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लेप्रोस्कोपी, सर्जरी का एक प्रकार होता है। इसकी मदद से डॉक्टर मरीज के शरीर में बिना कोई बड़ा चीरा दिए अंदरूनी पेट या पेल्विस के अंदर तक सर्जरी करने में सझम हो पाते हैं। लेप्रोस्कोपी सर्जरी को 'कीहोल' सर्जरी (Keyhole) और न्यूनतम चीरा सर्जरी (Minimally invasive surgery) के नाम से भी जाना जाता है। इस सर्जरी के दौरान किसी बड़े आकार का चीरा लगाने से बचा जा सकता है, क्योंकि इसमें सर्जरी करने वाले डॉक्टर (सर्जन) लेप्रोस्कोप (Laparoscope) नाम के उपकरण का इस्तेमाल करते हैं।

(और पढ़ें - सर्जरी से पहले की तैयारी)

  1. लेप्रोस्कोपी क्या होता है? - What is Laparoscopy in Hindi?
  2. लेप्रोस्कोपी क्यों किया जाता है - What is the purpose of Laparoscopy in Hindi
  3. लेप्रोस्कोपी से पहले - Before Laparoscopy in Hindi
  4. लेप्रोस्कोपी के दौरान - During Laparoscopy in Hindi
  5. लेप्रोस्कोपी के बाद - After Laparoscopy in Hindi
  6. लेप्रोस्कोपी के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Laparoscopy in Hindi
  7. लेप्रोस्कोपी के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Laparoscopy mean in Hindi
  8. लेप्रोस्कोपी कब करवाना चाहिए - When to get tested with Laparoscopy in Hindi

लेप्रोस्कोपी क्या होता है?

(और पढ़ें - एंडोस्कोपी टेस्ट)

लेप्रोस्कोपी को नैदानिक लेप्रोस्कोपी (Diagnostic laparoscopy) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक सर्जिकल डायग्नॉस्टिक प्रक्रिया होती है, जिसका उपयोग पेट के अंदरूनी अंगों को देखने के लिए किया जाता है। यह एक कम जोखिम वाली और छोटे चीरे वाली प्रक्रिया होती है। लेप्रोस्कोपी प्रक्रिया में अंदरूनी अंगों तक पहुंचने के लिए लेप्रोस्कोप नाम के एक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। लेप्रोस्कोप एक लंबी और पतली ट्यूब होती है, जिसमें आगे एक लाइट और हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरा लगा होता है। पेट की त्वचा में एक छोटा सा चीरा देकर इस उपकरण को पेट के अंदर डाला जाता है। पेट के अंदर इसको इधर-उधर घुमाया जाता है और कैमरा की मदद से पेट के अंदर की तस्वीरों को स्क्रीन पर देखा जाता है

(और पढ़ें - अल्ट्रासाउंड टेस्ट कैसे होता है

लेप्रोस्कोपी की मदद से डॉक्टर ऑपन सर्जरी किए बिना ही पेट के अंदर के अंगों को वास्तविक काल (Real time) में देख पाते हैं। इस प्रक्रिया के द्वारा डॉक्टर कुछ बायोप्सी के सेंपल भी ले सकते हैं।

(और पढ़ें - बायोप्सी क्या है)

लेप्रोस्कोपी टेस्ट किसलिए किया जाता है?

लेप्रोस्कोपी का इस्तेमाल अक्सर पेट या पेल्विक में दर्द की जांच करने और उसका पता लगाने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब बिना चीरे की जांच प्रक्रियाएं ठीक से किसी समस्या का परीक्षण ना कर पाए।

(और पढ़ें - पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज का इलाज)

लेप्रोस्कोपी का उपयोग निम्न के लिए किया जाता है:

  • पेट या पेल्विक में किसी असामान्य उत्पत्ति (Abnormal growth) की जांच करने के लिए, जैसे की ट्यूमर आदि।
  • कुछ प्रकार की मेडिकल स्थितियों की जांच व उनका उपचार करने के लिए, जैसे एंडोमेट्रिओसिस (Endometriosis), एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic pregnancy), और पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (Pelvic inflammatory disease)।
  • उस स्थिति की खोज करना जो किसी महिला को गर्भवती होने में कठिनाई पैदा कर रही है, इन स्थितियो में सिस्ट (Cysts), आसंजन (Adhesions), फाइब्रॉएड्स (Fibroids) और संक्रमण शामिल है। अगर प्रारंभिक बांझपन परीक्षण में बांझपन के कोई संकेत ना दिखाई दे, तो बांझपन प्रारंभिक परीक्षण के बाद भी लेप्रोस्कोपी प्रक्रिया की जा सकती है। (और पढ़ें - बांझपन के घरेलू उपाय)
  • अगर शरीर के किसी अन्य हिस्से में कैंसर है, तो यह देखने के लिए कि कहीं वह पेट के हिस्सों में तो नहीं फैल रहा। (और पढ़ें - पेट के कैंसर का इलाज)
  • अंदरूनी अंगों में क्षति की जांच करने के लिए, जैसे किसी चोट या दुर्घटना के कारण तिल्ली रोग (Spleen) होना।
  • हाइटल हर्निया या इन्गविनल हर्निया को ठीक करने के लिए (और पढ़ें - हर्निया का घरेलू उपाय)
  • अंग निकालने के लिए जैसे गर्भाशय, सप्लीन, पित्ताशय (लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी), अंडाशय, अपेंडिक्स (अपेंडेक्टोमी)। इसके द्वारा बृहदान्त्र (Colon) का आंशिक निष्कासन (Resection) भी किया जा सकता है। (और पढ़ें - अंडाशय में गांठ का उपाय)
  • पेल्विक में अचानक या लगातार होने वाले दर्द के कारण जानने के लिए।
  • बायोप्सी करने के लिए।
  • ट्यूबल लिगेशन (Tubal ligation) के लिए भी लेप्रोस्कोपी का इस्तेमाल किया जाता है।

लेप्रोस्कोपी का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब अन्य टेस्ट शरीर के अंदर की जानकारी ना प्रदान कर पाएं या अंदरूनी अंगों को ना दिखा पाएं। लेप्रोस्कोपी प्रक्रिया का उपयोग पेट के किसी अंदरूनी अंग से ऊतक का सेंपल लेने या बायोप्सी प्रक्रिया के लिए भी किया जाता है।

(और पढ़ें - पेप्टिक अल्सर का इलाज)

निम्न अंदरूनी अंगों का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर अक्सर लेप्रोस्कोपी प्रक्रिया का उपयोग करते हैं:

लेप्रोस्कोप उपकरण द्वारा उपरोक्त अंगों की जांच करके डॉक्टर निम्न समस्याओं का पता लगा सकते हैं:

  • पेट में ट्यूमर या असामान्य मास (Mass), 
  • पेट की गुहा (Abdominal cavity) में द्रव,
  • लिवर के रोग,
  • कुछ प्रकार के उपचारों की प्रभावशीलता,
  • किसी विशेष कैंसर की जाँच, इत्यादि।

(और पढ़ें - लिवर कैंसर ट्रीटमेंट)

इसके साथ ही इस परीक्षण के तुरंत बाद डॉक्टर आपकी स्थिति का इलाज करने के लिए इंटरवेशन (Intervention) करने में सक्षम हो सकते हैं।

लेप्रोस्कोपी से पहले क्या किया जाता है?

सर्जरी से पहले खाने और पीने से संबंधित दिए गए निर्देशों का पालन करें। लेप्रोस्कोपी होने से कम से कम आठ घंटे पहले आपको कुछ खाने और पीने से परहेज करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

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अगर आप किसी भी प्रकार की दवा खा रहे हैं, तो लेप्रोस्कोपी होने से पहले ही डॉक्टर को उनके बारे में बता दें। डॉक्टर आपको इस बारे में बताएंगे कि लेप्रोस्कोपी सर्जरी से पहले और बाद में उन दवाओं को कैसे लेना है।

अगर कोई दवा लेप्रोस्कोपी के परिणाम या उसे किसी भी तरह से प्रभावित करती है, तो डॉक्टर उसको कुछ समय के लिए बंद करवा सकते हैं या उसमें कुछ बदलाव करवा सकते हैं। लेप्रोस्कोपी को प्रभावित करने वाली दवाओं में निम्न शामिल हो सकती हैं:

(और पढ़ें - दवाओं की जानकारी)

  • थक्का-रोधी दवा (Anticoagulants)
  • नॉन स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लामेट्री ड्रग्स (NSAIDs), इसमें एस्पिरिन (Aspirin) या आइबूप्रोफेन (Ibuprofen) शामिल हैं।
  • अन्य दवाएं जो खून के थक्कों को प्रभावित करती हैं। (और पढ़ें - खून का थक्का जमने के कारण)
  • हर्बल या आहार संबंधी खुराक
  • विटामिन K

