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गाइनेकोमैस्टिया पुरूषों में होने वाली एक ऐसी समस्या है, जिसमें उनके स्तनों के ऊतक विकसित होने लग जाते हैं। स्तन के ऊतकों का आकार आमतौर पर 1-1/2  इंच से कम होता है और यह निप्पल के ठीक नीचे स्थित होते हैं। गाइनेकोमैस्टिया में एक तरफ के स्तन बड़े या दोनों तरफ के बड़े हो सकते है। कुछ पुरुषों या छोटे लड़कों की छाती पर अधिक चर्बी आ जाती है, जिससे उनके स्तनों का आकार बड़ा दिखने लग जाता है, इस स्थिति को “फाल्स गाइनेकोमैस्टिया” कहा जाता है। फाल्स गाइनेकोमैस्टिया और गाइनेकोमैस्टिया एक समान स्थिति नहीं होती है। 

सेक्स हार्मोन, टेस्टोस्टेरोन या एस्ट्रोजन आदि के स्तर में असंतुलन होने के कारण भी गाइनेकोमैस्टिया हो सकता है। डॉक्टर इस स्थिति का परीक्षण करने के लिए मरीज की छाती की जांच करते हैं। गाइनेकोमैस्टिया के सभी कारणों की रोकथाम नहीं की जा सकती है, हालांकि शरीर का सामान्य वजन बनाए रखना और धूम्रपान आदि ना करने से इससे बचाव करने में काफी मदद मिल सकती है।

गाइनेकोमैस्टिया का इलाज ऑपरेशन के द्वारा किया जा सकता है, जिसमें या तो लिपोसक्शन (Liposuction) या फिर डायरेक्ट एक्सीजन (Direct excision) सर्जरी की जाती है। कुछ मामलों में ये दोनो सर्जरी की जा सकती हैं। सर्जरी प्रक्रिया के दौरान मरीज के छाती के हिस्से को सुन्न किया जाता है और मरीज को बेहोश किया जा सकता है, जिससे मरीज को चिंतातनाव जैसी समस्याएं हो सकती है। गाइनेकोमैस्टिया के कारण मरीज को शर्मिंदगी भी महसूस हो सकती है, इतना ही नहीं यह समस्या ट्यूमर का संकेत भी दे सकती है। 

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  1. गाइनेकोमैस्टिया क्या है - What is Gynecomastia in Hindi
  2. गाइनेकोमैस्टिया के लक्षण - Gynecomastia Symptoms in Hindi
  3. गाइनेकोमैस्टिया के कारण व जोखिम कारक - Gynecomastia Causes & Risk Factors in Hindi
  4. गाइनेकोमैस्टिया से बचाव - Prevention of Gynecomastia in Hindi
  5. गाइनेकोमैस्टिया का परीक्षण - Diagnosis of Gynecomastia in Hindi
  6. गाइनेकोमैस्टिया का इलाज - Gynecomastia Treatment in Hindi
  7. गाइनेकोमैस्टिया की जटिलताएं - Gynecomastia Complications in Hindi

गाइनेकोमैस्टिया क्या है - What is Gynecomastia in Hindi

गाइनेकोमैस्टिया क्या है?

गाइनेकोमैस्टिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पुरुषों के स्तनों के ऊतक बढ़ने लग जाते हैं। इस स्थिति में पुरूषों के स्तनों में सिर्फ चर्बी ही नहीं बढ़ती, उनके स्तनों की ग्रंथियां भी बढ़ने लग जाती है। गाइनेकोमैस्टिया एक या दोनों स्तनों में हो सकता है।

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गाइनेकोमैस्टिया के लक्षण - Gynecomastia Symptoms in Hindi

गाइनेकोमैस्टिया के लक्षण क्या हैं?

