)
     
  • बायोप्सी - स्पाइनल ट्यूमर के प्रकार का पता लगाने का यह एक मात्र तरीका है। इसके तहत प्रभावित उत्तकों के नमूने की जांच की जाती है। बायोप्सी के नतीजे के आधार पर इलाज के विकल्प तय किये जाते हैं।

(और पढ़ें - मैमोग्राफी क्या है)

स्पाइनल ट्यूमर का उपचार क्या है?

स्पाइनल ट्यूमर के इलाज का मकसद ट्यूमर को पूरी तरह से खत्म करना होता है। लेकिन इस प्रक्रिया में मरीज के स्पाइनल कॉर्ड और उसके आस-पास के ऊतकों में स्थायी क्षति का जोखिम होता है। ट्यूमर का इलाज आपकी उम्र और शारीरिक स्थिति को ध्यान में रख कर  किया जाता है। इसके इलाज का तरीका ट्यूमर के प्रकार और इसकी अवस्थिति पर निर्भर करता है।

ज्यादातर स्पाइनल ट्यूमर का इलाज इस प्रकार किया जा सकता है -

  • निगरानी -
    स्पाइनल ट्यूमर का पता बगैर इसके स्पष्ट लक्षणों के भी लग सकता है जबकि आप किसी और तकलीफ के निदान के लिए डॉक्टर के पास गए हों। यदि छोटे ट्यूमर बढ़ नहीं रहे हैं या आस-पास के उत्तकों पर दबाव नहीं डाल रहे हैं तो उन पर नजर रखें। शायद इतने भर की जरूरत होती है। इस सतर्कता अवधि के दौरान आपके डॉक्टर समय-समय पर एम.आर.आई या सी.टी स्कैन करवाने को कह सकते हैं ताकि ट्यूमर की जांच हो सके। (और पढ़ें - ब्रेन ट्यूमर का इलाज)
     
  • ऑपरेशन -
    यदि आप ऑपरेशन के बाद स्पाइनल कॉर्ड या नसों को होनेवाली क्षति का जोखिम उठाने को तैयार हों तो ऑपरेशन एक विकल्प हो सकता है।
    गौरतलब है कि ऑपरेशन की अत्याधुनिक तकनीकें आने के बावजूद सभी किस्म के ट्यूमर को पूरी तरह से खत्म करना संभव नहीं है। यदि ऑपरेशन से ट्यूमर पूरी तरह से नहीं हटाया जा सके तो इसके बाद कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।  स्पाइनल ट्यूमर के ऑपरेशन से उबरने में कुछ हफ्ते या इससे ज्यादा समय लग सकता है। ऑपरेशन के बाद अस्थाई तौर पर संवेदन शून्यता (Loss of Sensation)  महसूस हो सकती है और खून का रिसाव (ब्लीडिंग) या स्नायविक उत्तकों क्षति जैसी भी समस्या हो सकती है। (और पढ़ें - ओवेरियन कैंसर की सर्जरी)
     
  • रेडिएशन थेरेपी -
    ऑपरेशन के बाद भी अगर आपका ट्यूमर पूरी तरह खत्म न हुआ या ट्यूमर ऐसी जगह हो जहां ऑपरेशन करना मुश्किल हो या फिर जिन ट्यूमर का ऑपरेशन करना खतरनाक हो वहां इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। रेडिएशन थेरेपी के दुष्परिणामों (साइड इफेक्ट), मसलन मतली और उलटी आदि की स्थिति में दवा से आराम मिल सकता है। (और पढ़ें - दवा की जानकारी)
     
  • कीमोथेरेपी -
    कीमोथेरेपी कई तरह के कैंसर को ठीक करने का आदर्श उपचार है। इसके तहत दवाओं के जरिये कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोका जाता है। हालांकि कीमोथेरेपी के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जैसे थकान, मतली,उलटी, संक्रमण का जोखिम बढ़ना और बालों का झड़ना। ( और पढ़ें - बाल झड़ने से कैसे रोकें)
     
  • अन्य दवाएं - ऑपरेशन और रेडिएशन थेरेपी या ट्यूमर के कारण स्पाइनल कॉर्ड सूजन आ सकती है। इसे कम करने के लिए डॉक्टर आपको कॉर्टिकोस्टेरॉइड लेने की सलाह दे सकते हैं। हालाकिं, कॉर्टिकोस्टेरॉइड का इस्तेमाल सूजन कम करने के लिए किया जाता है लेकिन डॉक्टर इसे कुछ अन्य गंभीर साइड इफेक्ट, जैसे मांसपेशियों की कमज़ोरी, ऑस्टियोपोरोसिस, हाई बी.पी,  शुगर और संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता कम करने के लिए भी दे सकते हैं। ये दवाएं आम तौर पर कम अवधि के लिए दी जाती हैं।

(और पढ़ें - bp kam karne ke upay)

स्पाइनल ट्यूमर आपकी स्पाइनल कॉर्ड की नसों पर दबाव डाल सकता है जिससे ट्यूमर से नीचे वाली जगह पर संवेदना में कमी महसूस हो सकती है। इससे मलाशय और मूत्राशय की कार्यक्षमता में भी बदलाव आ सकता है। नसों को स्थाई क्षति हो सकती है।

हालांकि शुरुआत में इसका पता लग जाए और उचित इलाज हो तो इससे आगे होने वाली क्षति रोकी जा सकती है और क्षतिग्रस्त नसों को फिर से कारगर बनाया जा सकता है। ट्यूमर किसी ऐसी जगह हुआ हो जिससे स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ रहा हो तो यह जानलेवा हो सकता है।

(और पढ़ें - मूत्राशय संक्रमण का इलाज)

Dr. Ashutosh Gawande

Dr. Ashutosh Gawande

ऑन्कोलॉजी

Dr. C. Arun Hensley

Dr. C. Arun Hensley

ऑन्कोलॉजी

Dr. Sanket Shah

Dr. Sanket Shah

ऑन्कोलॉजी

क्या आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है? सर्वेक्षण करें और दूसरों की सहायता करें

सम्बंधित लेख

और पढ़ें ...