वायरस और बैक्टीरिया किसी के लिए भी इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं. अगर सिर्फ बच्चों की बात करें, तो उन्हें सबसे ज्यादा स्किन इंफेक्शन, कान का इंफेक्शन और गले का इंफेक्शन प्रभावित करता है. इसके अलावा, बच्चों में बैक्टीरियल निमोनिया, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और गैस्ट्रोएंटेराइटिस इंफेक्शन भी हैं. बच्चों को होने वाले कुछ बैक्टीरियल इंफेक्शन का इलाज वैक्सीनेशन से किया जाता है, जबकि कुछ बैक्टीरियल इंफेक्शन को शुरुआती देखभाल व साफ-सफाई से रोका जा सकता है.

आज इस लेख में आप जानेंगे कि बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन के लक्षण, कारण और इलाज क्या-क्या हैं -

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  1. बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन के लक्षण
  2. बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण
  3. बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन का इलाज
  4. इन बातों का भी रखें ध्यान
  5. सारांश
बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन के लक्षण, कारण व इलाज के डॉक्टर

बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन के लक्षणों को आसानी से देखा जा सकता है. ठीक से नींद न आना, बुखार आना, सांस लेने में दिक्कत व डायरिया इत्यादि इसके लक्षण हैं. आइए, बच्चों को होने वाली बीमारियों के आधार पर बताते हैं कि बैक्टीरियल इंफेक्शन के लक्षण क्या-क्या हैं -

ब्रोन्काइटिस इंफेक्शन

ब्रोन्काइटिस इंफेक्शन यानी सांस की नली में सूजन होने पर सांस लेने में दिक्कत आ सकती है, सांस तेज चलने लगती है या सांस लेने के दौरान सी‍टी जैसी आवाज आने लगते हैं. नाक बहना भी इसी का एक लक्षण है. खांसी होना, जो खासतौर से रात में बढ़ जाती है. इसके अलावा, इस इंफेक्शन में बुखार भी चढ़ सकता है.

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सर्दी-जुकाम

सर्दी-जुकाम जैसे बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण बुखार होना सामान्य लक्षणों में से एक है. कोल्ड होने पर बुखार के साथ-साथ नाक का बहना, छींके आना और खांसी होने लगती है. साथ ही आंखों से पानी बहना शुरू हो जाता है. सिरदर्द भी इसी का एक लक्षण है. इसके अलावा, बच्चा ठीक से खाना भी नहीं खा पाता है.

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कान में इंफेक्शन

यह इंफेक्शन होने पर कान में दर्द होने के साथ-साथ उल्टी या दस्त भी होने लगते हैं. साथ ही सुनने में भी परेशानी हो सकती है.

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फ्लू (इन्फ्लूएंजा)

फ्लू होने पर सिरदर्द होना आम लक्षणों में से एक है. इसके अलावा, गले में सूजन, बहती नाक, भरी नाक, कफ, अचानक बुखार बढ़ना, ठंड लगनाशरीर में कमजोरी होनाशरीर में दर्दपेट में दर्द और उल्टी आना इसके लक्षण हैं.

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निमोनिया

निमोनिया होने पर बच्चे को कफ के साथ सांस लेने में तकलीफ होती है. साथ ही बुखार होना, ठीक से न खाना व कमजोरी महसूस होना इसके लक्षणों में शामिल है. गंभीर लक्षणों में ठंड से कंपकंपी होना, छाती में दर्द होना और तेज-तेज सांस लेना शामिल है.

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साइनोसाइटिस

साइनोसाइटिस में तेज सिरदर्द होना, 10 दिन से अधिक खांसी और नाक बहना, कम से कम 3 या 4 दिन तक बुखार होना, आंखों, चीकबोन्स या दांतों के आसपास दर्द होने के साथ ही गले में खराश इसके लक्षण हैं.

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यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने पर दर्द व जलन के साथ-साथ बार-बार पेशाब आना, बुखार होना, उल्टी आना, पेट में दर्द होना, कमर में दर्द महसूस होना, पेशाब से दुर्गंध आना इसके लक्षण हैं.

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बच्चे हों या बड़े, बैक्टीरियल इंफेक्शन तब होता है, जब बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. शरीर में प्रवेश करने के बाद ये संख्या में बढ़ने लगते हैं और शरीर में विभिन्न प्रकार के इंफेक्शन का कारण बनते हैं. ये बैक्टीरिया त्वचा पर लगे किसी भी तरह के कट से या फिर सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और बैक्टीरिया निमोनिया जैसे संक्रमण का कारण बन सकते हैं.

इसके अलावा, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों के मुकाबले कमजोर होती है. इस कारण से भी बच्चे जल्दी बैक्टीरिया का शिकार हो जाते हैं.

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बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन का इलाज लक्षणों और स्थिति पर निर्भर करता है. कुछ मामलों में एंटीबायोटिक कारगर होती हैं. आइए, बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज के बारे में विस्तार से जानते हैं -

एंटीबायोटिक

कुछ एंटीबायोटिक दवाएं हैं, जिनका इस्तेमाल बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज के लिए किया जाता है. डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं को इंफेक्शन की स्थिति के हिसाब से जारी रख सकते हैं या आवश्यकतानुसार बदल सकते हैं. साथ ही बच्चे के ठीक होने पर एंटीबायोटिक दवाओं को रोका भी जा सकता है.

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इंजेक्शन

बच्चे में बैक्टीरियल इंफेक्शन की स्थिति को देखकर डॉक्टर इंजेक्शन लगाने का निर्णय भी ले सकते हैं. इसमें इंजेक्शन के जरिए एंटीबायोटिक खुराक दी जाती है, जिससे शिशु को जल्द आराम मिल सकता है. बच्चे को सिर्फ दवा देनी है या इंजेक्शन लगाना है, इसका निर्णय डॉक्टर बच्चे की स्थिति को देखकर लेते हैं.

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यहां हम कुछ ऐसी काम की बातें बता रहे हैं, जिन्हें फॉलो करने से बच्चे को इंफेक्शन से बचाया जा सकता है. साथ ही अगर बच्चा बीमार है, तो उसे जल्द ठीक होने में मदद मिल सकती है -

  • कुछ भी खाने से पहले सुनिश्चित करें कि बच्चे के हाथ साफ हों.
  • गंदे हाथों से बच्चे को आंख, नाक और कान न छूने दें.
  • सर्दी-खांसी होने पर बच्चे को भाप जरूर दें.
  • बच्चे को हाइड्रेट रखें या डॉक्टर की सलाह पर इलेक्ट्रोलाइट दें.

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बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन होना आम बात है. बच्चे का गंदे हाथों से खाना खाना या गंदे हाथ को मुंह में डालना इंफेक्शन का कारण बन सकता है. बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन होने पर बुखार, कोल्ड, कफ, ठंड लगना, तेज सिरदर्द सहित शरीर में दर्द होना, सांस लेने में समस्या, शरीर में कमजोरी, उल्टी और दस्त होना आम लक्षण हैं. बैक्टीरियल इंफेक्शन को आमतौर पर एंटीबायोटिक्स से ठीक किया जा सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में डॉक्टर इंजेक्शन भी दे सकते हैं.

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