गाइनेकोमैस्टिया का आकार व उससे होने वाले लक्षण काफी अलग-अलग हो सकते हैं, जैसे निप्पल के ठीक पीछे के ऊतकों का आकार थोड़ा बहुत या बहुत अधिक बढ़ जाना, महिलाओं के स्तनों जैसी आकृति व आकार बन जाना। निप्पल के चारों तरफ के ऊतकों का आकार थोड़ा बढ़ जाने के कारण स्तन का उभरा हुआ महसूस होना भी गाइनेकोमैस्टिया के मुख्य संकेतों में से एक है। 

गाइनेकोमैस्टिया से एक या दोनों स्तन प्रभावित हो सकते हैं। कुछ मामलों में प्रभावित स्तनों में दर्द रहता है या उनको छूने पर दर्द होता है, हालांकि यह सभी मामलों में नहीं होता है। 

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको नीचे बताई गई समस्याओं में से कोई भी महसूस हो रही है, तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

  • सूजन
  • दर्द
  • छूने पर दर्द होना
  • एक या दोनों स्तनों के निप्पल से द्रव आना

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गाइनेकोमैस्टिया के कारण व जोखिम कारक - Gynecomastia Causes & Risk Factors in Hindi

गाइनेकोमैस्टिया क्यों होता है?

गाइनेकोमैस्टिया, कुछ प्रकार की दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट के परिणामस्वरूप या दवाओं का गलत तरीके से उपयोग करने के कारण हो सकता है। नीचे कुछ प्रकार की दवाओं के उदाहरण हैं, जो गाइनेकोमैस्टिया का कारण बन सकती हैं:

  • कोर्टिकोस्टेरॉयड और एनाबॉलिक स्टेरॉयड
  • एंटीबायोटिक
  • कुछ प्रकार के हर्बल उत्पाद जैसे टी ट्री ऑयल और लैवेंडर
  • ओपिओइड्स (नशीली दवाएं)
  • एस्ट्रोजन (जो सोया उत्पादों में पाई जाती है)
  • सीने में जलन को शांत करने के लिए ली जाने वाली दवाएं 
  • चिंता के लिए ली जाने वाली दवाएं (एंटी-एंग्जायटी मेडिकेशन)

इतना ही नहीं गाइनेकोमैस्टिया स्वास्थ्य संबंधी कुछ समस्याओं व उनके इलाज से संबंधित भी हो सकता है। इसकै उदाहरणों में निम्न शामिल हो सकते हैं: 

  • कुपोषण:
    यदि आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषण नहीं मिल रहा है, तो ऐसे में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर गिरने लग जाता है लेकिन एस्ट्रोजन का स्तर स्थिर रहता है। ऐसा होने पर शरीर में हार्मोन के स्तर का संतुलन बिगड़ने लग जाता है। व्यक्ति का सामान्य रूप से पोषण शुरू होने के बाद भी उसे गाइनेकोमैस्टिया हो सकता है। (और पढ़ें - कुपोषण के लक्षण)
     
  • ट्यूमर:
    किसी पुरूष के वृषण, एड्रीनल ग्रंथि या पीट्यूटरी ग्रंथि में ट्यूमर होने के कारण ये ग्रंथिया कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लग जाती हैं। ऐसा होने पर महिला-पुरुष हार्मोन का स्तर असंतुलित हो जाता है।
     
  • लंबे समय से किडनी खराब रहना:
    जिन लोगों का इलाज नियमित रूप से हीमोडायलिसिस के साथ किया जा रहा है, उनमें से लगभग आधे लोगों के हार्मोन में बदलाव होने के कारण गाइनेकोमैस्टिया हो जाता है। (और पढ़ें - किडनी खराब होने के लक्षण)

इनके अलावा अन्य रोग भी हैं, जो गाइनेकोमैस्टिया का कारण बन सकती हैं:

गाइनेकोमैस्टिया होने का खतरा कब बढ़ता है?