अगर आप गर्भवती हैं या आपको निश्चित नहीं है कि आप गर्भवती हैं या नहीं, तो डॉक्टर को इस बारे में बताएं। ऐसा करने से अगर आपके गर्भ में शिशु विकसित हो रहा है तो उसको हानि पहुंचने के जोखिम कम हो सकते हैं।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी में होने वाली समस्याएं)

लेप्रोस्कोपी से पहले डॉक्टर ब्लड टेस्ट, मूत्र विश्लेषण, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (EKG या ECG) और छाती का एक्स-रे आदि टेस्ट कर सकते हैं। लेप्रोस्कोपी से पहले डॉक्टर कुछ इमेजिंग टेस्ट भी कर सकते हैं, जैसे अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन आदि।

(और पढ़ें - सीटी स्कैन क्या है)

लेप्रोस्कोपी के दौरान क्या किया जाता है?

(और पढ़ें - लिवर कैंसर की सर्जरी)

लेप्रोस्कोपी को आमतौर पर एक आउट-पेशेंट (जिसमें रातभर अस्पताल में रूकने की जरूरत ना पड़े) सर्जरी के रूप में किया जाता है। इस प्रकार की सर्जरी करने के लिए मरीज को बेहोशी की दवा दी जाती है, जिससे मरीज को इस प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का दर्द महसूस नहीं होता। सामान्य बेहोशी की दवा देने के लिए नस में एक इंट्रावेनस (IV) लगाया जाता है। इंट्रावेनस के द्वारा डॉक्टर (Anesthesiologist) मरीज को एक विशेष दवा प्रदान करते हैं और साथ ही साथ तरल पदार्थ देकर हाइड्रेशन प्रदान करते हैं।

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लेप्रोस्कोपी के दौरान सर्जन आपकी नाभि के नीचे एक छोटा सा चीरा लगाते हैं और उसके बाद उसमें कैनुला (Cannula) नाम की एक छोटी ट्यूब डालते हैं। कैनुला की मदद से पेट में कार्बनडाइऑक्साइड गैस भर दी जाती है, जिससे पेट फूल जाता है। गैस भरने से डॉक्टर पेट के अंदरूनी अंगों को और स्पष्ट रूप से देख पाते हैं।

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जब एक बार आपके पेट को फुला दिया जाता है, उसके बाद डॉक्टर चीरा देकर उसमें लेप्रोस्कोप डालते हैं। लेप्रोस्कोप पर लगा कैमरा पेट की अंदरूनी तस्वीरों को एक स्क्रीन पर वास्तविक काल (Real time) में भेजता है।

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लेप्रोस्कोपी के बाद क्या किया जाता है?

प्रक्रिया पूरी होने के बाद शरीर से उपकरण को निकाल लिया जाता है। उसके बाद दिए गए चीरे को टांकों या सर्जिकल टेप के साथ बंद कर दिया जाता है। उसके बाद में चीरे के ऊपर बैंडेज भी लगाई जा सकती है।

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सर्जरी खत्म होने के बाद आपको कुछ घंटे डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है, उसके बाद घर भेजा जाता है। आपके कुछ महत्वपूर्ण संकेतों जैसे, सांस लेना या दिल की धड़कनें आदि की बहुत ही ध्यान से जांच की जाती है। डॉक्टर आपमें बेहोशी की दवा या लेप्रोस्कोपी का कोई विपरित प्रभाव या दिए गए चीरे में से अधिक समय तक खून निकलने जैसी समस्या की भी जांच करते हैं।

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लेप्रोस्कोपी होने के बाद छुट्टी मिलने में लगने वाला समय निम्न स्थितियों पर निर्भर करता है:

  • आपके संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य की स्थिति।
  • आपको किस प्रकार की बेहोशी की दवा दी गई है।
  • सर्जरी के प्रति आपके शरीर का रिएक्शन।

(और पढ़ें - प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी कैसे होती है)

कुछ मामलों में आपको रातभर अस्पताल में रूकने की जरूरत पड़ सकती है।

अगर आपको सामान्य बेहोशी की दवा दी गई है तो आपको घर तक जाने के लिए एक सहायक की आवश्यकता पड़ सकती है। सामान्य बेहोशी की दवा का असर पूरी तरह से उतरने में कई घंटे का समय लेता है, इसलिए लेप्रोस्कोपी की प्रक्रिया होने के तुरंत बाद गाड़ी आदि चलाना असुरक्षित हो सकता है।

लेप्रोस्कोपी होने के कुछ दिन बाद तक आपको उस जगह पर मध्यम दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द व तकलीफ सामान्य रूप से कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। दर्द से आराम दिलाने के लिए डॉक्टर आपके लिए कुछ दवाएं भी लिख सकते हैं।

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लेप्रोस्कोपी में क्या जोखिम हो सकते हैं?

