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मॉर्निंग सिकनेस, गर्भावस्था के दौरान उल्टी और मतली आने को कहते हैं। इसके नाम से ऐसा लगता है कि यह सुबह होने वाली समस्या है लेकिन यह दिन या रात किसी भी समय हो सकती है। 

गर्भवती महिलाओं को पहली तिमाही के दौरान उल्टियां आना एक आम बात है। लेकिन कुछ महिलाओं को यह पूरी गर्भावस्था के दौरान महसूस होती है।

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आमतौर पर इसमें उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि विभिन्न घरेलू उपचार जैसे पूरे दिन कुछ न कुछ खाते रहना और अदरक युक्त पेय पदार्थों का सेवन करने से अक्सर मितली को दूर करने में मदद मिलती है।

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  1. गर्भावस्था में उल्टी आने के संकेत और लक्षण - Signs and symptoms of morning sickness in pregnancy in Hindi
  2. प्रेगनेंसी में उल्टी और मतली के कारण - Morning sickness causes in pregnancy in Hindi
  3. गर्भावस्था में आने वाली उल्टियों का निदान - Pregnancy morning sickness diagnosis in Hindi
  4. गर्भावस्था में मॉर्निंग सिकनेस से बच्चे और मां के लिए क्या जोखिम होते हैं - Risks to mother and child due to Morning Sickness in Hindi
  5. प्रेग्नेंसी में उल्टी रोकने के उपाय - Morning sickness treatment in pregnancy in Hindi
  6. प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस होने पर काम कैसे करें - How to do work during morning sickness in pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में उल्टी किसी भी समय आ सकती है। कुछ लोगों को यह रात के बीच में भी आती है। मॉर्निंग सिकनेस में मतली और उल्टी दोनों महसूस होते हैं या उल्टी के बिना सिर्फ मतली भी महसूस हो सकती है। यह गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान अधिक होती है।

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गर्भवती महिलाओं में मॉर्निंग सिकनेस के विकसित होने के निम्नलिखित संकेत होते हैं:

  1. गर्भावस्था से पहले, महिलाओं को यात्रा के दौरान मतली या उल्टी, माइग्रेन, स्वाद या गंध महसूस होना। (और पढ़ें - माइग्रेन के घरेलू उपाय)
  2. यदि मां ने पिछली गर्भावस्था में मॉर्निंग सिकनेस का अनुभव किया था।
  3. मां एक से अधिक बच्चों की इच्छा रखती हैं।

गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर से बात करनी चाहिए अगर:

  1. मतली या उल्टी के लक्षण गंभीर हैं।
  2. उन्हें मूत्र बहुत कम मात्रा में हो रहा है।
  3. मूत्र गहरे रंग का है।
  4. अचानक खड़े होने पर चक्कर आते हैं।
  5. खड़े होने पर बेहोशी आये।
  6. दिल की धड़कन बढ़ने पर।
  7. रक्त की उल्टियां हों।

यदि लक्षण बहुत गंभीर होते हैं तो उस अवस्था को हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम (Hyperemesis gravidarum) कहते हैं। जो लगभग 1-2 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में पायी जाती है। आमतौर पर गर्भावस्था के 6वें सप्ताह के दौरान मतली और उल्टी होती है। इस तरह के मॉर्निंग सिकनेस से ग्रस्त होने पर अस्पताल में भर्ती होने और दवाओं के सेवन की आवश्यकता होती है।

अधिकतर गर्भवती महिलाओं में 12वें सप्ताह के बाद इन लक्षणों में सुधार आ जाता है। लेकिन लक्षण पूरी गर्भावस्था में अनुभव होते हैं।

गर्भावस्था में मतली और उल्टी आने के सटीक कारण अभी भी ज्ञात नहीं हैं। हालांकि ऐसा माना जाता है कि हार्मोनल परिवर्तन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:

एस्ट्रोजन स्तर (Estrogen levels): विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा एस्ट्रोजन के स्तर में वृद्धि होने के कारण हो सकता है, जो सामान्य स्तर की तुलना में गर्भावस्था के दौरान 100 गुना अधिक हो जाता है। हालांकि यह अभी पूरी तरह से सिद्ध नहीं हुआ है। 

