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परिचय:

छींक आना आपके शरीर की एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसके द्वारा शरीर नाक व गले के अंदर से उत्तेजक पदार्थों को बाहर निकाल देता है। छींक आने के दौरान मुंह से तेजी से हवा निकलती है, जो पूरी तरह से अनैच्छिक होती है। छींक बिना किसी प्रकार की चेतावनी दिए अचानक से आती है। छींक आना जुकाम या नाक संबंधी किसी ऐसी एलर्जी का शुरूआती संकेत भी हो सकती है, जो नाक में सूजन व लालिमा पैदा कर देती है। छींक कुछ अन्य लक्षणों के साथ भी आ सकती हैं, जैसे नाक बहना, खांसी, बुखार, गले में दर्द और थकान आदि।

छींक की रोकथाम करने के लिए उस स्थिति को कंट्रोल करना जरूरी होता है, जिसके कारण छींक आ रही हैं। सामान्य स्वच्छता बनाए रखना, एलर्जिक व उत्तेजक पदार्थों से दूर रहना और बीमार लोगों से दूर रहना आदि छींक आने से बचाव करने के कुछ सामान्य उपाय हैं। छींक आने के इलाज में एलर्जी की रोकथाम करने वाली दवाएं, भाप लेना और कुछ प्रकार के नाक के स्प्रे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। 

जिन लोगों को अधिक छींक आने की समस्या हो रही है, उन्हें अपने शरीर को पर्याप्त आराम देना चाहिए और खूब मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। छींक आने से कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे ऊपरी श्वसन तंत्र में संक्रमण, नाक के अंदर सूजन व जलन और नाक के वायुमार्गों में रुकावट आदि।

(और पढ़ें - बैक्टीरियल इन्फेक्शन का इलाज)

  1. छींक आना क्या है - What is Sneezing in Hindi
  2. छींक आने के लक्षण - Sneezing Symptoms in Hindi
  3. छींक आने के कारण व जोखिम कारक - Sneezing Causes & Risk Factors in Hindi
  4. छींक आने से बचाव - Prevention of Sneezing in Hindi
  5. छींक आने का परीक्षण - Diagnosis of Sneezing in Hindi
  6. छींक आने का इलाज - Sneezing Treatment in Hindi
  7. छींक आने के की जटिलताएं - Sneezing Complications in Hindi
  8. छींक आना की दवा - Medicines for Sneezing in Hindi
  9. छींक आना की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Sneezing in Hindi
  10. छींक आना के डॉक्टर

छींक आना क्या है - What is Sneezing in Hindi

छींक आना क्या है?

नाक व मुंह से अचानक और तेजी से निकलने वाली हवा जिसको नियंत्रित ना किया जा सके, उसे छींक कहते हैं। सीधे शब्दों में छींक शरीर की एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसके द्वारा नाक के वायुमार्गों से गंदगी को बाहर निकाला जाता है ताकि आप साफ हवा में सांस ले सकें। 

(और पढ़ें - सांस लेने में तकलीफ का उपचार)

छींक आने के लक्षण - Sneezing Symptoms in Hindi

छींक आने के क्या लक्षण होते हैं?

छींक आने से पहले अक्सर आप एक लंबी सांस लेते हैं और फिर उसको अंदर ही रखते हैं, जिसके कारण आपकी छाती की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है और आपके फेफड़ों में हवा का दबाव बढ़ जाता है। उसके बाद आपकी आंखें बंद हो जाती है और आपकी जीभ मुंह के ऊपरी हिस्से से जोर से चिपक जाती है। उस दौरान तेज दबाव के साथ हवा आती है और आपकी नाक से होते हुए तेजी से बाहर निकल जाती है। 

कई बार छींक के साथ घरघराहट के लक्षण भी देखे जा सकते हैं, ये लक्षण अक्सर छींक का कारण बनने वाली स्थिति पर ही निर्भर करते हैं। इसके अलावा छींक निम्न लक्षणों के साथ भी जुड़ी हो सकती है, जैसे:

यदि आपको बार-बार छींकें आ रही हैं, तो अपने डॉक्टर को  इस बारे मे बताएं। यदि कुछ घरेलू उपाय करने के बाद भी छींकें कम या बंद नहीं हो रही हैं या इससे आपकी रोजाना की दिनचर्या पर प्रभाव पड़ रहा है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।

(और पढ़ें - सूखी खांसी का इलाज)

छींक आने के कारण व जोखिम कारक - Sneezing Causes & Risk Factors in Hindi

छींक आने के कारण व जोखिम कारक - Sneezing Causes & Risk Factors in Hindi

छींक क्यों आती है?

