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क्या कभी आपको ऐसा लगा है कि आपकी यौन इच्छा पहले जैसी नहीं रही? या फिर आप थके-थके महसूस करते हैं और पार्टनर के साथ इंटिमेसी में इंट्रेस्ट कम हो गया है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। आजकल की तेज़-तर्रार ज़िंदगी, तनाव, नींद की कमी और कई शारीरिक समस्याएँ हमारी कामेच्छा यानी लिबिडो पर सीधा असर डालती हैं। कई लोग शर्म या झिझक के कारण इस बारे में खुलकर बात नहीं करते, लेकिन सच यह है कि यौन स्वास्थ्य भी उतना ही ज़रूरी है जितना कि दिल, दिमाग़ या शरीर का बाकी स्वास्थ्य जरूरी होता है।

मेडिकल साइंस के अनुसार कामेच्छा में कमी आने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें शारीरिक बीमारियाँ जैसे हार्मोनल असंतुलन, डायबिटीज़, थायरॉइड की समस्या, दवाइयों के साइड इफेक्ट, या फिर मानसिक कारण जैसे डिप्रेशन और तनाव शामिल हैं। इसके अलावा खराब जीवनशैली, शराब और धूम्रपान की आदत, और रिलेशनशिप की समस्याएँ भी बड़ी वजह बनती हैं।

अब सवाल उठता है कि क्या होम्योपैथी इस स्थिति में मदद कर सकती है? बहुत से लोग अल्टरनेटिव और नेचुरल ट्रीटमैंट की तरफ़ आकर्षित होते हैं क्योंकि वे इसे जेंटल और कम साइड इफ़ेक्ट वाला मानते हैं। होम्योपैथी में सेक्सुअल हेल्थ के लिए कई मेडिसिन्स बताई जाती हैं। लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि इनका असर व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है और साइंटिफिक एविडेंस अभी सीमित है। फिर भी, अगर इसे लाइफस्टाइल बदलाव और मेडिकल एडवाइस के साथ जोड़ा जाए, तो कई लोगों को इसका लाभ मिल सकता है।

  1. कामेच्छा कम होने के कारण
  2. होम्योपैथी और यौन स्वास्थ्य
  3. कामेच्छा बढ़ाने में फायदेमंद होम्योपैथिक दवाइयाँ
  4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  5. सारांश
यौन रोग के डॉक्टर

कामेच्छा यानी यौन इच्छा कम होना कोई एक वजह से नहीं होता, बल्कि यह शरीर, मन और हमारी रोज़मर्रा की जीवनशैली तीनों से जुड़ा रहता है।

शारीरिक कारण

 

अक्सर पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ-साथ टेस्टोस्टेरोन नाम का हार्मोन कम होने लगता है। यह हार्मोन सीधे तौर पर यौन इच्छा और ऊर्जा से जुड़ा होता है। जब इसका स्तर गिरता है तो स्वाभाविक रूप से इच्छा भी घट जाती है।

महिलाओं में भी रजोनिवृत्ति के समय हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन का स्तर बदलने लगता है। इसका असर उनकी कामेच्छा पर साफ दिखाई देता है।

डायबिटीज़, थायरॉइड और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियाँ भी शरीर की ताकत और यौन इच्छा दोनों को कमजोर कर देती हैं। इसके अलावा कुछ दवाइयाँ जैसे डिप्रेशन की दवा या हाई ब्लड प्रेशर की गोलियाँ भी इच्छा को दबा सकती हैं।

मानसिक कारण

अगर दिमाग़ हमेशा तनाव, चिंता या उदासी में घिरा रहेगा तो यौन इच्छा कम होना स्वाभाविक है। मानसिक दबाव सीधे मूड पर असर डालता है और फिर शरीर भी प्रतिक्रिया देने से पीछे हट जाता है।

पति-पत्नी या साथी के बीच भावनात्मक दूरी या रिश्तों में अनबन भी नज़दीकी को कम कर देती है। जब मन में जुड़ाव नहीं रहता, तो शारीरिक इच्छा भी कम हो जाती है।

कई बार लोग प्रदर्शन की चिंता में भी फँस जाते हैं। मन में यह डर रहता है कि “मैं सही कर पाऊँगा या नहीं।” यह घबराहट धीरे-धीरे इच्छा को दबा देती है।

