एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन क्या है?

एब्डोमिनल एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) स्कैन एक टेस्ट है, जिसमें पेट के अंदर के अंगों और ऊतकों की एमआरआई स्कैनिंग की जाती है और इस स्कैनिंग से तैयार छवियों (इमेजेस) की जांच की जाती है। इस प्रोसीजर के दौरान मैग्नेट और रेडियो वेव्स का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि रेडिएशन का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं ​होता है, यही वजह है कि इसे सीटी स्कैन का एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इस टेस्ट की मदद से डॉक्टर को असामान्यताओं की जांच करने में मदद मिलती है।

डॉक्टर पेट का एमआरआई स्कैन तब तब करवाने को बोलते हैं, जब मरीज ने पहले एक्स-रे, सीटी स्कैन या ब्लड से संबंधित कोई जांच कराई हो और रिजल्ट में किसी स्वास्थ्य सम्बंधित समस्या का पता चला हो।

(और पढ़ें - पेट के रोग का उपचार)

  1. पेट का एमआरआई कब नहीं किया जा सकता है? - Who cannot have an abdominal MRI scan in Hindi?
  2. पेट का एमआरआई स्कैन क्यों किया जाता है? - Abdominal MRI kyon hota hai?
  3. पेट के एमआरआई स्कैन के लिए तैयारी? - Preparation for Abdominal MRI in Hindi?
  4. पेट का एमआरआई स्कैन कैसे किया जाता है? - Pet ka mri kaise hota hai?
  5. पेट का एमआरआई स्कैन में कैसा महसूस होगा? - How will an abdominal MRI scan feel like in Hindi?
  6. पेट का एमआरआई स्कैन परिणामों का क्या मतलब है? - Results of an abdominal MRI scan mean in Hindi?
  7. पेट के एमआरआई स्कैन के जोखिम और लाभ - Risks and benefits of an abdominal MRI in Hindi?
  8. एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन के बाद क्या होता है? - What happens after an abdominal MRI scan in Hindi?
  9. कंट्रास्ट बनाम नॉन-कंट्रास्ट एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन - Contrast vs Non-contrast, Abdominal MRI Scan in Hindi
  10. एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन के साथ किए जाने वाले अन्य परीक्षण?

डॉक्टर निम्नलिखित स्थितियों वाले लोगों को पेट का एमआरआई स्कैन कराने की सलाह नहीं देते हैं :

  • गर्भवती महिलाएं : आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान एमआरआई स्कैन नहीं कराया जाता है, क्योंकि इससे पेट में पल रहे बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस बात को लेकर अभी तक कोई जानकारी नहीं है।
  • टैटू : यदि स्कैन वाले हिस्से पर टैटू बनवाया है तो ऐसे में एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन नहीं कराने की सलाह दी जाती है, क्योंकि टैटू के लिए कई बार ऐसे रंग का प्रयोग किया जाता है, जिसमें सूक्ष्म रूप में मेटल होता है, जो कि इस टेस्ट के दौरान गर्म हो सकता है। (और पढ़ें - टैटू हटाने के तरीके)
  • शरीर के अंदर किसी प्रकार का धातु होने पर : यदि आपने स्कैनिंग वाले हिस्से पर मेटल इंप्लांट कराया है, तो ऐसे में इस टेस्ट से पहले डॉक्टर से परामर्श लें।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में होने वाली परेशानियां)

एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन निम्नलिखित स्थितियों का पता लगाने के लिए किया जाता है :

  • पेट में रक्त वाहिकाओं और रक्त प्रवाह की जांच के लिए
  • किडनी रोग या लिवर रोग संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए
  • अग्नाशय, लिवर, किडनी, तिल्ली (स्प्लीन) या एड्रेनल्स (प्रत्येक किडनी के शीर्ष पर स्थित ग्रंथियां) में द्रव्यमान का पता करने के लिए
  • पेट में लिम्फ नोड्स (संक्रमण से लड़ने वाली ग्रंथियां) जानने के लिए (और पढ़ें - लिम्फ नोड्स में सूजन का इलाज)
  • आमतौर पर, इस टेस्ट का आयोजन एक्स-रे और सीटी स्कैन के परिणामों को पुख्ता करने के लिए किया जाता है। यह ट्यूमर को सामान्य ऊतकों से अलग दिखाता है और उनके आकार व गंभीरता को निर्धारित करने में मदद करता है।

(और पढ़ें -  ट्यूमर और कैंसर में अंतर क्या है)

