गठिया रोग के लक्षणों जैसे दर्द, जकड़न और सूजन को दूर करने में कई नैचुरल उपचार मदद कर सकते हैं. सामान्य चिकित्सा देखभाल जारी रखने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन कुछ नैचुरल उपचार गठिया से दर्द और कठोरता को दूर करने में मदद कर सकते हैं. जैसे - हीट एंड कोल्ड पैक का उपयोग करना. हॉट एंड कोल्ड पट्टी, एक्यूपंक्चर इत्यादि.

रूमेटाइड और आस्टियोआर्थराइटिस कई तरह के गठिया होते हैं, लेकिन सभी दर्द का कारण बन सकते हैं. कुछ जड़ी-बूटियों जैसे बोसवेलिया, नीलगिरी और विलो छाल में कुछ ऐसे गुण होते हैं, जिसके कारण गठिया रोग के दौरान होने वाली जलन, सूजन दूर हो सकती हैं और रूमेटाइड गठिया या पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस में भी मददगार साबित हो सकता है.

आज इस लेख में जानेंगे गठिया रोग की देसी जड़ी बूटी के बारे में -

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  1. गठिया में फायदेमंद औषधियां
  2. सारांश
गठिया रोग में लाभकारी जड़ी-बूटियां के डॉक्टर

कुछ जड़ी-बूटियों जैसे बोसवेलिया, नीलगिरी और विलो छाल में कुछ ऐसे गुण होते हैं, जिसके कारण गठिया रोग के दौरान होने वाली जलन व सूजन दूर हो सकती हैं. आइए, विस्तार से जानें गठिया रोग की देसी जड़ी बूटियों के बारे में -

एलोवेरा

एलोवेरा सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी-बूटियों में से एक है. यह कई रूपों में उपलब्ध है, जैसे कि गोलियां, पाउडर, जेल और पत्ती के रूप में. इसे अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. यह त्वचा में होने वाले इन्फेक्शन, सनबर्न के इलाज के साथ ही जोड़ों के दर्द में भी मदद कर सकता है. इसमें बहुत सारे एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. इसीलिए, एलोवेरा को गठिया के दर्द के लिए उपयोग किया जाता है. इसे सीधे त्वचा पर लगा सकते हैं या इसके जूस का सेवन करने से ऑस्टियोआर्थराइटिस के दर्द से राहत मिल सकती है.

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नीलगिरी

नीलगिरी आसानी से पाई जाने वाली जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग लोग कई प्रकार से करते हैं. नीलगिरी के पत्तों के अर्क का उपयोग गठिया के दर्द के इलाज के लिए किया जाता है. इस पौधे की पत्तियों में टैनिन होता है, जो गठिया से संबंधित सूजन और दर्द को कम करने में मदद कर सकता है. कुछ लोग इसके प्रभाव को बढ़ाने के लिए हीट पैड का उपयोग करते हैं. नीलगिरी अरोमाथेरेपी से गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है. नीलगिरी ऑयल का यूज करने से पहले पैच टेस्ट अवश्य कर लेना चाहिए.

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बोसवेलिया सेराटा

बोसवेलिया सेराटा को लोबान भी कहते हैं. यह बोसवेलिया के पेड़ों के गोंद से प्राप्त होता है, जो भारत में पाया जाता है. बोसवेलिक एसिड में ज्वलनरोधी प्रभाव होता है, जो गठिया रोग में मदद कर सकता है. लोबान कैप्सूल गठिया के दर्द, कार्य और कठोरता में सुधार करने में मदद कर सकते हैं. रिसर्च से पता चला हैं कि बोसवेलिया की प्रतिदिन 1 ग्राम तक की मात्रा ले सकते हैं. इसकी ज्यादा मात्रा लेने से लिवर पर गलत प्रभाव पड़ सकता है. यह टेबलेट फॉर्म और क्रीम के रूप में मार्केट में उपलब्ध है.

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कैट्स क्लॉ

यह एक नैचुरल हर्बल है, जो ट्रापिकल क्षेत्रों में पाया जाता है. ये दक्षिण और मध्य अमेरिका में उगता है. कैट्स क्लॉ की बेलों में पीले रंग के फूल होते हैं. यह गठिया में होने वाली जलन और सूजन कम करने के लिए उपयोगी जड़ी-बूटी है. कई सालों से इस जड़ी-बूटी का इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता हैं. आर्थराइटिस फाउंडेशन का कहना हैं कि रूमेटोइड गठिया के लिए कई पारंपरिक दवाओं की तरह, कैट्स क्लॉ ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर को कम करता हैं.

कैट्स क्लॉ सूजन को कम करने के साथ ही घाव को भरने में भी मददगार है. इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं, जिसमें मतलीचक्कर आना, लो ब्लड प्रेशरसिरदर्द आदि शामिल है.

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विलो छाल

विलो छाल दर्द और सूजन के लिए एक प्राचीन उपचार है. आप इसे चाय के रूप में या टैबलेट के रूप में उपयोग कर सकते हैं. कुछ शोध कहते हैं कि विलो छाल गठिया दर्द को दूर करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसे - पेट खराब होना, हाई ब्लड प्रेशरएलर्जी होना. अगर आपको एस्पिरिन से एलर्जी है या पेट में अल्सर है, तो इसका इस्तेमाल न करें या इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से बात अवश्य कर लेनी चाहिए.

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हल्दी

हल्दी को भारतीय रसोई में मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. यह एक शक्तिशाली हीलर और एंटीसेप्टिक है. इसमें एक मुख्य घटक करक्यूमिन होता है, जो सूजन को कम करने में मदद करता है. यह लंबे समय से पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है. यह रूमेटाइड और आस्टियोआर्थराइटिस और अन्य गठिया को कम करने में मदद कर सकता हैं. इसका अधिक मात्रा में और बहुत समय तक इसका उपयोग नहीं करना चाहिए, वरना इससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल की परेशानी हो सकती है.

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थंडर गॉड बेल

ये जड़ी-बूटी लंबे समय से चीनी, जापानी और कोरियाई दवाओं में सूजन और इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए उपयोग की जाती है. इसे रूमेटाइड गठिया और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों को ठीक करने के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन इसके कुछ गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसे - बाल झड़ना, सिरदर्द, त्वचा पर लाल पैच पड़ना, स्पर्म काउन्ट कम होना आदि. इसके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें.

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प्राकृतिक तरीके

गठिया रोग को कुछ जड़ी-बूटियों के साथ-साथ कुछ नैचुरल उपायों से भी ठीक किया जा सकता हैं, जैसे - व्यायाम, एक्यूपंक्चर, हॉट और कोल्ड थेरेपी और मालिश. इन सभी को अगर जड़ी–बूटी लेने के साथ किया जाए, तो बहुत बढ़िया रिजल्ट मिल सकते हैं.

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गठिया जोड़ों में दर्द और जकड़न का कारण बनता है. इसकी कई अलग-अलग दवाइया हैं, जिनसे इसका इलाज कर सकते हैं, लेकिन कुछ घरेलू उपचारों से दर्द से राहत और मूवमेंट को बढ़ाया जा सकता है. सामान्य घरेलू उपचारों में मालिश, हीट एंड कोल्ड पैक, योग और व्यायाम कर सकते हैं. इसके साथ ही कई जड़ी-बूटियां भी गठिया रोग में कारगर हैं. वहीं, अगर दर्द ज्यादा है या लगातार बढ़ रहा है, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

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