(और पढ़ें - कामेच्छा बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक उपाय)

जीवनशैली से जुड़े कारण

अगर नींद पूरी नहीं होती, शरीर को आराम नहीं मिलता और खानपान भी गड़बड़ है तो थकान बनी रहती है। थका हुआ शरीर स्वाभाविक रूप से इच्छा नहीं जगा पाता।

शराब और धूम्रपान करने वालों में धीरे-धीरे यौन ऊर्जा कम होने लगती है। साथ ही मोटापा भी हार्मोन का संतुलन बिगाड़ देता है और थकान बढ़ाता है।

शोध से यह साफ हो चुका है कि जब लोग लगातार तनाव, गलत जीवनशैली और असंतुलित खानपान में फँसे रहते हैं तो उनकी यौन इच्छा धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसलिए सिर्फ दवा लेने से काम नहीं चलता, पूरी जीवनशैली बदलने और शरीर-मन दोनों की देखभाल करने की ज़रूरत होती है।

(और पढ़ें- स्तंभन दोष का इलाज)

होम्योपैथी का सबसे बड़ा सिद्धांत यही है कि हर इंसान अलग होता है और उसके लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं। यही वजह है कि यौन कमजोरी या कामेच्छा की कमी का इलाज भी सबके लिए एक जैसा नहीं होता। इसमें दवा मरीज के पूरे हालात देखकर दी जाती है। यानी केवल बीमारी पर नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की शारीरिक बनावट, आदतें, मानसिक स्थिति और भावनाओं को भी ध्यान में रखा जाता है।

होम्योपैथी मानती है कि हमारे शरीर में खुद को ठीक करने की एक प्राकृतिक क्षमता होती है। सही दवा उस क्षमता को जगाने और शरीर की ऊर्जा को संतुलित करने का काम करती है। धीरे-धीरे शरीर अपनी स्थिति को सुधारने लगता है और व्यक्ति बेहतर महसूस करने लगता है।

हालाँकि यह मान लेना सही नहीं होगा कि होम्योपैथी पूरी तरह से आधुनिक चिकित्सा का विकल्प है। अगर किसी को हार्मोन की समस्या, गंभीर बीमारी या लंबे समय से बनी हुई यौन कमजोरी है, तो केवल होम्योपैथी पर निर्भर रहना सही नहीं है। लेकिन सहायक उपचार के रूप में कई लोग इसे उपयोगी मानते हैं। यह शरीर को कोमल तरीके से सपोर्ट करता है और कई बार जीवनशैली में सुधार के साथ मिलकर अच्छा असर दिखाता है।

(और पढ़ें- शीघ्रपतन का इलाज)

कामेच्छा बढ़ाने में फायदेमंद होम्योपैथिक दवाइयाँ के बारें में विस्तार से जाने -

लाइकोपोडियम

यह दवा उन लोगों के लिए मानी जाती है जिन्हें नज़दीकी रिश्ते के समय आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है। कई पुरुषों को यह डर सताता है कि वे अपने साथी को संतुष्ट नहीं कर पाएँगे। ऐसे में इच्छा तो होती है, लेकिन शरीर सही तरीके से प्रतिक्रिया नहीं देता। लाइकोपोडियम को अक्सर आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक दबाव कम करने में उपयोगी माना जाता है।

सामग्री 

लाइकोपोडियम क्लावैटम

प्रयोग :

यह दवा खासकर लीवर की परेशानियों, कब्ज़, पेट में सूजन और गठिया के दर्द में उपयोगी मानी जाती है।

प्रोडक्ट का रूप: लिक्विड

मुख्य फायदे :

  • पेट में सूजन और लीवर की समस्याओं में मदद करता है।
  • रुमेटिज़्म और गठिया से जुड़े दर्द को कम करने में सहायक।
  • लीवर और किडनी से जुड़ी कार्यात्मक समस्याओं को संभालने में असरदार।
  • ठंड सहने में कठिनाई या गर्मी की तीव्र इच्छा जैसी समस्याओं में सहायक।
  • नियमित सेवन से अत्यधिक जिद और चिंता जैसी मानसिक प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने में मदद करता है।

