हार्ट पल्पिटेशन - Heart Palpitations in Hindi

Dr. Ayush PandeyMBBS,PG Diploma

October 11, 2022

October 11, 2022

हार्ट पल्पिटेशन
हार्ट पल्पिटेशन

शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हृदय का ठीक तरह से धड़कना जरूरी होता है. वैसे तो हृदय सामान्य रूप से धड़कता है, लेकिन कभी-कभी दिल की धड़कन अचानक तेज महसूस होने लगती है. ऐसा कुछ मिनट या सेकंड के लिए हो सकता है. इस दौरान महसूस होता है कि दिल दौड़ रहा है, तेज हो रहा है या फड़फड़ा रहा है. इसे मेडिकल टर्म में हार्ट पल्पिटेशन कहलाता है. इस स्थिति में व्यक्ति को घबराहट, बेचैनी या सीने में दर्द महसूस हो सकता है. अगर हार्ट पल्पिटेशन कभी-कभार महसूस होता है, तो इसे सामान्य माना जा सकता है. वहीं, अगर ऐसा बार-बार होता है, तो इस स्थिति में व्यक्ति को इलाज की जरूरत पड़ती है. अगर हार्ट पल्पिटेशन का समय पर उपचार न किया जाए, तो यह भविष्य में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

आज इस लेख में आप हार्ट पल्पिटेशन के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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हार्ट पल्पिटेशन के लक्षण - Heart Palpitations Symptoms in Hindi

हार्ट पल्पिटेशन होने पर हृदय से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए, समय रहते ही इसके लक्षणों पर गौर करना जरूरी होता है. हार्ट पल्पिटेशन के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं -

  • हृदय का तेजी से धड़कना
  • कुछ पलों के लिए हार्ट बीट का मिस होना
  • दिल की धड़कना का जरूरत से ज्यादा महसूस होना
  • हृदय में तेज फड़फड़ाहट महसूस होना

हार्ट पल्पिटेशन गले या गर्दन के साथ-साथ छाती में भी महसूस हो सकता है. ऐसा आराम करने या किसी भी तरह की गतिविधि के दौरान महसूस हो सकता है.

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हार्ट पल्पिटेशन के कारण - Heart Palpitations Causes in Hindi

हार्ट पल्पिटेशन के कई कारण हो सकते हैं. यह कुछ दवाइयों, खराब जीवनशैली और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के कारण हो सकता है. एक अध्ययन के अनुसार, हृदय रोग वाले 16 प्रतिशत लोग हार्ट पल्पिटेशन की भी शिकायत करते हैं. हार्ट पल्पिटेशन के कारण निम्न हो सकते हैं -

खराब जीवनशैली

जब किसी व्यक्ति की जीवनशैली खराब होती है, तो उसे हृदय से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. खराब जीवनशैली को लंबे समय तक फॉलो करने से दिल की तेज धड़कनों का अहसास हो सकता है. खराब जीवनशैली में शामिल हैं -

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मानसिक स्वास्थ्य

जब कोई व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान होता है, तो उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. खराब मानसिक स्वास्थ्य हार्ट पल्पिटेशन का कारण भी बन सकता है. तनाव, चिंताडर, घबराहट या डिप्रेशन जैसी समस्याएं हार्ट पल्पिटेशन के लक्षणों को पैदा कर सकती है. इसलिए, हृदय को स्वस्थ रखने के लिए तनाव मुक्त रहने की कोशिश करनी चाहिए.

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दवाइयां

वैसे तो दवाइयां बीमारियों का इलाज करती हैं, लेकिन कई बार लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन कर लेते हैं. ऐसे में दवाइयां हृदय को प्रभावित कर सकती हैं. ओवर-द-काउंटर दवाइयां हार्ट पल्पिटेशन का कारण भी बन सकती हैं. इन दवाइयों में शामिल हैं -

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हृदय की बीमारियां

वैसे तो हार्ट पल्पिटेशन नुकसानदायक नहीं होता है, लेकिन जब हृदय की बीमारियां हार्ट पल्पिटेशन का कारण बनती हैं, तो इलाज करवाना जरूरी हो जाता है. हृदय की बीमारियां, जिनसे हार्ट पल्पिटेशन महसूस हो सकता है. इसमें शामिल हैं-

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अन्य मेडिकल कंडीशन

हृदय रोगों के अलावा कुछ मेडिकल कंडीशन भी हार्ट पल्पिटेशन का कारण बन सकती हैं. इसमें गर्भावस्थामेनोपॉजथायराइडबुखारस्लीप एपनिया, रक्त में ऑक्सीजन की कमी व लो ब्लड शुगर आदि मेडिकल कंडीशन हार्ट पल्पिटेशन का कारण बन सकती हैं.

