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टीबी या क्षय रोग (Tuberculosis) एक संक्रामक रोग होता है। यह रोग माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस (Mycobacterium tuberculosis) नाम के एक बैक्टीरिया से फैलता है। इस बैक्टीरिया के संपर्क में आने से गुप्त टीबी (Latent TB) हो जाता है, जिसका मतलब आप बैक्टीरिया से संक्रमित तो हो जाते हैं, मगर कोई लक्षण महसूस नहीं होता। गुप्त टीबी बाद में एक सक्रिय टीबी बन सकता है, जिसका डॉक्टर की मदद से इलाज करवाना बहुत जरूरी होता है।

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टीबी का प्रभाव आमतौर पर फेफड़ों पर ही होता है, पर यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है, जैसे मस्तिष्क, गुर्दे या रीढ़ की हड्डी आदि। अगर समय पर टीबी का इलाज ना किया जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है।

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  1. टीबी टेस्ट क्या होता है? - What is TB Test in Hindi?
  2. टीबी टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of TB Test in Hindi
  3. टीबी टेस्ट कब करवाना चाहिए - When to get tested with TB Test in Hindi
  4. टीबी टेस्ट के प्रकार - Types of TB Test in Hindi
  5. टीबी टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of TB Test in Hindi

टीबी टेस्ट क्या होता है?

टीबी की जांच करने के लिए दो प्रकार के टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है, खून टेस्ट और स्किन टेस्ट। इन दोनों में से किसी भी टेस्ट का रिजल्ट यह नहीं बताता कि मरीज को कौन सा टीबी है (गुप्त टीबी या सक्रिय टीबी)। इन टेस्टों का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि इलाज किसे करना चाहिए और किन दवाओं के साथ करना चाहिए।

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यह बैक्टीरिया आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन यह शरीर के अन्य भागों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

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अगर किसी व्यक्ति को फेफड़े या गले का टीबी है तो उसके खांसनें, छींकनें या बात करनें से टीबी हवा में फैल सकता है। अगर आपको लगता है कि आप किसी टीबी के मरीज के संपर्क में आ गए हैं, तो आपको इसकी जांच करवाने के लिए डॉक्टर के पास जाना चाहिए। अगर आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, तो आपमें टीबी होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

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टीबी टेस्ट क्यों किया जाता है?

टीबी टेस्ट उन लोगों की पहचान करने के लिए किया जाता है, जो टीबी से ग्रस्त हैं, इनमें निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • वे लोग जो टीबी के मरीजों के साथ करीब के संपर्क रहते हैं। (और पढ़ें - टीबी में परहेज)
  • हैल्थ केयर के कर्मचारी, जिन्हें टीबी के संपर्क में आने की अधिक संभावना रहती है।
  • वे लोग जिनमें टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे लगातार खांसी, रात में पसीना आना, वजन घटना जिसकी वजह का पता ना हो। (और पढ़ें - वजन बढ़ाने के तरीके)
  • वे लोग जिनका हाल ही में अंग प्रत्यारोपण हुआ (Organ transplant) हो। (और पढ़ें - लिवर की प्रत्यारोपण सर्जरी)
  • जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली खराब हो, जैसे एचआईवी (Human immunodeficiency virus)

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टीबी टेस्ट कब करवाना चाहिए?

हालांकि आपका शरीर टीबी का कारण बनने वाले बैक्टीरिया को अपने अंदर शरण दे सकता है और प्रतिरक्षा प्रणाली आपको बीमार होने से बचाए रखती है। इस वजह से डॉक्टर निम्न के बीच अंतर का पता करते हैं:

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गुप्त टीबी (Latent TB) – इस स्थिति में मरीज टीबी से संक्रमित हो जाता है, लेकिन बैक्टीरिया शरीर के किसी निष्क्रिय स्थान पर होने के कारण कोई लक्षण या संकेत नहीं पैदा कर पाते। गुप्त टीबी संक्रामक नहीं होता, इसको निष्क्रिय टीबी या टीबी संक्रमण भी कहा जाता है। गुप्त टीबी सक्रिय टीबी में बदल सकता है, इसलिए गुप्त टीबी का इलाज करवाना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि ऐसा करने से टीबी को फैलने से रोकने में मदद मिलती है।