कुछ स्थितियां हैं जिनमें मरीज को गाइनेकोमैस्टिया होने का खतरा बढ़ सकता है। इनमें निम्न स्थितियां शामिल हो सकती हैं:

  • शराब:
    अधिक मात्रा में पी गई शराब लीवर को कई तरीकों से क्षतिग्रस्त कर सकती है, जिसके कारण कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। अधिक मात्रा में एल्कोहल लीवर को उत्तेजित कर देती है, जिससे हार्मोन के स्तर मे असंतुलन हो जाता है। लीवर सर्कुलेटिंग एस्ट्रोजन को अवशोषित करना बंद कर देता है, एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है, लेकिन टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है। इस प्रकार से हार्मोन का स्तर असंतुलित होने के कारण स्तन के ऊतक बढ़ने लग सकते हैं।
     
  • मोटापा:
    व्यक्ति के शरीर में जितनी अधिक वसायुक्त कोशिकाएं होती हैं, उतना ही अधिक उनका शरीर एस्ट्रोजन बनाने लगता है। इसके परिणामस्वरूप स्तनों के ऊतक बढ़ने लग जाते हैं।

कुछ अन्य स्थितियां भी हैं, जिनसे गाइनेकोमैस्टिया होने का खतरा बढ़ जाता है:

  • ट्यूमर से एचसीजी या एस्ट्रोजन/एस्ट्रोजन प्रीकॉरसर (जैसे टेस्टिकुलर या एड्रीनल ट्यूमर) स्रावित होना।
  • कैंसर का इलाज करने के लिए किये जाने वाले हार्मोन ट्रीटमेंट के साइड इफेक्ट के रूप में भी स्तनों में सूजन आ सकती है।
  • किशोरावस्था
  • अधिक उम्र होना
  • हाइपोगोनैडिज्म (प्राइमरी या सेकेंड्री)
  • लंबे समय से गुर्दे खराब होना
  • हाइपोथायरायडिज्म

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गाइनेकोमैस्टिया से बचाव - Prevention of Gynecomastia in Hindi

गाइनेकोमैस्टिया से बचाव कैसे करें?

कुछ कारक हैं जिनको कंट्रोल करके आप गाइनेकोमैस्टिया होने के जोखिम को कम कर सकते हैं, जैसे: 

  • गैर-कानूनी व नशीले पदार्थ ना लें:
    उदाहरण के लिए स्टेरॉयड और एंड्रोजन, एम्फ़ैटेमिन, हेरोइन और गांजा आदि।
     
  • शराब छोड़ दें:
    यदि आप शराब पीते हैं, तो उसे छोड़ें दे या जितना हो सके उसे कम कर दें।
     
  • अपनी दवाओं की जांच करवाएं:
    यदि आप कुछ ऐसी दवाएं ले रहे हैं, जिन्हें गाइनेकोमैस्टिया का कारण बनने वाली दवाओं के रूप में जाना जाता है तो डॉक्टर से अपनी दवाओं के बारे में बात कर लेनी चाहिए।

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गाइनेकोमैस्टिया का परीक्षण - Diagnosis of Gynecomastia in Hindi

गाइनेकोमैस्टिया का परीक्षण कैसे किया जाता है?

डॉक्टर आमतौर पर यह पता लगा लेते हैं कि आपको गाइनेकोमैस्टिया है या नहीं, हालांकि कुछ मामलों में वे आपको ब्रेस्ट क्लिनिक भी भेज सकते हैं। ब्रेस्ट क्लिनिक में स्तनों के विशेषज्ञ डॉक्टर आपकी समस्या की जांच करते हैं। परीक्षण के दौरान डॉक्टर द्वारा ध्यानपूर्वक आपके स्तनों की जांच की जाती है और आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारियां ली जाती है। इसके अलावा परीक्षण के दौरान डॉक्टर आपके द्वारा हाल ही में खाई गई दवाओं के बारे में भी पूछ सकते हैं।

कुछ मामलों में स्तनों की जांच के अलावा कुछ अन्य टेस्ट भी करने पड़ सकते हैं, ताकि निश्चित रूप से स्थिति का पता लगाया जा सके। गाइनेकोमैस्टिया का परीक्षण करने के लिए निम्न टेस्ट किए जा सकते हैं:

  • स्तन का एक्स रे (मैमोग्राम) और/या अल्ट्रासाउंड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड में ध्वनि तरंगों की मदद से स्तन के अंदरुनी ऊतकों की तस्वीरें तैयार की जाती हैं।
  • फाइन नीडल एस्पिरेशन (FNA) या कोर बायोप्सी ऑफ ब्रेस्ट टेस्ट किये जा सकते हैं। 

