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मतली (जी मिचलाना) और उल्टी अपने आप में कोई बीमारी नहीं हैं, बल्कि यह चिकित्सकीय स्थितियों के लक्षण हैं। पेट में बेचैनी के साथ उल्टी करने की इच्छा को मतली (जी मिचलाना) कहते हैं। चूंकि उल्टी और मतली (जी मिचलाना) कई अलग-अलग स्थितियों के सामान्य लक्षण हैं, इसलिए इनका सटीक कारण अक्सर लक्षणों के आधार पर निर्धारित होता है। जिन स्थितियों की वजह से मतली (जी मिचलाना) या उल्टी की समस्या होती है उनमें शामिल हैं :

  • फूड एलर्जी : खाद्य उत्पादों के प्रति एलर्जी होने पर अक्सर मतली (जी मिचलाना), उल्टी, दस्त व अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
  • फूड पॉइजनिंग : फूड पॉइजनिंग, बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या परजीवियों द्वारा दूषित भोजन के सेवन के कारण होती है। ई. कोलाई और स्टेफिलोकोकस जैसे बैक्टीरिया फूड पॉइजनिंग के सबसे आम कारण हैं।
  • गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग : यह एक ऐसी स्थिति, जिसमें पेट में उत्पन्न एसिड या कभी-कभी पेट में मौजूद कोई अन्य तत्व भोजन नली में वापस आ जाते हैं। इससे व्यक्ति को मतली (जी मिचलाना) की समस्या हो जाती है।
  • रेडिएशन थेरेपी से होने वाले दुष्प्रभाव
  • जहाज में घूमने से मतली (जी मिचलाना)
  • मॉर्निंग सिकनेस (गर्भावस्था के दौरान सुबह के समय उबकाई या मतली (जी मिचलाना)
  • कैंसर
  • अपेन्डिसाइटिस, पित्त में पथरी, गैस्ट्राइटिस और अग्नाशयशोथ जैसी पाचन तंत्र की स्थिति
  • मेनिनजाइटिस और ब्रेन ट्यूमर जैसे तंत्रिका तंत्र के विकार

(और पढ़ें - उल्टी रोकने के घरेलू उपाय)

  1. मतली और उल्टी के लिए होम्योपैथिक दवाएं - Homeopathic medicine for nausea and vomiting in Hindi
  2. मतली और उल्टी के इलाज के लिए होम्योपैथी के अनुसार बदलाव - Diet according to homeopathy for Nausea and vomiting in Hindi
  3. मतली और उल्टी के लिए होम्योपैथिक उपचार कितने प्रभावी हैं - How much effective homeopathic medicine for Nausea and vomiting in Hindi
  4. मतली और उल्टी के लिए होम्योपैथिक दवा के जोखिम - Disadvantages of homeopathic medicine for Nausea and vomiting in Hindi
  5. मतली और उल्टी के लिए होम्योपैथिक उपचार से संबंधित टिप्स - Nausea and Vomiting ke liye homeopathic treatment se jude tips
उल्टी और मतली की होम्योपैथिक दवा और इलाज के डॉक्टर

उल्टी और मतली रोकने की होम्योपैथिक में निम्नलिखित दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है :

एंटीमोनियम क्रूडम
सामान्य नाम :
ब्लैक सल्फाइड ऑफ एंटीमोनी
लक्षण : गैस्ट्रिक स्थितियों में सबसे आम नुस्खे के रूप में एंटीमोनियम क्रूडम का उपयोग किया जाता है। आमतौर पर यह उन लोगों पर अच्छा सूट करता है जो चिड़चिड़े स्वभाव के होते हैं और जिनकी जीभ पर मोटी सफेद कोटिंग होती है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों में भी असरदार है :

यह लक्षण शाम के दौरान और खट्टे या अम्लीय खाद्य पदार्थों व शराब के सेवन से खराब हो जाते हैं।

अर्जेन्टम नाइट्रिकम
सामान्य नाम :
नाइट्रेट ऑफ सिल्वर
लक्षण : यह उपाय उन व्यक्तियों के लिए अनुकूल है, जिन्हें मीठा खाने की तेज इच्छा होती है और गर्मी को सहन करने में असमर्थ होते हैं। इसके अलावा निम्नलिखित लक्षणों को भी इस उपाय से ठीक किया जा सकता है :