खुराक:

1 चम्मच पानी में 3-5 बूंदें लेकर दिन में तीन बार या डॉक्टर की सलाह अनुसार लें।

सुरक्षा जानकारी:

  • इस्तेमाल से पहले लेबल ध्यान से पढ़ें।
  • इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें, धूप से दूर।
  • बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • सुझाई गई खुराक से अधिक न लें।
  • दवा हमेशा डॉक्टर की निगरानी में ही लें।
  • दवा लेते समय मुँह में तेज़ गंध वाले पदार्थ जैसे कॉफी, प्याज़, हींग, पुदीना, कपूर, लहसुन आदि न लें।
  • दवा के दौरान तम्बाकू खाने या शराब पीने से बचें।

(और पढ़ें- शुक्राणु की कमी का इलाज)

अर्जेंटम नाइट्रिकम

अगर कोई व्यक्ति हर बात पर ज़्यादा चिंता करता है, जल्दी घबरा जाता है और हर समय बेचैनी में रहता है, तो उसका असर यौन स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इस स्थिति में यह दवा दी जाती है। पारंपरिक होम्योपैथी के अनुसार चिंता और यौन कमजोरी आपस में गहराई से जुड़े होते हैं।

सामग्री: अर्जेंटम नाइट्रिकम

मुख्य फायदे:

  • गले, पेट और आंत की सूजन जैसी समस्याओं में बहुत असरदार।
  • सिरदर्द और शरीर में ठंड लगना, काँपना जैसी मानसिक और भावनात्मक परेशानी को कम करता है।
  • नसों की थकान और चिंता जैसी समस्याओं में उत्कृष्ट उपाय।
  • आंखों की जलन और खुजली जैसी कंजंक्टिवाइटिस की लक्षणों में मददगार।
  • गले में दर्द जो खाना या पानी निगलते समय होता है, उसे कम करता है।
  • सीने में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई वाले खाँसी में राहत देता है।
  • पेट में अत्यधिक गैस और दर्द, उल्टी जैसी समस्याओं में लाभकारी।

खुराक:
1 चम्मच पानी में 3-5 बूंदें लें, दिन में तीन बार या चिकित्सक की सलाह अनुसार।

सुरक्षा जानकारी:

  • इस्तेमाल से पहले लेबल ध्यान से पढ़ें।
  • दवा हमेशा डॉक्टर की निगरानी में लें।
  • सुझाई गई खुराक से अधिक न लें।
  • बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें, सीधे सूरज की रोशनी और गर्मी से दूर।

(और पढ़ें - कामोत्तेजना बढ़ाने की दवा)

स्टेफिसेग्रिया

यह दवा उन लोगों के लिए बताई जाती है जिन्होंने किसी मानसिक आघात को लंबे समय तक दबाकर रखा हो या जिनके मन में गुस्सा और तकलीफ़ दबा रह गई हो। ऐसा दबाव व्यक्ति की यौन इच्छा पर असर डाल सकता है। स्टेफिसेग्रिया ऐसे मामलों में सहायक मानी जाती है।

सामग्री: स्टेफिसेग्रिया के बीज + अल्कोहल

प्रयोग:

  • चिड़चिड़ापन, पेट में ऐंठन या ऐब्डोमिनल दर्द और त्वचा एवं बाल की समस्याओं में उपयोगी।

प्रोडक्ट का रूप:
लिक्विड

किसके लिए उपयुक्त:
पुरुष और महिलाएँ दोनों

मुख्य फायदे:

  • चिड़चिड़ापन और थकान को कम करके मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
  • त्वचा की सेहत बनाए रखने में मददगार, खुजली, दाने या सूखापन जैसी समस्याओं में आराम।
  • पाचन स्वास्थ्य को सहारा देता है और पेट की ऐंठन में राहत।
  • बच्चों में दांत निकलने से जुड़ी परेशानी और पेट की ऐंठन में सहायता।
  • कानों की समस्याओं और ग्रंथियों की सूजन में सहायक।
  • दांतों की परेशानी या मुँह के स्वास्थ्य में सुधार में मददगार।
  • बार-बार पेशाब आने या मूत्र संबंधी असुविधा में राहत।

