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यदि आप एक महिला हैं और बच्चा पैदा करने की कोशिश कर रही हैं, तो शायद आपको पता होगा कि बच्चा पैदा करने के लिए शरीर के कई सारे अंदरुनी अंगों को सही तरीके से काम करना पड़ता है। आपके अंडाशय को हर महीने अंडा बनाना पड़ता है जिस प्रक्रिया को डिंबोत्सर्जन या ओवुलेशन (Ovulation) कहा जाता है। आपका गर्भाशय अच्छे आकार में होना जरूरी होता है और आपकी फैलोपियन ट्यूब (अंडे को अंडाशय से गर्भाशय तक पहुंचाने वाली एक ट्यूब) का खुला होना जरूरी होता है। 

यदि इनमें से कोई भी अंग ठीक से काम नहीं कर रहा तो आपको गर्भधारण करने में मुश्किल आ सकती है।

यदि आपकी फैलोपियन ट्यूब में रुकावट हो गई है तो वीर्य, अंडे तक नहीं पहुंच पाता या फिर निषेचित अंडा गर्भाशय तक नहीं पहुंच पाता। फैलोपियन ट्यूब रुकने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन कारण चाहे जो भी हो, डॉक्टर इसका परीक्षण हिस्टेरोसलपिंगोग्राफी (Hysterosalpingography) नामक टेस्ट से करते हैं। इसे एचएसजी टेस्ट भी कहा जाता है।

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  1. एचएसजी क्या होता है? - What is HSG (Hysterosalpingography) Test in Hindi?
  2. एचएसजी क्यों किया जाता है - What is the purpose of HSG (Hysterosalpingography) Test in Hindi
  3. एचएसजी से पहले - Before HSG (Hysterosalpingography) Test in Hindi
  4. एचएसजी के दौरान - During HSG (Hysterosalpingography) Test in Hindi
  5. एचएसजी के बाद - After HSG Test in Hindi
  6. एचएसजी के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of HSG (Hysterosalpingography) Test in Hindi
  7. एचएसजी के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of HSG (Hysterosalpingography) Test mean in Hindi

एचएसजी टेस्ट क्या होता है?

हिस्टेरोसलपिंगोग्राफी या एचएसजी टेस्ट एक प्रकार का एक्स रे टेस्ट होता है जिसकी मदद से महिलाओं के गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब की जांच की जाती है। इस टेस्ट के दौरान एक विशेष प्रकार की डाई (जिसे कॉन्ट्रास्ट डाई) को इंजेक्शन द्वारा आपके शरीर के अंदर डाला जाता है, जिससे एक्स रे करने पर फैलोपियन ट्यूब और गर्भाशय की तस्वीरें ज्यादा साफ दिखाई देती हैं। इस टेस्ट में इस्तेमाल किये जाने वाले एक्स रे के प्रकार को फ्लूरोस्कोपी (Fluoroscopy) कहा जाता है।  इसमें तस्वीर की जगह पर अंगों का वीडियो बनाया जाता है। 

जब कॉन्ट्रास्ट डाई आपके प्रजनन प्रणाली में घूमती है तो एक्स रे करने वाले डॉक्टर इस टेस्ट की मदद से उसे आसानी से देख लेते हैं। यदि फैलोपियन ट्यूब रुकी हुई है या गर्भाशय में किसी प्रकार की संरचनात्मक असामान्यता है तो इस डाई की मदद से उसका पता लग जाता है। एचएसजी टेस्ट को यूटेरोसलपिंगोग्राफी (uterosalpingography) के नाम से भी जाना जाता है। 

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एचएसजी टेस्ट किस लिए किया जाता है?

यदि आपको गर्भधारण करने में परेशानी हो रही है या गर्भावस्था से जुड़ी कोई अन्य परेशानी (जैसे कि मिसकैरेज) हो रही है तो उसके कारण का पता करने के लिए डॉक्टर आपका एचएसजी टेस्ट कर सकते हैं। एचएसजी टेस्ट, बांझपन के कारण का पता लगाने में भी मदद कर सकता है। 

बांझपन निम्न के कारण हो सकता है:

  • गर्भाशय की संरचना में असामान्यता होना, जो जन्म से भी हो सकती है और बाद में भी हो सकती है।
  • फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होना
  • गर्भाशय में "स्कार ऊतक" (scar tissue: ऊतकों पर खरोंच जैसे निशान)
  • गर्भाशय में रसौली (यूटेराइन फाइब्रॉइड्स)
  • गर्भाशय में ट्यूमर या अंदर मांस बढ़ना