लेप्रोस्कोपी से होने वाली समस्याओं की संभावनाएं बहुत कम होती है, लेकिन इनमें कुछ निम्न जोखिम शामिल हो सकती हैं:

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(और पढ़ें - पीठ दर्द का उपाय)

लेप्रोस्कोपी के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

सामान्य रिजल्ट -

जब लेप्रोस्कोपी प्रक्रिया से पेट में किसी भी प्रकार का कोई हर्निया, आंतों की रुकावट, कैंसर या पेट में खून आदि बहने का कोई संकेत ना दिखे तो लेप्रोस्कोपी का रिजल्ट सामान्य माना जाता है। जब गर्भाभाशय, फैलोपियन ट्यूब, और अंडाशय आदि का आकार, रंग और आकृति सामान्य हो और लिवर सामान्य स्थिति में दिखाई दे रहा हो तो भी लेप्रोस्कोपी के रिजल्ट को सामान्य मान लिया जाता है।

असामान्य रिजल्ट –

ऐसी कई अलग-अलग स्थितियां हैं जो लेप्रोस्कोपी के असामान्य रिजल्ट का संकेत देती हैं:

  • पेट या पेल्विस के अंदर किसी ऊतक में चोट आदि का निशान (Adhesions)।
  • अपेंडिसाइटिस। (और पढ़ें - अपेंडिक्स का ऑपरेशन)
  • गर्भाशय के अंदर की कोशिकाओं का अन्य क्षेत्रों में बढ़ना (Endometriosis)।
  • पित्ताशय में सूजन व लालिमा आदि। (Cholecystitis)
  • अंडाश्य में सिस्ट या अंडाशय का कैंसर।
  • गर्भ, अंडाशय, या फैलोपियन ट्यूब में संक्रमण (Pelvic inflammatory disease)।
  • चोट के संकेत।
  • कैंसर का फैलना।
  • ट्यूमर।
  • कोख में एक कैंसरमुक्त ट्यूमर दिखाई देना (Uterine fibroids)।

लेप्रोस्कोपी कब करवाना चाहिए?

लेप्रोस्कोपी प्रक्रिया का उपयोग विभिन्न प्रकार के कारणों, स्वास्थ्य स्थितियों और रोगों का पता करने के लिए किया जाता है, जैसे ट्यूबल लिगेशन, नैदानिक प्रक्रियाएं और कुछ प्रकार की समस्याओं का इलाज करने के लिए।

लेप्रोस्कोपी करवाने के सामान्य कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • दीर्घकालिक पेल्विक दर्द, पेल्विक इन्फ्लामेटरी रोगों और बांझपन आदि का परीक्षण करने और इलाज करने के लिए।
  • फाइब्रॉएड, अपेंडिक्स, गर्भाशय, डिम्बग्रंथि सिस्ट, लिम्फ नोड्स आदि को निकालने के लिए या अस्थानिक गर्भावस्था (Ectopic pregnancy) के लिए।
  • कुछ प्रकार के विकारों का इलाज करने के लिए जैसे मूत्र असंयमिता, पैल्विक अंग विस्तार और कुछ प्रकार के कैंसर।
  • कुछ प्रकार के कैंसरों की सीमा का मूल्यांकन  करने के लिए जिनमें अंडाशय, गर्भाशय और सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) भी शामिल हैं।
  • मासिक धर्म में दर्द और अधिक मात्रा में आने के कारण का पता लगाने के लिए।
  • गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब या अंडाशय को निकालने के लिए।
  • अंडाशय में सिस्ट की जांच करने के लिए या उसे हटाने के लिए। (और पढ़ें - अंडाशय से सिस्ट हटाने की सर्जरी)
  • महिलाओं में बांझपन की जांच करने के लिए।
  • अस्थानिक गर्भावस्था का उपचार करने के लिए।
  • सिस्ट या अन्य ट्यूमर्स को निकालने के लिए।
  • आंत का एक हिस्सा निकालने के लिए।
  • टेस्ट करने के लिए ऊतक का एक छोटा सेंपल लेना (Biopsy)।
  • पेट दर्द या पेल्विक में हो रहे दर्द के कारण की खोज करने के लिए।