  • उल्टी के साथ बलगम आना 
  • जी मिचलाना
  • पेट में दर्द
  • गैस पास करना
  • मिठाई खाने की इच्छा
  • पूरे पेट में दर्द का घूमना

यह लक्षण मिठाई खाने, गर्म सिकाई करने और रात में खराब हो जाते हैं।

आर्सेनिकम एल्बम
सामान्य नाम :
आर्सेनिक एसिड
लक्षण : आर्सेनिकम एल्बम उन लक्षणों के लिए शानदार उपाय है, जो रात के दौरान बिगड़ जाते हैं। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों को भी ठीक कर सकता है :

  • भोजन की गंध पसंद न करना
  • खाने या पीने के बाद उल्टी
  • उल्टी जिसमें खून, हरा बलगम या भूरे रंग का कोई पदार्थ दिख सकता है
  • मतली (जी मिचलाना) और सीने में जलन
  • अधिक प्यास लगने पर बहुत सारा पानी पीने से उल्टी होना
  • पेट में जलन वाला दर्द

यह लक्षण ठंडे खाद्य और पेय पदार्थ की खपत से, नम और ठंडे मौसम में व रात के दौरान खराब हो जाते हैं।

कार्बो वेजीटेबिलिस
सामान्य नाम :
वेजीटेबल चारकोल
लक्षण : यह उपाय उन व्यक्तियों के लिए निर्धारित किया जाता है जो आमतौर पर भारी कद काठी के और सुस्त रहते हैं। इसके अलावा यह नीचे दिए लक्षणों में भी असरदार है :

  • डकार
  • पेट भरा होने का अहसास या भारीपन
  • पेट में परेशानी और दर्द के साथ गैस पास करना
  • भोजन के बाद खट्टी डकारें आना
  • मॉर्निंग सिकनेस
  • दूध, वसायुक्त और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को पसंद न करना

यह लक्षण ठंडे और नम मौसम, रात के समय और डेयरी उत्पादों, कॉफी व वसायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से खराब हो जाते हैं।

कार्बोलिकम एसिडम
सामान्य नाम :
फिनोल, कार्बोलिक एसिड
लक्षण : कार्बोलिकम एसिडम एक असरदार होम्योपैथिक दवा है, जो पेट की परेशानी से छुटकारा दिलाती है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों को भी ठीक कर सकता है :

  • भूख में कमी
  • तंबाकू और अन्य उत्तेजक पदार्थों का सेवन करने की इच्छा
  • जी मिचलाना
  • गहरे हरे रंग की उल्टी
  • डकार
  • गैस पास करने या मल त्याग के दौरान दर्द
  • अपच जिसके परिणामस्वरूप मुंह में खट्टापन या दुर्गंध आ सकती है।

कोक्यूलस इंडिकस
सामान्य नाम :
इंडियन कॉकल
लक्षण : यह एक प्रभावी उपाय है, जिसका उपयोग सीसिकनेस (जहाज पर होने वाली मत​ली) के इलाज के लिए किया जाता है। यह मुख्य रूप से साफ रंग वाली, गर्भवती या संवेदनशील महिलाओं के लिए अनुकूल है। हालांकि यह निम्नलिखित लक्षणों को भी ठीक कर सकता है :

  • किसी भी चलते हुए वाहन में मतली (जी मिचलाना)
  • भूख में कमी
  • चलती गाड़ी में बेहोशी और उल्टी
  • भोजन की गंध पसंद न करना
  • मुंह में धातु का स्वाद (और पढ़ें - मुंह का स्वाद खराब होना)
  • तंबाकू से जलन

यह स्थिति धूम्रपान, भोजन करने के बाद, दोपहर और शोरगुल के माहौल में बिगड़ जाती है।

