कावासाकी रोग - Kawasaki Disease in Hindi

Dr. Nadheer K M (AIIMS)MBBS

October 31, 2018

March 06, 2020

कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!
कावासाकी रोग
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परिचय

कावासाकी रोग (केडी) एक ऐसी बीमारी है जो लगभग हमेशा बच्चों को ही प्रभावित करती है, उनमें से अधिकतर बच्चे 5 वर्ष से कम आयु के होते हैं। इसे म्यूकोक्यूटेनियस लिम्‍फ नोड सिंड्रोम भी कहा जाता है। यह बच्चों में हृदय रोग के प्रमुख कारण में से एक है। लेकिन अगर जल्दी इसका पता चल जाता है तो डॉक्टर इसका इलाज कर सकते हैं और अधिकांश बच्चे बिना किसी समस्या के ठीक हो जाते हैं।

कावासाकी रोग के लक्षण क्या हैं?

विशेष लक्षणों में शरीर का उच्च तापमान जो 5 दिनों या उससे अधिक समय तक रहता है, लाल चकत्ते के साथ गर्दन की ग्लैंड में सूजन, सूखे और फटे होंठ, हाथ या पैर की उंगलिया लाल होना, आंखें लाल होना, कुछ हफ्तों के बाद और सही उपचार से, लक्षण कम गंभीर हो जाते हैं, लेकिन कुछ बच्चों में अधिक समय लग सकता है।

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कावासाकी रोग क्यों होता है?

कावासाकी रोग का सटीक कारण अभी भी अज्ञात है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारकों का मिश्रण कावासाकी रोग का कारण बन सकता है। ऐसा इस तथ्य के कारण हो सकता है कि कावासाकी रोग विशिष्ट मौसम के दौरान होता है और एशियाई मूल के बच्चों को अधिक प्रभावित करता है। कावासाकी रोग एक बच्चे से दूसरे में नहीं फैलता है।

कावासाकी रोग का इलाज कैसे होता है?

कावासाकी रोग की जांच के लिए कोई विशेष परीक्षण उपलब्ध नहीं है। इसका निदान करने के लिए, डॉक्टर संकेत और लक्षण देखते हैं। वे इकोकार्डियोग्राम टेस्ट या अन्य परीक्षणों का भी उपयोग कर सकते हैं। मुख्य रूप से दवाओं से इसका इलाज किया जाता है। कभी-कभी, चिकित्सा प्रक्रियाओं और सर्जरी का उन बच्चों के लिए उपयोग किया जा सकता है जिनकी कोरोनरी धमनियां प्रभावित होती हैं।

अगर जल्दी पता लग जाता है तो डॉक्टर कावासाकी रोग के लक्षणों का प्रबंधन कर सकते हैं। अधिकांश बच्चे इलाज शुरू करने के 2 दिनों के भीतर बेहतर महसूस करने लगते हैं। लक्षणों की शुरुआत के 10 दिनों के भीतर कावासाकी रोग का इलाज हो जाने पर हृदय की समस्याएं आमतौर पर विकसित नहीं होती है।

कावासाकी रोग को रोका नहीं जा सकता है। हालांकि, अधिकांश बच्चे जिनमें यह रोग विकसित होता है, आमतौर पर लक्षण पैदा होने के कुछ हफ्तों के भीतर पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।

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कावासाकी रोग क्या है - What is Kawasaki Disease in Hindi

कवासाकी रोग क्या है?

कवासाकी एक ऐसी बीमारी है, जो शरीर में मुख्य रूप से त्वचा, मुंह और लिम्फ नोड्स को प्रभावित करती है। कवासाकी रोग आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक होता है।

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कावासाकी रोग के लक्षण - Kawasaki Disease Symptoms in Hindi

कवासाकी रोग के लक्षण क्या हैं?