यदि आपकी ट्यूबल ऑपरेशन हुआ है, तो यह पता लगाने के लिए कि ऑपरेशन सफल हुआ या नहीं, डॉक्टर एचएसजी टेस्ट करवाने को कह सकते हैं। यदि आपकी "ट्यूबल लिगेशन" (tubal ligation: एक प्रक्रिया जिसमें फैलोपियन ट्यूब को बंद किया जाता है) की गई है, तो यह पता लगाने के लिए भी एचएसजी टेस्ट किया जाता है कि ट्यूब पूरी तरह से बंद हो गई है या नहीं। ट्यूबल लिगेशन द्वारा बंद की गई फैलोपियन ट्यूब को फिर से खोलने के लिए "रिवर्सल ऑफ ट्यूब लिगेशन" (Reversal of a tubal ligation) प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है, फैलोपियन ट्यूब पूरी तरह से खुल गई है या नहीं यह जानने के लिए भी एचएसजी टेस्ट की मदद ली जाती है।

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एचएसजी टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?

कुछ महिलाओं को इस टेस्ट के दौरान दर्द होता है इसलिए डॉक्टर उनके लिए दर्द को कम करने की दवाएं लिख देते हैं। इन दवाओं को डॉक्टर टेस्ट प्रक्रिया शुरू करने से एक घंटा पहले लेने के लिए बोल सकते हैं। यदि आप टेस्ट को लेकर चिंतित हैं तो डॉक्टर आपके लिए कुछ प्रकार की सीडेटिव (Sedative) दवाएं देते हैं जिनकी मदद से आप रिलैक्स महसूस करती हैं। डॉक्टर टेस्ट से पहले और बाद में लेने के लिए कुछ एंटीबायोटिक्स दवाएं भी लिख देते हैं जो संक्रमण से बचाती हैं।

यह टेस्ट आपके मासिक धर्म खत्म होने के कुछ दिन या एक हफ्ते के बाद किया जाता है। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि आप गर्भवती नहीं हैं। साथ ही, यह संक्रमण के जोखिम को कम करने में भी मदद करता है। डॉक्टर के लिए यह जानना बहुत जरूरी होता है कि आप गर्भवती हैं या नहीं क्योंकि यह टेस्ट गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है। यदि आपको पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी) है या आपकी योनि से खून बहता है जिसके कारण का पता ना हो तो आपको यह टेस्ट नहीं करवाना चाहिए। 

जैसा कि ऊपर बताया था, इस टेस्ट प्रक्रिया में शरीर के अन्दर एक कॉन्ट्रास्ट डाई को डाला जाता है। शरीर के अंदर यह डाई जहां भी होती है एक्स रे में यह साफ-साफ दिखाई देती है जिससे एक्स रे तस्वीर में अंदरूनी अंगों की आकृति ज्यादा साफ दिखाई देती है। यह डाई अंदरुनी अंगों पर रंग नहीं छोड़ती बल्कि या तो शरीर के पानी के साथ घुल जाती है या फिर पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाती है। यदि आपको बेरियम (Barium) या कॉन्ट्रास्ट डाई से एलर्जी है तो टेस्ट प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इस बारे में डॉक्टर को बता देना चाहिए। 

किसी भी प्रकार का धातु का सामान एक्स रे मशीन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकता है। यदि आप ने लोकेट, कड़ा, आभूषण या कोई अन्य धातु पहना हुआ है तो टेस्ट शुरू होने से पहले ही डॉक्टर उनको उतारने के लिए कह सकते हैं। उतारी गई चीजों  को रखने के लिए अस्पताल में आपको जगह दे दी जाती है या आप अपने सामान को घर पर भी छोड़ कर आ सकते हैं।

एचएसजी टेस्ट कैसे किया जाता है?

टेस्ट प्रक्रिया शुरू करने के लिए आपको अस्पताल में एक गाउन दिया जाता है जिसे पहनने के बाद डॉक्टर आपको एक मेज पर पीठ के बल लेटने के लिए कह सकते हैं। मेज पर पीठ के बल लेटने के बाद आपके घुटनों को मोड़ कर पैरों को फैला दिया जाता है, बिलकुल पेल्विक परीक्षण की तरह। इसके बाद टेस्ट करने वाले डॉक्टर आपकी योनि में एक स्पेक्युलम (speculum) डालते हैं। स्पेक्युलम एक ऐसा उपकरण होता है जो योनि द्वार को फैला देता है जिससे योनि के पीछे स्थित सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) दिखाई देने लगता है। इस प्रक्रिया के दौरान आपको थोड़ी तकलीफ महसूस हो सकती है।

