क्लोराइड टेस्ट क्या है?
क्लोराइड टेस्ट एक लेबोरेटरी स्क्रीनिंग टेस्ट है, जो खून और यूरिन में क्लोराइड के आयन की जांच करने के लिए किया जाता है। क्लोराइड कोशिकाओं के बाहर मिलने वाला एक अनायन है जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। क्लोराइड ऑस्मोटिक दबाव बनाए रखने में मदद करता है। यह अम्ल और क्षार का संतुलन बनाए रखने में भी सहायता करता है और पाचन को भी ठीक रखता है। सीरम में क्लोराइड का जमाव पानी की कमी, अत्यधिक क्लोराइड लेने, गुर्दे ठीक से काम करना बंद कर देना और मेटाबॉलिज्म एसिडोसिस के कारण हो सकता है। क्लोराइड का जमाव कुछ बीमारियों की स्थिति में भी कम हो सकता है। यदि डॉक्टर को शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का असंतुलन नजर आता है, तो वे क्लोराइड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। ब्लड क्लोराइड टेस्टिंग या 24 घंटे के यूरिन क्लोराइड टेस्ट साधारण स्क्रीनिंग टेस्ट हैं। ये टेस्ट शरीर में मौजूद द्रव व इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन पर नजर रखने और मरीज़ो में लो साल्ट डाइट का असर जानने के लिए किया जाता है। सिस्टिक फाइब्रोसिस के मरीजों में पसीने के द्वारा भी क्लोराइड की जांच की का सकती है।
- क्लोराइड टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Chloride test in Hindi
- क्लोराइड टेस्ट से पहले - Before Chloride test in Hindi
- क्लोराइड टेस्ट के दौरान - During Chloride test in Hindi
- क्लोराइड टेस्ट के परिणाम और नॉर्मल रेंज - Chloride test results and normal range in Hindi
क्लोराइड टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Chloride test in Hindi
क्लोराइड टेस्ट किसलिए किया जाता है?
क्लोराइड आयन शरीर की बहुत सी महत्वपूर्ण क्रियाओं के लिए जरुरी होता है। ये अधिकतर सोडियम आयन से जुड़े हुए ही होते हैं, इसीलिए सोडियम के जमाव में कोई भी कमी आने पर क्लोराइड भी असंतुलित हो जाता है। निम्न स्थितियों में डॉक्टर क्लोराइड टेस्ट की सलाह देते हैं:
- कमजोरी
- तेज और गहरी सांस लेना
- सुस्ती
- बेहोशी, जो कोमा का रूप भी ले सकती है।
- मांसपेशियों में अकड़न
- टिटेनी
- किडनी का ठीक प्रकार से काम न कर पाना
- हाइपोटेंशन (लो ब्लड प्रेशर)
- दस्त
- उल्टी
क्लोराइड टेस्ट से पहले - Before Chloride test in Hindi
क्लोराइड टेस्ट की तैयारी कैसे करें?
यह एक सामान्य टेस्ट है, जिस के लिए किसी भी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है। टेस्ट से पहले भूखे रहने की जरुरत नहीं होती।
यूरिन टेस्टिंग दिन में कभी भी की जा सकती है या चौबीस घंटे के सैंपल लेने के बाद उसका परीक्षण किया जा सकता है। डॉक्टर मरीज को टेस्ट के बारे में बता देते हैं और चौबीस घंटे के यूरिन इकट्ठा करने के लिए अलग-अलग कंटेनर देते हैं।
क्लोराइड टेस्ट के दौरान - During Chloride test in Hindi
क्लोराइड टेस्ट कैसे किया जाता है?