सेवन की विधि :
डॉक्टर की सलाह अनुसार लें।

सुरक्षा जानकारी:

  • इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें, सीधे सूरज की रोशनी से दूर।
  • इस्तेमाल से पहले लेबल ध्यान से पढ़ें।
  • बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • सुझाई गई खुराक से अधिक न लें।

(और पढ़ें - कामेच्छा बढ़ाने वाले योगासन)

myUpchar के डॉक्टरों ने अपने कई वर्षों की शोध के बाद आयुर्वेद की 100% असली और शुद्ध जड़ी-बूटियों का उपयोग करके myUpchar Ayurveda Urjas Energy & Power Capsule बनाया है। इस आयुर्वेदिक दवा को हमारे डॉक्टरों ने कई लाख लोगों को शारीरिक व यौन कमजोरी और थकान जैसी समस्या के लिए सुझाया है, जिससे उनको अच्छे प्रभाव देखने को मिले हैं।
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कास्टिकम

कुछ लोग लंबे समय से थकान, कमजोरी और नर्वस सिस्टम की दिक्कतों से जूझते हैं। ऐसी स्थिति में यौन कमजोरी भी जुड़ सकती है। कास्टिकम उन लोगों के लिए माना जाता है जो हमेशा थके-थके या कमज़ोर महसूस करते हैं।

सामग्री: नैट्रम कॉस्टिकम

मुख्य फायदे:

  • लीवर की समस्याओं जैसे हेपैटोजेनिक टॉक्सेमिया और लीवर की कमी में उपयोगी।
  • लिम्फ ग्रंथियों को आराम देता है और साइनसाइटिस व ब्लड प्रेशर की समस्याओं में मदद करता है।
  • नसों की तनाव, उदासी और मनोवैज्ञानिक भारीपन को कम करता है।
  • स्ट्रैबिस्मस में मदद करता है और गले की सूखापन कम करता है।
  • आंखों के स्क्विंट होने में असरदार।
  • नाक की बंदी और नाक से खून आने में राहत देता है।
  • गले की सूखापन और सफेद बलगम वाली खांसी में सहायक।
  • लीवर और किडनी से जुड़ी बीमारियों में उपयोगी।
  • त्वचा पर सफेद रंगत या धब्बों को दूर करने में मदद करता है।

सेवन की विधि :
डॉक्टर की सलाह अनुसार खुराक लें।

सुरक्षा जानकारी:

  • इस्तेमाल से पहले लेबल ध्यान से पढ़ें।
  • सुझाई गई खुराक से अधिक न लें।
  • बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें।

(और पढ़ें - 50 के बाद बेहतर सेक्स के लिए टिप्स)

एग्नस कैस्टस

यह दवा उन लोगों में उपयोग की जाती है जिनकी यौन इच्छा बहुत कम हो गई हो या बिल्कुल खत्म-सी हो गई हो। जल्दी थकान या कमजोरी आने पर भी इसका ज़िक्र किया जाता है। होम्योपैथी में इसे लिबिडो बढ़ाने वाली दवाओं में शामिल किया जाता है।

सामग्री: एग्नस कैस्टस

मुख्य फायदे:

  • मुख्य रूप से मानसिक समस्याओं जैसे डिप्रेशन और चिंता के इलाज में उपयोगी।
  • शरीर में ऊर्जा के स्तर को बहाल करता है।
  • पुरुषों में यौन समस्याओं जैसे शीघ्रपतन और इरेक्टाइल डिसफंक्शन के उपचार में अत्यंत लाभकारी।
  • यौन इच्छा बढ़ाता है और लिबिडो में सुधार करता है।
  • महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं और स्तनपान को बढ़ावा देने में सहायक।
  • गठिया और रुमेटिज़्म के दर्द में असरदार।
  • होम्योपैथिक संरचना के कारण सुरक्षित और साइड इफेक्ट फ्री।

सेवन की विधि:
½ कप पानी में 10-15 बूंदें मिलाकर दिन में तीन बार लें या चिकित्सक की सलाह अनुसार।

सुरक्षा जानकारी:

  • इस्तेमाल से पहले लेबल ध्यान से पढ़ें।
  • सुझाई गई खुराक से अधिक न लें।
  • बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें, सीधे सूरज की रोशनी और गर्मी से दूर।