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सक्रिय टीबी (Active TB) – यह स्थिति मरीज को बीमार कर देती है और अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकती है। यह टीबी के बैक्टीरिया के संपर्क में आने के कुछ हफ्ते बाद भी हो सकती है।

अगर आपमें निम्न में से एक या उससे अधिक लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर आपको टीबी टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।

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टीबी शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है, जिनमें रीढ़ की हड्डी, गुर्दे या मस्तिष्क आदि शामिल हैं। अगर टीबी का संक्रमण फेफड़ों से बाहर है, तो टीबी के लक्षण उस अंग पर निर्भर करते हैं, जिसमें टीबी संक्रमण हुआ है। उदाहरण के लिए जैसे रीढ़ की हड्डी में टीबी होने से कमर दर्द होता है और गुर्दे में टीबी होने से पेशाब में खून आना आदि जैसे लक्षण मौजूद होते हैं।

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टीबी टेस्ट के कितने प्रकार होते हैं?

मैन्टॉक्स टेस्ट (MantouxTest) –

टीबी स्किन टेस्ट को मैन्टॉक्स ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट (TST) भी कहा जाता है। टीबी स्किन टेस्ट में मरीज को डॉक्टर के पास दो बार जाना पड़ता है, पहली बार में डॉक्टर टेस्ट लेते हैं और दूसरी बार में टेस्ट के रिजल्ट की जांच करते हैं।

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  • स्किन टीबी टेस्ट के दौरान इन्जेक्शन से एक द्रव (Tuberculin) की छोटी सी मात्रा को बाजू के निचले हिस्से में डाला जाता है।
  • उसके बाद डॉक्टर मरीज को 48 या 72 घंटे से समय के बाद फिर से आने को कहते हैं और तब इन्जेक्शन की जगह पर रिएक्शन की जांच की जाती है।
  • टेस्ट का रिजल्ट उस जगह के आकार, उभार, कठोरपन और सूजन आदि पर निर्भर करता है। 
    • पॉजिटिव स्किन टेस्ट – इसका मतलब होता है कि व्यक्ति टीबी के बैक्टीरिया से संक्रमित हो चुका है, टीबी के प्रकार (गुप्त या सक्रिय टीबी) की जांच करने के लिए अन्य टेस्ट किए जाते हैं।
    • नेगेटिव स्किन टेस्ट – इसका मतलब होता है कि व्यक्ति के शरीर ने टेस्ट पर प्रतिक्रिया नहीं दी है और गुप्त टीबी संक्रमण या टीबी रोग होने की संभावनाएं कम हैं।

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अकेले ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट के रिजल्ट को देखकर सक्रिय टीबी संक्रमण की पुष्टी नहीं की जा सकती। अगर स्किन टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव पाया जाता है, तो सक्रिय टीबी संक्रमण की पुष्टी करने के लिए छाती का एक्स-रे, स्प्यूटम साइटोलॉजी (Sputum cytology), और स्प्यूटम कल्चर आदि टेस्ट किए जा सकते हैं।

एएफबी कल्चर और संवेदनशीलता (AFB culture and sensitivity) –

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एसिड फास्ट बेसिली (Acid- Fast Bacilli) स्मियर और एसिड फास्ट बेसीली कल्चर दो अलग-अलग टेस्ट हैं जो हमेशा एक साथ ही किए जाते हैं। टीबी की प्राथमिक जांच करने के लिए लगातार तीन दिन सुबह-सुबह गहरी खांसी से सैम्पल निकालना सबसे बेहतर तरीका माना जाता है। थूक के सैम्पल को एक ऐसे पदार्थ में मिलाया जाता है, जो रोगाणुओं के विकास को बढ़ावा देते हैं। अगर कोई रोगाणु विकसित ना हो पाए तो कल्चर नेगेटिव माना जाता है और अगर संक्रमण का कारण बनने वाले रोगाणु विकसित होने लगें तो कल्चर को पॉजिटिव माना जाता है। रोगाणुओं के प्रकार की पहचान माइक्रोस्कोप या केमिकल टेस्ट द्वारा की जाती है। कई बार अन्य टेस्ट भी किए जाते हैं, जिनसे संक्रमण का इलाज करने के लिए सही दवा का चुनाव करने में मदद मिलती है, जिसे संवेदनशीलता (Sensitivity testing) टेस्टिंग कहा जाता है।

