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प्ल्यूरल फ्लूइड एनालिसिस टेस्ट क्या है?

यह टेस्ट प्ल्यूरल फ्लूइड की जांच करने के लिए किया जाता है, जो पल्यूरल स्पेस में जमा होता है। छाती की परत और फेफड़ों की बाहरी परत के बीच की खाली जगह को प्ल्यूरल स्पेस कहा जाता है। इस टेस्ट की मदद से फुफ्फुस बहाव (प्ल्यूरल इफ्यूजन) नामक रोग का परीक्षण किया जाता है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें प्ल्यूरल स्पेस में द्रव (प्ल्यूरल फ्लूइड) जमा होने लगता है।

  1. प्ल्यूरल फ्लूइड एनालिसिस टेस्ट क्यों किया जाता है - Pleural Fluid Analysis Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. प्ल्यूरल फ्लूइड एनालिसिस टेस्ट से पहले - Pleural Fluid Analysis Test Se Pahle
  3. प्ल्यूरल फ्लूइड एनालिसिस टेस्ट के दौरान - Pleural Fluid Analysis Test Ke Dauran
  4. प्ल्यूरल फ्लूइड एनालिसिस टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Pleural Fluid Analysis Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

प्ल्यूरल फ्लूइड एनालिसिस टेस्ट किसलिए किया जाता है?

इस टेस्ट की मदद से प्ल्यूरल इफ्यूजन के कारण का पता लगाया जा सकता है। यह प्रक्रिया अत्यधिक प्ल्यूरल इफ्यूजन के कारण होने वाली सांस फूलने की समस्या का इलाज करने में भी मदद करती है। डॉक्टर प्ल्यूरल इफ्यूजन टेस्ट की सलाह तब देते हैं जब उन्हें व्यक्ति के शरीर में ऐसी स्थितियां दिखाई देती हैं जो प्ल्यूरल इफ्यूजन का कारण होती हैं।

प्ल्यूरल इफ्यूजन के कुछ कारण और संकेत निम्न हैं:

इस टेस्ट के परिणाम प्ल्यूरल द्रव के प्रकारों (ट्रांसूडेट और एक्सूडेट) में अंतर करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा ये परिणाम द्रव के जमाव का कारण भी बता सकते हैं।

प्ल्यूरल फ्लूइड एनालिसिस टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती। टेस्ट के पहले और बाद में छाती का एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन किया जाता है। टेस्ट के दौरान फेफड़ों को किसी तरह की चोट न पहुंचे उस के लिए व्यक्ति को टेस्ट के दौरान हिलना-ढुलना, गहरी सांस और खांसी आदि नहीं करनी चाहिए। यदि व्यक्ति कोई ब्लड थिंनिंग दवा ले रहा है तो इसके बारे में डॉक्टर को बता देना चाहिए।

प्ल्यूरल फ्लूइड एनालिसिस टेस्ट कैसे किया जाता है?

टेस्ट के लिए प्ल्यूरल द्रव का सैंपल थोरासेंटेसिस प्रक्रिया द्वारा लिया जाता है। प्राप्त हुए सैंपल का परीक्षण करके उसमें कैंसर की कोशिकाओं और सूजन आदि का पता लगाया जाता है। इस टेस्ट की मदद से संक्रमण फैलाने वाले रोगाणुओं का भी पता लगाया जा सकता है, जैसे फंगी, वायरस, बैक्टीरिया। साथ ही प्रोटीन, ग्लूकोज व अन्य पदार्थों के स्तर की जांच भी इस टेस्ट की मदद से की जा सकती है।

थोरासेंटेसिस के लिए निम्न प्रक्रिया का पालन किया जाता है:

  1. इसमें व्यक्ति को किसी कुर्सी पर बैठने और उसके पीछे एक मेज लगाकर उस पर सिर रखने को कहा जा सकता है।
  2. डॉक्टर एनेस्थीसिया की मदद से त्वचा को सुन्न कर देते हैं और जहां से सेंपल निकालना है, वहां से त्वचा को साफ कर देते हैं।
  3. इसके बाद छाती की मांसपेशियों के अंदर से प्लूरल स्पेस (जहां द्रव भरा है) में सुई लगाकर, द्रव का सेंपल निकाल लिया जाता है। उसके बाद बाकी के द्रव को एक कंटेनर में निकाल कर खाली कर दिया जाता है।

इस दौरान व्यक्ति को खांसी भी उठ सकती है, क्योंकि फेफड़े निकाले गए द्रव की जगह को भरने के लिए फूलने लग सकते हैं। खांसी उठने की स्थिति टेस्ट होने के कुछ घंटे बाद तक महसूस हो सकती है। यदि व्यक्ति को छाती में तेज दर्द या सांस लेने में तकलीफ या सांस फूले तो इसके बारे में तुरंत डॉक्टर को बता दें।

कुछ मामलों में द्रव का अच्छे से निरिक्षण करने के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन भी किया जा सकता है। थोरासेंटेसिस से जुड़े कुछ खतरे निम्न हैं:

हालांकि इससे बहुत ही कम मामलों में इससे किसी प्रकार की कोई गभीर समस्या हो पाती है।

प्ल्यूरल फ्लूइड एनालिसिस टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

सामान्य परिणाम:
यदि द्रव की मात्रा 20 मिलीलीटर से कम है और द्रव का रंग हल्का पीला या साफ तरल की तरह है, तो रिजल्ट को सामान्य माना जाता है।

असामान्य परिणाम:
असामान्य परिणाम निम्न स्थितियों और बिमारियों के संकेत दे सकते हैं:

  • प्ल्यूरल द्रव का लाल रंग यह बताता है कि द्रव में खून मिला हुआ है। 
  • प्ल्यूरल द्रव यदि गाढ़ा और धुंधला दिखाई दे तो इसका मतलब है कि द्रव में सफ़ेद रक्त कोशिकाएं हैं या संक्रमण हुआ है। इसके अलावा लसिका से रिसाव के कारण भी ऐसा हो सकता है।

असामान्य परिणाम प्ल्यूरल इफ्यूजन के कारणों के बारे में बता सकते हैं इनमें निम्न शामिल हैं:

  • ट्रॉमा 
  • कैंसर 
  • संक्रमण 
  • सिरोसिस (लिवर की गंभीर क्षति इसके कई कारण होते हैं इससे अंत में लिवर फेलियर जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं)
  • प्ल्यूरल द्रव और किसी अन्य अंग का असामान्य रूप से कोई संबंध दिखाई देना
  • हार्ट फेलियर 
  • गंभीर रूप से कुपोषण होना

यदि डॉक्टर को कोई संक्रमण होने का संदेह होता है तो सूक्ष्मजीवों की जांच के लिए कल्चर टेस्ट की सलाह भी दी जा सकती है।

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References

  1. MedlinePlus Medical Encyclopedia. [Internet] US National Library of Medicine; Pleural fluid analysis
  2. MedlinePlus Medical Encyclopedia. [Internet] US National Library of Medicine; Pleural effusion
  3. Pennstate Hershey. [Internet] Milton S Hershey Medical Center, U.S. Thoracentesis
  4. Beaufort Memorial Hospital. [Internet] SC, U.S.Pleural fluid analysis
  5. Moon Jun Na. Diagnostic Tools of Pleural Effusion Tuberc Respir Dis (Seoul). 2014 May; 76(5): 199–210 PMID: 24920946
  6. Richard W. Light. Pleural diseases 5th Edition U.S: Lippincott Williams and Wilkins, 2007, Page no: 214