फेरम मेटालिकम
सामान्य नाम :
आयरन
लक्षण : फेरम मेटालिकम आमतौर पर उन युवा व्यक्तियों को दिया जाता है जो दुबलेपन, खून की कमी और क्लोरोटिक (पीली हरी) त्वचा से जूझ रहे होते हैं। यह निम्नलिखित लक्षणों को ठीक करने में भी असरदार है : 

  • असामान्य रूप से भूख बढ़ जाना या भूख में कमी
  • खट्टे पदार्थों को पसंद न करना
  • खाने के तुरंत बाद उल्टी
  • खाने के बाद दस्त
  • रात में बार-बार उल्टी
  • अंडों की गंध बर्दाश्त न कर पाना
  • बिना खाने के भी डकार आना
  • भोजन के बाद मतली (जी मिचलाना) और उल्टी

आमतौर पर धीमे रूप से गतिविधि करने और चारों ओर घूमने से आराम मिलता है, लेकिन खाली बैठने या ऐसे कार्य करने से लक्षण खराब हो जाते हैं, जिनमें पसीना बहुत आता है।

उल्टी और मतली (जी मिचलाना) खराब जीवनशैली या आहार के कारण हो सकती है या हो सकता है कि यह किसी गंभीर बीमारी का भी लक्षण हो। फूड पॉइजनिंग, एलर्जी या डायरिया से संबंधित रोग मतली (जी मिचलाना) और बार-बार उल्टी आने के सामान्य कारण हैं।

डब्लूएचओ के अनुसार, हर साल काफी संख्या में लोग (ज्यादातर बच्चे) डायरिया की बीमारी से पीड़ित होते हैं, जिनका सही इलाज न होने पर जान को खतरा हो सकता है। ऐसा अक्सर कम आय वाले देशों में देखा जाता है।

इसी तरह, असुरक्षित भोजन का सेवन भी मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है। ऐसा अनुमान है कि हर साल 600 मिलियन (दुनिया की आबादी का 10%) बीमार पड़ जाते हैं और 420,000 लोग दूषित भोजन की वजह से अपना जीवन खो देते हैं।

इस प्रकार, उपचार के दौरान और बाद में एक स्वस्थ जीवन शैली और आहार बनाए रखना बहुत जरूरी होता है।

क्या करना चाहिए

क्या नहीं करना चाहिए

  • उपचार के दौरान शराब या तंबाकू का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। 
  • कैफीन जैसे कॉफी या चाय का सेवन न करें क्योंकि यह होम्योपैथी दवाओं के असर में हस्तक्षेप कर सकता है।
  • मसालेदार या खट्टे खाद्य पदार्थों से परहेज करें क्योंकि यह दवा के प्रभावों को कम कर सकता है।
  • मतली (जी मिचलाना) और उल्टी की स्थिति में ज्यादा मेहनत वाले काम न करें क्योंकि यह लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं।

(और पढ़ें - मसालेदार खाने के नुकसान)

होम्योपैथिक दवाएं व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर फोकस होती हैं, ताकि शरीर अपने आप बीमारियों से लड़ सके। होम्योपैथिक दवाएं कई मामलों में निर्धारित की जाती है, लेकिन ज्यादातर इन्हें पाचन से संबंधित स्थितियों को ठीक करने के लिए निर्धारित किया जाता है। दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग इन दवाइयों का उपयोग कर रहे हैं। मतली (जी मिचलाना) और उल्टी से निपटने के लिए पल्सेटिला, कार्बो वेजीटेबिलिस, नक्स वोमिका और कैल्केरिया कार्बोनिका जैसी होम्योपैथिक दवाएं असरदार हैं।

उल्टी और मतली (जी मिचलाना) के प्रति होम्योपैथी दवाओं के असर को जानने के लिए चार्ल्स डार्विन नामक व्यक्ति पर एक स्टडी की गई। उनमें उल्टी की समस्या के साथ विभिन्न परेशान करने वाले लक्षण थे। स्टडी के दौरान होम्योपैथिक दवाओं के साथ वॉटर क्योर (इसमें प्रक्रिया में पीड़ित को थोड़े समय में बड़ी मात्रा में पानी पीने के लिए मजबूर किया जाता है) का इस्तेमाल किया गया। होम्योपैथिक नुस्खों के साथ उन्होंने न सिर्फ लक्षणों पर बल्कि समग्र स्वास्थ्य में तेजी से सुधार का अनुभव किया।