(और पढ़ें - सेक्स करने के तरीके)

सेलेनियम मेटालिकम

अगर किसी व्यक्ति को लगातार थकान रहती है, शरीर में ऊर्जा कम रहती है और बार-बार यौन कमजोरी महसूस होती है, तो यह दवा दी जाती है। ऐसे लोगों में कई बार इच्छा तो बनी रहती है लेकिन ताक़त की कमी के कारण शरीर साथ नहीं देता। सेलेनियम ऐसे मामलों में मददगार बताई जाती है।

मुख्य घटक:
सेलेनियम डिल्यूशन 

मुख्य फायदे:

  • शरीर में सेलेनियम की कमी को रोकने में मदद करता है।
  • हाइपरथायरॉइडिज़्म की रोकथाम में सहायक।
  • कमजोर इम्यून सिस्टम में सुधार करता है, जो सेलेनियम की कमी से जुड़ी होती है।
  • कोरोनरी हार्ट डिज़ीज़ की रोकथाम में मददगार।
  • सूजन को कम करता है और ब्लड फ्लो बढ़ाता है।
  • फ्री रेडिकल्स के हानिकारक प्रभाव को कम करता है और एंटीऑक्सीडेंट गुण रखता है।
  • सेल डैमेज को रोकता है और भारी धातुओं से होने वाले नुकसान से शरीर की सुरक्षा करता है।

सेवन की विधि:
चार टैबलेट दिन में चार बार लें और मुँह में घुलने दें, सीधे निगलें नहीं। 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए खुराक आधी करें। डॉक्टर की सलाह अनुसार खुराक लें।

सुरक्षा जानकारी:

  • इस्तेमाल से पहले लेबल ध्यान से पढ़ें।
  • सुझाई गई खुराक से अधिक न लें।
  • बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • दवा हमेशा डॉक्टर की निगरानी में लें।
  • इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें, सीधे सूरज की रोशनी और गर्मी से दूर।

(और पढ़ें - पहली बार सेक्स कैसे करें

कैलेडियम

यह दवा खासकर उन लोगों के लिए मानी जाती है जिन्हें धूम्रपान या तंबाकू जैसी आदतों के कारण यौन कमजोरी का सामना करना पड़ता है। तंबाकू शरीर की ऊर्जा और यौन क्षमता दोनों को कमजोर कर देता है, ऐसे में कैलेडियम का उपयोग किया जाता है।

मुख्य घटक:
कैलैडियम सेगुइनम

प्रयोग:
यौन समस्याएँ, सीने में जकड़न, पसीना, मतली और प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियों में उपयोगी।

मुख्य फायदे:

  • पुरुषों में यौन और फेफड़ों की समस्याओं के इलाज में मुख्य रूप से उपयोगी।
  • दर्दनाक सिरदर्द को कम करता है और यौन थकान से जुड़ी समस्याओं में राहत देता है।
  • पेट दर्द, ऐंठन, मतली और अपच में मदद करता है।
  • ग्रंथियों की सूजन को कम करता है और जननांगों की खुजली में राहत देता है।
  • इरेक्टाइल डिसफंक्शन में सहायक और लिबिडो बढ़ाता है।
  • महिलाओं में योनि और यूटेरस की खुजली व दर्द में आराम।
  • सीने में दबाव और जकड़न को कम करता है, सांस लेने में कठिनाई में राहत।
  • अत्यधिक पसीने और स्वेदन को कम करने में उपयोगी।

सेवन की विधि:
½ कप पानी में 3-5 बूंदें मिलाकर दिन में तीन बार लें या चिकित्सक की सलाह अनुसार।

सुरक्षा जानकारी:

  • इस्तेमाल से पहले लेबल ध्यान से पढ़ें।
  • सुझाई गई खुराक से अधिक न लें।
  • बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें।

(और पढ़ें - सुरक्षित सेक्स कैसे करें)

