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  1. लैमिनेक्टॉमी क्या है?
  2. लैमिनेक्टॉमी की ज़रुरत कब होती है?
  3. लैमिनेक्टॉमी के लिए तैयारी
  4. लैमिनेक्टॉमी कैसे की जाती है?
  5. लैमिनेक्टॉमी के बाद देखभाल
  6. लैमिनेक्टॉमी के बाद संभव जटिलताएं और जोखिम

लैमिनेक्टॉमी क्या है? - What is Laminectomy in Hindi?

लैमिनेक्टॉमी एक प्रकार की सर्जरी है जिसका उपयोग रीढ़ की हड्डी में हुए संपीड़न (compression) से राहत देने के लिए किया जाता है। नसों और रीढ़ की हड्डी की जड़ों पर दबाव पड़ने से गंभीर पीठ दर्द, सुन्न होना, चलने की समस्याएं, पैरों में कमजोरी हो सकती हैं। लैमिना रीढ़ की हड्डी का एक हिस्सा है जो कशेरुका ढांचा (vertebral arch) बनाता है। लैमिनेक्टॉमी को निम्नलिखित नामों से भी जाना जाता है:

लम्बर लैमिनेक्टॉमी (Lumbar laminectomy)
सरवाइकल लैमिनेक्टॉमी (Cervical laminectomy)
डीकम्प्रेस्सिव लैमिनेक्टॉमी (Decompressive laminectomy)
ज्यादातर समय, स्पाइनल स्टेनोसिस (spinal stenosis) के लक्षणों में, लैमिनेक्टॉमी की मदद से राहत मिलती है। हालांकि रीढ़ की हड्डी से जुडी भविष्य की समस्याओं को पूरी तरह से रोका जाना संभव नहीं है। यह प्रत्येक मामले में दर्द कम करने में मदद नहीं कर सकता है। सामान्य तौर पर, रीढ़ की हड्डी के विलयन वाले मरीजों को रीढ़ की हड्डी से जुडी समस्यायें हो जाती हैं।

लैमिनेक्टॉमी की ज़रुरत कब होती है? - When is Laminectomy required in Hindi?

सामान्यतया, लैमिनेक्टॉमी का इस्तेमाल तब किया जाता है जब मरीज़ की रीढ़ की हड्डी से सम्बंधित समस्या उसकी रोज़ाना की ज़िन्दगी में हस्तक्षप करती है। जब कम चीरकर या काटकर की जाने वाली तकनीक उचित परिणाम प्रदान नहीं कर पाती हैं, तो लैमिनेक्टॉमी का उपयोग किया जाता है।

स्पाइनल स्टेनोसिस से निजात पाने के लिए, लैमिनेक्टॉमी का उपयोग किया जाता है। स्पाइनल स्टेनोसिस के मामले में, मेरूदंड (spinal column) संकरी हो जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी और साथ ही नसों की जड़ों पर दबाव पड़ता है। स्पाइनल स्टेनोसिस रीढ़ की हड्डी के सिकुड़ने, रीढ़ गठिया (spine arthritis), जन्मजात दोष, हड्डियों और स्नायुओं (Ligaments) की सूजन, एकोंड्रॉप्लासिया (achondroplasia; बौनापन), रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर, डिस्क खिसकना (slipped disc) और किसी गहरी चोट के परिणामस्वरूप विकसित होता है।

लैमिनेक्टॉमी के लिए तैयारी - Preparing for Laminectomy in Hindi

सर्जरी से पहले आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और आपके डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ और जो दवाइयां आप ले रहे हैं उनकी सूचना अपने चिकित्सक को दें (Medication Before Surgery And Inform Your Doctor About Medicines You are Taking)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग/ खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

लैमिनेक्टॉमी कैसे की जाती है? - How is Laminectomy done?

एनेस्थेसिया देकर, रोगी के बेहोश हो जाने के बाद लैमिनेक्टॉमी की जाती है। कुछ मामलों में स्पाइनल एनेस्थेसिया दिया जाता है, जिनमे रोगी सर्जरी के दौरान होश में रहता है। दोनों ही मामलों में, प्रक्रिया के दौरान रोगी को किसी भी प्रकार का दर्द महसूस नहीं होता है। सर्जरी के दौरान, एक एनेस्थेटिस्ट (anesthetist) रोगी की निगरानी करता है।

यह प्रक्रिया निम्नलिखित क्रम में की जाती है। सामान्य तौर पर लैमिनेक्टॉमी की पूरी प्रक्रिया एक से तीन घंटे के भीतर हो जाती है।