नाक व गले की श्लेष्मा झिल्ली (Mucous membranes)में किसी प्रकार की खुजली व जलन आदि के कारण छींक आ सकती है। बार-बार छींक आना काफी परेशान कर देने वाली स्थिति हो सकती है, लेकिन बहुत ही कम मामलों में इसके कारण कोई गंभीर समस्या विकसित होती है। 

छींक निम्न के कारण भी हो सकती है:

(और पढ़ें - एलर्जी टेस्ट कैसे होता है)

छींक आने का खतरा कब बढ़ता है?

ऐसी कई चीजें हैं, जिनसे छींक आने लगती है:

  • सिगरेट का धुआं
  • मसालेदार खाना
  • घर के अंदर ठीक से हवा का बहाव ना होना
  • कोई गंभीर भावना महसूस होना
  • कुछ प्रकार की दवाएं
  • मसाले व मिर्च आदि (और पढ़ें - हरी मिर्च के फायदे)
  • अधिक तेज रोशनी
  • धूल
  • वायु प्रदूषण
  • शुष्क (सूखी) हवा
  • कुछ प्रकार के स्प्रे व पाउडर आदि
  • जुकाम साल के किसी भी समय में हो जाता है, लेकिन पतझड़ और ठंड के मौसम में इसके होने की संभावना अधिक होती है।

(और पढ़ें - सर्दी जुकाम में क्या खाएं)

छींक आने से बचाव - Prevention of Sneezing in Hindi

छींक की रोकथाम कैसे करें?

छींक आना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। छींक आना आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और आपके शरीर को वायरस व बैक्टीरिया से बचाता है। इसलिए अगली बार जब आपको छींक आने जैसा महसूस हो तो आप उसको रोकें नहीं आने दें। क्योंकि छींक आना आपको स्वस्थ रखने का एक तरीका होता है। (और पढ़ें - स्यूडोमोनस संक्रमण का इलाज)

अधिक छींक आना कुछ प्रकार की समस्याओं का संकेत दे सकता है। इन मामलों में छींक आना परेशान कर देने वाली समस्या बन जाती है। बार-बार छींक आने की स्थिति की रोकथाम करने के लिए आप कुछ तरीके अपना सकते हैं:

  • यदि आपको लगता है, कि आपके दोस्त या परिवार में से कोई बीमार पड़ गया है, तो जब तक वह ठीक नहीं हो जाता उसके संपर्क में ना आएं या कम से कम संपर्क में आने की कोशिश करें। बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद अपने हाथों को अच्छे से धोएं। 
  • धूल से छुटकारा पाने के लिए अपने घर में पोछा आदि लगाएं और वैक्यूम क्लीनर आदि का इस्तेमाल करें।
  • अपने हाथों को अच्छे से और नियमित रूप से धोते रहें। साबुन व पानी से हाथ धोना रोगाणुओं से बचने का अच्छा तरीका होता है। 
  • पर्याप्त मात्रा में ऐसे खाद्य पदार्थों को खाएं, जिनमें अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जैसे दही खाना या नियमित रूप से प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स लेना।
  • धूल के कीड़ों व अन्य सूक्ष्म जीवों को मारने के लिए अपनी बेड की चादर व अन्य कपड़ों को समय-समय पर धोते  रहें।
  • ऐसे पदार्थों से बचें जिनसे आपको छींक आती है।
  • उत्तेजक पदार्थों के संपर्क में आने से बचने के लिए अपने घर में थोड़ा बहुत बदलाव करें।
  • अपने घर के खिड़कियों व दरवाजों को खुला रखें या घर पर हवा को फिल्टर करने वाली मशीन लगा लें, ताकि आपके घर की हवा ताजी व साफ रहे। 

(और पढ़ें - धूल से एलर्जी के लक्षण)

छींक आने का परीक्षण - Diagnosis of Sneezing in Hindi

छींक की जांच जैसे की जाती है?