रिसर्च एविडेंस और लिमिटेशन्स

अगर हम मेडिकल रिसर्च को देखें तो यौन कमजोरी के कारण बहुत सारे और जटिल हो सकते हैं। ज़्यादातर मामलों में तनाव, चिंता और रिश्तों में दिक्कतें सबसे बड़ी वजह बनती हैं। यही चीजें धीरे-धीरे आपकी यौन इच्छा यानी सेक्स करने की चाहत को कम कर देती हैं। इसके अलावा अगर शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की कमी हो जाए या फिर आपको कोई पुरानी बीमारी हो, तो भी इसका असर आपकी इच्छा और प्रदर्शन पर पड़ता है।

अब अगर बात करें होम्योपैथी की, तो अभी तक इसके लिए बहुत सीमित वैज्ञानिक सबूत ही मिले हैं। कुछ छोटी-छोटी स्टडी और केस रिपोर्ट्स में यह देखा गया है कि मरीजों को थोड़ी बहुत सुधार महसूस हुई है। लेकिन बड़ी और मज़बूत रिसर्च की अभी कमी है।

इसीलिए मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि होम्योपैथी को सपोर्टिव इलाज के तौर पर लिया जा सकता है, लेकिन इसे अकेले इलाज मान लेना सही नहीं होगा। अगर आपको यौन कमजोरी की समस्या है, तो सबसे पहले डॉक्टर से मिलें और उनकी सलाह के साथ होम्योपैथी या किसी भी वैकल्पिक इलाज को अपनाएँ।

(और पढ़ें - सेक्स स्टैमिना बढ़ाने के उपाय)

जीवनशैली और मेडिकल सलाह

अगर आपको लग रहा है कि आपकी यौन इच्छा धीरे-धीरे कम हो रही है, तो सबसे पहले अपनी रोज़मर्रा की आदतों पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है। कई बार यह समस्या दवाइयों या हार्मोन की कमी की वजह से नहीं होती, बल्कि हमारी जीवनशैली से जुड़ी होती है।

सबसे पहले अपने खाने-पीने की आदतें सुधारें। कोशिश कीजिए कि आपका खाना संतुलित और पौष्टिक हो। खाने में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में शामिल हों। ताज़ी सब्ज़ियाँ, मौसमी फल, दाल, दूध और ड्राई फ्रूट्स आपके शरीर को ज़रूरी पोषण देंगे और ऊर्जा बनाए रखेंगे।

रोज़ाना कम से कम तीस मिनट व्यायाम ज़रूर करें। वॉकिंग, योगा या कोई भी शारीरिक गतिविधि आपके हार्मोन को संतुलित करती है और मूड को बेहतर बनाती है। जब आपका शरीर फिट और एक्टिव रहता है, तो स्वाभाविक रूप से यौन इच्छा भी बढ़ती है।

(और पढ़ें - सेक्स पावर बढाने के उपाय)

तनाव यानी स्ट्रेस यौन कमजोरी की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। ध्यान और योग इस मामले में बहुत मददगार हैं। रोज़ाना 15-20 मिनट ध्यान लगाने से आपका मन शांत होता है और चिंता कम होती है।

धूम्रपान और शराब जैसी आदतों से दूर रहें। ये धीरे-धीरे आपकी यौन ऊर्जा को कम कर देती हैं।

नींद पूरी करना भी उतना ही ज़रूरी है। अगर आप रोज़ अच्छी नींद नहीं लेते, तो शरीर हमेशा थका-थका रहेगा और यौन इच्छा कम हो जाएगी।

अगर इन सब उपायों के बावजूद समस्या लगातार बनी रहती है, तो देरी न करें और डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर आपकी पूरी जांच करके ज़रूरत पड़ने पर हार्मोन का स्तर और अन्य स्वास्थ्य कारण जांच सकते हैं।

मेडिकल रिसर्च भी यही दिखाती है कि जब लोग स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं और तनाव को नियंत्रित करते हैं, तो उनकी यौन इच्छा में साफ-साफ सुधार देखा जाता है।

(और पढ़ें - सेक्स के लिए गोक्षुर के फायदे)

सुरक्षा और सावधानियाँ

होम्योपैथिक दवाइयों को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप खुद से दवा चुनकर लेना शुरू कर दें। याद रखिए, खुद से दवा लेना कई बार नुकसानदायक हो सकता है।

यौन कमजोरी हमेशा अकेली समस्या नहीं होती। यह कई बार किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत भी हो सकती है। जैसे डायबिटीज़, हार्मोनल असंतुलन या थायरॉइड की दिक्कत। इसलिए सबसे पहले सही जाँच कराना ज़रूरी है।