एक अन्य अध्ययन में, जीईआरडी नामक बीमारी के लक्षणों वाले 34 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिन्हें 8 सप्ताह के लिए होम्योपैथिक दवाएं दी गई थीं, अध्ययन के बाद सभी में लक्षणों और जीवन की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया।

चूंकि होम्योपैथिक उपचार प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होते हैं और इन्हें इस्तेमाल करने से पहले घुलनशील रूप दिया जाता है, इसलिए इन दवाइयों का कोई नुकसान नहीं होता है। होम्योपैथी दो सिद्धांतों पर आधारित है और दोनों ​ही उपचार यह सुनिश्चित करते हैं कि इनका कोई प्रतिकूल यानी नकारात्मक प्रभाव न पड़ने पाए।

लाइक क्योर लाइक : इसका मतलब है कि वह तत्व या पदार्थ जो किसी स्वस्थ व्यक्ति में लक्षण पैदा करता है या किसी बीमारी का कारण बनता है, अगर उसी पदार्थ को अत्यधिक पतले रूप में परिवर्तित करके उसी व्यक्ति को दिया जाए तो लक्षणों में सुधार हो सकता है। बशर्ते खुराक उचित मात्रा में ली जाए।

लोएस्ट रिक्वॉयर्ड अमाउंट : होम्योपैथी में जो पदार्थ या तत्व होते हैं उन्हें कम से कम आवश्यक मात्रा में​ दिया जाता है, ताकि शरीर में एंटीबॉडी बन सकें।

एक होम्योपैथिक चिकित्सक व्यक्ति में लक्षणों के अलावा उसकी शारीरिक स्थिति, मानसिक स्थिति और फैमिली हिस्ट्री का सावधानीपूर्वक आकलन करने के बाद उपाय निर्धारित करते हैं। यदि इन उपायों को होम्योपैथिक डॉक्टर की देखरेख में लिया जाए, तो यह पूरी तरह से सुरक्षित और साइड इफेक्ट्स से मुक्त हैं।

(और पढ़ें - सफर में उल्टी आना की होम्योपैथिक दवा)

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी को अपने आप में बीमारी नहीं माना जाता है। यह अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के लक्षण हैं, जिन्हें नजरअंदाज करने पर जान जाने का खतरा भी हो सकता है। मतली (जी मिचलाना) और उल्टी गंभीर रूप से भी परेशान कर सकते हैं, क्योंकि वे व्यक्ति को कमजोर, सुस्त और दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में बाधा महसूस कराती हैं।

वैसे तो पारंपरिक या प्रमाणिक दवाएं इन लक्षणों को दबा देती हैं, लेकिन वे लक्षणों की स्थिति या स्थायी राहत के लिए पूर्ण समाधान प्रदान नहीं कर सकती हैं। जबकि होम्योपैथिक उपाय लक्षणों के साथ-साथ समग्र स्वास्थ को ठीक करने पर फोकस करता है और इन्हें प्राकृतिक सोर्स से प्राप्त किया जाता है इसीलिए इन उपायों का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।

(और पढ़ें - कमजोरी का इलाज)

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संदर्भ

  1. MedlinePlus Medical Encyclopedia. [Internet] US National Library of Medicine; Food allergy
  2. National Centre of Homeopathy. Indigestion, Nausea, Vomiting, and Upset Stomach. Mount Laural NI; [Internet]
  3. British Homeopathic Association. Digestive problems (2003). London; [Internet]
  4. Dana Ullman. The Curious Case of Charles Darwin and Homeopathy. Evid Based Complement Alternat Med. 2010 Mar; 7(1): 33–39. PMID: 19875430
  5. Renu Mitta et al. An open-label pilot study to explore usefulness of Homoeopathic treatment in nonerosive gastroesophageal reflux disease. Year : 2016, Volume : 10, Issue : 3, Page : 188-198
  6. William Boericke. Homoeopathic Materia Medica. Kessinger Publishing: Médi-T 1999, Volume 1
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