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प्रोजेस्टेरोन का स्तर (Progesterone levels): गर्भवती महिला में प्रोजेस्टेरोन का स्तर भी बढ़ जाता है। प्रोजेस्टेरोन का उच्च स्तर समय से पहले प्रसव को रोकने के लिए गर्भाशय (गर्भ) की मांसपेशियों को शिथिल करता है। हालांकि यह पेट और आंतों को भी शिथिल करता है, जिसके परिणामस्वरूप पेट में अतिरिक्त एसिड एकत्रित हो सकता है और गैस्ट्रोइसोफैगल रिफ्लक्स रोग (Gastroesophageal reflux disease, GERD) या एसिड रिफ्लक्स हो सकता है। 

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हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia): माता के शरीर से बच्चे में ऊर्जा प्रवाह के कारण रक्त शर्करा के स्तर में कमी आ जाती है। हालांकि यह अभी साबित नहीं हुआ है।

ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन (Human chorionic gonadotropin, HCG): इस हार्मोन का स्रावण गर्भवती होने के तुरंत बाद भ्रूण द्वारा और बाद में प्लेसेंटा द्वारा किया जाता है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, एचसीजी का मॉर्निंग सिकनेस से सम्बन्ध हो सकता है।

सूंघने की शक्ति (Sense of smell): गर्भावस्था के दौरान, गंधों की संवेदनशीलता में वृद्धि हो जाती है, जिसके कारण जी मिचलाने की समस्या भी हो सकती है।

भ्रूण के विकास के लिए ज़रूरी है मॉर्निंग सिकनेस -

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मॉर्निंग सिकनेस भ्रूण के विकास के लिए ज़रूरी हो सकती है जो गर्भवती माताओं और उनके बच्चे को फ़ूड पॉइजनिंग (Food poisoning) से बचाती है। यदि गर्भावस्था में उल्टी और मतली का अनुभव करने वाली महिला को खाना अच्छा नहीं लगता है, तो संभावित रूप वो मुर्गीपालन (Poultry), अण्डों या मांस से दूषित हो सकता है। और जिन खाद्य पदार्थों के दूषित होने का जोखिम कम होता है, जैसे चावल, रोटी और क्रैकर्स आदि, खाने का मन करता है। जिससे महिला और उसके बच्चे के स्वस्थ रहने की सम्भावना में वृद्धि होती है। 

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विकासशील भ्रूण में प्रतिरक्षा तंत्र (Immune system) पूरी तरह से विकसित नहीं होता है और इसी कारण उसके लिए विषाक्त पदार्थों की थोड़ी मात्रा भी हानिकारक भी हो सकती है।

भ्रूण के विकासशील अंग विषाक्त पदार्थों के कारण सबसे ज्यादा गर्भावस्था के 6 से 18 सप्ताह के बीच कमजोर होते हैं।

यदि हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम होने का संदेह होता है तो डॉक्टर आपको मूत्र और रक्त परीक्षण कराने को कहेंगे। भ्रूण की संख्या की पुष्टि करने और उल्टी या जी मिचलाने के अन्य कारण जानने के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन भी किया जा सकता है।

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यदि मूत्र में कीटोन का स्तर अधिक है तो उल्टियां होने की सम्भावना बढ़ जाती है और इस वजह से गर्भवती महिला कुपोषित भी हो जाती है।

यदि महिला को हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम है तो बच्चे को नुकसान पहुंचने की संभावना कम होती है। यदि महिलायें गर्भावस्था के दौरान अपना वजन कम होने का अनुभव करती है तो जन्म के समय बच्चे का भी वज़न कम होने का खतरा होता है।

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हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम के 90% मामलों में गर्भावस्था के पांचवें महीने के बाद लक्षण ख़त्म होने लगते हैं। इन लक्षणों के कारण निम्न जोखिम हो सकते हैं:

  1. अधिक उल्टी आने के कारण शरीर में तरल पदार्थ रुक नहीं पाते।
  2. निर्जलीकरण और वजन कम होने का खतरा। (और पढ़ें - शरीर में पानी की कमी)
  3. ऐल्कलोसिस (Alkalosis- रक्त की सामान्य अम्लता में तेज़ी से कमी आना)।
  4. हाइपोकैलीमिया (Hypokalemia- रक्त में पोटेशियम की मात्रा में कमी होना)। (और पढ़ें - पोटेशियम के स्रोत)

