कामोत्तेजना यानी सेक्सुअल अराउजल यौन रूप से एक्टिव होने की भावना है. इस अवस्था में शारीरिक व मानसिक रूप से कई बदलाव महसूस किए जा सकते हैं. पेनिस व वजाइना में सेंसिटिविटी व गीलापन महसूस हो सकता है.
कामोत्तेजना पार्टनर के साथ या अकेले भी हो सकती है. कई बार कामोत्तेजना खुद के शरीर के सेंसिटिव पार्ट्स को छूने से भी हो सकती है, लेकिन ये जरूरी नहीं कि सब एक जैसा ही महसूस करें. कामोत्तेजना का अनुभव हर किसी के लिए अलग हो सकता है. साथ ही कामोत्तेजना के कई चरण भी माने गए हैं.
आज हम इस लेख में हम कामोत्तेजना की परिभाषा, इसके लक्षण, चरण व इसे बढ़ाने के तरीकों के बारे में जानेंगे -
- कामोत्तेजना क्या है?
- कामोत्तेजना के लक्षण
- कामोत्तेजना के चरण
- कामोत्तेजना के स्तर को कैसे बढ़ाया जाए?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सारांश
कामोत्तेजना क्या है?
किसी के अच्छे सेक्सुअल रिलेशनशिप के लिए जरूरी है कि अपनी बॉडी के सेक्सुअल रिस्पॉन्स और पार्टनर के सेक्सुअल रिस्पॉन्स को बेहतर तरीके से पहचाना जाए. सेक्सुअल अराउजल मुख्य रूप से शरीर के हार्मोंस से प्रभावित होता है.
कामोत्तेजना की शुरूआत मस्तिष्क से होती है, क्योंकि मस्तिष्क ही किसी विचार या इमेज पर शरीर को संकेत देता है. पार्टनर के करीब आने, प्यार की भावना रखने, पार्टनर के टच करने या शरीर के विशेष रूप से जननांगों को टच करने से मस्तिष्क के संकेत देने पर ही शरीर प्रतिक्रिया करता है और मनुष्य कामुकता का अहसास करता है.
सेक्सुअल अराउजल हर किसी के लिए अलग-अलग हो सकता है. जैसे किसी आकर्षक (पार्टनर भी हो सकता है) व्यक्ति को देखकर कामोत्तेजना हो सकती है, शरीर का कोई खास पार्ट, कोई एक्टिविटी या कोई ऑब्जेक्ट जो अपीलिंग लगे, लोगों की सेक्सुअल फेंटेसी या सेक्सुअल थॉट्स भी सेक्सुअल अराउजल का कारण बन सकते हैं.
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कामोत्तेजना के लक्षण
कामोत्तेजना के लिए कई तरह की शारीरिक प्रतिक्रियाओं को देखा जा सकता है. रिसर्च की मानें तो कामोत्तेजना बिना किसी लक्षण के भी अचानक किसी इमेज और स्थिति को देखकर भी हो सकती है. कई बार सपने में भी कामोत्तेजना हो सकती है, जिसे वैट ड्रीम के नाम से भी जाना जाता है. इस दौरान शरीर नींद में भी गीलापन और उत्तेजना महसूस करता है. कामोत्तेजना के स्तर पर पहुंचने के बाद महिला व पुरुष के शरीर में निम्न तरह के बदलाव नजर आ सकते हैं -
- ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट, सांस की गति व शरीर का तापमान बढ़ जाता है.
- महिलाओं में निप्पल, वजाइना और क्लाइटोरिस में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है और ये पार्ट बहुत अधिक सेंसिटिव हो जाते हैं.
- पुरुषों का पेनिस हार्ड होकर इरेक्ट हो जाता है.
- योनि में चिकनाई या गीलापन महसूस होने लगता है, जो अधिक उत्तेजना होने पर फैलने लगता है.
कामोत्तेजना के चरण
कामोत्तेजना के चरणों की बात करें तो कामुक होने के दौरान व्यक्ति में शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक बदलाव होते हैं. जब एक व्यक्ति यौन रूप से उत्तेजित होता है और सेक्स व मास्टरबेशन सहित अन्य यौन उत्तेजक एक्टिविटीज में भाग लेता है, तो इन सेक्सुअल एक्टिविटी के दौरान व्यक्ति चार प्रमुख चरणों से गुजरता है. पुरुष और महिला दोनों इन चरणों को महसूस करते हैं, लेकिन दोनों के लिए समय अलग-अलग हो सकता है. वैसे ये जरूरी नहीं कि दोनों को एक ही समय में ऑर्गेज्म हो. आइए, कामोत्तेजना के चरणों के बारे में विस्तार से जानें -
एक्साइटमेंट
एक्साइटमेंट यानी उत्तेजना कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों तक रह सकती हैं. इस दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं, जैसे -
- मांसपेशियों में तनाव बढ़ता है.