उसके बाद डॉक्टर सर्विक्स को साफ करते हैं और तकलीफ को कम करने के लिए उसमें सुन्न करने वाला इंजेक्शन भी लगा सकते हैं। इंजेक्शन लगाने के दौरान एक चुभन सी महसूस होती है और फिर तुरंत आराम महसूस होने लगता है। इसके बाद कैनुला (Cannula: एक सुई जैसा उपकरण) नाम के उपकरण को सर्विक्स तक भेजा जाता है और फिर स्पेक्युलम को हटा दिया जाता है। कैनुला की मदद से डॉक्टर गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब में डाई पहुंचाते हैं।

उसके बाद एक्स रे मशीन के साथ आपका एक्स रे किया जाता है। एक्स रे की प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर आपको एक-दो बार पोजीशन बदलने के लिए भी कह सकते हैं जिससे अलग-अलग दिशाओं से एक्स रे की तस्वीरे ली जा सकें। जब डाई फैलोपियन ट्यूब के अंदर से गुजरती है तो आपको उस समय थोड़ा दर्द व तकलीफ महसूस हो सकती है। जब एक्स रे हो जाता है तो कैनुला को निकाल दिया जाता है। डॉक्टर दर्द को कम करने और संक्रमण आदि होने से रोकथाम करने के लिए कुछ दवाएं लिख देते हैं जिसके बाद आपको अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है।

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एचएसजी टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?

टेस्ट होने के बाद भी तकलीफ जारी रह सकती है। यह तकलीफ पीरियड्स में दर्द के समान महसूस हो सकती है। टेस्ट के बाद आपकी योनि से डिसचार्ज या खून बह सकता है। इस समय संक्रमण से बचने के लिए आपको टैम्पोन की जगह पर सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करना चाहिए।

(और पढ़ें - योनि में इन्फेक्शन के घरेलू उपाय)

टेस्ट होने के बाद कुछ महिलाओं को चक्कर आने लगते हैं और जी मिचलाने लगता है। इस टेस्ट के साइड इफेक्ट सामान्य होते हैं और अपने आप ठीक हो जाते हैं। यदि आपको संक्रमण के लक्षण महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर को जरूर बताएं। संक्रमण के लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

टेस्ट के बाद आपके डॉक्टर आपको टेस्ट के रिजल्ट समझाएंगे। टेस्ट के रिजल्ट पर निर्भर करते हुऐ वे आपको फिर से आने के लिए कह सकते हैं या अन्य टेस्ट करवाने का सुझाव भी दे सकते हैं।

एचएसजी टेस्ट से कौन से जोखिम होते हैं?

एचएसजी टेस्ट कई टेस्टों के मुकाबले सुरक्षित माना जाता है लेकिन सभी प्रकार की टेस्ट प्रक्रियाओं से कुछ ना कुछ जोखिम जुड़े ही होते हैं। यदि आपको डाई से एलर्जी है तो आपको यह टेस्ट करवाने से दिक्कत हो सकती है। पेल्विस में संक्रमण और गर्भाशय में किसी प्रकार की क्षति होना भी एचएसजी टेस्ट के संभावित जोखिम हो सकते हैं। यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा हो तो तुरंत अपने डॉक्टर को बता दें:

एचएसजी टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

एक्स रे करने वाले विशेषज्ञ एक्स रे तस्वीर की जांच करते हैं और उसकी रिपोर्ट बनाकर आपके डॉक्टर को भेज देते हैं। डॉक्टर आपके साथ इस टेस्ट के रिजल्ट के बारे में बात करेंगें और यदि आपको अन्य प्रकार के टेस्ट करवाने की जरूरत है तो आपको इस बारे में बताएंगे।

यदि रिपोर्ट बताती है कि आपकी फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक हो गई है तो आपको लेप्रोस्कोपी टेस्ट करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है। लेप्रोस्कोपी की मदद से डॉक्टर सीधे फैलोपियन ट्यूब को देख पाते हैं। इसके अलावा डॉक्टर आईवीएफ (In vitro fertilization/ IVF) करवाने का भी सुझाव दे सकते हैं। डॉक्टर आपके लिए उपलब्ध विकल्पों के बारे में आपसे बात करेंगे और आपके लिए सबसे बेहतर निर्णय लेने में आपकी मदद करेंगे।

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