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नेगेटिव स्टेन क्या है?

नेगेटिव स्टेन सूक्ष्मजीवों जैसे बैक्टीरिया, वायरस और फंगी की संरचनात्मक संबंधी शीघ्रता से जांच करने का तरीका है। आमतौर पर यह तकनीक रक्त और ऊतकों के सैंपल में सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति की जांच और उनकी पहचान करने के लिए की जाती है।

नेगेटिव स्टेनिंग खासतौर पर ऐसे सूक्ष्मजीवों की पहचान करने के लिए की जाती है जो कि डायरेक्ट स्टेनिंग मेथड में देखे नहीं जा सकते या फिर जो लैब की प्रक्रिया के दौरान क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

  1. नेगेटिव स्टेन क्यों किया जाता है - Negative stain Kyu Kiya Jata Hai
  2. नेगेटिव स्टेन से पहले - Negative stain Se Pahle
  3. नेगेटिव स्टेन के दौरान - Negative stain Ke Dauran
  4. नेगेटिव स्टेन के परिणाम का क्या मतलब है - Negative stain Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

नेगेटिव स्टेन किसलिए किया जाता है?

डॉक्टर आपको नेगेटिव स्टेन करने की सलाह तब दे सकते हैं जब आप किसी संक्रामक रोग से पीड़ित हों। वैसे तो इस टेस्ट से बहुत सारे पैथोजेनिक सूक्ष्मजीवों की जांच हो सकती है। जिन सूक्ष्मजीवों की जांच आमतौर पर नेगेटिव स्टेनिंग से की जाती है उनके व उनसे फैलने वाले रोगों के बारे में नीचे बताया गया है।

सी. नियोफॉर्मन्स :

एक फंगी जिससे क्रिप्टोकॉकल मैनिंजाइटिस होता है। क्रिप्टोकॉकल मैनिंजाइटिस का मतलब है मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड को सुरक्षा प्रदान करने वाली परत में सूजन आना। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है या जिन्हें एचआईवी एड्स होता है उनमें यह रोग अधिकतर पाया जाता है।

सी. नियोफॉर्मन्स की पहचान करने के लिए सीएसएफ (मस्तिष्कमेरु द्रव जो कि मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड में पाया है) का सैंपल लिया जाता है। क्रिप्टोकॉकल मैनिंजाइटिस के निम्न लक्षण होते हैं :

यदि क्रिप्टोकॉकल मैनिंजाइटिस का इलाज न किया जाए तो इससे निम्न स्थितियां हो सकती हैं :

डॉक्टर त्वचा पर चकत्ते पैदा करने वाले वायरसों की पहचान करने के लिए भी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। उदाहरण के लिए :

वेरिसेला-जोस्टर वायरस

चेचक और दाद जैसे रोगों का कारण बनने वाला वायरस

चेचक के संक्रमण में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं :

  • छालों में खुजली 
  • चकत्ते, जो कि तीन अवस्था में दिखाई दे सकते हैं :
    • लाल दाने
    • द्रव से भरे छाले (वेसिकल्स)
    • फूटे हुए छाले जिन पर पपड़ी जम गई है
  • बुखार
  • भूख कम लगना 
  • सिरदर्द 
  • थकान और स्वस्थ महसूस न करना

दाद में कुछ लोगों को चकत्ते के साथ दर्द और जलन भी हो सकती है। दाद के चकत्तों के निम्न लक्षण हो सकते हैं :

  • खुजली
  • कान और मुंह पर चकत्ते
  • लाल चकत्ते
  • द्रव्य से भरे हुए छाले

पॉक्सवायरस

जानवरों व इंसानों में विभिन्न संक्रमण फैलाता है जैसे स्मॉलपॉक्स, मंकीपॉक्स और ऑर्फ।

मंकीपॉक्स से जुड़े कुछ लक्षण निम्न हैं :

ऑर्फ वायरस संक्रमण और मंकीपॉक्स वायरस संक्रमण में कुछ लक्षण एक समान हो सकते हैं जैसे हल्का बुखार और थकान।

हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस

यह ओरल और जेनिटल हर्पीस फैलाता है। ओरल हर्पीस में छाले हो जाते हैं वहीं जेनिटल हर्पीस एक एसटीडी है, जिसमें जननांगों पर छाले विकसित हो जाते हैं।

हर्पीस संक्रमण हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस से फैलता है जिसमें निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं :

  • दर्द या खुजली होना 
  • छाले
  • छोटे लाल दाने
  • अल्सर 
  • पपड़ी

स्पीरोचेट्स

यह बैक्टीरिया पतला, लंबा और घुमावदार सर्पिल आकृति का होता है, जो तेजी से गति करता है उदाहरण के तौर पर ट्रेपोनेमा। ट्रेपोनेमा मुख्य रूप से ट्रेपोनेमा पैलीडम की किसी एक प्रजाति का बैक्टीरिया होता है, जो सिफलिस रोग फैलाता है। सिफिलिस इंसानों में होने वाला एक यौन संचारित रोग है।

सिफिलिस से जुड़े लक्षण हैं :

  • मुंह, योनि और लिंग के चारों तरफ छाले
  • बुखार
  • भूख न लगना
  • जननांगों पर धब्बे होना
  • हथेली और तलवों पर चकत्ते
  • दिखाई देने  में तकलीफ होना

नेगेटिव स्टेन की तैयारी कैसे करें?

