रीढ़ या रीढ़ की हड्डी का मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) एक तरह का नैदानिक परीक्षण है। इसमें बड़े चुम्बक, रेडियो तरंगों और कंप्यूटर की मदद से रीढ़ और आसपास के उत्तकों की विस्तृत तस्वीरें तैयार की जाती हैं।

हमारी रीढ़ में छोटी-छोटी हड्डियां होती हैं, जिन्हें वर्टेब्रे कहते हैं। दो वर्टेब्रे के बीच स्पंज जैसे उत्तक (डिस्क) होते हैं, जो उन्हें अलग करते हैं।

रीढ़ की हड्डी यहां से गुजरने वाली तंत्रिकाओं की रक्षा करती है, जो दिमाग को शरीर के अन्य हिस्सों से जोड़ती हैं।

रीढ़ का एमआरआई डॉक्टर को रीढ़ या उसके आसपास के उत्तकों में मौजूद किसी भी तरह की समस्या के निदान में मदद करता है।

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी में टेढ़ेपन का कारण)

  1. रीढ़ का एमआरआई कौन नहीं करवा सकता है - Who cannot get a spine MRI done in Hindi?
  2. रीढ़ का एमआरआई क्यों किया जाता है - Why is the spine MRI ordered in Hindi?
  3. रीढ़ के एमआरआई के लिए तैयारी - How should I prepare for a spine MRI in Hindi?
  4. रीढ़ का एमआरआई कैसे किया जाता है - What is the procedure of a spine MRI in Hindi?
  5. रीढ़ के एमआरआई में कैसा महसूस होता है - How does a spine MRI feel in Hindi?
  6. रीढ़ के एमआरआई रिजल्ट का क्या मतलब है - What do the results of a spine MRI mean in Hindi?
  7. रीढ़ के एमआरआई के जोखिम और लाभ - What are the risks and benefits of a Spine MRI in Hindi?
  8. रीढ़ का एमआरआई के बाद क्या होता है - What happens after the spine MRI in Hindi?
  9. रीढ़ के एमआरआई के साथ और कौन से टेस्ट किए जा सकते हैं - What other tests can be done with the spine MRI in Hindi?
रीढ़ का एमआरआई के डॉक्टर

चूंकि एमआरआई एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण करता है, इसलिए जब तक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक न हो तब तक इसे निम्नलिखित लोगों के लिए टाला जाता है :

  • गर्भवती महिलाएं, खासकर पहली तिमाही में
  • किसी धातु का प्रत्यारोपण करवाने वाले लोग, जैसे:
  • कान में प्रत्यारोपण
  • पेसमेकर या कार्डियक डिफाइब्रिलेटर
  • रक्त वाहिकाओं में रखे गए धातु के तार
  • मस्तिष्क धमनीविस्फार के लिए इस्तेमाल की गई क्लिप्स
  • जिन लोगों के शरीर में धातु की कोई चीज लगी हो, जैसे गोलियां या छर्रे
  • जिन लोगों ने टैटू बनवाया हो, क्योंकि कुछ टैटू की स्याही में धातु होती है, जो एमआरआई के दौरान गर्म हो सकती है।

(और पढ़ें - टैटू बनवाने के नुकसान)

यदि आपको पीठ दर्द के साथ-साथ निमन लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर रीढ़ का एमआरआई करवाने का सुझाव दे सकते हैं :

रीढ़ के एमआरआई से डॉक्टरों को रीढ़ और आसपास के उत्तकों में लगी चोटों, असामान्यताओं, ट्यूमर व अन्य स्थितियों का पता लगाने में मदद मितली है।

रीढ़ का एमआरआई डॉक्टर को निम्न प्रक्रियाओं की योजना बनाने में भी मदद करता है, जैसे :

  • दबी हुई नस को वापस पूर्व स्थिति में लाना
  • स्टेरॉयड इंजेक्शन का प्रबंधन
  • स्पाइनल फ्यूजन (एक से ज्यादा वर्टेब्रे को सर्जरी के जरिए जोड़कर एक बनाना)

(और पढ़ें - नस दबने का इलाज)