- हृदय गति और सांस तेज हो जाती है.
- त्वचा लाल हो सकती है.
- निप्पल सख्त या खड़े हो सकते हैं.
- जननांगों में रक्त का प्रवाह बढ़ सकता है, जिसके कारण वजाइना में सूजन हो सकती है और पेनिस इरेक्ट हो सकता है.
- योनि में चिकनाहट आनी शुरू हो सकती है.
- महिला के स्तनों में भारीपन महसूस हो सकता है.
- पुरुषों को अंडकोष में सूजन या भारीपन महसूस हो सकता है.
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क्लाइमेक्स
कामोत्तेजना के दूसरे चरण में व्यक्ति क्लाइमेक्स तक पहुंच जाता है, जिससे शरीर में कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं, जैसे -
- पहले चरण में शुरू हुए शारीरिक बदलावों में तेजी आने लगती है.
- जननांगों में बढ़े हुए रक्त प्रवाह से योनि में सूजन बढ़ सकती है और योनि की वॉल्स का रंग बदल सकता है.
- महिला का क्लाइटोरिस बहुत अधिक सेंसिटिव हो जाता है और कई बार छूने पर दर्द भी महसूस हो सकता है.
- पुरुषों में लिंग में उत्तेजना होने के बाद पेनिस की ऊपरी स्किन नीचे की ओर चली जाती है और टेस्टिकल्स में कसाव आ जाता है.
- सांस, हार्ट बीट व ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है.
- हाथों, पैरों और चेहरे की मांसपेशियों में ऐंठन व तनाव बढ़ सकता है.
ऑर्गेज्म
कामोत्तेजना के तीसरे चरण में व्यक्ति ऑर्गेज्म तक पहुंच जाता है. हालांकि ये सबसे छोटा चरण होता है, लेकिन इसमें शरीर में कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं, जैसे -
- मांसपेशियों में दबाव महसूस होना शुरू हो सकता है.
- ऑक्सीजन के तेजी से सेवन के साथ ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट और सांस अपने उच्चतम दर पर होते हैं.
- पैरों की मांसपेशियों में ऐंठन को साफ महसूस किया जा सकता है.
- सेक्सुअल टेंशन अचानक और फोर्सफुली रिलीज होती है.
- महिलाओं में योनि की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं. गर्भाशय में भी दबाव महसूस होने लगता है.
- पुरुषों में पेनिस से सीमन इजैक्युलेट होता है.
- पूरे शरीर पर रैशेज दिखाई दे सकते हैं, हालांकि ये अस्थाई और कुछ समय के लिए ही होते हैं.
स्टेबिलिटी
कामोत्तेजना के चौथे चरण में शरीर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटने लगता है. इस चरण में जहां महिलाएं जल्दी सामान्य हो जाती हैं, वहीं पुरुषों को सामान्य होने में समय लगता है. इस दौरान शरीर में कई बदलाव देखे जा सकते हैं, जैसे -
- शरीर के जिन भागों में सूजन आई है या इरेक्शन के साथ ही हार्डनेस आई है, वो धीरे-धीरे सामान्य होने लगती है.
- जननांगों का आकार और रंग सामान्य होने लगता है.
- इस दौरान पार्टनर के साथ इंटीमेसी अधिक महसूस हो सकती है.
- इस चरण में व्यक्ति को सबसे अधिक थकान महसूस हो सकती है.
- इस चरण में दोबारा संभोग करना संभव नहीं होता.
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कामोत्तेजना के स्तर को कैसे बढ़ाया जाए?
कामोत्तेजना में कमी मेनोपॉज के कारण, तो कई बार किन्हीं बीमारियों के कारण हो सकती है. इसका एक कारण रिलेशनशिप में समस्या भी हो सकती है. ऐसे में वियाग्रा और लुब्रिकेंट जैसे विकल्पों को अपनाकर कामोत्तेजना को बढ़ाया जा सकता है. आइए, विस्तार से जानते हैं कि कामोत्तेजना के स्तर को कैसे बढ़ाया जा सकता है -
अन्य उपाय
कई बार कामोत्तेजना में कमी एंजाइटी, खराब रिलेशनशिप, अच्छी नींद न आने की समस्या, व्यायाम न करने, अच्छी डाइट न लेने, स्ट्रेस के बढ़ने व स्मोकिंग करने के कारण भी हो जाती है. ऐसे में इन कमियों को दूर करके आसानी से कामोत्तेजना को बढ़ाया जा सकता है.
