नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर होती है। ऐसे में शिशु को कई रोग होने की काफी संभावनाएं रहती है, जिसके चलते उसको सुरक्षित और स्वस्थ रखना बेहद जरूरी होता है। इसी के तहत टीकाकरण के माध्यम से शिशु की रोगप्रतिरोधक क्षमता को रोगों से बचाव करने में सक्षम बनाया जाता है।

हेपेटाइटिस बी एक संक्रामक रोग है और नवजात शिशु में इसके होने की अधिक आशंका होती है। हेपेटाइटिस बी की वजह से लीवर को नुकसान होता है। हेपेटाइटिस बी से शिशु को सुरक्षित रखने के लिए ही हेपेटाइटिस बी वैक्सीन का टीका लगाया जाता है।

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इस लेख में हेपेटाइटिस बी वैक्सीन के बारे में विस्तार से बताया गया है। साथ ही इसमें हेपेटाइटिस बी वैक्सीन क्या है, हेपेटाइटिस बी के टीके की खुराक, हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की कीमत, हेपेटाइटिस बी वैक्सीन के साइड इफेक्ट और हेपेटाइटिस बी का टीका किसे नहीं देना चाहिए आदि विषयों को भी विस्तार से बताया गया है। 

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  1. हेपेटाइटिस बी टीका क्या है - Hepatitis B tika kya hai
  2. हेपेटाइटिस बी के टीके की खुराक और उम्र - Hepatitis B ke tike ki tike khurak aur umar
  3. हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की कीमत - Hepatitis B vaccine ki kimat
  4. हेपेटाइटिस बी वैक्सीन के साइड इफेक्ट - Hepatitis B vaccine ke side effect
  5. हेपेटाइटिस का टीका किसे नहीं दिया जाना चाहिए - Hepatitis ka tika kise nahi diya jana chahiye
  6. भारत में हेपेटाइटिस बी वैक्सीन - Hepatitis B vaccine in india
हेपेटाइटिस बी टीका के डॉक्टर

हेपेटाइटिस बी का टीका हेपेटाइटिस बी से शिशु का बचाव करता है। इस वैक्सीन के बारे में जानने के लिए आपको समझना होगा कि हेपेटाइटिस बी होता क्या है और कैसे फैलता है। हेपटाइटिस बी वायरस के कारण शिशु या व्यस्कों को हेपेटाइटिस बी होता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। हेपेटाइटिस बी वायरस से लीवर पर दुष्प्रभाव पड़ता है। हेपेटाइटिस के कारण होने वाली समस्याएं कुछ सप्ताह के लिए या उससे अधिक लंबे समय तक भी चल सकती हैं।

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हेपेटाइटिस बी का वायरस दो तरह से प्रतिक्रिया करता है। इसके कुछ वायरस तीव्र प्रतिक्रिया (Acute hepatitis B virus) दिखाते हैं, जबकि कुछ वायरस लंबे समय के बाद अपना प्रभाव दिखाते हैं, इनको दीर्घकालिक वायरस (Chronic hepatitis B virus) भी कहा जा सकता है।

तीव्र प्रतिक्रिया वाले वायरस के संपर्क में आने के बाद शिशु या व्यक्ति को हेपेटाइटिस बी छह महीनों के अंदर हो जाता है। इसको जल्द ठीक होने वाली बीमारी माना जाता है। इसके रोगी में बुखार, थकान, भूख कम लगना, जी मिचलाना और उल्टी आने के लक्षण होते हैं। इसके साथ ही व्यक्ति को पीलिया, मांसपेशियों, पेट और जोड़ों में दर्द भी होने लगता है।

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दीर्घकालिक हेपेटाइटिस बी वायरस का संक्रमण होने पर रोगी लंबे समय तक बीमार रहता है। यह संक्रमण तब होता है जब वायरस व्यक्ति के शरीर में लंबे समय तक रहता है। इस तरह के वायरस से संक्रमित अधिकतर लोगों के शरीर में किसी भी तरह के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, परंतु इसकी वजह से लीवर क्षति (लीवर सिरोसिस), लीवर कैंसर और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। इस रोग के मरीज अन्य लोगों को भी हेपेटाइटिस बी से संक्रमित कर सकते हैं। 

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हेपेटाइटिस बी रक्त, वीर्य और शरीर के अन्य तरल जैसे लार आदि से फैलता है। इस वायरस से निम्न तरह से संक्रमित होने की संभावना अधिक होती है:

  • जन्म के समय या उसके बाद (यदि बच्चे की मां हेपेटाइटिस के वायरस से संक्रमित हो)
  • संक्रमित व्यक्ति के दाढ़ी बनाने के सामान (शेविंग किट) का प्रयोग करना या उसके टूथब्रश को इस्तेमाल करना।
  • संक्रमित व्यक्ति के घावों या खून के संपर्क में आने से।
  • वायरस वाले व्यक्ति से संभोग करना।
  • इंजेक्शन का दोबारा इस्तेमाल करना।
  • किसी तीखे औजार पर लगे संक्रमित रक्त के संपर्क में आना। 

शिशु व अन्य व्यस्कों में हेपेटाइटिस से बचाव के लिए ही हेपेटाइटिस बी वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाता है। हेपेटाइटिस बी वैक्सीन, हेपेटाइटिस बी वायरस के एक हिस्से से बनाई जाती है, वैक्सीन में मौजूद वायरस का हिस्सा हेपेटाइटिस बी के संक्रमण का कारण नहीं होता है। आमतौर पर हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए इस वैक्सीन की छह महीनों के अंदर तीन से चार खुराक दी जाती है।  

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हेपेटाइटिस बी के टीके जन्म के समय से ही शिशु को देना शुरू होते हैं। शिशु और व्यस्कों को हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की तीन खुराक दी जाती है, जबकि कुछ मामलों में इसकी चार खुराक भी दी जा सकती है। हेपेटाइटिस बी के टीके के लगाने की सही उम्र के बारे में नीचे विस्तार से जानें –

  • पहली खुराक – जन्म के समय में, 0.5 मिली लीटर।
  • दूसरी खुराक – एक से दो महीने के बीच में, 0.5 मिली लीटर।
  • तीसरी खुराक – 6 से 18 महीने के बीच में, 0.5 मिली लीटर।

वयस्कों को हर खुराक में हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की 1 मिली लीटर मात्रा दी जाती है। हाल में विदेशी स्वास्थ्य संस्थाओं के द्वारा 18 साल या उससे अधिक आयु के लोगों को हेपेटाइटिस बी वैक्सीन के विकल्प के रूप में एचईपीबी-सीपीजी (HepB-CpG) की दो खुराक देने की सलाह दी गई है। 

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हेपेटाइटिस बी वैक्सीन किसे लेनी चाहिए?

हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन निम्न तरह लोगों को लेनी चाहिए:

  • सभी नवजात शिशु,
  • उन बच्चों और किशोरों को, जिन्होंने 19 साल का होने तक एक बार भी वैक्सीन न ली हो।
  • जिनको सेक्सुअल इंफेक्शन होने का खतरा होता है।
  • 19 से 59 उम्र के डायबिटीज से पीड़ित लोगों को। (और पढ़ें - डायबिटीज में परहेज )
  • घर के किसी व्यक्ति को हेपेटाइटिस बी से संक्रमित होने पर, अन्य सभी लोगों को वैक्सीन लेनी चाहिए।
  • किसी वयस्क द्वारा सुई या इंजेक्शन को दोबारा इस्तेमाल करना।
  • बीमार की देखभाल करने वाले लोगों को।
  • किसी ऐसे देश में यात्रा के लिए जाना, जहां पर हेपेटाइटिस बी का खतरा अधिक हो।  
  • हेपेटाइटिस सी के वायरस से संक्रमित होने पर।
  • लंबे समय से लीवर रोग होने पर।
  • एचआईवी संक्रमण होने पर।
  • हेपेटाइटिस बी वायरस से बचाव के लिए।    

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भारत में हेपेटाइटिस बी की कई वैक्सीन मिलती है। इस वैक्सीन की मात्रा के आधार पर इसकी कीमत भी अलग-अलग हैं। कुछ महत्वपूर्ण वैक्सीन को कीमत के साथ नीचे बताया गया है।

वैक्सीन के नाम    कीमत
बॉयोवैक बी 100 एमसीजी इंजेक्शन (Biovac B 100 mcg Injection) 700
ईलोवैक-बी 20 एमसीजी इंजेक्शन (Elovac-B 20 mcg Injection) 162.5
इंजरिक्स-बी10 एमसीजी (Engerix-B 10 mcg) 300.8
इनीवैक एचबी (Enivac HB)  157.5
जिनीवैक-बी वैक्सीन (GeneVac-B Vaccine) 820.4
हेपेटाइटिस बी इंजेक्शन (Hepatitis B  injection) 11000