- क्लोराइड ब्लड टेस्ट:
यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें डॉक्टर बांह की नस में सुई लगा कर लगभग 7 मिलीलीटर ब्लड सैंपल को एक हरे रंग की ट्यूब में भर लेता है। इस दौरान सेंपल निकालने के लिए बांह पर कोई पट्टी आदि नहीं बांधी जाती है। मरीज को सुई लगते समय हल्का सा दर्द हो सकता है या हल्की सी चुभन हो सकती है, बाकि इस टेस्ट के कोई खतरे नहीं हैं।
- क्लोराइड यूरिन टेस्ट:
मरीज 24 घंटे के यूरिन सैंपल सुबह सात बजे से लेना शुरू करता है और लिए गए सैंपल को फ्रीज में रखा जाता है। डॉक्टर सैंपल के कंटेनर पर शुरू और अंत का समय लिखने के लिए कहते हैं। दिन के आखरी सैंपल ले लेने के बाद सैंपल को परीक्षण के लिए आगे भेज दिया जाता है।
(और पढ़ें - ब्लड टेस्ट क्या है)
क्लोराइड टेस्ट के परिणाम और नॉर्मल रेंज - Chloride test results and normal range in Hindi
क्लोराइड टेस्ट के परिणाम और नॉर्मल रेंज
सामान्य नतीजे :
क्लोराइड ब्लड टेस्ट: यदि खून में क्लोराइड के जमाव का स्तर 90-106 मिली-इक्वेवेलेंट्स प्रति लीटर (mEq/L) या 90-106 (mmol/L) है, तो यह नॉर्मल रेंज माना जाता है।
क्लोराइड यूरिन टेस्ट : चौबीस घंटे के यूरिन सैंपल के टेस्ट में जो नतीजे सामान्य माने जाते हैं वो हैं:
- व्यस्क में : 140-250 mEq/24 घंटे में या 140-250 mmol/ एक दिन में
- छह साल तक के बच्चो में : 15-40 mEq/24 घंटे में या 15-40 mmol/एक दिन में
- 14-16 साल तक के बच्चो में : 64-176 mEq/24 घंटे में या 64-176 mmol/एक दिन में
टेस्ट के नतीजे नमक (कितना नमक शरीर के अंदर जाता है) और पसीने पर भी निर्भर करता है। हर लेबोरेटरी के अलग-अलग मानक मूल्य हो सकते हैं।
असामान्य नतीजे : सामान्य नतीजों से अधिक या कम मूल्य असामान्य माने जाते हैं। असामान्य नतीजे ब्लड सैंपल में लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने और कुछ विशेष दवाइयों के कारण भी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति जिसमें क्लोराइड की मात्रा खून और यूरिन में सामान्य से अधिक होती है उसे हाइपरक्लोरेमिया कहते हैं वहीं क्लोराइड की सामान्य से कम मात्रा की स्थिति को हाइपोक्लोरेमिया कहते हैं।
क्लोराइड का अत्यधिक सम्मिश्रण, अत्यधिक नमक खाने और मेटाबॉलिक एसिडोसिस से हाइपरक्लोरेमिया की स्थिति पैदा हो सकती है। शरीर में गंभीर रूप से पानी की कमी हो जाने के कारण भी कुछ समय के लिए क्लोराइड का स्तर बढ़ सकता है।
हाइपरक्लोरेमिया का संकेत निम्न स्थितियों में मिल सकता है:
- एक्यूट रीनल फेलियर
- शराब की लत
- एनीमिया
- कुशिंग सिंड्रोम
- हाइपरपैराथायराइडिज्म
- डायबिटीज इन्सिपिडस
- एड्रेनोकोर्टिकल पर्याप्त मात्रा में ना बन पाना
- मल्टीपल माइलोमा
- श्वसन क्षारमयता
खून और यूरिन में क्लोराइड का स्तर अत्यधिक पसीने, उल्टी और कुछ विशेष एक्सोजिन व एंडोजिनस कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स की वजह से भी गिर सकता है। एक्यूट डिकम्पेन्सेटेड हार्ट फेलियर के मरीजों में भी क्लोराइड का निम्न स्तर देखा जाता है। हाइपोक्लोरेमिया की निम्न स्थितियों का संकेत देता है:
- दस्त
- एडिसन डिजीज
- मेटाबॉलिक अल्कलॉसिस
- एक्यूट इन्फेक्शन
- जलना
- अल्सरेटिव कोलाइटिस
- सोडियम और पोटेशियम का कम स्तर
- क्रोनिक रीनल फेलियर
परिणाम के तौर पर यह भी कहा जा सकता है कि क्लोराइड की सामान्य से कम या अधिक मात्रा गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों को पैदा कर सकती है। इसीलिए सामान्य और आसान लैब टेस्ट के द्वारा सही और सटीक परीक्षण करवा कर स्थिति के इलाज में मदद मिल सकती है।
संदर्भ
- Denise. D. Wilson. McGraw-Hill Manual of Laboratory and Diagnostic Tests. 1st Edition; ISBN10: 0071481524
- Lippincott Williams & Wilkins. Manual of Laboratory and Diagnostic Tests. 9th Edition; ISBN: 978-1-4511-9089-2.
- Allan Wilson. Principles of anatomy and physiology. 14th Edition; ISBN: 978-1-118-34500-9.
- Michigan Medicine. [internet]. University of Michigan. Chloride (Cl).
- MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Chloride test - blood
- Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Laboratory Procedure Manual