कवासाकी रोग के बारे में सबसे खास बात यह है कि यह बहुत ही जल्दी हो जाता है और इससे होने वाले लक्षण चरणों में विकसित होते हैं। इसके कारण हृदय से संबंधित समस्याएं भी विकसित हो जाती हैं, जो लक्षण शुरु होने के 10 दिन से 2 हफ्तों के बाद शुरू हो जाती है। 

इसके लक्षण व संकेतों में निम्न भी शामिल हो सकते हैं:

  • तेज बुखार - इसमें 101 F से भी ऊपर बुखार हो जाता है, जिसके दवाएं बहुत ही कम असर कम कर पाती हैं। इसका तापमान कम होने में 5 से भी अधिक दिन लग जाते हैं। 
  • चकत्ते और/या त्वचा पीली पड़ना - इसमें चकत्ते आमतौर पर टांगों व छाती के बीच के भाग में और जननांगों के आसपास होते हैं। बाद में ये चकत्ते हाथों व पैरों की उंगलियों पर भी होने लग जाते हैं। (और पढ़ें - त्वचा पर चकत्तों के घरेलू उपाय)
  • सूजन व लालिमा - इसमें पैरों के निचले हिस्से और हाथों पर सूजन व लालिमा हो जाती है और उसके बाद हाथों व पैरों के बाकी हिस्सों में फैलने लग जाती है। 
  • आंखों के सफेद हिस्से में लालिमा व अन्य तकलीफ होना
  • गर्दन में स्थित लिम्फ नोड्स में सूजन आना
  • मुंह, होठ और गले में सूजन व अन्य तकलीफ होना
  • जीभ में सूजन व लालिमा
  • पेट संबंधी समस्याएं जैसे दस्त लगना और उल्टी आना
  • जोड़ों में दर्द होना

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डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपके बच्चे को बुखार है, जो लगातार तीन दिनों के बाद भी नहीं उतर रहा है, तो ऐसे में बच्चे को बच्चों के डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। इसके अलावा यदि आपको बच्चे में निम्न लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो जल्द ही डॉक्टर को दिखाएं:

  • दोनों आंखों में लालिमा
  • जीभ लाल हो जाना और सूजन आ जाना
  • हथेली व पैरों के तलवे लाल हो जाना
  • त्वचा पर पपड़ी उतरना
  • त्वचा पर चकत्ते होने पर
  • लसीका ग्रंथि में सूजन आने पर

(और पढ़ें - हृदय रोग से बचने के उपाय)

कावासाकी रोग के कारण व जोखिम कारक - Kawasaki Disease Causes & Risk Factors in Hindi

कवासाकी रोग क्यों होता है?

कवासाकी रोग के कारण का अभी तक ठीक से पता नहीं चल पाया है। डॉक्टर का मानना है कि यह समस्या आमतौर पर प्रतिरक्षा प्रणाली में किसी प्रकार की गड़बड़ के कारण होती है, लेकिन प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ पैदा करने वाले कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। 

इसके कारणों में निम्न भी शामिल हो सकते हैं:

  • आनुवंशिक कारक
  • किसी प्रकार के वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में आना
  • अन्य वातावरणीय कारक जैसे केमिकल या अन्य उत्तेजक पदार्थ

(और पढ़ें - वायरल इन्फेक्शन का इलाज)

कवासाकी रोग होने का खतरा कब बढ़ता है?

कुछ स्थितियां हैं, जो बच्चों में कवासाकी रोग होने का खतरा बढ़ा देती है। इनमें निम्न शामिल हो सकती हैं:

  • लिंग:
    लड़कियों के मुकाबले लड़कों में कवासाकी रोग होने के खतरा अधिक होता है।
     
  • उम्र:
    पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों में कवासाकी रोग होने के जोखिम सबसे ज्यादा होते हैं।
     
  • जातीयता:
    एशियन व प्रशांत महाद्वीप के बच्चों में कवासाकी रोग होने के जोखिम अधिक होते हैं, जैसे जापान व कोरिया में पैदा हुऐ बच्चे।
     
  • मौसम:
    अन्य किसी मौसम के मुकाबले सर्दी व वसंत ऋतू के समय में बच्चों में कवासाकी रोग होने का खतरा सबसे अधिक होता है। हालांकि यह रोग साल के किसी भी मौसम में हो सकता है।

(और पढ़ें - बैक्टीरियल संक्रमण के लक्षण)

कावासाकी रोग से बचाव - Prevention of Kawasaki Disease in Hindi

कवासाकी रोग की रोकथाम कैसे की जाती है?

