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बच्चे में जन्म से ही थोड़ी-बहुत प्रतिरक्षा प्रणाली होती है। लेकिन बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत होने में थोड़ा समय लगता है। प्रतिरक्षा तंत्र जब तक मजबूत नहीं होता तब तक बच्चों में वायरल इन्फेक्शन का खतरा बना रहता है, जो नवजात शिशुओं में सर्दी जुकाम का कारण बनता है।

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करीब 200 से अधिक प्रकार के वायरस नवजात शिशुओं में सर्दी जुकाम का कारण बन सकते हैं। अच्छी बात यह है कि सर्दी जुकाम होने से आपके शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत होने में मदद मिलती है (लेकिन हर प्रकार के वायरस से संक्रमित होने से ऐसा नहीं होता)।

शिशु को साल के किसी भी समय सर्दी जुकाम हो सकता है। एक साल का होने से पहले ही अधिकांश बच्चों को कम से कम सात बार सर्दी जुकाम हो जाता है। यदि आपकाे शिशु के पास अन्य बड़े बच्चे ज्यादा रहते हों, तो उसको सुर्दी जुकाम होने की संभावना बढ़ जाती है।

नवजात शिशुओं में सर्दी जुकाम होना कोई गंभीर समस्या नहीं होती है, लेकिन इससे उनको जल्द ही निमोनिया या क्रुप (croup: खांसी का प्रकार) जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

शिशुओं में होने वाले सर्दी जुकाम के बारे में आपको आगे विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही नवजात शिशुओं में सर्दी जुकाम के लक्षण व कारण बताये हैं। इसके आलावा आप यह भी जानेंगे कि नवजात शिशुओं में सर्दी जुकाम कितने दिनों तक रहता है, इसके इलाज व बचाव के उपाय क्या हैं, आदि।

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  1. नवजात शिशु को सर्दी जुकाम होने के लक्षण - Navjat shishu ko sardi jukam hone ke lakshan
  2. नवजात शिशु को सर्दी जुकाम होने के कारण - Navjat shishu ko sardi jukam hone ke karan
  3. नवजात शिशु को सर्दी जुकाम कितने दिनों तक रह सकता है - Navjat shishu ko sardi jukam kitne dino tak rah sakta hai
  4. नवजात शिशु के सर्दी जुकाम का इलाज - Navjat shishu ke sardi jukam ka ilaj
  5. नवजात शिशु को सर्दी से कैसे बचाएं - Navjat shishu ko sardi se kaise bachaye
  6. नवजात शिशु को सर्दी जुकाम के डॉक्टर

नाक बंद होना या बहना आपके नवजात शिशु को सर्दी जुकाम होने का पहला संकेत हो सकता है। शुरु में बच्चे की नाक से बहने वाला तरल पतला होता है, लेकिन कुछ दिनों के बाद नाक से बहने वाला तरल गाढ़ा और हल्के पीला-हरे रंग में बदल जाता है। यह सामान्य होता, इसका मतलब यह नहीं होता कि आपके शिशु का सर्दी जुकाम बढ़ रहा है। इसके अलावा नवजात शिशुओं में सर्दी जुकाम होने पर निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

नवजात शिशुओं को सर्दी जुकाम होने पर फ्लू, क्रुप और निमोनिया जैसे ही लक्षण दिखाई देते हैं। इसलिए अक्सर माता-पिता को ज्यादा चिंता होने लगती है। 

1.  फ्लू –

अगर आपके नवजात शिशु को सर्दी जुकाम के साथ ठंड लगे, शिशु को उल्टी और दस्त हो तो यह फ्लू होने का संकेत होता है। इसके साथ ही उसको सिरदर्द और शरीर की मांसपेशियों में दर्द, बदन दर्दगले में दर्द की समस्या हो सकती है, लेकिन वह इन समस्याओं को बता नहीं पाता है।