आप अपना नियमित खान-पान जारी रख सकते हैं, लेकिन यदि डॉक्टर इस संबंध में कोई निर्देश दें तो उनका पालन जरूर करें। यदि आपको बंद जगहों पर डर लगता है, तो डॉक्टर आपको माइल्ड सिडेटिव दे सकते हैं, जिससे आपको नींद आ जाएगी और चिंता नहीं होगी। अगर आप गर्भवती हैं या स्तनपान करवाती हैं तो इस संबंध में रेडियोलॉजी स्टाफ और डॉक्टर को जरूर बताएं।

आपको एमआरआई कक्ष में जाने से पहले सभी धातु और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं को निकालकर बाहर ही रख देना चाहिए। जरूरी न हो तो इन सभी चीजों को घर पर ही छोड़कर जाएं या चेंजिंग रूम के लॉकर में बंद कर सकते हैं या अपने साथ गए व्यक्ति के पास उन्हें छोड़ सकते हैं। इनमें शामिल हैं :

  • आभूषण, घड़ी और क्रेडिट कार्ड
  • बालों में लगाने वाली पिन, धातु की जिप और धातु की अन्य वस्तुएं
  • नकली दांत या दांत में लगाई गई धातु, जिसे निकाला जा सके
  • नाक और कान की रिंग
  • मोबाइल फोन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
  • पेन, चाकू और चश्मा

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर का इलाज)

रीढ़ के किस हिस्से का एमआरआई किया जाना है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी रीढ़ के कौन से हिस्से में लक्षण महसूस हो रहे हैं। एमआरआई निम्नलिखित चरणों के तहत किया जाता है :

  • इस प्रक्रिया के दौरान आपको एक खास ड्रेस पहनने को दी जाएगी, जिसे हॉस्पिटल गाउन कहा जाता है।
  • यदि एमआरआई के लिए कॉन्ट्रास्ट डाई का उपयोग किया जाता है, तो यह आपकी बांह की नस में इंजेक्ट की जाएगी। कुछ मामलों में कॉन्ट्रास्ट डाई के इस्तेमाल से तस्वीरों की स्पष्टता बढ़ जाती है।
  • इसके बाद आपको स्कैनिंग टेबल पर लेटने को कहा जाता है। यह टेबल एक बड़े से सिलेंडर जैसे आकार की गुफा जैसी मशीन में जाती (स्लाइड होती) है।
  • टेक्नोलॉजिस्ट एक अन्य कमरे से इस मशीन को ऑपरेट करता है। लेकिन इस दौरान वह हर समय आप पर नजर रखता है और किसी भी समय आपसे संवाद कर सकता है।
  • एमआरआई स्कैन के दौरान आपको बिल्कुल सीधा लेटे रहना चाहिए। हिलने पर तस्वीरें धुंधली हो सकती हैं।
  • स्कैन होने के बाद यह टेबल मशीन से बाहर निकल आती है। टेक्नोलॉजिस्ट आपको टेबल से उतरने में मदद करेंगे। यदि कॉन्ट्रास्ट डाई का इस्तेमाल किया गया है तो इसके लिए लगाई गई इंट्रावेनस लाइन को हटाया जाएगा।
  • एमआरआई स्कैन के दौरान करीब एक घंटे तक का समय लग सकता है।

(और पढ़ें - लैब टेस्ट कितने प्रकार के होते हैं)

एमआरआई स्कैनिंग प्रक्रिया दर्द रहित होती है, लेकिन लंबे समय तक कठोर टेबल पर लेटे रहने से आपको थोड़ा असहज महसूस हो सकता है। स्कैनिंग मशीन जोर-जोर की ध्वनियां निकलती हैं और इस शोर से बचने के लिए आपको इयरप्लग दिए जाएंगे।

यदि कॉन्ट्रास्ट डाई का इस्तेमाल किया गया है तो आप निम्न साइड इफेक्ट महसूस कर सकते हैं : 

(और पढ़ें - सिरदर्द की होम्योपैथिक दवा)

रीढ़ का एमआरआई निम्न स्थितियों का पता लगाने में मदद करता है :