जीनएक्सपर्ट टीबी टेस्ट (Genexpert TB test) -

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जीनएक्सपर्ट टीबी टेस्ट, टीबी के लिए एक आणविक टेस्ट (Molecular test) होता है। इसमें टीबी के बैक्टीरिया की उपस्थिति की जांच करके, टीबी का परीक्षण किया जाता है और साथ ही साथ रिफैम्पिसिन (टीबी में उपयोग की जानी वाली एंटीबायोटिक दवाएं) के प्रतिरोध की जांच की जाती है। दिसंबर 2010 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) नें टीबी स्थानिक देशों में उपयोग करने के लिए इस टेस्ट का समर्थन किया था।

जीनएक्सपर्ट टीबी टेस्ट यह संकेत देता है कि सेंपल में टीबी पाया गया है या नहीं। कई बार टेस्ट अमान्य भी हो सकता है, जिससे दोबारा टेस्ट करना पड़ता है। अगर टेस्ट रिजल्ट में टीबी पाया जाता है, तो रिजल्ट यह भी स्पष्ट करता है कि रिफैम्पिसिन का प्रतिरोध-

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  • मिला है,
  • नहीं मिला
  • या अनिर्धारित है।

इस टेस्ट के मुख्य लाभ में टीबी की जांच के लिए थूक माइक्रोस्कोपी की तुलना में अधिक विश्वसनीयता और कल्चर टेस्ट की तुलना में तेजी से रिजल्ट देना शामिल है। टीबी के परीक्षण के लिए हालांकि दोनो टेस्ट सस्ते और तेजी से होने वाले हैं, लेकिन ये अक्सर अविश्वसनीय हो सकते हैं। हालांकि, कल्चर एक निश्चित रिजल्ट देता है, लेकिन इसमें रिजल्ट पाने के लिए 1 हफ्ते तक का समय लग जाता है जबकि जीन एक्सपर्ट टेस्ट से रिजल्ट प्राप्त करने में कुछ ही घंटे का समय लगता है।

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टीबी टेस्ट में क्या जोखिम हो सकते हैं?

खासकर अगर आपको टीबी है, तो ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट (Tuberculin skin test) से गंभीर एलर्जिक रिएक्शन होने के कुछ मामूली जोखिम हो सकते हैं। एलर्जिक रिएक्शन के कारण अधिक सूजन व दर्द हो सकता है। एलर्जिक जगह पर घाव या दाग भी बन सकता है।

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ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट से टीबी नहीं फैलता क्योंकि इस टेस्ट के लिए किसी जीवित बैक्टीरिया का उपयोग नहीं किया जाता। ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित होता है।

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जिस जगह पर स्किन टेस्ट किया गया है वहां पर थोड़ी लालिमा हो सकती है। इस जगह में खुजली हो सकती है, लेकिन यह जरूरी होता है कि उस जगह पर खुजली ना हो। क्योंकि खुजली करने से लालिमा और सूजन बढ़ सकती है, जिससे त्वचा की जांच करने में कठिनाई हो सकती है। अगर खुजली से समस्या हो रही है, तो उस पर गीला/ठंडा खीसा (Cold Washcloth/ रुमाल की तरह का कपड़ा) रखें और फिर त्वचा को सूखने दें।

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थूक का सेंपल देने के बाद छाती में थोड़ी तकलीफ महसूस हो सकती है। अगर थूक का सेंपल ब्रोंकोस्कोपी (Bronchoscopy) या नासोट्रेचियल कैथेटर (Nasotracheal catheter) से लिया गया है, तो सैम्पल लेने के कुछ देर बाद तक गले में दर्द रह सकता है।

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References

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