इसके साथ ही सेक्स थेरेपी से भी कामोत्तेजना के स्तर को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. कई बार पार्टनर से सेक्स संबंधी बातें करने और साथी के साथ इरोटिक कॉन्टेंट देखने से भी कामोत्तेजना को बढ़ाया जा सकता है.
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बिहेवियरल थेरेपी
कामोत्तेजना बढ़ाने में मदद करने के लिए बिहेवियरल थेरेपी भी की जा सकती है. इस थेरेपी का उद्देश्य यौन कल्पनाओं को बढ़ाना और यौन उत्तेजनाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होता है. इस थेरेपी में ये भी देखा जाता है कि पार्टनर के साथ आपकी कम्युनिकेशन प्रॉब्लम्स क्या–क्या हैं. साथ ही आपका पार्टनर यौन उत्तेजना के लिए जितना समय आवश्यक है उतना समय नहीं बिताता है, इन बातों पर भी ध्यान दिया जाता है.
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वियाग्रा का इस्तेमाल
कई बार उत्तेजना में कमी को दूर करने या कामोत्तेजना के स्तर को बढ़ाने के लिए वियाग्रा (सिल्डेनाफिल) व अल्फा-एड्रीनर्जिक ब्लॉकर्स नामक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये कामोत्तेजना बढ़ाने में मदद करती हैं साथ ही महिलाओं में योनि के सूखेपन को खत्म करने में मदद करती हैं. हालांकि, शोध में महिलाओं की वियाग्रा से सेक्स संतुष्टि या कामोत्तेकजना की पुष्टि नहीं की गई है और इसे अभी भी एफडीए द्वारा महिलाओं के उपयोग के लिए प्रमाणित नहीं किया गया है. वहीं, पुरुषों को डॉक्टर की सलाह पर वियाग्रा या इससे संबंधित ड्रग्स दी जा सकती हैं.
लुब्रिकेंट का इस्तेमाल
कामोत्तेजना कम होने के सबसे आम लक्षणों में पेनिस या योनि में ड्राईनेस अधिक होना है. इसके लिए ओवर-द-काउंटर लुब्रिकेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है. यदि मेनोपॉज के कारण वजाइनल लुब्रिकेशन में कमी आई है, तो इसके इलाज के लिए अक्सर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जाती है. इस समस्या के लिए ड्रग थेरेपी भी मौजूद है, लेकिन इस थेरेपी के कुछ जोखिम और दुष्प्रभाव भी हैं. ऐसे में ओवर-द-काउंटर वजाइनल लुब्रिकेंट सबसे सुरक्षित विकल्प हो सकता है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अपने सवालों के जवाब यहाँ पाएं।
कामोत्तेजना बढ़ाने के तरीके क्या हैं?
हाँ, हर व्यक्ति का अनुभव अलग होता है। किसी को जल्दी उत्तेजना होती है तो किसी को धीरे-धीरे।
कामोत्तेजना बढ़ाने के तरीके क्या हैं?
लुब्रिकेंट का इस्तेमाल, वियाग्रा जैसी दवाएँ, बिहेवियरल या सेक्स थेरेपी, स्वस्थ जीवनशैली, स्ट्रेस कम करना और पार्टनर के साथ खुली बातचीत कामोत्तेजना बढ़ा सकते हैं।
कामोत्तेजना के लक्षण क्या हैं?
शरीर में ब्लड प्रेशर, हार्टबीट और सांस की गति बढ़ना, निप्पल या क्लाइटोरिस का सेंसिटिव होना, पेनिस का इरेक्ट होना और योनि में चिकनाई महसूस होना आम लक्षण हैं।
सारांश
कामोत्तेजना वह स्थिति है जब व्यक्ति सेक्सुअली एक्टिव होता है और सेक्सुअल एक्टिविटीज करता है. कामोत्तेजना के आम लक्षणों में पेनिस में इरेक्शन और वजाइना में चिकनाहट होना शामिल है. कामोत्तेजना चार चरणों एक्साइटमेंट से शुरू होकर क्लाइमेक्स और ऑर्गेज्म से होते हुए स्टेबिलिटी पर खत्म होती है. कामोत्तेजना को बढ़ाने के लिए वियाग्रा, सेक्स थेरेपी और ओवर-द-काउंटर लुब्रिकेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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