हेपेटाइटिस बी वैक्सीन के दुष्प्रभाव बेहद हल्के होते हैं और कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं। फिलहाल, वैक्सीन से होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में विस्तार से नीचे बताया जा रहा है।

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हेपेटाइटिस का टीका हर किसी को नहीं दिया जाता है। कुछ विशेष स्थिति में लोगों को हेपेटाइटिस बी का टीका नहीं लेना चाहिए या अपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसको लगाना चाहिए। आगे जानते हैं कि किन परिस्थितियों में आपको हेपेटाइटिस वैक्सीन नहीं लेनी चाहिए या डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

  • यदि व्यक्ति को हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की पहली खुराक से गंभीर एलर्जी हुई हो, तो ऐसे में उस व्यक्ति को हेपेटाइटिस बी की दूसरी खुराक को लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
  • किसी बीमारी जैसे सर्दी जुकाम के हल्के लक्षण होने पर आप वैक्सीन ले सकते हैं। लेकिन यदि आपको किसी बीमारी के गंभीर लक्षण हो तो हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लेने से पहले थोड़ा इंतजार करना चाहिए। (और पढ़ें - बच्चे को दूध पिलाने के तरीके)
  • अगर आपको यीस्ट, हेपेटाइटिस बी के किसी तत्व या किसी दवा से एलर्जी हो, तो ऐसे में हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
  • किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या जैसे लीवर रोग या डायबिटीज होने पर हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लेने से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
  • गर्भवती महिला या प्रेग्नेंसी के प्रयास करने वाली महिलाओं को हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। बेशक, हेपेटाइटिस बी वैक्सीन से गर्भ में पलने वाले बच्चे को नुकसान होने के तथ्य मौजूद न हो, लेकिन आपको इस वैक्सीन से होने वाले संभावित नुकसान के बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • अगर आप स्तनपान कराती हैं या बच्चे को स्तनपान कराना शुरू करने वाली हैं, तो ऐसे में भी आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। (और पढ़ें - बच्चे को दूध पिलाने के तरीके)
  • अगर आप पहले से विटामिन, किसी प्रकार की दवाएं या सप्लिमेंट्स या हर्बल प्रोडक्ट ले रहे हैं, तो हेपेटाइटिस बी वैक्सीन पहले से ली जाने वाली दवाओं पर अपना प्रभाव दिखा सकती है। अन्य दवाओं और हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की प्रतिक्रियाओं पर भी आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही इस वैक्सीन को लेना चाहिए।

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हाल में भारत में हुए अध्ययन में पता चला कि टीकाकरण घर में किया जाए या अस्पताल में अधिकांश नवजात इस हेपेटाइटिस वायरस के संक्रमण से सुरक्षित रहते हैं। नब्बें प्रतिशत मामलों में इस टीके को लेने के बाद शिशु का इस बीमारी से बचाव होता है। 

साथ ही इस अध्ययन में घर और अस्पताल में पैदा होने वाले शिशुओ को हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की तीनों खुराक देने के अंतर पर विचार करने पर पाया कि दोनों में ही स्थितियों में बेहद कम अंतर हैं। हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन न लेने पर शिशु को संक्रमण होने की 4.6 प्रतिशत संभावाना पाई गई।

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एडवाइजरी कमेटी ऑन इम्युनाईजेशन प्रेक्टिसेज (ACIP/ Advisory committee on immunization pratices) ने इस वैक्सीन पर निम्न कुछ सुझाव दिए हैं।

  • हेपेटाइटिस बी वैक्सीन जन्म के 24 घंटों के भीतर दो किलो या अधिक वजन वाले शिशु को दी जानी चाहिए। (और पढ़ें - पीलिया के घरेलू उपाय)
  • हेपेटाइटिस बी के वायरस की जांज के लिए गर्भवती महिला का एचबीएसएजी (HBsAg) टेस्ट कराना। 
  • जिस व्यक्ति को गंभीर लीवर रोग हो (जैसे – फैटी लीवर, सिरोसिस, अल्कोलिक लीवर रोग)
  • जिस शिशु की मां के एचबीएसजी की सही स्थिति मालूम न हो, उस शिशु को वैक्सीन देने के बाद सिरोलॉजिक टेस्ट कराना चाहिए।  

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