टेस्ट के लिए जिस भी सैंपल का प्रयोग किया जाना है उसके अनुसार ही तैयारी करने को कहा जाएगा।

यदि बायोप्सी का सैंपल लिया जा रहा है तो आप जो भी दवाएं ले रहे हैं उनके बारे में डॉक्टर को बता दें। जिसमें विटामिन ,सप्लीमेंट, ओटीसी या हर्बल दवाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा यदि आपको रक्त स्त्राव से जुड़ी कोई समस्या है या किसी प्रकार की एलर्जी है या फिर आप रक्त को पतला करने वाली दवाएं जैसे एस्पिरिन या वार्फरिन ले रहे हैं तो इसके बारे में डॉक्टर को बताएं। 

सीएसएफ का सैंपल लेने से पहले आपको मल व पेशाब करके अपनी आंतों व मूत्राशय को खाली करने को कहा जा सकता है।

नेगेटिव स्टेन कैसे किया जाता है?

क्रिप्टोकोकस की जांच करने के लिए एक ब्लड सैंपल की जरूरत होती है। सैंपल को लेने की प्रक्रिया लम्बर पंक्चर कहलाती है। सैंपल निम्न तरीके से लिया जाएगा :

  • डॉक्टर आपसे एग्जामिनेशन टेबल पर लेटने या बैठने के लिए कहेंगे
  • इसके बाद वे आपकी कमर को एक एंटीसेप्टिक से साफ करेंगे और त्वचा को एनेस्थीसिया के एक इंजेक्शन की मदद से सुन्न कर देंगे
  • इसके बाद निचली कमर की दो हड्डियों के बीच में एक सुई लगाकर सैंपल ले लेंगे
  • थोड़ी सी मात्रा में द्रव को निकाल लिया जाएगा और उसे परीक्षण के लिए लैबोरेटरी में भेज दिया जाएगा।
  • इस प्रक्रिया के बाद आपसे एक घंटे तक कमर के बल लेटने को कहा जाएगा ताकि आपको बाद में सिरदर्द न हो

 यदि फफोले का सैंपल लिया जाना है तो यह निम्न प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा :

  • लैब टेक्नीशियन एक कीटाणुरहित सुई की मदद से फफोले की ऊपरी परत हटाएंगे
  • इसके बाद एक स्वैब को जख्म पर रगड़ेंगे। ऐसा संक्रमित कोशिका और द्रव्य को लेने के लिए किया जाता है
  • इस सैंपल को तुरंत लैब में टेस्ट के लिए भेज दिया जाएगा

यदि त्वचा के घाव या फफोले की पपड़ी का सैंपल लेना है, तो उसे सीधे त्वचा से उतार लिया जाता है और परीक्षण के लिए लैब में भेज दिया जाता है।

कभी-कभी बायोप्सी सैंपल की भी जरूरत होती है जो निम्न तरीके से लिया जाता है :

  • डॉक्टर इस प्रक्रिया से पहले त्वचा के भाग को सुन्न कर देते हैं 
  • यदि ऊपरी त्वचा का परीक्षण किया जाना है तो वे इसे छोटे रेजर की मदद से ले लेंगे
  • गहरी परत से सैंपल लेने के लिए ऊतक के थोड़े से भाग को एक पंचिंग टूल से हटाया जाता है। इसके बाद इस भाग को सिलाई से बंद कर दिया जाता है।
  • इस प्रक्रिया में 15 मिनट का समय लगता है

नेगेटिव स्टेन के परिणाम क्या बताते हैं?

सामान्य परिणाम 

सामान्य परिणाम को नेगेटिव लिखा जाता है। इसका मतलब है कि दिए गए सैंपल में कोई भी संक्रामक सूक्ष्मजीव नहीं पाए गए हैं।

असामान्य परिणाम 

असामान्य परिणाम को पॉजिटिव लिखा जाता है। डॉक्टर जीव के आकार, आकृति या संरचना के अनुसार परिणामों की जानकारी देंगे। उदाहरण के तौर पर ऑर्फ वायरस सतह पर अंडाकार आकृति में दिख सकता है जिसमें क्रिस-क्रॉस तरह की आकृति बनी हुई दिखाई दे सकती है।

और पढ़ें ...

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