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प्राचीन समय से शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए पेड़-पौधों से मिलने वाले तेल का प्रयोग किया जा रहा है इसे ही अरोमाथेरेपी कहा जाता है। पौधों की जड़ों, पत्तियों और फूलों से निकाले हुए तेलों का स्नान में, भाप लेने में, फेशियल, कैंडल्स और मसाज में उपयोग करके अरोमाथेरेपिस्ट आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाते हैं।

पूरी दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों में लगभग 5,000 वर्षों से अरोमाथेरेपी का उपयोग एक विश्वशनीय इलाज के तौर पर किया जाता रहा है। एरोमेटिक एसेंशियल ऑयल (पेड़-पौधों से निकाले जाने वाले प्राकृतिक तेल) के एंटी बैक्टीरियल (जीवाणुरोधी), एंटी इंफ्लेमेटरी (इंफ्लमैशन को कम करने वाले गुण) और एनाल्जेसिक (दर्द दूर करने वाले) प्रभाव अरोमाथेरेपी में प्राकृतिक उपचार के रूप में काम करते हैं।

इस लेख में आप विस्तार से पढ़ेंगे की अरोमाथेरेपी क्या है, अरोमाथेरेपी किट क्या होती है और अरोमाथेरेपी कैसे की जाती है और इसके साथ ही आप यह भी पढ़ेंगे कि अरोमाथेरेपी के क्या फायदे या लाभ और नुकसान हो सकते हैं।

  1. अरोमाथेरपी क्या है - Aromatherapy kya hai in hindi
  2. अरोमाथेरपी किट - Aromatherapy kit in hindi
  3. अरोमाथेरपी कैसे होती है - Aromatherapy procedure in hindi
  4. अरोमाथेरपी के फायदे - Aromatherapy benefits in hindi
  5. अरोमाथेरपी के नुकसान - Aromatherapy side effects in hindi

अरोमाथेरेपी को "एसेंशियल ऑयल थेरेपी" भी कहा जाता है। शरीर के स्वास्थ्य को संतुलित करने और बढ़ावा देने के लिए पौधों से निकाले गए प्राकृतिक खुशबूदार एवं गुणों से युक्त तेल का उपयोग करने वाली कला और विज्ञान को अरोमाथेरेपी कहा जाता है।

अरोमाथेरेपी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक प्रक्रियाओं को जोड़ कर व्यक्ति की सहज इलाज प्रक्रिया को बढ़ावा देती है।

फ्रांस के एक इत्र विशेषज्ञ और रसायनशास्त्री रेने-मॉरीस गैटेफॉस ने अरोमाथेरेपी शब्द का प्रयोग इसी नाम से प्रकाशित अपनी पुस्तक में पहली बार किया। इस पुस्तक में एसेंशियल ऑयल का उपयोग शारीरिक परेशानियों के लिए करने वाले आरंभिक क्लीनिकल शोध के परिणाम बताए गए हैं।

अपनी पुस्तक में एसेंशियल ऑयल के इत्र के रूप में उपयोग और मेडिकल उपयोग में अंतर को स्पष्ट किया है। इसीलिए इसे उन्होंने अरोमाथेरेपी नाम दिया था।

इसके आधार पर अरोमाथेरेपी को एक ऐसी उपचार प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए एसेंशियल ऑयल का मेडिकल उपयोग करती है। जैसे-जैसे अरोमाथेरेपी का उपयोग बढ़ता गया है, कई वर्षों के दौरान अरोमाथेरेपी ने शरीर, मन और आत्मा (ऊर्जा) को मिलाकर एक इलाज का समग्र दृष्टिकोण अपनाया है।

(और पढ़े - संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए योग)

अरोमाथेरेपी किट में घरेलू इलाज में उपयोग किये जाने वाले तेल शामिल होते हैं जैसे, नारंगी का तेल, लैवेंडर आयल, पुदीने का तेल, टी ट्री आयल, नींबू का तेल, लोबान का तेल, जिरेनियम का तेल और देवदार का तेल इत्यादि। किट में ये सभी तेल अलग-अलग पैक में दिए जाते हैं ताकि इनको मिला कर अपनी आवश्यकता के हिसाब से मिश्रण तैयार किया जा सके।

इसके साथ किट में निर्देश भी दिए जाते हैं कि इन तेल का उपयोग कैसे करना है। बिना किसी प्रशिक्षण के इस किट का स्वयं उपयोग न करें, आपको परेशानी भी हो सकती है। किसी विशेषज्ञ से मदद लें।

अरोमाथेरेपी के अंतर्गत एसेंशियल ऑयल्स का उपयोग निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता हैं -