मॉर्निंग सिकनेस के ज्यादातर मामलों में, डॉक्टर के इलाज की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि कुछ चीजें हैं जो लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं। मॉर्निंग सिकनेस को कम करने की ऐसी ही कुछ युक्तियां इस प्रकार हैं:

  1. थकावट मतली को भी बदतर बना सकती है। इस दौरान आराम करना बहुत जरुरी होता है। (और पढ़ें - थकान दूर करने के लिए क्या खाएं)
  2. तरल पदार्थों का एक बार में अधिक मात्रा के बजाय कम मात्रा में और नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। इससे होने वाली उल्टियों में कमी आ सकती है। फलों का रस, लॉलीपॉप या बर्फ के टुकड़ों को चूसने से इससे निजात पाने में मदद मिल सकती है। (और पढ़ें - फ्रूट जूस में कितनी कैलोरी हैं)
  3. दिन में थोड़ी थोड़ी मात्रा में, विशेष रूप से उच्च कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करने से गर्भावस्था में होने वाली मॉर्निंग सिकनेस कम हो सकती है। सूखे और सुगंधित खाद्य पदार्थ, जैसे क्रैकर्स आदि आमतौर पर मीठे या मसालेदार भोजन से अधिक अच्छे लगते हैं। ठंडी चीज़ें अक्सर गर्म भोजन की तुलना में बेहतर लगता है क्योंकि उनमें कम गंध आती है। (और पढ़ें - कार्बोहाइड्रेट के स्रोत)
  4. गर्भवती महिलाओं को पेट खाली होने से बचने की कोशिश करनी चाहिए। कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए।
  5. सुबह उठने से 20 मिनट पहले सादा बिस्कुट खाने से मॉर्निंग सिकनेस में मदद मिलती है।
  6. यदि लक्षण गंभीर हैं तो डॉक्टर से परामर्श के बाद गर्भावस्था के दौरान उपयोग की जाने वाली दवाओं का सेवन कर सकते हैं।
  7. कुछ अध्ययनों से पता चला है कि अदरक युक्त चीज़ों का सेवन गर्भावस्था के दौरान मतली के लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं।

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यदि गर्भावस्था के दौरान ऑफिस में आपको मॉर्निंग सिकनेस की वजह से काम करने में असुविधा हो रही है तो आप निम्नलिखित उपाय अपना सकती हैं:

  1. परिस्थिति के अनुकूल काम करें अर्थात यदि संभव हो तो घर से काम करें। अपने मालिक को बताने में संकोच न करें कि आप गर्भवती हैं। हो सकता है वो आपकी स्थिति समझ कर आपके लिए और सुरक्षा इंतज़ाम कर दें।
  2. जब भी संभव हो लेट जायें और आरामदायक कुर्सी इस्तेमाल करें।
  3. अपनी बीमारी की छुट्टियों (Sick leaves) का इस्तेमाल इन दिनों में करें।
  4. अपने पेट को ज़रूरत से ज्यादा खाली या भरने न दें।
  5. थोड़ी थोड़ी देर में खाने के लिए स्नैक्स ज़रूर साथ रखें।
  6. ताजी हवा लेने की कोशिश करें। ऐसा करने से पेट में आराम मिलता है।
  7. अपने कंप्यूटर मॉनीटर की सेटिंग सही कर लें क्योंकि चमक (Brightness), रंग और कंट्रास्ट (Contrast) मतली में योगदान दे सकते हैं।
  8. यदि लगातार मतली के कारण कमज़ोरी महसूस हो रही हो तो डॉक्टर से मतली ख़त्म करने वाली दवाओं के सेवन के लिए परामर्श ले लें। (और पढ़ें - कमजोरी दूर करने के घरेलू उपाय)

(स्वस्थ गर्भावस्था के बाद अपने बच्चों का यूनीक नाम रखने के लिए पढ़ें - यूनीक बच्चों के नाम)

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