  • कशेरुकाओं (वर्टेब्रे) और आसपास के कोमल उत्तकों में चोट लगना
  • रीढ़ की हड्डी में चोट लगना
  • रीढ़ की हड्डी और रीढ़ में कोई संरचनात्मक दोष होना
  • डिस्क और जोड़ों के रोग
  • रीढ़ की हड्डी और नसों में सूजन या उनका दब जाना
  • रीढ़, डिस्क या रीढ़ की हड्डी का संक्रमण
  • रीढ़ की हड्डी, कशेरुकाओं या आसपास के कोमल ऊतकों में ट्यूमर
  • टूटी हुई कशेरुका और हड्डी की सूजन
  • सर्जरी के बाद रीढ़ की हड्डी में घाव या संक्रमण
  • केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के दीर्घकालिक रोग, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस

रीढ़ के एमआरआई के लाभ इस प्रकार हैं :

  • यह गैर आक्रामक है
  • विकिरण (रेडिएशन) का कोई जोखिम नहीं 
  • रीढ़ की हड्डी और नसों को देखने के लिए उपलब्ध सर्वोत्तम इमेजिंग टेस्ट
  • इसमें रीढ़ की चोटें, असमान्यताएं और बीमारियां आसानी से पकड़ में आ जाती हैं, जो किसी भी अन्य इमेजिंग टेस्ट में संभव नहीं है।
  • किसी भी तरह के संक्रमण और ट्यूमर के शुरुआती लक्षणों का पता लग सकता है

(और पढ़ें - ट्यूमर और कैंसर में क्या अंतर होता है)

रीढ़ के एमआरआई के जोखिम :

  • मशीन का चुम्बकीय क्षेत्र किसी भी तरह के प्रत्यारोपित चिकित्सा उपकरण को खराब कर सकता है।
  • गुर्दे की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों को कॉन्ट्रास्ट डाई नुकसान पहुंचा सकती है।
  • कुछ बेहद ही दुर्लभ मामलों में कॉन्ट्रास्ट डाई से एलर्जी हो सकती है।

(और पढ़ें - एलर्जी की आयुर्वेदिक दवा)

रीढ़ के एमआरआई के बाद आप अपने दैनिक आहार और गतिविधियों को तब तक जारी रख सकते हैं, जब तक कि आपको ऐसा करने से मना न किया जाए।

यदि कॉन्ट्रास्ट डाई का उपयोग किया गया है तो आपको कुछ समय तक निगरानी रखनी चाहिए, क्योंकि इससे सूजन, चकत्ते, खुजली और सांस लेने में कठिनाई जैसी एलर्जिक समस्याएं हो सकती हैं।

यदि आपको शांत करने के लिए सिडेटिव का इस्तेमाल किया गया है तो आपको ड्राइविंग नहीं करनी चाहिए और इसका असर खत्म होने तक आपके साथ हर समय कोई न कोई व्यक्ति अवश्य रहना चाहिए।

यदि इंजेक्शन की जगह पर संक्रमण के लक्षण (लालिमा और सूजन) दिखते हैं तो, डॉक्टर को तुरंत सूचित करें।

(और पढ़ें - सूजन कम करने के उपाय)

रीढ़ के एमआरआई के साथ जो अन्य टेस्ट किए जा सकते हैं, उसमें शामिल हैं :

  • सीटी स्कैन
  • मैग्नेटिक रेजोनेंस एंजियोग्राफी (एमआरए)
  • मायलोग्राम
  • सेरेब्रल स्पाइनल फ्लूइड टेस्ट (स्पाइनल टैप)
  • डिस्कोग्राफी

ध्यान रहे : इन सभी टेस्ट के परिणाम रोगी के नैदानिक स्थितियों से सहसंबद्ध यानी जुड़े होने चाहिए। ऊपर मौजूद जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह किसी भी डॉक्टर द्वारा सुझाए गए मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।

(और पढ़ें - टांग का एमआरआई कैसे किया जाता है)

Dr. Rachita Gupta

Dr. Rachita Gupta

रेडियोलोजी
12 वर्षों का अनुभव

Dr. Tejinder Kataria

Dr. Tejinder Kataria

रेडियोलोजी
35 वर्षों का अनुभव

Dr. Shyam Singh Bisht

Dr. Shyam Singh Bisht

रेडियोलोजी
17 वर्षों का अनुभव

Dr. Shikha Goyal

Dr. Shikha Goyal

रेडियोलोजी
18 वर्षों का अनुभव

और पढ़ें ...
cross
डॉक्टर से अपना सवाल पूछें और 10 मिनट में जवाब पाएँ