छींक आना आमतौर पर कोई ऐसी समस्या नहीं होती, जिसके कारण डॉक्टर के पास जाना पड़ें। यदि छींक बार-बार आ रही है या इसके साथ-साथ कुछ अन्य लक्षण भी महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर को दिखाने की आवश्यकता पड़ सकती है। 

स्थिति का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर आपके स्वास्थ्य से जुड़ी पिछली जानकारी लेते हैं और आपके कान, नाक व गले की जांच करते हैं। परीक्षण के दौरान आपके शरीर में किसी प्रकार के बदलाव की जांच भी की जाती है। इसके अलावा आपके स्वास्थ्य संबंधी कुछ अन्य लक्षणों की जांच भी करेंगे, जैसे खांसी, आंखों से पानी आना और बंद नाक आदि। (और पढ़ें - एचएसजी टेस्ट कैसे होता है)

किसी प्रकार की एलर्जी व सर्दी जुकाम आदि की जांच करने के लिए आपको डॉक्टर से परीक्षण करवाना पड़ता है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में जुकाम का इलाज)

परीक्षण करने के लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट भी कर सकते हैं, जैसे:

(और पढ़ें - लैब टेस्ट क्या है)

छींक आने का इलाज - Sneezing Treatment in Hindi

छींक आने का इलाज - Sneezing Treatment in Hindi

छींक का इलाज कैसे किया जाता है?

यदि आपको एलर्जी या संक्रमण आदि के कारण छींक आ रही हैं, तो इस समस्या को ठीक करने के लिए डॉक्टर आपकी मदद कर सकते हैं। 

  • नाक स्प्रे में कोर्टिकोस्टेरॉयड होता है, जिसकी मदद से नाक के अंदर की सूजन को कम किया जा सकता है। नाक के अंदर की सूजन को कम करके भी छींक आने की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। 
  • एंटीहिस्टामिन दवाएं बहती नाक में सुधार करती हैं और छींक को कम करती हैं। 
  • जुकाम के एक लक्षण के रूप में कई बार बदन दर्द होने लगता है, एंटीहिस्टामिन दवाओं की मदद से बदन दर्द को कम किया जा सकता है। (और पढ़ें - बदन दर्द के उपाय)
  • शरीर को जल्दी स्वस्थ करने के लिए पर्याप्त आराम करें और खूब मात्रा में पानी व अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें
  • यदि आपको एलर्जी आदि के कारण छींकें आती हैं, तो उन पदार्थों से दूर रहें जिनसे आपको एलर्जी होती है। (और पढ़ें - एलर्जिक राइनाइटिस के उपाय)
  • आपके लिए एलर्जिक पदार्थों की पहचान करने के लिए और उनका इलाज करने के लिए डॉक्टर की मदद लें।
  • कुछ प्रकार की एंटीहिस्टामिन दवाएं भी हैं, जो एलर्जी के लक्षणों को कम कर देती हैं, ये दवाएं  डॉक्टर द्वारा लिखी जाती हैं और कुछ दवाएं डॉक्टर की पर्ची के बिना भी मेडिकल स्टोर से मिल जाती हैं। एलर्जी की रोकथाम करने के लिए सबसे अधिक उपयोग की  जाने वाले टेबलेट लोरैटैडाइन (Loratadine) और सिट्राजिन (Cetirizine) हैं। 
  • यदि आपको कोई गंभीर एलर्जी है, तो डॉक्टर आपको एलर्जी का टीका (एलर्जी शॉट) लगा सकते हैं। इसमें शुद्ध किए हुए एलर्जिक पदार्थों के अर्क होते हैं। टीके की मदद से एलर्जिक पदार्थों को शरीर के अंदर डाल दिया जाता है, जिससे फिर भविष्य में कभी उस पदार्थ के संपर्क में आने से एलर्जी पैदा नहीं होती। 
  • यदि आपको सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसा कोई संक्रमण हो गया है, तो उसके बंद नाक या बहती नाक जैसे लक्षणों को कम करने के लिए नाक के लिए उपयोग किए जाने वाले कुछ स्प्रे का उपयोग किया जा सकता है। 