लेप्रोस्कोपी से जुड़े सवाल और जवाब

सवाल 4 महीना पहले

मैंने हाल ही में अपनी लेप्रोस्कोपी करवाई है जिसके बाद मेरे पहला पीरियड नहीं आया है। क्या लेप्रोस्कोपी के बाद पीरियड्स रूक जाते हैं? अगर हां, तो यह कब तक होता है और मासिक चक्र नॉर्मल होने में कितना समय लगता है?

Dr. Haleema Yezdani MBBS, सामान्य चिकित्सा

कई महिलाओं में सर्जरी के बाद 4 से 6 हफ्ते तक पीरियड्स नहीं आते हैं और जब उनका मासिक चक्र नॉर्मल हो जाता है, तब उनको पहले से ज्यादा ब्लीडिंग और सामान्य से अधिक पीड़ा महसूस हो सकती है। अगर लेप्रोस्कोपी से आपकी स्थिति में सुधार आया है तो कुछ भी करने पहले 2 से 3 बार पीरियड्स आने की प्रतीक्षा करें। अगर सर्जरी के बाद 2 से 3 महीने तक पीरियड्स नॉर्मल नहीं आते हैं तो डॉक्टर को दिखाएं।

सवाल 3 महीना पहले

मैंने अपनी लेप्रोस्कोपी करवाई है। चीरे वाली जगह से पट्टी कब हटा सकती हूं?

Dr. Manju Shekhawat MBBS, सामान्य चिकित्सा

लेप्रोस्कोपी करवाने के 24 घंटे बाद नहाने जा रहे हैं तो आप टांके वाली जगह से पट्टी हटा सकते हैं। ऑपरेशन के बाद पेट में थोड़ा दर्द और तकलीफ महसूस हो सकती है। इसी के साथ आपको कंधे के सिरे पर दर्द हो सकता है। 

 

सवाल 3 महीना पहले

मैंने कल अपनी लेप्रोस्कोपी करवाई थी जिसके बाद से मुझे पेट में बहुत दर्द हो रहा है। मैं जानना चाहता हूं कि लेप्रोस्कोपी करवाने के बाद कितना दर्द होना नॉर्मल है?

Dr. Anjum Mujawar MBBS, मधुमेह चिकित्सक

सर्जरी के बाद 4 दिन तक चीरे वाली जगह पर ऐंठन या दर्द होता ही है। सर्जरी के बाद हर दिन आपको बेहतर महसूस होने लगेगा। हालांकि, आपको बहुत जल्दी थकान हो सकती है। कुछ दिनों के लिए दर्द निवारक दवा लें।

सवाल 3 महीना पहले

लेप्रोस्कोपी के बाद गैस का दर्द कब तक ठीक होता है?

Dr. Sangita Shah MBBS, सामान्य चिकित्सा

अगर पेट में दर्द ज्यादा है और पेट फूल भी रहा है या ये प्रॉब्लम किसी तरह से ठीक नहीं हो पा रही है तो तुरंत सर्जन को दिखाएं। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद महिलाओं को गैस की वजह से कंधे में दर्द हो सकता है क्योंकि सर्जरी के दौरान पेट को बढ़ाने के लिए उसमे गैस भरी जाती है। यह दर्द एक हफ्ते तक रह सकता है।

 

और पढ़ें ...

References

  1. Health direct [internet]: Department of Health: Australian government; Laparoscopy
  2. National Institute of Health. US National Library of Medicine [internet]: Bethesda (MA), US. US Department of Health and Human Services Laparoscopy (keyhole surgery)
  3. National Institute of Health. US National Library of Medicine [internet]: Bethesda (MA), US. US Department of Health and Human Services When it's used - Laparoscopy (keyhole surgery)
  4. Health direct [internet]: Department of Health: Australian government; Ectopic pregnancy
  5. American College of Obstetricians and Gynecologists. Women's Health Care Physicians [internet], Washington, DC; Laparoscopy
  6. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Laparoscopy
  7. Better health channel. Department of Health and Human Services [internet]. State government of Victoria; Laparoscopy
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