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हार्ट पल्पिटेशन का इलाज - Heart Palpitations Treatment in Hindi

कभी-कभार पल्पिटेशन होना और कुछ सेकंड तक रहना सामान्य होता है, लेकिन अगर बार-बार और लंबे समय तक हार्ट पल्पिटेशन के लक्षण महसूस होते हैं, तो इस स्थिति में हृदय की जांच करवाने की सलाह दी जाती है. वैसे हार्ट पल्पिटेशन को इलाज की जरूरत नहीं होती है, जब तक कि ये किसी गंभीर बीमारी के कारण न हो. हार्ट पल्पिटेशन का इलाज इसके कारणों के आधार पर निम्न प्रकार से किया जा सकता है -

हृदय रोग का इलाज

अगर किसी तरह का हृदय रोग है और इसकी वजह से हार्ट पल्पिटेशन हो रहा है, तो आपको इस बीमारी का इलाज करवाने की जरूरत होती है. हृदय रोग के इलाज के बाद पल्पिटेशन के लक्षणों से भी छुटकारा मिल सकता है.

इसके अलावा अगर किसी अन्य मेडिकल कंडीशन की वजह से पल्पिटेशन की समस्या हो रही है, तो उसका इलाज करवाना जरूरी होता है. इस तरह से आप हार्ट पल्पिटेशन के लक्षणों को कम कर सकते हैं.

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तनाव कम करें

तनाव, चिंता या अवसाद भी हार्ट पल्पिटेशन का कारण बनता है. ऐसे में आप तनाव को कम करके इसका इलाज कर सकते हैं. तनाव को कम करने हृदय की बढ़ी हुई धड़कनों को कम करने में मदद मिल सकती है. तनाव कम करने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन जरूर करें. इसके अलावा, रिलेक्सेशन थेरेपी का भी सहारा लिया जा सकता है.

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कैफीन व नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं

अगर कोई कैफीन और नशीले पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करता है, तो इससे हार्ट पल्पिटेशन हो सकता है. ऐसे में कैफीन और नशीले पदार्थों का सेवन कम से कम करें. जिन दवाइयों या उत्पादों में कैफीन या निकोटीन होता है, उन्हें भी खाने से बचना चाहिए.

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हेल्दी डाइट

ब्लड शुगर लेवल के कम होने पर दिल की धड़कनें बढ़ सकती हैं. ऐसे में ब्लड शुगर को सामान्य करने के लिए शुगर और हेल्दी कार्ब्स को अपनी डाइट में शामिल करें. इससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ेगा और हार्ट पल्पिटेशन से बचाव होगा. इसके लिए ताजे फलों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए.

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दवाइयों को बदलें

अगर किसी को लगता है कि जो दवाइयां वो ले रहे हैं, उसकी वजह से हार्ट पल्पिटेशन हो रहा है, तो उन दवाइयों को डॉक्टर की सलाह पर बदला जा सकता है. इसलिए, दवाइयों के नुकसान से बचने के लिए किसी भी दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल न लें.

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सारांश – Summary

हार्ट पल्पिटेशन एक सामान्य स्थिति है. अधिकतर मामलों में इससे नुकसान नहीं होता है. ऐसे में इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है. हालांकि, कुछ मामलों में हार्ट पल्पिटेशन गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है. ऐसे में तुरंत इलाज की जरूरत पड़ सकती है. हृदय को स्वस्थ रखने के लिए अच्छी लाइफस्टाइल और हेल्दी डाइट लेना जरूरी होता है. इसके साथ ही तनाव आदि से बचें और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा का सेवन न करें. इस तरह से आप अपने हृदय को हेल्दी बनाए रख सकते हैं और हृदय रोगों से बच सकते हैं.

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