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लिपिडेमा को पेनफुल फैट सिंड्रोम (Painful Fat Syndrome) भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है वसा के जमाव संबंधी एक दर्दनाक स्थिति। यह एक गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली स्थिति है। इस विकार में त्वचा के नीचे अत्यधिक वसा जम जाती है जिसके कारण दोनों टांगे असामान्य आकार में बढ़ने लगती हैं।

इसके लक्षणों की पहचान जांघों, टांगों और कूल्हों पर जमी वसा से की जा सकती है। कई बार यह इतना बढ़ जाता है कि त्वचा ढीली और दर्दनाक बन जाती है। यह स्थिति पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में सामान्य रूप से देखी जाती है। ज्यादातर मामलों में महिलाओं में बांह और जांघों का आकार बढ़ता है, जबकि उनके हाथों व पैरों में वसा जमा नहीं होती है।

डॉक्टरों को अभी तक लिपिडेमा के कारण का नहीं पता चल पाया है। हालांकि, यह विकार मरीजों को उनके माता पिता से मिल सकता है और आगे उनके बच्चों में जा सकता है। यह आमतौर पर किशोरावस्था (प्यूबर्टी) में हार्मोन में बदलाव, महिलाओं में गर्भावस्था या मेनोपॉज के दौरान हो सकता है।

इसका पता लगाना आमतौर पर मुश्किल हो जाता है, क्योंकि अधिकतर मामलों में यह वसा संबंधी एक आम समस्या (जैसे कि मोटापा) जैसी दिखाई देती है। हालांकि, इस विकार को कुछ संकेतो द्वारा पहचाना जा सकता है, जैसे कि इस स्थिति मेंं होने वाली सूजन को उंगली से दबाया नहीं जा सकता। यह सूजन टांगों को आराम देने से नहीं जाती और न ही इसे गर्म या ठंडी सिकाई से कम किया जा सकता है।

हालांकि, इस विकार कि स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कुछ प्रकार की थेरेपी उपलब्ध हैं, जैसे कि वेटलॉस सर्जरी (ट्यूमसेंट)। दर्द से आराम पाने के लिए हल्के दबाव की पट्टी भी बांधी जा सकती है, लेकिन यह सभी मरीजों पर प्रभावशाली नहीं होती हैं।

लिपिडेमा के लक्षण
इसके लक्षण व्यक्तियों में विभिन्न प्रकार के होते हैं, लेकिन आमतौर पर इसके ज्यादातर मरीजों में असामान्य वसा की जमावट होती है। लोअर बॉडी में थाई, कूल्हों और लोअर लैग्स (टांगों का निचला हिस्सा) बढ़ जाते हैं। इसके अलावा लिपिडेमा में हो सकता है कि आपके शरीर का आकार किसी नाशपाती (पीयर शेप) जैसा दिखने लगे।

वसा की जमावट बांहों में भी दिखाई दे सकती है और वे टांगों के आकर जितनी बढ़ सकती हैं।

अन्य लक्षणों में शामिल हैं :

  • वसा की जमावट के कारण दर्द और भी गंभीर होने लगता है।
  • त्वचा का लचीलापन खत्म होना। 
  • लिपोमा (त्वचा को छूने पर गांठ महसूस होना)।
  • त्वचा पर आसानी से चोट लगना।
  • प्रभावित हिस्सों में वसायुक्त सूजन पड़ना।

इसके अलावा समाज में शरीर के बढ़े हुए आकार के कारण शर्मिंदगी महसूस होना, चिंता करना और नए लोगों से मिलना व जगहों पर जाने से घबराने के कारण मरीज डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।

लिपिडेमा का परीक्षण
लिपिडेमा का परीक्षण बेहद मुश्किल होता है। यह केवल चिकित्सीय विशेषज्ञों द्वारा किया जा सकता है जिन्हें विशेषरूप से इस स्थिति से संबंधिति समस्याओं का अनुभव होता है।

इसका परीक्षण मुख्य रूप से मरीज कि दोनों टांगों मे हो रही सूजन के आधार पर किया जाता है। इसके अलावा एमआरआई, अल्ट्रासाउन्ड और लिम्फैंगियोग्राम का इस्तेमाल कारगर साबित हो सकता है।