कवासाकी रोग से बचाव करने के लिए अभी कोई भी उपाय नहीं मिला है। 

 

कावासाकी रोग का परीक्षण - Diagnosis of Kawasaki Disease in Hindi

कवासाकी रोग का परीक्षण कैसे किया जाता है?

इस रोग का परीक्षण करने के लिए कोई विशेष टेस्ट उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर इस रोग का परीक्षण बच्चे के लक्षण व संकेतों के आधार पर करते हैं। इसका परीक्षण करने के लिए डॉक्टर कुछ प्रकार के लैब टेस्ट भी कर सकते हैं। यदि बच्चे को लगातार 5 दिन से 101F से ज्यादा बुखार है, तो बच्चों में यह सबसे मुख्य लक्षण माना जाता है, जो कवासाकी रोग का संकेत देता है। 

(और पढ़ें - लैब टेस्ट क्या है)

यदि बच्चे में 5 दिन से ज्यादा बुखार है या फिर नीचे दिए गए 5 लक्षणों में से कोई 4 महसूस हो रहे हों, तो डॉक्टर समझ लेते हैं कि बच्चे को कवासाकी रोग हो गया है:

  • आंखे लाल होना (लेकिन किसी प्रकार का द्रव या कीचड़ आदि ना निकलना)
  • होठ सूखना, होठ फटना व लालिमा होना
  • हाथों व पैरों में सूजन व लालिमा और त्वचा पर पपड़ी बनकर उतरना
  • गर्दन में मौजूद लिम्फ नोड्स में सूजन होना और छूने पर दर्द महसूस होना

(और पढ़ें - फटे होंठ के घरेलू उपाय)

कवासाकी रोग का परीक्षण करने के लिए निम्न टेस्ट किए जा सकते हैं:

  • एक्स रे:
    परीक्षण के दौरान छाती का एक्स रे किया जाता है, जिसकी मदद से हृदय व फेफड़ों की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर बनाई जाती है। हार्ट फेलियर व अन्य सूजन आदि जैसी समस्याओं का पता लगाने के लिए डॉक्टर यह टेस्ट कर सकते हैं। (और पढ़ें - लिवर फंक्शन टेस्ट क्या है)
     
  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी एंड अल्ट्रासोनोग्राफी:
    डॉक्टर हृदय की इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी या अल्ट्रासोनोग्राफी भी कर सकते हैं। इस टेस्ट का उपयोग कोरोनरी धमनी विस्फार, हृदय की वाल्व में रिसाव होना, हृदय के आस-पास की थैली में सूजन होना (पेरिकार्डिटिस) और हृदय की मांसपेशियों में सूजन व लालिमा (मायोकार्डिटिस) आदि का पता लगाने के किया जाता है। कभी-कभी असामान्यता एकदम विकसित नहीं होती और टेस्ट में कुछ नहीं मिलता, इस वजह से टेस्ट को 2 या 3 हफ्तों से लेकर 6 से 8 हफ्तों के बीच फिर से किया जा सकता है। कुछ मामलों में टेस्ट को लक्षण शुरू होने के 6 से 12 महीने बाद भी किया जा सकता है। (और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट क्या है)
     
  • खून टेस्ट व थ्रोट कल्चर:
    कवासाकी जैसे लक्षण पैदा करने वाली अन्य समस्याओं के लिए खून टेस्ट, थ्रोट कल्चर और ब्लड कल्चर आदि टेस्ट किए जाते हैं। कवासाकी रोग में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या भी बढ़ जाती है, लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य से कम हो जाती है और सूजन व लालिमा जैसी समस्याएं होने लग जाती हैं। 

(और पढ़ें - अल्ट्रासाउंड क्या है)

कावासाकी रोग का इलाज - Kawasaki Disease Treatment in Hindi

कवासाकी रोग का इलाज कैसे किया जाता है?