अगर आप पहले से ही किसी पुरानी बीमारी जैसे डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट प्रॉब्लम की एलोपैथिक दवा ले रहे हैं, तो होम्योपैथिक दवाइयों को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार दवाइयों का असर एक-दूसरे पर पड़ सकता है।

याद रखिए, हर व्यक्ति का शरीर और उसकी समस्या अलग होती है। इसलिए वही दवा आपके लिए सही होगी जो आपके पूरे लक्षण और हेल्थ हिस्ट्री देखकर किसी योग्य होम्योपैथिक डॉक्टर ने चुनी हो।

(और पढ़ें - सेक्स कब और कितनी बार करें)

आपके सवालों के जवाब यहाँ पाएं।

क्या होम्योपैथी सेक्सुअल हेल्थ के लिए वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है?

होम्योपैथी पर अभी तक बहुत ज्यादा बड़े वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुए हैं। कुछ लोगों को इससे फायदा दिखता है, लेकिन यह हर किसी के लिए गारंटीड नहीं है। इसे आप सहायक इलाज के रूप में ले सकते हैं, अकेले मुख्य इलाज के रूप में नहीं।

क्या होम्योपैथी से कामेच्छा तुरंत बढ़ जाती है?

नहीं। होम्योपैथिक दवाओं का असर धीरे-धीरे दिखाई देता है। यह सीधे शरीर की ओवरआल हेल्थ और कांस्टीट्यूशन पर काम करती हैं। इसलिए धैर्य रखना ज़रूरी है।

क्या ये दवाएँ सभी के लिए सुरक्षित हैं?

नहीं। होम्योपैथिक दवाओं का असर धीरे-धीरे दिखाई देता है। यह सीधे शरीर की ओवरआल हेल्थ और कांस्टीट्यूशन पर काम करती हैं। इसलिए धैर्य रखना ज़रूरी है।

क्या होम्योपैथी और एलोपैथी एक साथ ली जा सकती हैं?

कई बार ली जा सकती हैं, लेकिन डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। कुछ दवाइयाँ एक-दूसरे पर असर डाल सकती हैं, इसलिए बिना सलाह के साथ में लेना सुरक्षित नहीं है।

क्या लाइफस्टाइल बदलने से लिबिडो में सुधार हो सकता है?

हां, बिल्कुल। अगर आप संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, तनाव को कम करें और अच्छी नींद लें, तो इससे यौन इच्छा में बड़ा सुधार हो सकता है। जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव भी लंबे समय में असर दिखाते हैं।

कामेच्छा में कमी आजकल एक आम समस्या बन गई है। लेकिन यह केवल शारीरिक कारणों से नहीं होती, बल्कि हमारे मन, तनाव और रोज़मर्रा की जीवनशैली का भी असर पड़ता है। होम्योपैथी कई लोगों के लिए एक सौम्य और सहायक तरीका साबित हो सकती है। यह शरीर की अपनी प्राकृतिक शक्ति को जागरूक करती है और धीरे-धीरे ऊर्जा और यौन इच्छा को बेहतर बनाती है। लेकिन ध्यान रखें, इसका असर हर व्यक्ति में अलग होता है और तुरंत परिणाम नहीं दिखते। अगर आप खुद में यौन कमजोरी या कामेच्छा की कमी महसूस कर रहे हैं, तो सबसे पहले अपनी जीवनशैली सुधारें, तनाव को कम करें और डॉक्टर से सलाह लें। होम्योपैथिक दवाइयाँ तब सबसे सुरक्षित और प्रभावी होती हैं जब इन्हें किसी अनुभवी होम्योपैथिक चिकित्सक की निगरानी में लिया जाए। खुद से दवा लेना या बिना जाँच शुरू करना सुरक्षित नहीं होता।

(और पढ़ें - फोरप्ले क्यों होता है जरूरी)

Dr. Shubham

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होमियोपैथ
5 वर्षों का अनुभव

Dr Rachita Tripathi

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होमियोपैथ
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Dr. Sunil Thumar

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होमियोपैथ
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Dr. Rutvik Nakrani

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