गाइनेकोमैस्टिया स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याओं का लक्षण भी हो सकता है, इसलिए डॉक्टर आपके शरीर के कुछ अन्य हिस्सों की जांच भी कर सकते हैं जैसे गला, पेट और वृषण आदि। इतना ही नहीं डॉक्टर आपको खून टेस्ट जैसे कुछ अन्य टेस्ट करवाने का सुझाव भी दे सकते हैं।

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गाइनेकोमैस्टिया का इलाज - Gynecomastia Treatment in Hindi

गाइनेकोमैस्टिया का इलाज कैसे करें?

कुछ लोगों में गाइनेकोमैस्टिया का कारण बनने वाली स्थितियों का इलाज (जैसे दवाओं में बदलाव करना, शरीर का मोटापा कम करके या शराब छोड़ कर) करके बढ़े हुऐ स्तनों के आकार को फिर से सामान्य साइज में लाया जा सकता है। कुछ मामलों में स्तनों को फिर से सामान्य बनाने के लिए दवाएं खानी पड़ सकती है और कुछ मामलों में सर्जरी भी करवानी पड़ सकती है। 

डॉक्टर आमतौर पर गाइनेकोमैस्टिया का इलाज दवाओं से ही शुरू करते हैं, इस रोग में उपयोग की गई दवाओं में निम्न शामिल हो सकती हैं:

  • टेमोक्सिफेन:
    यह शरीर में एस्ट्रोजेन की मात्रा को कम करके और पुरुषों में स्तन के आकार को कम करते हुए प्रभावी रूप से गाइनेकोमैस्टिया का इलाज कर देती है। टेमोक्सिफेन दवाएं आमतौर पर टेबलेट के रूप में मिलती हैं, इन दवाओं की कितनी खुराक लेनी है और कब तक लेनी यह यह आपके डॉक्टर निर्धारित करते हैं।
     
  • डेनाजॉल:
    यह दवा अंडकोष में बन रहे एस्ट्रोजन की मात्रा को कम कर देती है, जिससे स्तन का आकार कम हो जाता है और गाइनेकोमैस्टिया के लक्षणों में सुधार हो जाता है। यह दवा भी टेबलेट के रूप में ली जाती है और इसकी खुराक व अवधि डॉक्टर के द्वारा ही निर्धारित की जाती है।
     
  • एरोमाटेज इनहिबिटर्स (कभी-कभार):
    इन दवाओं का उपयोग मुख्य रूप से ब्रेस्ट कैंसर के रूप में किया जाता है। एरोमाटेज इनहिबिटर्स दवाएं खाने वाली टेबलेट के रूप में मिलती हैं, इनकी खुराक या इन्हें कितने समय तक खाना है आदि के बारे में डॉक्टर बताते हैं।

ऐसी कोई विशेष दवा नहीं है जिसको सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाए, हालांकि गाइनेकोमैस्टिया के लिए टेमोक्सिफेन दवा को सबसे अधिक पसंद किया जाता है। इसलिए कोई भी दवा लेने से पहले उसके फायदे व उनसे होने वाले जोखिम आदि के बारे में पता कर लेना चाहिए। 

दवाएं छोड़ देने के बाद गाइनेकोमैस्टिया फिर से हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो आपको बिना देरी किए अपने डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए। 

ऑपरेशन:

आमतौर पर सर्जरी का उपयोग असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाता है। यदि जीवन शैली में उचित बदलाव करने से या दवाओं से इलाज करने पर भी गाइनेकोमैस्टिया में किसी प्रकार का सुधार ना हो पाए, तब ऑपरेशन से इसका इलाज करने पर विचार किया जाता है। यदि आपको लंबे समय से गाइनेकोमैस्टिया की समस्या हो रही है जिससे आपका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है, तो ऐसे में डॉक्टर सर्जरी से ही इसका इलाज करने के बारे में सोचते हैं। 