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2.  निमोनिया –

शिशु का सर्दी जुकाम बढ़ कर निमोनिया बनने की संभावना होती है। अगर ऐसा हो जाये तो निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:

3.  क्रुप –

कई बार बच्चे को सर्दी जुकाम की वजह से क्रुप (खांसी का एक प्रकार) हो जाता है, ऐसे में बच्चे को सांस लेने में परेशानी या गला बैठने की समस्या हो जाती है। इसके साथ ही बच्चा जब सांस लेता है तो घरघराहट जैसी आवाज आती है।

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नवजात शिशु में सर्दी जुकाम नाक और गले के संक्रमण (ऊपरी श्वसन तंत्र के संक्रमण) की वजह से होता है। 100 से अधिक वायरस के कारण शिशुओं में सर्दी जुकाम हो सकता है, जिसमें राइनोवायरस (Rhinovirus) एक मुख्य वजह बनता है।

शिशु एक बार वायरस से संक्रमित होने पर, उस वायरस के प्रति अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर लेता है। लेकिन कई तरह के वायरस सर्दी का कारण होते हैं, इसलिए आपके शिशु को साल भर में कई बार सर्दी जुकाम हो सकता है। 

सर्दी जुकाम करने वाले वायरस आपके शिशु के मुंह, नाक और आंखों से प्रवेश करते हैं। आपका शिशु निम्न तरह से संक्रमित हो सकता है:

  • हवा – अगर किसी को सर्दी के कारण खांसी या बार-बार छींके आती हो, तो वह हवा के जरिए सीधे तौर पर आपके बच्चे को वायरस से संक्रमित कर सकता है। (और पढ़ें - बच्चों के लिए कैविटी से बचने के उपाय)
     
  • सीधे संपर्क में आना – सर्दी जुकाम से ग्रसित व्यक्ति के द्वारा बच्चे के हाथ को छूने से भी सर्दी जुकाम के वायरस बच्चे में फैल सकते हैं।
     
  • दूषित जगह – कुछ वायरस वस्तुओं की सतह पर दो से तीन घंटों के लिए जीवित रह सकते हैं। अगर शिशु वायरस युक्त दूषित जगह या वस्तु को छूता है तो इससे भी वह सर्दी जुकाम के वायरस से संक्रमित हो सकता है।

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आमतौर पर नवजात शिशुओं में सर्दी जुकाम के लक्षण तीन से 10 दिनों के बाद कम हो जाते हैं, हालांकि बहुत छोटे बच्चों में यह लक्षण दो सप्ताह तक भी बने रह सकते हैं। बड़े बच्चों के संपर्क में आने वाले अधिकांश शिशु को पहले साल में ही छह से दस बार सर्दी जुकाम हो सकता है। कई बार ऐसा लगता है जैसे शिशु को सर्दियों के पूरे मौसम में नाक बहने की समस्या रहती है।

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नवजात शिशु को सर्दी जुकाम होने पर आपको उसकी देखभाल रोगी की तरह करनी चाहिए। इस समय बच्चे का शरीर खुद को रोगों से बचाना सीख रहा होता है। इस प्रक्रिया में आपको उन्हें आराम देना चाहिए।

सर्दी जुकाम को कम करने वाली दवाएं बच्चे को नहीं देनी चाहिए, क्योंकि उनका असर बच्चों पर नहीं होता है, जबकि इन दवाओं के दुष्प्रभाव होने की संभावनाएं अधिक होती है।

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सर्दी जुकाम के शुरुआती दौर में डॉक्टर घरेलू उपचार अपनाने की सलाह देते हैं। कई बार भरी नाक में सेलाइन की बूंदे (Nasal saline drops: सोडियम क्लोराइड और पानी का मिश्रण) डालने से बच्चे को काफी आराम मिलता है।

नवजात शिशु को होने वाले कुछ मामलों में बुखार को कम करने वाली दवाइयों को देने पर भी विचार किया जाता है। शिशु के सर्दी जुकाम के लक्षणों को पूरी तरह से खत्म होने में 2 सप्ताह का समय लग सकता है।

