महिलाएं सेहत के प्रति पुरुषों की तुलना में कम सजग रहती हैं. कई महिलाएं घर-परिवार का काम अच्छे से संभालने के बावजूद खुद पर अच्छे से ध्यान नहीं दे पाती हैं. कई ऐसी महिलाएं हैं, जो खानपान से लेकर शरीर में हो रहे बदलावों को नजरअंदात कर देती हैं. महिलाओं की इन्हीं आदतों की वजह से वे कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं.

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आज हम आपको इस लेख में महिलाओं को होने वाली कुछ सामान्य बीमारियों के बारे में बताएंगें.

  1. महिलाओं को होने वाली सामान्य बीमारियां - Common diseases in women in Hindi
  2. महिलाओं में होने वाली कुछ अन्य सामान्य बीमारियां - Other common diseases in women in Hindi
  3. सारांश - Takeaway
महिलाओं में होने वाली सामान्य बीमारियां के डॉक्टर

आइये जानते हैं कि महिलाओं में सबसे आम गंभीर बीमारियां कौन सी हैं।

ब्रेस्ट कैंसर

ब्रेस्ट कोशिकाओं की अनियंत्रित बढ़ोतरी होने से महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से ग्रसित हो सकती हैं. आमतौर पर यह लोब्यूल्स (lobules) और दुग्ध नलिकाओं (Milk ducts) में प्रवेश करके स्वस्थ कोशिकाओं पर आक्रमण करते हैं. धीरे-धीरे यह शरीर के अन्य भागों में फैलने लगते हैं. कुछ मामलों में, स्तन कैंसर स्तन के अन्य ऊतकों को भी प्रभावित करने लगता है.

इस बीमारी से ग्रसित होने पर ब्रेस्ट के आसापास या फिर स्तन पर गांठ बनने लगती है. इसके अलावा स्तन या आसपास के क्षेत्र में काफी ज्यादा दर्द, स्तन की स्किन लाल, निप्पल पर दाने जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं.

(और पढ़ें - ब्रेस्ट में सूजन का इलाज)

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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं को होने वाली एक सामान्य बीमारी है. यह ओवरी से जुड़ी समस्या है. पीसीओएस (PCOS) की वजह से महिलाओं के शरीर में हार्मोन असुंतलन की स्थिति उत्पन्न होने लगती है. पीसीओएस से ग्रसित महिलाओं के शरीर में फीमेल हार्मोन की बजाय मेल हार्मोन (एण्ड्रोजन) का स्त्राव अधिक होने लगता है. जिसकी वजह से महिलाओं के अंडाशय में कई गांठे (सिस्ट) बनने लगती हैं.

पीसीओएस (PCOS) से ग्रसित महिलाओंं को कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों से जूझना पड़ता है. पीसीओएस से ग्रसित महिलाओं में ओवुलेशन की प्रक्रिया में रुकावट उत्पन्न होने लगती है. ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में रुकावट की वजह से महिलाओं को प्रेग्नेंसी में काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा पीसीओएस से ग्रसित महिलाओं को टाइप-2 डायबिटीज और मोटापा बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है.  इसके अलावा पीसीओएस से ग्रसित महिलाओं को पेट में दर्द, पेडू में दर्द, चेहरे, छाती, पेट, अंगूठे या पैर की उंगलियों पर अत्यधिक बाल उगना, बालों का झड़ना, मुंहासे, ऑयली स्किन और डैंड्रफ, स्किन पर धब्बे जैसे लक्षण दिख सकते हैं.

(और पढ़ें - अंडाशय में गांठ का इलाज)

इंटरस्टीशियल सिस्टाइटिस

इंटरस्टीशियल सिस्टाइटिस एक गंभीर ब्लैडर स्थिति (chronic bladder condition) है, जिसकी वजह से मूत्राशय या आसपास के  पेल्विक क्षेत्र में बार-बार असुविधा या दर्द का सामना करना पड़ता है. इस समस्या से ग्रसित लोगों में आमतौर पर मूत्राशय की दीवारों में सूजन या जलन होने लगती है. आईसी (Interstitial cystitis) किसी को भी प्रभावित कर सकता है. हालांकि, यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में काफी आम है.