लिम्फैंगियोग्राम एक इमेजिंग तकनीक है, इसमें लिम्फ वेसेल्स और लिम्फ नोड्स की जांच के लिए कंट्रास्ट डाई और एक्स-रे मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। लिपिडेमा के अलावा, इस तकनीक को कुछ प्रकार के कैंसर के परीक्षण में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

लिपिडेमा का इलाज
लिपिडेमा का कोई प्रभावशाली इलाज नहीं है क्योंकि इसके मुख्य कारण की पहचान अभी तक नहीं की जा सकी है। इसके इलाज में लक्षणों को कम करने पर ध्यान दिया जाता है और व्यायाम, संतुलित आहार और भावनात्मक रूप से सहारा देकर रोग को बढ़ने से रोका जाता है।

संतुलित आहार
लिपिडेमा के फैट को कम करना बेहद कठिन होता है। वसायुक्त कोशिकाओं का आकार बड़ा होने, हयालूरोनिक ऐसिड और कोशिकाओं में पानी चले जाने के कारण फैट सेल्स रक्त कोशिकाओं से दूर होने लगते है, जिसके परिणामस्वरूप लगातार शरीर में धीरे-धीरे फैट रिलीज होता रहता है।

लिपिडेमा से ग्रस्त व्यक्तियों को डेयरी पदार्थों, जानवरों से बने प्रोटीन व वसा, शक्कर, कार्बोहाइड्रट, नमक और आटे से परहेज करने कि सलाह दी जाती है। आहार में फलसब्जियां, साबुत अनाज और स्वस्थ प्रोटीन को शामिल करना चाहिए।

कॉम्प्लेक्स डीकंजेस्टिव थेरपी
परीक्षण कि पुष्टि होने के बाद हो सकता है डॉक्टर कॉम्प्लेक्स डीकंजेस्टिव थेरपी की सलाह दें जिसमें अलग-अलग प्रकार के इलाज शामिल होते हैं, जैसे कि :

  • मैन्यूल लिम्फ ड्रैनेज : थेरेपिस्ट धीरे से आपकी लिम्फैटिक चैनल्स को खोलेंगे और लिम्फैटिक फ्लूइड्स को हाथों कि मदद से त्वचा को खींच कर हटाएंगे।
  • अक्वैटिक व्यायाम जैसे तैराकी से लिम्फैटिक फ्लूइड्स को हटाने में मदद मिलती है, क्योंकि पानी प्राकृतिक रूप से त्वचा पर दबाव बनाता है। उच्च प्रभाव वाले व्यायाम जैसे दौड़ कि सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि इससे स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
  • डॉक्टर कुछ सप्लिमेन्टस या दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं।
  • फोम के साथ बैंड की परत चढ़ाई जाती है या विशेष रूप से फिट होने वाले कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनाए जाते हैं जिनसे सूजन को नियंत्रित किया जाता है।
  • प्रभावित हिस्से कि देखभाल क्लीनिंग और नमी पहुंचाने से की जा सकती है।

भावनात्मक रूप से सहारा देना
लिपिडेमा से जूझ रहे व्यक्ति मानसिक रोग, डिप्रेशन, चिंता और भोजन विकार (ईटिंग डिऑर्डर) से भी ग्रस्त हो सकते हैं। ऐसा अक्सर बढ़े हुऐ आकार के कारण सामाज में मजाक बनने व शर्मिंदगी महसूस होने के कारण होता है। सामाज में मोटे लोगों का मजाक बनाया जाता है जिसके कारण इस स्थिति से ग्रस्त लोगों को दोस्तों व परिवारजनों के भावनात्मक सहारे की भी जरूरत पड़ती है।

इनवेसीव इलाज
इवेसीव इलाज में सर्जरी जैसे वेट लॉस सर्जरी (डब्ल्यूएलएस) शामिल होती हैं, जिनसे अतिरिक्त वसा को हटाया जाता है। इसके अलावा डॉक्टर इनकी मदद से वसायुक्त कोशिकाओं को कनेक्टिव ऊतकों से धीरे से एक सक्शन ट्यूब की मदद से हटाते हैं। डॉक्टर ट्यूमसेंट लिपोसक्शन या वाटर-असीसटेड लिपोसक्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

  1. पेनफुल फैट सिंड्रोम : शरीर का आकार बिगाड़ देता है यह रोग
  2. लिपिडेमा के डॉक्टर
Dr. Tanmay Bharani

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एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान

Dr. Sunil Kumar Mishra

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Dr. Parjeet Kaur

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