  1. सबसे पहले, बैक्टीरिया संक्रमण की रोकथाम के लिए एंटीसेप्टिक लोशन से सर्जिकल साइट की त्वचा को साफ़ किया जाता है।
  2. रोगी की पीठ के बीच के हिस्से या गर्दन पर छोटे चीरे लगाए जाते हैं। सर्जरी के दौरान रोगी की त्वचा को हटाया जाता है ताकि सर्जरी करने में आसानी रहे।
  3. रोगी की रीढ़ की हड्डी से लैमिना निकालने की प्रतिक्रिया की जाती है।
  4. बॉन स्पर्स (Bone spurs) या छोटी डिस्क के टुकड़े निकाल दिए जाते हैं।
  5. चीरों को टाँके की सहायता से बंद कर दिया जाता है
  6. चीरों को कवर करने के लिए विसंक्रमित पट्टियों का उपयोग किया जाता है।
  7. स्पाइनल फ्यूजन (प्रमुख सर्जरी) की प्रक्रिया की जा सकती है, इसमें रोगी की पीठ में दो या अधिक हड्डियों को जोड़ा जाता है। इससे बेहतर रीढ़ की स्थिरता प्राप्त करने में मदद मिलती है  जिस क्षेत्र से तंत्रिका जड़ें रीढ़ की हड्डी के माध्यम से प्रवेश करती हैं उस क्षेत्र को चौड़ा करने के लिए फोरमीनोटॉमी (Foraminotomy) नामक प्रक्रिया की जा सकती है ।

लैमिनेक्टॉमी के बाद देखभाल - What to do after Laminectomy?

सर्जरी के बाद रोगी को रिकवरी रूम में स्थानांतरित किया जाता है। एनेस्थेसिया का असर ख़तम होने के कुछ देर बाद रोगी को होश आ जाता है। होश आने के कुछ देर बाद रोगी का शारीरिक परिक्षण किया जाता है। सर्जन मरीज़ को ऐसी स्थिति में आराम करने की सलाह देता है जिसमे उसकी, पीठ की मांसपेशियों को ज़्यादा तनाव न हो।

सर्जन की सलाह के आधार पर रोगी को घूमने फिरने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। रोगी को सर्जरी के बाद चलना फिरना चाहिए, लेकिन पीठ की मांसपेशियों को अत्यधिक झुकाने या मोड़ने से बचना चाहिए। ज्यादातर मामलों में, रोगी को सर्जरी के बाद 2-3 दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती होने  की सलाह दी जाती है ताकि उचित स्वास्थ सुधार सुनिश्चित हो सके।
सर्जरी और सुधार के बाद मरीजों को निम्नलिखित गतिविधियों से बचने की जरूरत है:

  1. सीढ़ियों को जल्दबाज़ी में चढ़ना
  2. भारी वजन उठाने और श्रमसाध्य गतिविधियों

धीरे-धीरे, मरीजों को चलने जैसे कार्यों में वृद्धि करनी चाहिए और जटिलताओं से बचने के लिए सभी फॉलो-अप अपॉइंटमेंट्स का पालन करना चाहिए।

सर्जरी के बाद स्नान या शॉवर लेते समय मरीजों को बहुत सावधान रहने की आवश्यकता होती है। चीरे वाली जगह को रगड़ना नहीं चाहिए क्योंकि इससे टांकों को नुकसान पहुंच सकता है और संक्रमण हो सकता है। सर्जन के परामर्श के बिना चीरे पर कोई लोशन या क्रीम नहीं लगाना चाहिए  बाथटब, हॉट टब के इस्तेमाल से और तैराकी जैसी गतिविधियों से बचना चाहिए।

सर्जन द्वारा दिए गए विशेष निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। अगर रोगियों को निम्नलिखित लक्षणों का अनुभव होता है तो सर्जन से समय पर परामर्श करने की जरूरत है:

  1. छाती में दर्द
  2. चीरा साइट पर लाली
  3. चीरा साइट से स्त्राव होता महसूस होना
  4. गर्माहट महसूस होना
  5. सांस लेने में कठिनाई
  6. चीरा साइट पर या आसपास सूजन
  7. पेशाब करने में कठिनाइयां
  8. आंत्र या मूत्र नियंत्रण न कर पाना
  9. तेज़ बुखार (और पढ़ें – बुखार के घरेलू उपचार)
  10. पैरों में सूजन

लैमिनेक्टॉमी के बाद संभव जटिलताएं और जोखिम - Risks and Complications of Laminectomy in Hindi

चूंकि लैमिनेक्टॉमी रीढ़ की हड्डी की सर्जरी है, सर्जरी करते समय काफी सावधानी बरती जानी चाहिए। लैमिनेक्टॉमी के सामान्य जोखिम यहां सूचीबद्ध है:

  1. दिल का दौरा (और पढ़ें – दिल का दौरा के लक्षण)
  2. स्ट्रोक (और पढ़ें - स्ट्रोक का इलाज)
  3. औषधि प्रतिक्रियाएं
  4. साँस सम्बन्धी परेशानी
  5. संक्रमण
  6. रक्त की हानि
  7. पैरों में खून के थक्कों का गठन जिसके परिणामस्वरूप पल्मोनरी एम्बोलिस्म (pulmonary embolism) हो सकता है।
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