इंटरस्टीशियल सिस्टाइटिस की समस्या होने पर आपको पेट या पेल्विक में हल्की बेचैनी, लगातार पेशाब आना, पेशाब करने की इच्छा तेज होना, पेट या पेल्विक पर दबाव महसूस होना, मूत्राशय या पेल्विक में तेज दर्द होना, पेट के निचले हिस्से में गंभीर दर्द (जो मूत्राशय के भरने या खाली होने पर तेज हो जाता है.) इत्यादि लक्षण महसूस हो सकते हैं.

(और पढ़ें - इंटरस्टीशियल सिस्टाइटिस का इलाज)

ओवेरियन और सर्विकल कैंसर

ओवेरियन और सर्विकल कैंसर महिलाओं को होने वाली एक कॉमन समस्या है. कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें ओवेरियन और सर्विकल कैंसर के बीच का अंतर पता नहीं है. सर्विकल कैंसर यूट्रस के निचले हिस्से से शुरू होता है. वहीं, ओवरियल कैंसर फैलोपियन ट्यूब (fallopian tubes) से शुरू होता है. हालांकि, दोनों स्थितियों के लक्षण लगभग समान होते हैं.  सर्विकल कैंसर में इंटरकोर्स (intercourse) के दौरान डिस्चार्ज और दर्द का सामना करना पड़ता है. वहीं, ओवेरियन कैंसर में आपको पेट में सूजन, पेट में दबाव और दर्द, बार-बार पेशाब आना, मासिक धर्म में अनियमितता और संभोग के दौरान दर्द जैसे लक्षण दिख सकते हैं.

(और पढ़ें - सर्विकल कैंसर का इलाज)

गर्भाशय फाइब्रॉएड

महिलाओं में फाइब्रॉएड (fibroids) की समस्या बहुत ही आम है. यह एक नॉन-कैंसर ट्यूमर (noncancerous tumors) स्थिति है. शरीर में हार्मोनल बदलाव और अनुवांशिक कारणों से महिलाओं को गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterine fibroids) की परेशानी हो सकती है. फाइब्रॉएड (Fibroids) मांसपेशियों की कोशिकाओं और ऊतकों से बने होते हैं, जो गर्भाशय या गर्भ की दीवार और उसके आसपास बढ़ते हैं. फाइब्रॉएड की समस्या के सटीक कारणों के बारे में बताना अभी मुश्किल है. हालांकि, अधिक वजन और अनुवांशिक कारणों से फाइब्रॉएड होने का खतरा ज्यादा होता है.

पीरियड्स के दौरान काफी ज्यादा दर्द या फिर हैवी फ्लो होना, पेट के निचले हिस्से में भरा-भरा सा महसूस होना, बार-बार पेशाब आना, सेक्स के दौरान दर्द होना, कमर के निचले हिस्से में दर्द होना, प्रजनन संबंधी समस्याएं (जैसे इंफर्टिलिटी, एक से अधिक गर्भपात) जैसे लक्षण शामिल हैं.

(और पढ़ें - योनि के कैंसर का इलाज)

महिलाओं में होने वाली कुछ अन्य सामान्य बीमारियां इस प्रकार हैं -

(और पढ़ें - बच्चेदानी में सूजन का इलाज)

ध्यान रखें कि बीमारियां किसी के भी शरीर में दस्तक दे सकती हैं. इसलिए अपने शरीर में हो रहे बदलावों को नजरअंदाज करने से बचें. चाहे वह महिला हो या पुरुष हर किसी व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की आवश्यता होती है. इसके अलावा अपने खानपान में बेहतर डाइट का चुनाव करें, इससे कई तरह की बीमारियों से बचाव किया जा सकता है. अगर आपके शरीर में किसी भी तरह के बदलाव नजर आ रहे हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें. ताकि आगे होने वाली गंभीर परेशानियों से बचा जा सके.

(और पढ़ें - एंडोमेट्रियल पॉलीप का उपचार)

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