डॉक्टर आपको एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन टेस्ट से पहले छह घंटे तक कुछ भी खाने / पीने के लिए नहीं कह सकते हैं। यदि कोलन की छवियों की आवश्यकता है, तो आपको कोलन को साफ करने के लिए लैक्सटिव (मल को ढीला करने या आंतों के कार्य को उत्तेजित करने वाले पदार्थ) या एनीमा (enema) दे सकते हैं। निम्नलिखित स्थितियां होने पर टेस्ट से पहले डॉक्टर और रेडियोलॉजिस्ट को बता देना चाहिए :

  • गर्भावस्था
  • हाल ही में रक्त वाहिका की सर्जरी कराई हो
  • शरीर में मेटल इंप्लांट कराया हो जैसे :
    • पेसमेकर (अनियमित दिल की धड़कन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक छोटी डिवाइस)
    • ईयर इंप्लांट (कान में लगाई जाने वाली मशीन)
    • एन्यूरिज्म क्लिप (एक क्लिप जिससे रक्त प्रवाह को बंद किया जाता है)
    • धातु की पिन या स्क्रू (पेंच)
    • मेडिसिन इंफ्यूजन पंप
  • अंतर्गर्भाशयी डिवाइस (T के आकार की बर्थ कंट्रोल डिवाइस)
  • मेडिसिन पैच पहनना (पैच जिसमें दवाई होती है)
  • किडनी की बीमारी या सिकल सेल एनीमिया (और पढ़ें - किडनी रोग में क्या खाना चाहिए)
  • 60 मिनट तक पेट के बल लेटने में असमर्थता
  • क्लौस्ट्रफोबिक (बंद स्थानों से डरना)

अगर आपको बंद जगहों पर डर लगता है, तो ऐसे में चिंता कम करने के लिए दवा दी जा सकती है।

टेस्ट के लिए कोई भी आभूषण या कीमती सामान (घड़ी, बेल्ट, चाबी आदि) साथ न ले जाएं, क्योंकि इन चीजों को स्कैन रूम में जाने की अनुमति नहीं होती है।

(और पढ़ें -  एंग्जायटी का होम्योपैथिक इलाज)

एमआरआई स्कैन में आमतौर पर निम्नलिखित चरण होते हैं:

  • सबसे पहले मेडिकल स्टाफ आपको मेटल की वस्तुओं को निकालने के लिए कहते हैं जैसे नकली दांत, पियर्सिंग और सुन्ने वाली मशीन। इसके अलावा अस्पताल का गाउन पहनने के लिए कहा जा सकता है।
  • इसके बाद आपको एमआरआई मशीन की टेबल पर लेटने के लिए कहा जाएगा, यह टेबल स्कैनर में स्लाइड हो जाती है।
  • तस्वीरों की क्वालिटी को बढ़ाने के लिए हाथ में नस के माध्यम से डाई (कंट्रास्ट) इंजेक्ट किया जा सकता है।
  • डॉक्टर मल त्याग की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए दवा दे सकते हैं।
  • कर्मचारी दूसरे कमरे से एमआरआई मशीन का संचालन करेंगे।
  • टेबल जब एमआरआई मशीन में स्लाइड होती है तो ऐसे में बिल्कुल भी हिलना नहीं चाहिए, इसा करने पर फोटो ब्लर (जो साफ ना हो जैसे धुंधला) हो सकती है।
  • यह टेस्ट आमतौर पर लगभग 60 मिनट तक चल सकता है, लेकिन कई बार इसमें अधिक या कम समय लग सकता है।

(और पढ़ें - PET scan test kaise hota hai)

टेस्ट के दौरान किसी तरह का दर्द नहीं होता है, लेकिन स्कैनिंग प्रोसेस के दौरान देर तक एक ही पोजिशन में लेटे रहने की वजह से दर्द हो सकता है। टेबल ठंडी के साथ-साथ कठोर महसूस हो सकती है और आप स्कैन किए गए हिस्से में गर्मी महसूस कर सकते हैं।

टेस्ट के दौरान, एमआरआई मशीन जोर से शोर हो सकती है, इसलिए रेडियोलॉजी स्टाफ आपको टेबल पर जाने से पहले इयरप्लग दे सकते हैं।

यदि एक कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया जाता है, तो आपको नसों में इंजेक्शन लगाने पर ठंडक का एहसास हो सकता है।

(और पढ़ें - दर्द की आयुर्वेदिक दवा)

एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन का रिजल्ट नकारात्मक आना निम्न स्थितियों से जुड़ा हो सकता है :

  • किडनी की धमनियों (ऐसी रक्त वाहिकाएं जो किसी अंग को ऑक्सीजन युक्त खून पहुंचाती हैं) में रुकावट/बाधा
  • हाइड्रोनफ्रोसिस (एक या दोनों किडनी की सूजन)
  • किडनी की नसों में थ्रोम्बोसिस (रक्त वाहिका में थक्का बनना)
  • ग्लोमेरुलोनफ्राइटिस (किडनी के उस हिस्से को नुकसान होना, जो खून को​ फिल्टर करता है)
  • प्रत्यारोपित अंग का सही से कार्य न करना
  • गालस्टोन (पित्ताशय की थैली में ठोस पदार्थ बनना)
  • पित्ताशय की थैली या पित्त नली में सूजन
  • प्लीहा बढ़ना
  • लिवर बढ़ना (और पढ़ें - फैटी लीवर के घरेलू उपाय)
  • पोर्टल वेन ऑब्सट्रक्शन (पोर्टल वेन में बाधा आना, यह वेन पाचन तंत्र से लिवर तक खून पहुंचाती है)
  • एब्सेस (त्वचा के नीचे मवाद बनना, जिसमें अक्सर दर्द होता)
  • एड्रेनल मासेस (एड्रेनल ग्रंथि में असामान्य वृद्धि)
  • अग्नाशय और आंतों का कैंसर
  • गाल ब्लैडर का ट्यूमर
  • लिम्फैडेनोपैथी (लिम्फ नोड्स की सूजन)

(और पढ़ें - किडनी खराब होने के लक्षण)

एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन से जुड़े जोखिम :

  • टेस्ट के दौरान मैग्नेटिक फील्ड के इस्तेमाल की वजह से मेटल इंप्लांट अपनी जगह से खिसक सकता है या अन्य कोई दिक्कत आ सकती है
  • कंट्रास्ट डाई किडनी रोगियों पर हानिकारक प्रभाव डाल सकती है, जिन्हें डायलिसिस की आवश्यकता होती है
  • दुर्लभ मामलों में कंट्रास्ट डाई की वजह से एलर्जी हो सकती है (और पढ़ें - एलर्जी की आयुर्वेदिक दवा)

एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन से जुड़े लाभ :

  • इस प्रक्रिया में दर्द नहीं होता
  • इसमें रेडिएशन का उपयोग नहीं होता
  • यह विस्तृत में जानकारी देता है।

(और पढ़ें - ईईजी टेस्ट क्या है)

एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन पूरा होने के बाद आप नॉर्मल तरीके से दैनिक गतिविधियों को जारी रख सकते हैं। हालांकि, अगर आपको चिंता को कम करने के लिए दवा दी गई है, तो आपको नीचे बताई गई सावधानियों का पालन करना चाहिए :

  • टेस्ट के बाद 24 घंटे तक किसी के साथ रहें।
  • वाहन न चलाएं या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग न करें।
  • टेस्ट के दिन किसी भी मशीन पर काम न करें

(और पढ़ें - चिंता कम करने के उपाय)

कुछ मामलों में फोटो की क्वालिटी में सुधार के लिए कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया जा सकता है। इस डाई को इंजेक्शन के जरिये शरीर में पहुंचाया जाता है, इंजेक्शन के दौरान कुछ ठंडक महसूस हो सकती है। कंट्रास्ट डाई का उपयोग करना उन लोगों में हानिकारक हो सकता है जो किडनी डिजीज से ग्रस्त हों या जिन्हें इससे एलर्जी हो।

(और पढ़ें - एलर्जी की होम्योपैथिक दवा)

मरीज की स्थिति के अनुसार, डॉक्टर एब्डोमिनल एमआरआई स्कैन के साथ अन्य टेस्ट कर सकते हैं :

  • इंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेंज्यिओपैन्क्रिएटोग्राफी (ERCP)
  • कोलेसिंटिग्राफी (पित्ताशय में पथरी के लिए)
  • एंजियोग्राफी
  • बायोप्सी

पूर्ण और सटीक निदान करने के लिए इन टेस्ट का परिणाम रोगी की नैदानिक स्थितियों से जुड़ा होना चाहिए। उपरोक्त जानकारी पूरी तरह से शैक्षिक दृष्टिकोण से प्रदान की गई है।

(और पढ़ें - ब्रोंकोस्कोपी क्या है)

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