डॉक्टर ऑपरेशन से पहले ही आपको सर्जरी से जुड़े सभी जोखिम के बारे में बता देते हैं, ताकि आप यह तय कर सकें कि आपको ऑपरेशन करवाना चाहिए या नहीं। 

गाइनेकोमैस्टिया का आकार कितना है और चर्बी कितनी बढ़ गई है आदि के आधार पर ऑपरेशन के प्रकार को तय किया जाता है। इलाज का मुख्य लक्ष्य मरीज की छाती को सामान्य आकार में लाना होता है। इसके इलाज में एक से अधिक ऑपरेशन करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

जब शुरूआती इलाज के बाद भी ब्रेस्ट का आकार अधिक रह जाता है, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर सर्जरी करवाने की सलाह देते हैं। इसके लिए की जाने वाली सर्जरी मुख्य दो प्रकार की होती हैं: 

  • लिपोसक्शन (Liposuction):
    इस सर्जरी के द्वारा स्तनों के ऊपर से अतिरिक्त चर्बी को हटा दिया जाता है, लेकिन इससे स्तन की ग्रंथियों को नहीं हटाया जाता है।
     
  • मेसाटेक्टोमी (Mastectomy):
    इस सर्जिकल प्रक्रिया की मदद से स्तनों की ग्रंथियों के ऊतकों को ही निकाल दिया जाता है। यह सर्जरी आमतौर पर एंडोस्कोपी की मदद से की जाती है, मतलब इसमें एक छोटा सा चीरा लगाया जाता है। इस सर्जरी में छोटा सा ही चीरा दिया जाता है, इसलिए यह जल्दी  ठीक भी हो जाती है। 

कुछ प्रकार की सर्जिकल प्रक्रियाएं हैं, जिनको अकेले या एक-दूसरे के साथ संयोजन के रूप में किया जा सकता है। किसी भी प्रक्रिया को शुरू करने से पहले डॉक्टर आपकी ध्यानपूर्वक जांच करेंगे, ताकि वे आपके लिए उचित सर्जिकल प्रक्रिया का पता लगा सकें। 

(और पढ़ें - ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी)

गाइनेकोमैस्टिया की जटिलताएं - Gynecomastia Complications in Hindi

गाइनेकोमैस्टिया से क्या जटिलताएं होती हैं?

गाइनेकोमैस्टिया काफी परेशान कर देने वाली स्थिति होती है, जिससे मरीज को काफी शर्मिंदगी भी महसूस हो सकती है। गाइनेकोमैस्टिया से ग्रस्त पुरुष खुद को समाज से अलग समझने लग जाता है। यह ब्रेस्ट कैंसर का कारण भी हो सकता है, जिसका तुरंत परीक्षण व इलाज करवाना बहुत जरूरी होता है। 

गाइनेकोमैस्टिया के जिन मामलों का कारण कैंसर नहीं होता, वे आमतौर घातक नहीं होते हैं। हालांकि इस स्थिति का इलाज करने के लिए की गई सर्जरी से कुछ जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

गाइनेकोमैस्टिया की सर्जरी से होने वाली कुछ संभावित सर्जरी या जोखिम निम्न हो सकते हैं:

  • दोनों स्तन व निप्पल आपस में मेल ना खाना (अंतर होना)
  • प्रभावित नस कुछ समय के लिए सुन्न हो जाना या फिर स्तन को महसूस ना कर पाना
  • यदि स्तन ठीक से विकसित नहीं हुआ है, तो सर्जरी के बाद स्तन फिर से बढ़ने लग सकता है।
  • स्तन के आस-पास की त्वचा का रंग स्थायी रूप से बिगड़ जाना
  • केलोइड्स व हाइपरट्रोफिक स्कार जो उभरे हुऐ, लाल रंग के व थोड़े मोटे होते हैं। ये स्कार सर्जरी के चीरे वाली जगह पर बन सकते हैं। ये काफी परेशान कर देने वाले, खुजलीदार देखने में थोड़े अजीब हो सकते हैं, लेकिन इनसे स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी नहीं होती है।

(और पढ़ें - निप्पल में दर्द का कारण)

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