  • मसाज - यह अरोमाथेरेपी का सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला तरीका है। एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदे वाहक लोशन (बादाम, कोको बटर, शीया बटर) के साथ उपयोग शरीर को शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से प्रभावित कर सकती है। मसाज का सही तरीका सीखने के बाद ही इसका उपयोग करें। यदि संभव हो तो किसी मसाज विशेषज्ञ से ही मसाज करवाए। (और पढ़े - बॉडी मसाज करने का तरीका)
  • स्नान - गर्म पानी में कुछ बूंदे मिलाए और उस पानी से स्नान करें। यह अरोमाथेरेपी का लाभ उठाने का सबसे अच्छा तरीका है। (और पढ़े - नहाने का सही तरीका)
  • इंहेलेशन - अस्थमा के रोगी इसका उपयोग न करें। एसेंशियल ऑयल्स बहुत सारी सांस की परेशानियों को ठीक कर सकते हैं इसलिए गर्म पानी में किसी एसेंशियल ऑयल की पांच बूंदे डालें और एक टॉवल को सिर पर ओढ़ ले और बर्तन मुँह के सामने रखकर भाप को थोड़ी देर सांसों में जाने दे।
  • लोशन या क्रीम या लेप - उपचार के लिए अपने पसंदीदा वाहक लोशन, मसाज ऑयल या क्रीम (कोका बटर, शीया बटर या अन्य कोई बिना सुगंध वाला लोशन) में एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदे मिला कर उपयोग करें। (और पढ़े - कोका पाउडर का फायदा)
  • सेक (कंप्रेस) - गर्म पानी की एक कटोरी में अपनी पंसद का कोई एसेंशियल ऑयल मिलाए और इसमें एक साफ कपड़ा गीला करके इसे दर्द वाली जगह पर सेक की तरह रखें। मासिक धर्म की ऐंठन के लिए भी गर्म सेक काफी अच्छा होता है। (और पढ़े - मासिक धर्म में दर्द का उपाय)

अरोमाथेरेपी विशेष रूप से तनाव संबंधी परेशानियों और विभिन्न जीर्ण रोगों का एक प्रभावी इलाज है। इसका उपयोग किसी भी उम्र में किया जा सकता है लेकिन ऊपर लिखी किसी भी विधि का सुरक्षित उपयोग करने के लिए प्रशिक्षण लिया जाना चाहिए।

हर तेल की अलग विशेषताएँ होती हैं और व्यक्तिगत रूप से अलग-अलग प्रकार के प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं जो निम्नलिखित हैं -

इलाज करवाने वाले की मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी या संवेदनशीलता के स्तर के आधार पर कुछ प्रकार के ऑयल का उपयोग नहीं करने की सलाह दी जाती है। अधिकांश एसेंशियल ऑयल्स को बच्चों से दूर रखना चाहिए।

अगर आप गर्भवती है या बच्चे को दूध पीला रही है तो हमेशा यह ध्यान रखें कि अरोमाथेरेपी के लिए जिस एसेंशियल तेल का उपयोग कर रही है वो आपके लिए सुरक्षित हो। (और पढ़े - गर्भावस्था में देखभाल के टिप्स)

हालाँकि, एसेंशियल ऑयल्स से बहुत कम नुकसान होते हैं फिर भी कुछ संभावित नुकसान निम्नलिखित हैं -

  • अधिक मात्रा में उपयोग या दुरूपयोग विषाक्तता पैदा कर सकता है
  • त्वचा की परेशानी होना, विशेष रूप से जब अधिक मात्रा में प्रयोग किया जाए (और पढ़े - त्वचा की देखभाल के टिप्स)
  • एलर्जी कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (प्रतिक्रिया के कारण होने वाला त्वचा रोग का एक रूप)
  • सूर्य के प्रकाश के प्रति प्रकाश संवेदनशीलता (फोटो सेंसिटिविटी) इत्यादि।

ऑयल्स का सांस के माध्यम से यानी इंहेलेशन के तरीके से उपयोग तभी करें जब आप पूरी तरह से आश्वस्त हो कि तेल शुद्ध है और आप ऐसी कोई दवा नहीं ले रहे हैं जो तेल के साथ रिएक्शन कर सकती है।

हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह ले कर या अच्छे से सही जानकारी जुटा कर ही अरोमाथेरेपी ऑयल्स का प्रयोग करें।

नोट - ये लेख केवल जानकारी के लिए है। myUpchar किसी भी सूरत में किसी भी तरह की चिकित्सा की सलाह नहीं दे रहा है। आपके लिए कौन सी चिकित्सा सही है, इसके बारे में अपने डॉक्टर से बात करके ही निर्णय लें।

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