    घरेलू उपचार - 
     
  • विटामिन सी:
    कुछ खट्टे फलों व कुछ प्रकार की सब्जियों में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है इसके अलावा विटामिन सी सप्लीमेंट्स के रूप में भी उपलब्ध है। आहार में विटामिन सी की मात्रा को बढ़ाकर समय के साथ-साथ छींक आने में कमी की जा सकती है। (और पढ़ें - विटामिन सी की कमी से होने वाला रोग)
     
  • आंवला:
    यह एंटीऑक्सिडेंट्स का काफी अच्छा स्रोत होता है और इसमें काफी मात्रा में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। ताजे आंवला को सीधे भी खाया जा सकता है या इसका जूस भी पिया जा सकता है। दिन में दो या तीन बार आंवला लेने से बार-बार छींक आने में सुधार किया जा सकता है। (और पढ़ें - आंवला जूस के फायदे)
     
  • काली इलायची:
    भारत में इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के भोजन व मसालों में किया जाता है। काली इलायची खाने के कई फायदे होते हैं। छींक से राहत पाने के लिए काली इलायची को एक दिन में दो या तीन बार चबाना चाहिए। 
     
  • अदरक:
    अदरक में एंटी-सेप्टिक गुण पाए जाते हैं, इसलिए यह डिकॉन्जेस्टेंट की तरह काम करता है और सर्दी जुकाम का इलाज करने में मदद करता है। (और पढ़ें - अदरक की चाय के फायदे)
     
  • सौंफ के बीज:
    सौंफ के बीज में एंटीबायोटिक, एंटीसेप्टिक और एंटीहिस्टामिन गुण होते हैं। छींक आने को रोकने के लिए एक मुट्ठी भुनी हुई सौंफ को अदरक के साथ लिया जा सकता है। (और पढ़ें - सौंफ की चाय के फायदे)
     
  • भाप लेना:
    नाक के श्वसन मार्गों में खुजली, जलन व किसी प्रकार के तकलीफ को शांत करने के लिए भाप लिया जा सकता है। इस प्रक्रिया को हर कोई अपने घर पर कर सकता है, इसमें किसी विशेष सामान्य या महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसे छींक की रोकथाम करने के लिए सबसे सस्ते उपायों में से एक माना जाता है। (और पढ़ें - भाप के फायदे)
     
  • पुदीने का तेल:
    पुदीने के तेल को छींक की रोकथाम करने के सबसे प्रभावी घरेलू उपाय में से एक माना जाता है। पुदीने के तेल को गर्म पानी में मिला कर भाप ली जा सकती है।

(और पढ़ें - पुदीने की चाय के फायदे)

छींक आने के की जटिलताएं - Sneezing Complications in Hindi

छींक आने से क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

छींक आना शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है। छींक को रोकने की कोशिश करना बहुत खतरनाक हो सकता है, क्योंकि छींक में हवा का दबाव अत्यधिक तेज होता है, जिसको रोकने से हमारे कान के परदे फट सकते हैं, नाक से खून आ सकता है या नाक व मस्तिष्क की रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। 

किसी प्रकार की एलर्जी के कारण होने वाली छींक का इलाज अगर समय पर ना किया जाए, तो इससे कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जैसे:

  • ऊपरी श्वसन तंत्र में संक्रमण
  • मुंह से अधिक सांस लेने के कारण दांत संबंधी समस्याएं होना (और पढ़ें - दांत के दर्द का इलाज)
  • लंबे समय तक नाक में सूजन व लालिमा रहना
  • लंबे समय तक नाक बंद रहना

 (और पढ़ें - खर्राटे रोकने के उपाय)

सर्दी जुकाम के कारण होने वाली छींक से निम्न जटिलताएं हो सकती हैं:

(और पढ़ें - निमोनिया के घरेलू उपाय)

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छींक आना की दवा - Medicines for Sneezing in Hindi

छींक आना के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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छींक आना की ओटीसी दवा - OTC medicines for Sneezing in Hindi

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