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नवजात शिशु के सर्दी जुकाम के लिए घरेलू उपाय

निम्न घरेलू उपायों की मदद से आप अपने बच्चें के सर्दी जुकाम को कम कर सकती हैं –

  • पानी की कमी न होने दें – शिशु को जब सर्दी जुकाम, खांसी या बुखार होता है, तो उसको अधिक तरल और इलेक्ट्रोलाइट्स की आवश्यकता होती है। ऐसे में आप शिशु में पानी की कमी न होने दें और उसको नियमित स्तनपान कराएं। (और पढ़ें - बच्चे को बुखार)
     
  • नाक को साफ करें – रबड़ से बने सीरिंज की मदद से आप शिशु की भरी नाक को साफ कर सकती हैं। इससे शिशु को सांस लेने में आसानी होती है। (और पढ़ें - सर्दी जुकाम के घरेलू उपाय)
     
  • बच्चे के पास नमी बनाए रखें – नवजात शिशु को सर्दी जुकाम होने पर आप उसके पालने के आस-पास किसी ह्युमिडिटीफायर (humidifier: नमी बनाए रखने वाला यंत्र) का उपयोग करना चाहिए। इससे शिशु को बलगम से राहत मिलती है जिससे वह आसानी से सांस ले पाता है। (और पढ़ें - सर्दी जुकाम में क्या खाएं)
     
  • भाप लेना – बच्चे के साथ किसी ऐसे बाथरुम में 10 से 15 मिनट तक खड़ें हो जहां पर गर्म पानी की वजह से भाप हो, इससे बच्चे का बलगम ढीला हो जाता है। (और पढ़ें - भाप लेने का तरीका)
     
  • शिशु को ज्यादा से ज्याद आराम दें – शिशु को भीड़भाड़ वाली जगह में ना ले जाएं और जितना संभव हो उसको आराम करने दें। 

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कभी-कभी नवजात शिशु के सर्दी जुकाम के कारण अन्य बड़े बच्चों को भी सर्दी जुकाम होने का खतरा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अन्य बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली भी सर्दी जुकाम के वायरस से लड़ने के लिए तैयार नहीं होती है।

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इसके आलावा बड़े बच्चे व धूम्रपान करने वाले लोगों के आस-पास होने से भी शिशु को सर्दी जुकाम का खतरा बना रहता है।

सर्दी जुकाम करने वाला वायरस एक व्यक्ति से दूसरे तक हवा के द्वारा आसानी से फैल सकता है। कई बार जिस व्यक्ति में सर्दी जुकाम के वायरस होते हैं उसमें सर्दी जुकाम के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से शिशु आसानी से संक्रमित हो जाता है।

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नीचे बताए गए तरीको को अपनाकर आप नवजात शिशु को सर्दी जुकाम होने से बचा सकते हैं-   

  • जो व्यक्ति ज्यादातर शिशु के पास रहता हो, उसको नियमित रूप से हाथ धोने चाहिए।
  • शिशु को बीमार व्यक्ति से दूर रखें और किसी बीमार व्यक्ति के आसपास न जाने दे। (और पढ़ें - नवजात शिशु का वजन कितना होना चाहिए)
  • भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ज्यादा न जाएं।
  • धूम्रपान करने वाले व्यक्ति से अपने शिशु को दूर रखें। (और पढ़ें - शिशु का वजन बढ़ाने के उपाय)  
  • नियमित रूप से खिलौने और जमीन की सफाई करें।

स्तनपान कराने से मां के कुछ एंटीबॉडिज शिशु तक पहुंचते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आपका शिशु बीमार नहीं होगा, लेकिन स्तनपान से शिशु के बीमार होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। बेबी फार्मूला लेने वाले शिशुओं की तुलना में स्तनपान करने वाले शिशु को संक्रमण होने की सम्भावना कम होती है।

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