आपके बच्चे को बुखार, सूजन व त्वचा संबंधी तकलीफ होने पर काफी दर्द हो सकता है। 

इन सभी समस्याओं से राहत देने के लिए डॉक्टर आपके बच्चे के लिए कुछ दवाएं लिख सकते हैं, जिनमें एस्पिरिन व अन्य कुछ दवाएं होती हैं जैसे खून का थक्का जमने से बचाव करने वाली दवाएं आदि। डॉक्टर से पूछे बिना बच्चे को किसी भी प्रकार की दवा नहीं देनी चाहिए। 

(और पढ़ें - दवाओं की जानकारी)

एस्पिरिन - 

  • एस्पिरिन एक नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा है। इस दवा की मदद से दर्द व तकलीफ को कम किया जा सकता है और बुखार को कम किया जा सकता है। एस्पिरिन की एक बड़ी खुराक एंटी-इंफ्लेमेटरी की तरह काम करती है इसकी मदद से सूजन को भी कम किया जा सकता है। एस्पिरिन की एक छोटी खुराक एंटी-प्लेटलेट की तरह काम करती है, इसकी मदद से खून के थक्के बनने से बचाव किया जा सकता है। (और पढ़ें - बुखार कम करने के उपाय)
     
  • आपके बच्चे को एस्पिरिन की कितनी बड़ी खुराक दी जाती है और कितने समय के लिए दी जाती है यह सब आपके बच्चे के लक्षणों पर निर्भर करता है।
     
  • जब तक बच्चे का बुखार नहीं उतरता तब तक डॉक्टर उसे एस्पिरिन की बड़ी खुराक देते रहते हैं।
     
  • लक्षण शुरु होने के 6 से 8 हफ्तों के बाद डॉक्टर एस्पिरिन की छोटी मात्रा देना शुरू कर सकते हैं।
     
  • यदि हृदय तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं में किसी भी प्रकार की  दिक्कत विकसित होती है, तो खून का थक्का को काम करने के लिए यह दवा दी जाती है।

(और पढ़ें - बुखार में क्या खाना चाहिए)

इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोबुलिन - 

  • मरीज को नसों के द्वारा इम्यून ग्लोबुलिन दिया जाता है। एस्पिरिन को अकेले देने की बजाए यदि उसके साथ इम्यून ग्लोबुलिन दिया जाए, तो यह मरीज के लिए और भी प्रभावी होता है। यदि इलाज में इसका उपयोग समय पर किया जाए तो इससे हृदय संबंधी समस्याएं होने का खतरा काफी कम हो जाता है। इस से होने वाली जटिलताओं से बचने के लिए ज्यादातर बच्चों का इलाज करने के लिए उनको जल्द से जल्द अस्पताल में भर्ती कर दिया जाता है।
     
  • इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोबुलिन को आईवीआईजी (IVIG) भी कहा जाता है। इम्यूनोग्लोबुलिन एंटीबॉडीज का एक सोलूशन (मिश्रण या घोल) जो स्वस्थ रक्तदान कर्ता लोगों से प्राप्त किया जाता है। इंट्रावेनस का मतलब होता है, कि इस दवा को सुई के द्वारा सीधे नसों में डाला जाता है।
     
  • एंटीबॉडीज एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जिसे प्रतिरक्षा प्रणाली सूक्ष्म जीवों व इन्फेक्शन आदि से लड़ने के लिए बनाती है।
     
  • आईवीआईजी बुखार को कम करने के साथ साथ हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम भी कम कर सकती है।
     
  • बच्चे को आईवीआईजी देने के बाद उसके लक्षण 36 घंटों के अंदर कम होने लग जाते हैं।
     
  • यदि 36 घंटों के बाद भी लक्षणों में किसी प्रकार का कोई सुधार ना हो, तो डॉक्टर आईवीआईजी की दूसरी खुराक भी दे सकते हैं। 

(और पढ़ें - प्रोटीन की कमी से होने वाले रोग)

कोर्टिकोस्टेरॉयड - 

  • कोर्टिकोस्टेरॉयड एक ऐसी दवा है, जिसमें हार्मोन होते हैं। ये हार्मोन ऐसे शक्तिशाली केमिकल होते हैं, जो शरीर को काफी प्रभावित करते हैं।
     
  • कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं आमतौर पर तब दी जाती हैं, जब आईवीआईजी दवाएं काम ना कर पाएं। इसके अलावा यदि आपके बच्चे में हृदय संबंधी समस्याएं होने के अधिक जोखिम हैं, तो भी डॉक्टर कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं देने पर विचार कर सकते हैं।

(और पढ़ें - हार्मोन असंतुलन के नुकसान)

कावासाकी रोग की जटिलताएं - Kawasaki Disease Risks & Complications in Hindi

कवासाकी रोग से क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

यह स्थिति हृदय से जुड़ी होती है, इसलिए यह जीवन के लिए घातक भी हो सकती है। लेकिन कवासाकी से ग्रस्त ज्यादातर लोग पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं और उन्हें कोई दीर्घकालिक समस्या नहीं होती है। हालांकि कुछ दुर्लभ (बहुत ही कम) मामलों में कवासाकी रोग से ग्रस्त बच्चों को कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे:

  • हार्ट वाल्व क्षतिग्रस्त होना (और पढ़ें - हार्ट वाल्व रोग का इलाज)
  • हृदय की धड़कन असामान्य हो जाना
  • हृदय की मांसपेशियों में सूजन आना
  • रक्त वाहिकाओं में सूजन व लालिमा (वाहिकाशोथ), यह स्थिति आमतौर पर कोरोनरी धमनी में होती है, जो हृदय तक खून पहुंचाने का काम करती है।
  • कोरोनरी आर्टरी एन्यूरिज्म

कवासाकी रोग से होने वाली अन्य जटिलताएं जैसे:

  • मस्तिष्क के आसपास के ऊतकों में सूजन व लालिमा होना (मेनिनजाइटिस)
  • जोड़ों संबंधी समस्याएं
  • पित्ताशय संबंधी समस्याएं (और पढ़ें - पित्ताशय की सूजन का इलाज)
  • आंख का अंदरुनी हिस्सा भी प्रभावित हो सकता है

इससे होने वाली सभी जटिलताएं आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाती हैं और कोई स्थायी क्षति नहीं पहुंचाती हैं।

(और पढ़ें - कोरोनरी धमनियों की बीमारी का इलाज)



संदर्भ

  1. National Health Service [Internet]. UK; Overview - Kawasaki disease
  2. American Heart Association. Kawasaki Disease. [Internet]
  3. Nathan Jamieson, Davinder Singh-Grewal et al. Kawasaki Disease: A Clinician's Update. Int J Pediatr. 2013; 2013: 645391. PMID: 24282419
  4. D Eleftheriou et al. Management of Kawasaki disease. Arch Dis Child. 2014 Jan; 99(1): 74–83. PMID: 24162006
  5. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Kawasaki Disease

कावासाकी रोग के डॉक्टर

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कावासाकी रोग की दवा - Medicines for Kawasaki Disease in Hindi

कावासाकी रोग के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

दवा का नाम

कीमत

₹53.2

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₹117.49

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